अपना चिट्ठा/जालस्थल लुटेरों से बचायें 9

पिछले लेख में मैं ने डोमेन कंट्रोल पेनल के महत्व एवं उपयोग पर प्रकाश डाला था. उस पर कुछ प्रश्न मिले थे जिन पर मैं अनुसंधान कर रहा हूं. उत्तर मिलने पर वह जानकारी इस परम्परा में जोड दी जायगी.

इस लेख में हम देखेंगे कि आपके जाल स्थान पर आपकी मालिकियत को किस तरह से जांचा जा सकता है. जाल पर इसके लिये बहुत से स्रोत हैं, जिनमें से एक है http://www.internic.net/ यह अमरीकी सरकार द्वारा नियंत्रित एक संस्था है, लेकिन इसका संचालन करता है ICANN जो एक निजी/गैरसरकारी संस्था है एवं जिसके पास जालजगत का समूचा नियंत्रण है. इस जालस्थल पर आप कई प्रकार की जानकारी पा सकते हैं, लेकिन इस लेख के लिये हम सिर्फ WHOIS सुविधा की चर्चा करेंगे. यह सुविधा मिलती है http://www.internic.net/whois.html पर.

जालगजत में WHOIS वह इलेक्ट्रानिक पंजिका है जहां पर जालस्थलों के पंजीकरण सम्बंधी सारी जानकारी जनसामन्य के लिये उपलब्ध करवाई जाती है. जालस्थलों की संख्या में असीमित वृद्धि के कारण, एवं कई व्यावहारिक कारणो से, आजकल यह जानकारी बहुत सारी पंजिकाओं में बंटा हुआ है. लेकिन, COM, ORG, NET आदि से सम्बंधित जानकारी सामन्यतया यहां मिल जाती है. यहां आप अपने जालस्थल जालपता देकर जानकारी मांग सकते है. नीचे दिया चित्र देखिये कि हम सारथी के बारे में जानकारी कैसे मांग रहे हैं:

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जानकारी उपलब्ध हो तो आपको नीचे दिख रहे चित्र के समान कुछ मिलेगा:

 

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यहां आपको यह जानकारी मिल जायगी कि आपने कब पंजीकरण करवाया था, तथा यह कब तक के लिए आपके अधिकार में है. इस तारीख को नोट कर लें एवं आपकी मालिकियत खतम होने की तारीख से बहुत पहले ही नवीनीकरण करवा लें. हो सकता है कि आपका पंजीकारक कहे कि पेशगी नवीनीकरण नहीं हो सकता है, लेकिन यह गलत है. वह किसी कारण से जानबूझ कर आपसे झूठ बोल रहा है. मेरे पहले पंजीकारक ने यह झांसा देकर मेरा बहुत नुक्सान करवाया था. इन दिनों दस साल तक का पंजीकरण एक साथ करवाया जा सकता है. ऊपर देखिये, मैं ने 2007 मे पंजीकरण करवाया 2017 तक का. अब दस साल तक मेरे चिट्ठे पर मेरा मालिकाना हक है. दस साल के पंजीकरण के लिये कुल खर्चा आया 3500 रुपये का. यदि आपको यकीन है कि आपका चिट्ठा/जालस्थल चल निकलेगा एवं यह कि यह आपको नाम या दाम दिला सकता है तो एक चुने हुए नाम की मालिकियत के लिये 3500 रुपया किसी भी तरह से अधिक नहीं है. जालचोरों को निरुत्साहित करने के लिये भी मदद हो जाती है — शास्त्री जे सी फिलिप

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Author: Super_Admin

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