English Posts

White Tiger: A Dissenting View

White Tiger: A Dissenting View

The White Tiger is a 320+ page English novel by Arvind Adiga which was given the 2008 Man Booker prize. He was given an award close to Rs. 4,000,000 for this novel. Going by the amount he pocketed, and the praises that I saw (a masterpiece, Compelling, Delightfully mordant wit, blazingly savage and brilliant), I […]

विश्लेषण

क्या है यह स्लट-वॉक ???

क्या है यह स्लट-वॉक ???

इन दिनों स्लट-वॉक की बडी चर्चा हो रही है. दर असल स्लट-वॉक पश्चिमी सभ्यता का एक नंगा नाच है जिसे हिन्दुस्तान में आयातित किया जा रहा है. यह 3 अप्रेल 2011 को कनाडा से चालू हुआ था जहां प्रथम स्लट-वॉक में  काफी सारी जवान स्त्रियों ने एक दम अर्धनग्न वस्त्रों में स्त्रियों के यौनिक शोषण […]

परामर्श

हिन्दुस्तानी हो, हिन्दुस्तानी बनो!

हिन्दुस्तानी हो, हिन्दुस्तानी बनो!

कई दशाब्दियों से रेलगाडी यात्रा मेरे लिये जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है. इन यात्राओं के दौरान कई खट्टेमीठे अनुभव हुए हैं, जिनमें मीठे अनुभव बहुत अधिक हैं. इसके साथ साथ कई विचित्र बाते देखने मिलती हैं जिनको देखकर अफसोस होता है कि लोग किस तरह से विरोधाभासों को पहचान नहीं पाते हैं. […]

मार्गदर्शन

नया साल, नये सपने??

नया साल, नये सपने??

जनवरी एक को हमारे प्रार्थना समाज में सर्वदेशीय उन्नति एवं प्रगति के लिये हम एकत्रित हुए तो एक सज्जन ने एक दिलचस्प बात कही. वे बोले कि हर नये साल वे कुछ न कुछ निर्णय जरूर लेते हैं, लेकिन कभी भी उन निर्णयों का पालन नहीं कर पाते. इस कारण उन्होंने तय किया है कि […]

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सारथी-परिचय

सारथी-परिचय

छायाचित्र: जीवाजी विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के माईक्रोस्कोप के साथ.  इस मशीन का उपयोग अतिसूक्ष्म भौतिकी अनुसंधान में होता है. शास्त्री जे सी फिलिप एक समर्पित लेखक, अनुसंधानकर्ता, एवं हिन्दी-सेवी हैं. उन्होंने भौतिकी, देशीय औषधिशास्त्र, और ईसा के दर्शन शास्त्र में अलग अलग विश्व्वविद्यालयो से डाक्टरेट किया है. आजकल वे पुरातत्व के वैज्ञानिक पहलुओं पर […]

क्या हम कभी सुधरेंगे?

क्या हम कभी सुधरेंगे?

पापी पेट का चक्कर कुछ ऐसा चला कि चिट्ठाकारी करना भूल गया. लेकिन चिट्ठाकारी नहीं भूला. इस बीच हिन्दी शब्द संसाधक ने ऐसा चक्कर चलाया कि कुछ पूछिये मत. अब सब कुछ लगभग सामान्य दिखने लगा है. इन दिनों सारथी पर लिख नहीं रहा था, लेकिन चिट्ठों को पढता जरूर था. कई बार बडी कुंठा […]

सरकार हमारी है या हम सरकार के खरीदे हैं??

सरकार हमारी है या हम सरकार के खरीदे हैं??

जनतंत्र का मतलब यह है कि सरकार जनता की, जनता के द्वारा और जनता के लिये बनाई गई है.  लेकिन पूर्ण जनतंत्र तभी स्थापित हो सकता है जब किसी भी जनतंत्र के सारे  नियमकानून उस देश की जनता के द्वारा और जनता के लिये बनाये गये हों. विडंबना यह है कि १९४७ में तकनीकी तौर […]