सारथी चुने हुए लेख 2

नए और फ्लॉप लेखक हिट्स से विचलित न हौं: नये लेखक जिन्होंने अभी हाल ही में इंटर नेट पर लिखना शुरू किया है और जो पहले से ही लिख रहे हैं और मेरी तरह फ्लॉप हैं उन्हें हिट होने की चिंता बहुत सताती है और इस चक्कर में उनका लिखने से ज्यादा वक्त इस बात पर नष्ट होता है कि अन्य लोगों की तरह हिट कैसे हौं और इस मुख्य चौपाल पर जब अपनी गत देखते हैं तो उनकी निराशा बढ जाती होगी कि “यार अब क्या होगा?’ मैं उस दौर से गुजर चुका हूँ और कई बार तो हैरान होकर अपने आप से ही पूछता था कि ‘यार यहां मैं हिट होने आया हूँ कि लिखने का आनन्द उठाने?’

शुरू में मैंने वर्ड प्रेस पर जब अपने निज पत्रक (ब्लोग) बनाए तो मेरा प्रयास यह रहता था कि मेरी पोस्ट किसी तरह से वर्ड प्रेस की लिस्ट में दिखे इसीलिये एक तो खुद अपनी कमेन्ट खुद लगाता था ताकि लोग उसे पढ़ सकें-और क्लिक भी खुद ही करता था कि सब ठीक ठाक हैं कि नहीं। मैं यह समझ ही नहीं पाता था कि आख़िर मेरा ब्लोग किस तरह ऊपर जाएगा पर हुआ यूँ कि उस समय मुख्य चौपाल वाले भी वर्डप्रेस से ब्लोग स्पॉट कॉम की तरफ जा रहे थे तो वहां अफरा-तफरी थी और उसके सब पाठक वर्डप्रैस ही जमा हो जाते थे और वहां मेरे ब्लोग पर आते थे और उसका परिणाम यह हुआ कि मेरी न पढी जा सकने वाली पोस्ट भी कुछ मेरी और कुछ उनकी क्लिक की वजह से दो और तीन नंबर पर पहुंच जाते थी और फिर शुरू हुआ प्रश्नों का सिलसिला । बताओ यह पोस्ट किस भाषा में है और अगर हिन्दी में नहीं है तो यहां क्यों घुस आये हो?

बहरहाल हमने यूनीकोड में लिखा तो कहा कि इधर क्या दण्ड पेल रहे हो जरा इधर चौपाल में आकर अपने हाथ दिखाओ। मित्रों की बात न माने वह मेरी नजर कृतघ्न होता है और फिर उन्होने हमें सही रास्ता बताया था तो सोचा कि यह बात भी मान लेते हैं। हम तो स्वयं ही हिट हो रहे थे पर सोचा कि मुख्य चौपाल में भाई लोग ही हमें हिट बना देंगे तो हम फुर्सत से अपना लेखन कार्य करते रहेंगे -और यह हुआ भी। उन्होने वर्ड प्रेस के चिट्ठे को एक नहीं कई बार एक नंबर पर पहुंचाया, और ब्लोग स्पॉट कॉम में भी कई पोस्ट हिट पर पहुंचायी, हालांकि मुख्य चौपाल पर लगे बोर्ड पर लिखा था कि उनके हिट से अपने को हिट न समझे यहां तो सिर्फ वही व्यूज ही दिखेंगे जो यहाँ से आपकी पोस्ट पर गये हैं इसका मतलब यह था कि व्यूज कहीं और से भी आएंगे। पहले समझ में नहीं आया पर बाद में लगा कि कुछ लोग उसे अपने यहां लिंक कर लेते है तो कुछ और भी ऎसी उपचौपाल हैं जहां उनको देखा जाता है तो कुछ लोग उसे मूल जगह पर ही देखने के भी आदी हैं, पर मुख्य चौपाल का शुरुआती समर्थन हमेशा महत्वपूर्ण होता है यह हमारे समझ में आ गयी थी। सब कुछ सही चल रहा था कि एक गड़बड़ हो गयी।

हमारे निज पत्रक की रचनाएं एक नंबर को तरस गयीं तो निज पत्रक पांच नंबर के लिए तरसने लगा। हमने देखा हमारे व्यूज और कमेन्ट में कोई कमी नहीं आयी थी , पर फिर भी हमने आत्म-मंथन किया। सुबह ध्यान में हमारे अन्दर एक विचार कौंधा-खोजो, क्या कारण है ?

हमने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम किया है और उसके पांच ‘क’ हमने रट रखे हैं-कब, क्यों कहॉ कैसे और किसने। इस खोजबीन में हमारी नजर चौपाल से हमारे ईमेल पर प्रतिदिन आने वाली ईमेल पर गयी, वहाँ हमने देखा कि कोई सहायक चौपाल भी खुल गयी है, उस समय तत्काल उस चौपाल पर गये और उसका डंडा और झंडा उठाया और अपने मुख्य चौपाल पर वर्ड प्रेस के अपन्जीक्रित दो ब्लोग पर लगा लिया तो पता लगा कि एक ब्लोग पहले ही वहां था जिसे हमने मुख्य चौपाल से हटवा लिया था। अब उस जगह वर्ड प्रेस के हमारे तीन ब्लोग हैं और जब हमने देखा कि वहां ज्यादा आसानी से ब्लोग खुल रहा है क्योंकि वह ज्यादा प्रसिद्ध नहीं है इसलिये उस पर अधिक भीड़ नहीं होती और उस पर व्यूज बनाना कहीं ज्यादा आसान हो गया था-तब लगा कि कुछ गड़बड़ है।

वर्ड प्रेस और मुख्य चौपाल के हिट अविश्वसनीय हो चुके हैं: जिन्होंने मुख्य चौपाल का घोषणापत्र रचा है, वह निहायत समझदार हैं इसलिये वह स्वयं भी मानते हैं के उनके यहाँ के हिट किसी के लिए कोई पैमाना नहीं है। नए और फ्लॉप लेखक इसे मूल मन्त्र मानकर आगे बढ़ें। अगर वह उन हिट्स को देखकर खफा होंगें तो अपना ही नुकसान करेंगे। उस जगह हिट होने के लिए जरूरी है

  1. आप उस चौपाल से संबंधित विषय पर कुछ लिखें। अपने दोस्तो की कोई लाबी बना लें जिसमें आपका एक मित्र ही आपको पांच से दस व्यूज दे, और आप हर रोज वहां हिट रहेंगे, किसी और की रचना अगले दिन उस चौपाल पर अगले दिन नहीं पडी जाती पर आपकी पढी जायेगी। तीन सो से पांच सौ तक व्यूज आ सकते हैं और आप आत्म मुग्ध हो सकते हैं कि आप इस देश के सबसे बडे लेखक हैं। पर यह तभी करो जब जब लिखना तुम्हारे लिए खेल हो और इस चौपाल से तुम्हें आगे नहीं जाना हो।
  2. आप बिल्कुल भी गंभीर लेखक नहीं बनना चाहते और केवल इससे सन्तुष्ट हो कि अपने दोस्तो में हिट हो,मुख्य चौपाल और उसके कर्णधारों का यह मकसद नहीं है वह केवल खेल खेलेंगे और यही वजह है कि वह अपने लिए हिट जुटाने की कोशिश करते नजर नहीं आते हालांकि वह सब अच्छे लेखक हैं पर जो चल रहा है वह उसे रोक भी नहीं सकते हैं और मैं चाहता भी नहीं कि वह ऐसा करे-क्योंकि जिन बातों का नैतिक आधार हो उसे कानून से नहीं सुलझा सकते।

आप पूछेंगे कि तुम क्यों बीच में आ रहे हो: इस बारे में मेरा एक ही जवाब है कि मैं हिंदी भाषा को इन्टरनेट पर वैसे ही फैलता देखना चाहता हूँ जैसे चौपाल के कर्णधार! इधर मुझे संदेह हो रहा है कुछ लोगों का मनोबल गिर सकता है-इन हिट्स को देखकर वह किसी भ्रम का शिकार हो सकते हैं और मेरे संकल्प और निश्चय के खिलाफ है।

मेरे कुछ मित्र मेरे बात से नाराज हो सकते हैं पर एक बात मैं उन्हें बता दूं कि एक समय मेरा भी मनोबल गिर रहा था-मुझे लगा कि शायद मेरे लिखने में कमी है पर संभल गया और सोचा कि मेरे मकसद तो केवल लिखना है।मेरे जैसे और लोग भ्रमित न हौं इसलिये खोजबीन शुरू की और पाया कि कई ऎसी रचनाये शिखर पर आयीं जो उस लायक नहीं थीं । ऐसा नहीं हैं कि सभी ऎसी थीं इनमें तो कुछ ऎसी थी जिनसे मैं सीखा और नयी जानकारी मिली, और इनमें मेरे एक मित्र हैं जिन्हे तीन चार बार तो मैं इसीलिये क्लिक करता हूँ ताकि कुछ समझने से छूट न गया हो इन्टरनेट पर नवीनतम जानकारी के लिए वह लाभप्रद होती हैं -और मैं जब भी उसे पढता हूँ उससे कुछ सीख कर आता हूँ। अपने ब्लोग का आइडिया भी मैंने उसकी रचनाओं से ही सीखा था।

उन जैसे कुछ और भी लेखक हैं जो इण्टरनेट पर ज्ञान वर्द्धक लेखन करते हैं और ऊनको हिट्स मिलना कोई आश्चर्य की बात नहीं है पर जब से सहायक चौपाल का काम शुरू हुआ है वहां से अपने लिए हिट्स लेना आसान हो गया है, अगर आप हिट्स के लिए लिख रहे हैं तो-

  1. वर्ड प्रेस, मुख्य चौपाल या सहायक चौपाल में अपना ब्लोग खोलें बग़ैर हीजाये और उसे कई बार क्लिक करें उससे जो व्यूज बनेगे उससे आपका ब्लोग रेटिंग में ऊपर आयेगा, और आप आनन्द लेते रहें, हालांकि आप इससे अपनी रचना की गुणवत्ता खो बैठेंगे पर जब आप केवल हिट के लिए लिख रहे हैं तो उससे क्या मतलब है?
  2. लोगों को शक न हो इसलिये मुख्य चौपाल पर भी अपने व्यूज बनाते रहें ताकि लोगों को यह लगे कि आप हित के योग्य हैं। क्लिक करने में कोई कमी न आने दें , पहले जहां ७०-८० व्यूज में वर्ड प्रेस पर रचना और ब्लोग एक नंबर पर पहुच जाता था आजकल १७५-१८० में भी नहीं पहुंच पाता -उस दिन प्रयोग करते हुए मैंने देखा था। इसका मतलब है कि लंबी छलांग लगानी पडेगी। कुछ मित्रों को भी इसके लिए तैयार करना होगा जो आपके लिए क्लिक करते रहें-पढने में समय बरबाद करने की बजाय वह उसे क्लिक करने में लगाएं।

पर अगर आप लेख के प्रति गंभीर हैं तो

  1. अपने लिखे के प्रति गंभीर हो जाएँ। हिट की तरफ देखें ही नहीं क्योंकि वह अविश्वसनीय, कृत्रिम और क्षणिक हैं और अगर आप अच्छा लिखेंगे तो आपकी रचनाओं को रोज देखने वाले मिल जायेंगे। में अपने वर्ड प्रेस वाले निज पत्रकों का रोज अवलोकन करता हूँ और देखता हूँ २०-२५ व्यूज उस पर आते हैं और ऎसी रचनाओं पर आते हैं जो मुख्य चौपाल पर पंजीकृत ब्लोग स्पॉट के अपने ब्लोग पर पहले पोस्ट की थीं और वहां औंधे मुहँ गिरी-और कुछ समय बात मैंने उन्हें वर्ड प्रेस के ब्लोग पर पोस्ट किया। उन पर अभी भी व्यूज और कमेन्ट आते हैं ।
  2. मुख्य चौपाल, सहायक चौपाल और वर्ड प्रेस की सूचियां हमारी रचनाओं को शुरूआती बढत जरूर दिखाती हैं पर उसके बाद सामान्य व्यूअर्स ही उसका भाग्य नियन्ता होता है जो अपने लिए इण्टरनेट पर रचनाएँ ढूँढता है। इसीलिये समसामयिक विषयों पर लिखने के अलावा ऎसी रचनाएँ लिखें जो दीर्घ प्रभावी हौं। यह मानकर चलें कि आपकी वह रचनाएँ तीन महीने बाद भी पढी जा सकती हैं अपने वर्ड प्रेस के निज पत्रकों अवलोकन करने पर यह बात मेरे सामने आयी है। (शेष अगले अंक में) अनुमति: दीपकबापू कहिन

 

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Author: Super_Admin

3 thoughts on “सारथी चुने हुए लेख 2

  1. बहुत सकारात्मक एवं सराहनीय प्रयास ! नए चिट्ठाकारों का उत्साह वर्धन करना बहुत आवश्यक है! हिंदी का जालजगत पर फैलाव इसी प्रकार के कदम उठाने से हो सकता है !

  2. hi,

    very good article but i wanted to point out some mistake in this post. please do not take it as a criticism. this is a point of view from a small reader. the mistake is not in writing but actually in understanding. you write chopal and other hindi words which many people like me cannot understand it fully. i request you to please write in practical hindi. i mean that those words which most people know by its english name not by hindi names than please use the english name. it is easy for the common people. if i am right i think this blog is not for hindi pandit it is for common people and i think you have to use the common language not pure hindi language.

    i am sorry if i hurt you.

    thanks,

    sanjay sharma

  3. Dear Sanjay

    thanks for your comments. Sarathi is for the common man, but we do reproduce material from a wide range, so some difficulty is natural from time to time.

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