वे गडरिये रातोंरात अपनी जगह से कूच कर गये एवं ढूंढ कर उस गौशाले तक पहुंच गये. वहां जैसा स्वर्गदूतों ने उन से कहा था ठीक उसी तरह उन्होंने शिशु ईसा को कपडे में लिपटा और चरनी में सोते पाया. उन्होंने पहले तो उनको साष्टांग प्रणाम किया, और उसके बाद दूतों के दर्शन की बात शिशु के मांबाप को एवं सराय में टिके लोगों को बताई. यह सुन लोग ईसा के दर्शन के लिये उमड पडे, एवं यहूदियों के प्रति ईश्वर की करुणा के लिये उनका आभार माना. लेकिन जैसा कि मनुष्य की रीत है, बहुत जल्दी ही सबने उनको भुला दिया क्योंकि वे तो महलों मे जन्मे एवं राजकाज में निपुण एक मुक्तिदाता के इंतजार में थे जो उनको रोमी साम्राज्य से एक राजनीतिक छुटकारा प्रदान करेगा. वे यह नही पहचान पाये कि करुणामूर्ति ईसा मानव मात्र के लिये पधारे थे, न कि केवल यहूदियों के राजनैतिक छुटकारे के लिये.