मंगनी के कुछ महीने बाद मरियम अपने कमरे में बैठ प्रार्थना कर रही थी कि अचानक एक स्वर्गदूत उसके सामने आ खडा हुआ. उसने मरियम से कहा: “हे मरियम, हे ईश्वर-भक्त नारी, आप पर परमात्मा की विशेष कृपा हुई है. आप जिस तरह से उद्धारकर्ता की आस लगाये बैठी हैं, उससे परमात्मा प्रसन्न हुए हैं. अब हे भद्र महिला, मेरी बातें ध्यान से सुनिये. आप भाग्यवती हैं. ईश्वर की यह इच्छा है कि यहूदियों के मुक्तिदाता आपके द्वारा एवं आपकी कोख से जन्म लें.

इसके बारे में आपको कई बातें जानना जरूरी है. पहली बात यह कि उनका नाम ईश-अभिषिक्त ईसा रखा जायगा. दूसरी बात, वे सिर्फ यहूदियों के लिये नहीं बल्कि ईश-पुत्र होने के कारण मानव मात्र के उद्धार के लिये पधारेंगे. तीसरी बात, मनुष्य सिर्फ मनुष्य को जन्म दे सकता है, ईश-पुत्र को नहीं, अत: आपके द्वारा मुक्तिदाता का जन्म प्रकृति के नियमों के अन्तर्गत नहीं बल्कि ईश्वर के पराक्रम के द्वारा होगा. आपकी कोख उनको जन्म नही देगी, बल्कि सिर्फ उनके लिये पृथ्वी पर पधारने के वाहन का काम करेगी. आपके अपने पति के साथ मिलन से पूर्व परमपिता परमात्मा अपनी दिव्य शक्ति से आप की कोख में एक जीवन स्थापित कर देंगे. वहां प्रकृति के नियम के अनुसार बढ कर वह मुक्तिदाता आप की कोख से बाहर आयेंगे. वे आपके बालक कहलायेंगे, लेकिन आप और आपका परिवार समय आने तक इस बात को रहस्य रखेंगे कि वे महज एक मनुष्य नहीं बल्कि मुक्तिदाता हैं”