पांच मिनिट जो आपकी जिंदगी बदल सकते हैं!

हम में से किसी को अनुमान नहीं होता कि किसी नये दिन हमारे साथ क्या क्या बातें घटेंगी. अत: जब अचानक हमारी सोचपसंद से विपरीत कोई घटना घटती है तो अधिकतर लोग एकदम से विपरीत प्रतिक्रिया कर देते हैं एवं मामला बिगाड देते है. लेकिन यदि वे सोचसमझ जवाब देते तो शायद वे उस विपरीत घटना का उपयोग आपने फायदे के लिए कर लेते, तथा सब को इस बात का कायल भी कर देते कि आप कैसी महान सोच के मालिक है. वास्तव में हर रात महज पांच मिनिट निकाल कर आप अपने आप को इस दिशा में बदल सकते है.

ThinkingMan_Rodin

1. सोने से एकदम पहले जरा सोचें कि पिछले दिन आप से कहां कहां गलतियां हुई, या कहां अप्रिय घटनायें घटीं.

2. अब यह सोचें कि वे न घटतीं तो आपका आनंद, प्रभाव, एवं आपकी दक्षता कितनी बढ सकती थी.

3. विश्लेषण करें कि आप कुछ और समझदारी से जवाब देते तो फल कितना बेहतर होता. उदाहरण के लिये अपने मातहत, पत्नी, बच्चे, मित्र आदि से एकदम नाराज हो जाने के बदले उनसे कुछ समय के बाद आपसे बातचीत करने को कहा होता तो कितना अच्छा होता.

4. विश्लेषण करें कि आनेवाले कल इस तरह की अप्रत्याशित घटनाये होंगी तो आप किस तरह समझदारी से उनको निपटयेंगे.

5. कल रात पुन: इसी तरह विश्लेषण करें, निर्णय लें. कम से कम तीन हफ्ते तक इस प्रक्रिया को दुहरायें. आपके दैनिक जीवन में एक विलक्षण परिवर्तन आ जायगा. इसे जीवन भर जारी रखें, हर कोई आपका कायल हो जायगा. ये पांच मिनिट आपकी सारी जिंदगी बदल सकते हैं !

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Author: Super_Admin

8 thoughts on “पांच मिनिट जो आपकी जिंदगी बदल सकते हैं!

  1. मैं अकसर किसी भी बात पर गुस्से के थोड़ी देर बाद ही ये समझने की कोशिश करता हूं कि इसमें मेरा दोष कितना या सामने वाले की जगह मैं होता तो, क्या करता। कई बार मैंने इससे बड़ी मुश्किलें आसान की हैं।

  2. शास्त्री जी प्रणाम.
    बहुत पते की बात कही आपने. दर-असल हमने अपनी ज़िन्दगी को इतना मशीनी बना लिया है की आत्म-चिंतन जैसी अच्छी बात हम ख़ारिज ही करते जा रहे हैं..मैने अपनी एक नज़्म में बरसों पहले लिखा था कि सबसे तो मिल रहे हैं अपने आप ही से मुलाक़ात नहीं हो पाती है. आपकी ये प्रेरणास्पद पोस्ट बहुत कुछ सिखाती है और अपने आपको बदलने जज़्बा देती है.

  3. आपके विषय मुझे मेरे अतीत मे ले जाते हैं जब यही बातें अपने विद्यार्थियों को कही जाती थीं. आत्म-चिंतन किए बिना आत्म-विकास कैसे सम्भव है !! आत्म-चिंतन होता है और फिर आत्म-मंथन ..मंथन होने पर मिलने वाला अमृत प्रसन्न कर देता है और विष देखकर दुखी हो जाते हैं.

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