एग्रीगेटर कब तक

पिछले दिन एक चिट्ठामित्र ने मुझ से एक प्रश्न पूछा:  बढते चिट्ठों के कारण किसी भी लेख को किसी भी एग्रिगेटर के पहले पन्ने पर अधिक समय रहने का मौका नहीं मिलता है. अत: लेखकों को क्या करना चाहिये. उनको दिये गये जवाब में से कुछ वाक्य अन्य चिट्ठाकारों के चिंतन के लिये:

1. यह सही है कि आजकल हिन्दी चिट्ठाकरों को, खास कर नवागंतुकों को, पाठक दिलाने में एग्रीगेटर काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे है. इसे कोई भी व्यक्ति नकार नहीं सकता.  लेकिन लेखों की संख्या के बढने के कारण बहुत जल्दी ही स्थिति बद्ल जायेगी. अत: एग्रीगेटरों के निरीक्षण के आधार पर मैं कुछ बाते  और कहना चाहता हूं

2. यदि एक दिन की सारी पोस्टिंग एग्रीगेटर के एक पन्ने पर आ जाये  तो सबसे अच्छा है.

2. नारद की इच्छा हमेशा यह रही है कि ऐसा ही हो. बाकी एग्रीगेटरों की सोच अलग है.

3. अनावश्यक डुप्लिकेट पोस्टिंग पर नारद चेतावनी भी देता था (मुझे अनाजाने हुई एक गलती पर मिल चुकी है).  उनका कहना था  की प्रथम पन्ने पर आने का दूसरों का अवसर नष्ट न हो. यह एक बहुत अच्छी अच्छी सोच है.

4. लेकिन चाहे कोई भी एग्रीगेटर कुछ भी कर ले, अगले  24 महीनों  में (मध्य 2009 तक) एक घंटे में 60 से 120 हिन्दी पोस्टिंग होने लगेंगी. ऐसी स्थिति में कोई भी एग्रीगेटर  कुछ नहीं कर पायगा.

5. इन हिन्दी पोस्टिगों में से 60%  तक किसी के कोई खास काम के नहीं होंगे.  अत: अच्छे लेखकों को इस भीड बीच में अपनी अलग पहचान बनानी होगी.

6. सार यह कि आज जो थोडा बहुत अवसर मिल रहा है उसका उपयोग करके मुझे और आपको अपनी “दुकानदारी” इस तरह फैलानी होगी कि कल हमारे 60% “ग्राहक”  सीधे हमारे पास आयें. बाकी एग्रीगेटरों के द्वारा आयें

7. इस बीच हो सकता है कि शायद आज के एग्रीगेटर लेखों को अपने आप श्रेणियों में बांटने की कोशिश करेंगे.

8. शायद नये सेग्रीगेटर आ जायेंगे जो श्रेणीबद्द तरीके से चिट्ठाप्रविष्ठियों को प्रस्तुत करेंगे. इस मामले मे ज्ञानदत्त जी अपना प्रस्ताव भी रख चुके हैं: ब्लॉग सेग्रीगेटर – पेरेटो सिद्धांत लागू करने का जंतर चाहिये

9. इस दिशा में कालजई की छंटी प्रविष्ठियां एक अच्छे  प्रयास का आरंभ है.

9. लेकिन चिट्ठाकारों को इन बातों के इंतजार किये बिना ही अपने चिट्ठों पर स्थाई मूल्य के लेखों को प्रस्तुत करना चाहिये जिससे उनको एक बहुत बडा स्थाई पाठकवर्ग अपने आप मिल जाये.

चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: हिन्दी, हिन्दी-जगत, राजभाषा, विश्लेषण, सारथी, शास्त्री-फिलिप, hindi, hindi-world, Hindi-language,

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Author: Super_Admin

6 thoughts on “एग्रीगेटर कब तक

  1. 2. यदि एक दिन की सारी पोस्टिंग एग्रीगेटर के एक पन्ने पर आ जाये तो सबसे अच्छा है.

    its only yesterday i had commented to vipul at chhittajagat for a new comendable look and he was kind to inform me that they are working on this problem and will come up soon with a solution

  2. “एक दिन की सारी पोस्टिंग एग्रीगेटर के एक पन्ने पर” अच्छा सुझाव है, इससे एक फायदा ये होगा की नियमित पडने वाले जब सुविधा मे नही है तो जब उन्हे समय मिलेगा वे आर्काइव को देख सकते है तारीख के हिसाब से.

  3. अभी भी अधिकांश चिट्ठाकारों के पास समय होता है कि नारद, चिट्ठाजगत, हिन्दी-ब्लागर आदि को खंगालें। कुछ लोग इन वेबसाइटों में उपलब्ध सर्च-बॉक्स का उपयोग करके अपने जरूरत के विषय के चिट्ठों पर पहुँचते हैं। अधिकांश लोग अपनी पसन्द के लेख ‘गूगल’ द्वारा ही खोजते हैं। भविष्य में अत्यन्त बहुस्तरीय सूचकांकन (multilevel indexing) के द्वारा, इण्टरनेट से आवश्यक सूचना एकत्रित करके, उनकी उपयोक्ता के द्वारा परिभाषित आधार पर सार बनाकर ई-मेल से पहुँचाने की सुविधाएँ भी सर्च-इंजिनों, ब्राउजर-एडऑन्स द्वारा प्रदान करने की प्रस्तुति चल रही है।

  4. सार यह कि आज जो थोडा बहुत अवसर मिल रहा है उसका उपयोग करके मुझे और आपको अपनी “दुकानदारी” इस तरह फैलानी होगी कि कल हमारे 60% “ग्राहक” सीधे हमारे पास आयें. बाकी एग्रीगेटरों के द्वारा आयें।

    एकदम स‌ही और इसमें स‌र्च इंजनों की स‌बसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। अतः जितनी अच्छी और ज्यादा स‌ामग्री होगी उतना ट्रैफिक मिलेगा। यानि कि Content is the king…

  5. मेरे विचार से पाठक कि यह सोच – एग्रीगेटर पर जा कर चिट्ठियां देखना – ठीक नहीं है। इस बारे में मेरे अनुभव अच्छे नहीं रहे। हिन्दी चिट्टाजगत बहुत कुछ विवाद इसी सोच के चलते वा इसका अनावश्यक हल ढूढने के कारण है। सारे एग्रेगेटर अपनी फीड देते हैं आपको किसी भी एग्रेगेटर पर जाने की जरुरत नहीं। आपको जो अच्छा लगता हो उसकी फीड अपने कंप्यूटर पर स्थापित कर लें।
    जितनी ज्लदी इस सोच पर परिवर्तन आयेगा, हिन्दी चिट्टाजगत का उतना ज्लदी भला होगा।

  6. वर्तमान में तो ज्यादा पाठक एग्रेगेटर के माध्यम से ही मिल रहे है । बाद मे भगवान मालीक है।

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