हिंदी

सहज-सरल हिंदी ०२०

सहज-सरल हिंदी ०२०

  जाने अनजाने हिंदी में अंग्रेजी की जो घुसपैठ हो रही है वह हिंदी के स्वरूप, अस्मिता, एवम मौलिकता को ख़तम कर सकती है. यदि अन्य भाषाओं से उधार लेना है तो भारतीय भाषाओं से क्यों न लें ?? हिंदी एवम अन्य भारतीय भाषाओ में किस बात की कमी है की हमें अंग्रेजी के बैसाखी […]

विश्लेषण

क्या है यह स्लट-वॉक ???

क्या है यह स्लट-वॉक ???

इन दिनों स्लट-वॉक की बडी चर्चा हो रही है. दर असल स्लट-वॉक पश्चिमी सभ्यता का एक नंगा नाच है जिसे हिन्दुस्तान में आयातित किया जा रहा है. यह 3 अप्रेल 2011 को कनाडा से चालू हुआ था जहां प्रथम स्लट-वॉक में  काफी सारी जवान स्त्रियों ने एक दम अर्धनग्न वस्त्रों में स्त्रियों के यौनिक शोषण […]

मार्गदर्शन

ग्वालियर का प्रसिद्ध किला ४

ग्वालियर का प्रसिद्ध किला ४

कई भारतीयों को तब तक संतोष नहीं होता है जब तक कि एतिहसिक धरोहरों पर अपना और अपनी प्रेमिका का नाम न लिख दें। ग्वालियर के किले पर सैकडों स्थनों पर इस तरह की लिखाई दिखती है। इसके विरुद्ध एक जगृति फैलने के लिये मैं देशप्रेमियों का आह्वान करता हूं.  

भारत

सरकार हमारी है या हम सरकार के खरीदे हैं??

सरकार हमारी है या हम सरकार के खरीदे हैं??

जनतंत्र का मतलब यह है कि सरकार जनता की, जनता के द्वारा और जनता के लिये बनाई गई है.  लेकिन पूर्ण जनतंत्र तभी स्थापित हो सकता है जब किसी भी जनतंत्र के सारे  नियमकानून उस देश की जनता के द्वारा और जनता के लिये बनाये गये हों. विडंबना यह है कि १९४७ में तकनीकी तौर […]

परिचय

ग्वालियर का प्रसिद्ध किला 3

ग्वालियर का प्रसिद्ध किला 3

जैसा मैं ने पिछले आलेख में कहा था, ग्वालियर का प्रसिद्ध किला लगभग ३५० फीट ऊंचे एक अति-विशाल चट्टान पर बनाया गया है। यह चट्टान कई किलोमीटर लम्बा है एवं इस चट्टान में सैकडों स्वाभाविक एवं कृत्रिम गुफायें एवं मूर्तियां हैं, जिन में से कई कालांतर में लुप्त हो चुके हैं। ऊरवाई गेट से प्रवेश […]

भारतीय सिक्के

नाग साम्राज्य के सिक्के

नाग साम्राज्य के सिक्के

ग्वालियर (मप्र) से लगभग ४० किलोमीटर दूर एक गांव है `पवाया`। बहुत कम लोग इसे जानते हैं, और उससे भी कम लोग वहां गये हैं। मैं ४० साल ग्वालियर रहा लेकिन मुझे पवाया की महानता के बारें में कुछ भी मालूम नहीं था। जब मालूम पडा तो दो साल पहले वहां जाने की कोशिश की […]

साहित्य

कंप्यूटर-युग — बैलगाडी युग की सोच !!

कंप्यूटर-युग — बैलगाडी युग की सोच !!

जब से हमारा बिजली-कार्यालय कंप्यूटरीकृत हो गया है तब से खुले पैसे की परेशानी खतम हो गयी है। यदि कुछ पैसे बाकी हों तो उसे आपके हिसाब में अगले महीने के लिये जोड दिया जाता है एवं अगली बार हिसाब में कट जाता है। मैं इस सुविधा का उपयोग पिछले एक साल से करता आ […]

सूचना

चिट्ठा एग्रीगेटर की कमी!

चिट्ठा एग्रीगेटर की कमी!

काफी अर्से पापी पेट की जरूरतों के पीछे  भाग, चिट्ठाकारी को हटा कर रखने  के बाद चिट्ठाकारी में लौटा तो एक बात बहुत खल गई कि कोई भी एग्रीगेटर काम नहीं कर रहा है. ऐसा लगा कि मैं अनाथ हो गया हूं. दर असल कुछ साल से यह नियम बन गया था कि रोज सुबह […]

ईसा-दर्शन

ईसा जयंती: शुभ कामनायें!!

ईसा जयंती: शुभ कामनायें!!

  ईसा-जयंती के इस पावन पर्व पर आप सब को ईश्वर की असीम आशिष प्राप्त हो!   राजमहलों में जन्म लेने के बदले जिस तरह से प्रभु ईसा ने एक गरीब के घर में और वह भी अपने मांबाप की यात्रा के दौरान एक गौशाले में जन्म लिया,  उस घटना के द्वारा प्रभु हम सब […]

English Posts

White Tiger: A Dissenting View

White Tiger: A Dissenting View

The White Tiger is a 320+ page English novel by Arvind Adiga which was given the 2008 Man Booker prize. He was given an award close to Rs. 4,000,000 for this novel. Going by the amount he pocketed, and the praises that I saw (a masterpiece, Compelling, Delightfully mordant wit, blazingly savage and brilliant), I […]

Other Recent Posts

सारथी-परिचय

सारथी-परिचय

छायाचित्र: जीवाजी विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के माईक्रोस्कोप के साथ.  इस मशीन का उपयोग अतिसूक्ष्म भौतिकी अनुसंधान में होता है. शास्त्री जे सी फिलिप एक समर्पित लेखक, अनुसंधानकर्ता, एवं हिन्दी-सेवी हैं. उन्होंने भौतिकी, देशीय औषधिशास्त्र, और ईसा के दर्शन शास्त्र में अलग अलग विश्व्वविद्यालयो से डाक्टरेट किया है. आजकल वे पुरातत्व के वैज्ञानिक पहलुओं पर […]

हिन्दुस्तानी हो, हिन्दुस्तानी बनो!

हिन्दुस्तानी हो, हिन्दुस्तानी बनो!

कई दशाब्दियों से रेलगाडी यात्रा मेरे लिये जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है. इन यात्राओं के दौरान कई खट्टेमीठे अनुभव हुए हैं, जिनमें मीठे अनुभव बहुत अधिक हैं. इसके साथ साथ कई विचित्र बाते देखने मिलती हैं जिनको देखकर अफसोस होता है कि लोग किस तरह से विरोधाभासों को पहचान नहीं पाते हैं. […]

क्या हम कभी सुधरेंगे?

क्या हम कभी सुधरेंगे?

पापी पेट का चक्कर कुछ ऐसा चला कि चिट्ठाकारी करना भूल गया. लेकिन चिट्ठाकारी नहीं भूला. इस बीच हिन्दी शब्द संसाधक ने ऐसा चक्कर चलाया कि कुछ पूछिये मत. अब सब कुछ लगभग सामान्य दिखने लगा है. इन दिनों सारथी पर लिख नहीं रहा था, लेकिन चिट्ठों को पढता जरूर था. कई बार बडी कुंठा […]