पांच मिनिट में शब्द भंडार 1

मेरे गुरुजन हमेशा कहा करते थे कि शब्दों मे जादू है. जिसका शब्द-भण्डार समर्थ है, वह गंभीर से गंभीर विषय गवांरों में गंवार को भी उसकी भाषा में समझा सकता है. लेकिन जिसके पास शब्द भण्डार नहीं है, वह विद्वानों मे विद्वान को भी एक छोटी सी बात नहीं मनवा सकता है. डांटडपट एवं सजा देकर उन्होंने हमे शब्द सिखाये. हम उनके डंडे से बहुत डरते थे. लेकिन पांच दशाब्दी शब्द-सारथी के रूप में पाच से अधिक भाषाओं का उपयोग करने के बाद मैं सिर्फ एक बात कह सकता हूं: मेरे अध्यापकों ने शब्दभण्डार के द्वारा मुझे जीवनदान दिया. मैं उनका यह ऋण कभी नहीं उतार पाऊंगा.

यदि आपको लगता है कि अब इस उमर में एक अच्छा शब्दभण्डार पाना, अपने शब्दभण्डार को विकसित करना, कठिन है तो यह आपकी गलतफमी है. हर भाषा में कुछ ऐसे सूत्र मिल जाते हैं जिनकी मदद से आप अपने शब्दभण्डार को काफी तेजी से विकसित कर सकते हैं. उदाहरण के लिये, यदि आप हिन्दी शब्दों के पहले लगाये जाने वाले “उपसर्ग” (prefixes) समझ लेते हैं तो अभिव्यक्ति के लिये आपके पास दस गुना शब्दभण्डार हो जाता है. (उपसर्ग एवं प्रत्यय (suffix) की तकनीकी बारिकियों में हम नहीं जायेंगे क्योंकि वह इस लेखन परम्परा का लक्ष्य नहीं है)

आईये, सारथी के इस लेखन परम्परा के हर लेख को कम से कम पांच मिनिट समय दीजिये, एवं अपने शब्दभण्डार को असामन्य तेजी के साथ पुष्ट कीजिये. शब्द सीखने के इस तरीके को हम नाम देंगे “सूत्रों पर आधारित अध्ययन”

सूत्र 1: अंतर
अंतर= भीतर, अंदर, बीच में, मध्य में (उपसर्ग के रूप में प्रयुक्त होने पर)

शब्द

अर्थ

अंग्रेजी अर्थ

अंतरतम

सबसे अंदर का, या सबसे भीतरी, भाग

The innermost part, section

अंतरात्मा

मनुष्य का सबसे भीतरी भाग, अवयव

The innermost being of man

अंतर्कथा

कहानी के अंदर छिपी कथा

The inner essence of a story

अंतर्गामी

अंदर की ओर (गमन) जाने वाला

He who walks towards the inside

अंतर्दशा

भीतर की अवस्था

The condition inside, the inner reality

अंतर्दाह

मन का दाह, मन का कष्ट

Inner agony, mental anguish

अंतर्दृष्टि

अन्दर तक देख सकने में समर्थ दृष्टि, मन में अचानक आने वाली समझ

Insight, the sixth sense

अंतर्मुखी

जो हमेशा अपने अन्दर डूबा रहता है

Introvert, ingoing person

अंतर्राष्ट्रीय

राष्ट्रों के मध्य

International, in between nations

अंतर्देशीय

देश के अंदर

Inside the country

इस जानकारी का उपयोग कैसे करें: कोई भी जानकारी तब तक बेकार है जब तक उसका व्यावहारिक उपयोग न किया जाये. यदि आप वाकई में अपना शब्दभण्डार बढाना चाहते हैं तो इस लेख को छाप कर एक प्रति अपनी जेब में रख लें. जब भी फुर्सत मिले तो इस पर नजर डाल लें. ऊपर दिये गये सूत्र की सहायता से कितने नये शब्द बना सकते हैं यहा जांचे. उनको लिख लें. (सिर्फ ललित शब्द बनायें. क्लिष्ट शब्दावली से आपको कोई फायदा नहीं होगा). उनका प्रयोग कहा किया जा सकता है वह भी सोचें. आपको फायदा होता दिखे या नहीं, यह काम करते रहें. बहुत जल्दी ही आपको ताज्जुब होने लगेगा कि किस तरह से य नयेपुराने शब्द आपकी भाषा और लेखनी को पुष्ट एवं शक्तिशाली बना देता है — शास्त्री जे सी फिलिप

आभार: हरिराम (प्रगत भारत), अनुनाद सिह (प्रतिभास)

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Author: Super_Admin

6 thoughts on “पांच मिनिट में शब्द भंडार 1

  1. उपसर्ग के साथ प्रत्यय जोड़कर शब्द-वंशावलियाँ विकसित हुई हैं। पाणिनी के अनुसार संस्कृत की मूल धातुओं संख्या मात्र दो हजार के अन्दर सिमट जाती हैं। किन्तु इसके साथ उपसर्ग और प्रत्यय जोड़कर करोड़ों शब्द बनकर अरबों अर्थों को प्रतिपादित कर पाते हैं। कम्प्यूटर में स्पेलचेकर प्रोग्राम में भी “उपसर्ग+मूलधातु+प्रत्यय” सूत्र का सहारा लिया जाता है। इस प्रकार यह एक बहु-आयामी उपयोग में आता है। अतः एक ही शब्दकोश स्पेल चेकर(वर्तनी शोधक) और हाईफेनेशन डिक्शनरी दोनों कार्यों में प्रयोग होता है।

  2. एक और अच्छा कार्य आरम्भ करने पर साधुवाद!

    अन्तर्दृष्टि का अर्थ मुझे थोड़ा अलग समझ में आता है। मेरे खयाल से इसका अर्थ ‘सतही दृष्टि’ का विलोम है, अर्थात – अन्दर तक देख सकने में समर्थ दृष्टि ।

  3. कृपया नीचे के दो शब्दों के अर्थ बताए…

    ककूदि
    दोर्मूले

    प्रत्युत्तर की अपेक्षा..

  4. yah ek behtar prayas hai.pehli baar is sanstha se prichay hua. dekhkar khushi hui. vartmaan vyavstha jab shikcha ki or hi dhyan nahin de pa rahi to unse bhasha ke prati nishtha ki apekcha karna bemani jaan parta hai.vastutah yah prayas ghar se hi shuru hote hain.mata pita vartmaan chakachuandh me gum hain aur vah agli peedhi ko na hi apni sanskriti de pa rahe hain aur na apni bhasha hi…aise me yah padini sanstha ek chirag ki tarah hai jo hame raasta dikhayegi…dhanyavaad

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