चिट्ठा/जालस्थल: कुछ गलतफहमियां

मेरे लेख विषय सूची – 1 (विषयाधारित चिट्ठा बनायें) मे रचना सिंह ने एक लम्बी टिप्पणी की है जो कई गलतफहमियों के ऊपर अधारित है. ये गलतफहमियां चिट्ठाकारों के बीच व्याप्त है अत: इस विषय पर एक चिट्ठा लिखना जरूरी हो गया है.

WrongWay“आप ब्लोग को और वेब साईट को मिला रहे हैं । वेब साईट पहले से ही विषय आधारित होती थी पर उनको इंटरनेट पर अपलोड करने के लिये पैसा देना होता था । अब लोग ब्लोग को वेब साईट मान ले रहे है और आप भी उसी विधा को ब्लॉगर को शायद समझा रहे है । पर एक बात को हमेशा ध्यान मे रखना होगा की ब्लॉगर अपने ब्लोग का सारा लेखा जोखा अपने कंप्यूटर या किसी कद पर सुरक्षित रखे क्योकि “ब्लोग” फ्री सुविधा है और कभी भी खतम हो सकती है या की जा सकती है । विषय आधारित ब्लॉगर को काफी मेहनत करनी होगी और अगर फिर सारा डाटा विलीन हो गया तो काफी निराशा और शोभ का सामना हो सकता है । [rachna]

गलतफहमियां निम्न हैं

1. ब्लोग और वेब साईट अलग अलग चीजें हैं: वेब साईट (जालस्थल) में किसी जमाने में स्थाई जानकारी दी जाती थी जबकि ब्लॉग (चिट्ठा) व्यक्तिगत विचार, जानकारी आदि छापने के लिये प्रयुक्त होता था. लेकिन अब यह अंतर मिट रहा है, एवं 2010 तक पूरी तरह से मिट जायगा. “चिट्ठानिर्माण तंत्र” जालराज के लिये हर काम इतना आसान कर देता है कि अब बहुतायत से ब्लॉग का उपयोग स्थाई जानकारी उपलब्ध करवाने के लिये करवाया जा रहा है. पर्यानाद, गत्यात्मक ज्योतिष, रचनाकार, उन्मुक्त, चिट्ठाचर्चा, आवारा बंजारा, शब्दों का सफर, डॉ अरविंद का चिट्ठा, स्वास्थ्य चर्चा आदि इसके थोडे से उदाहरण हैं. अत: धीरे धीरे दोनों का अंतर मिट रहा है.

2. वेबसाईट को अपलोड करने के लिये पैसा देना पडता था: वेबसाईट और चिट्ठे तब भी मुफ्त में बनाये जा सकते थे, आज भी बनाये जा सकते हैं. पैसा कभी भी एक विषय नहीं था. पैसा दिया जाता है अपने खुद के डोमेन (उदाहरण: सारथी, मेरा पन्ना, काकेश आदि) के लिये एवं सर्वर स्पेस के लिये. अपने डोमेन/सर्वर पर वेबसाईट भी हो सकता है ब्लॉग भी.

3. ब्लॉगर अपने ब्लोग का सारा लेखा जोखा अपने कंप्यूटर या किसी कद पर सुरक्षित रखे: सिर्फ ब्लॉग ही नहीं, वेबसाईट (जालस्थल) का मालमसाला भी सुरक्षित रखना पडता है क्योंकि अन्य तरीके से यह भी खोया जा सकता है.

4. विषय आधारित ब्लॉगर को काफी मेहनत करनी होगी: सस्ता रोये बार बार, महंगा रोये एक बार. जीवन में हर उत्कृष्ट चीज के लिये एक कीमत चुकानी पडती है. विषय अधारित चिट्ठे वाकई में उन लोगों के लिये है जो एक बार रोने के बाद सालों तक उसका फल काटना चाहते हैं.

5. विषय आधारित ब्लॉगर को काफी मेहनत करनी होगी और अगर फिर सारा डाटा विलीन हो गया तो काफी निराशा और शोभ का सामना हो सकता है: यदि आप ने मेहनत की है तो किसी भी चिट्ठे का डाटा विलीन होने पर रोनागाना तो होगा. यह सिर्फ विषयाधारित चिट्ठों तक सीमीत रुलाई नहीं है.

मैं क्यों विषयाधारित चिट्ठों की वकालात कर रहा हूँ उसका एक पहलू आज प्रबुद्ध पाठक ने टिपियाया है:

आप एक नयी अवधारणा की स्थापना कर रहे हैं. अभी तक तो ब्लॉग को हल्की फुल्की बातों, आपबीती तथा कुछ भी ऊल जूलुल कहने के लिए लोगबाग इस्तेमाल कर रहे थे, पर यह उचित है कि इस विधा को भी एक गरिमा प्रदान किया जाय, जैसा कि कईओं ने कर भी दिखाया है — Arvind

आभार डॉ अरविन्द !! उम्मीद है कि मैं जिन अवधारणाओं की वकालात कर रहा हूँ वे बहुत लोगों के लिये उपयोगी होंगे.

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Author: Super_Admin

13 thoughts on “चिट्ठा/जालस्थल: कुछ गलतफहमियां

  1. अभी तक तो ब्लॉग को हल्की फुल्की बातों, आपबीती तथा कुछ भी ऊल जूलुल कहने के लिए लोगबाग इस्तेमाल कर रहे थे—-
    *********************************
    हमें तो यही कहने के लिये काफी मेहनत करनी पड़ रही थी/है।

  2. सही है. धीरे धीरे हिन्दी ब्लॉग भी विषय़ाधारित होते जायेंगें.

  3. भविष्य विषयाधारित चिट्ठों का ही है।
    सामग्री खो जाने के भय से, अपनी चिट्ठियों की एक कॉपी अपने कंप्यूटर पर भी रखता हूं।

  4. वैसे आज़कल यह देखने को मिल रहा है कि ब्लॉग के विषय चयन में लोग काफी गंभीर होते जा रहे है जो आने वाले समय के लिए एक शुभ संकेत का द्योतक है !इसमें कोई संदेह नहीं कि -धीरे धीरे हिन्दी ब्लॉग भी विषय़ाधारित होते जायेंगें.

  5. उन्मुक्त जी की बात से सहमति है कि भविष्य तो विषय आधारित चिट्ठों का ही होगा!! क्योंकि भविष्य में इतने अधिक चिट्ठे होंगे कि आदमी अपनी पसंद के ही विषयों वाले चिट्ठे पर ही जाना पसंद करेगा!!

  6. यदि आप किसी विषय पर आधारित चिट्ठा नहीं चला सकते तो ना सही लेकिन इस अवधारणा का विरोध करने का क्‍या औचित्‍य है कि ब्‍लॉग विषयाधारित नहीं होने चाहिए? ब्‍लॉगिंग सिर्फ शब्‍द भंजन नहीं है और यदि ऐसा होता तो आज विषयाधारित चिट्ठों का वजूद नहीं होता. शास्‍त्री जी ने अब जो बहस आरंभ की है उसे कई लोगों ने बहुत पहले से समझ रखा है और काम कर रह हैं. कोई माने या ना माने जल्‍द ही वह समय आ जाएगा जब लोग आपके चिट्ठे पर महज कुछ शब्‍दों की तुकबंदी पढ़ने नहीं आएंगे. मैं विषयाधारित चिट्ठों का पूरा समर्थन करता हूं.

  7. @rachna

    Whether you move to your own domain or not, the content with Google will be wiped out the day the company begins a wipe — which can easily take place in 5 to 10 years. So keep a backup because you will be doing a lot of posting in 5 to 10 yeras.

    The wipe will have no connection with whether you have the data elsewhere.Anything on blogger at that time will be gone.

  8. आप ब्लोग को और वेब साईट को मिला रहे हैं । वेब साईट पहले से ही विषय आधारित होती थी पर उनको इंटरनेट पर अपलोड करने के लिये पैसा देना होता था ।
    thewn what is wrong in this statement sir can you explain in detail

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