वासनालोलुप हमारा मन

कामेच्छा शरीर की अन्य इच्छाओं के समान एक स्वाभाविक इच्छा है, एवं जिस तरह से (चोरी किये बिना) भूख-प्यास को कोई भी व्यक्ति सही तरीके से मिटा सकता है उसी तरह कामेच्छा के मामले में कोई भी व्यक्ति अपने वैवाहिक जीवन में तृप्ति पा सकता है. लेकिन विवाह के बाहर कामेच्छा को तृप्त करना वासनालोलुपता एवं नैतिक अपराध होता है.

मानव मन दो कारणों से वासना लोलुप हो जाता है — अस्वस्थ यौन अवधारणा एवं अस्वस्थ यौन अवधारणाओं को भडकाने वाला आदान-प्रदान (पुस्तकें, दृश्य-श्रव्य माध्यम). आज लगभग सारे हिन्दुस्तानी माध्यम इस तरह के भडकाऊ वासना से भरे हुए हैं. जनसामान्य के बीच बहुत से लोग माध्यमों का उपयोग ही ऐसे कार्यों के लिये करते है.

उदाहरण के लिये, हिन्दी जालगगत में पिछले दो हफ्तों मे जिन विषयों पर गूगल पर हिन्दी में खोज हुई उसका एक आंकडा देखिये.

# Google योनि (‎514)
# Google ग्लोबल वार्मिंग (‎62)
# Google नंगी लड़की (‎51)
# Google सेक्स एजुकेशन (‎45)
# Google यौन क्रिया (‎40)
# Google प्रकृति (‎39)
# Google संभोग (‎37)
# Google देश (‎29)
# Google हिन्दुस्तान (‎27)
# Google समलैंगिक (‎27)

इसी दौरान सारथी पर जो पुरालेख सबसे अधिक पढे गये उनकी संख्या एवं विषयवस्तु देखिये.

# (केवल वयस्कों के लिये) यौन शिक्.002e. (‎771)
# यौनाकर्षण: स्त्रियों की जिम्म.002e. (‎118)
# मेरी पसंद के चिट्ठे 005 (‎108)
# मेरी पसंद के चिट्ठे 001 (‎91)
# हिन्दुस्तान जंगलियों का देश ह.002e. (‎64)
# लाखों अमरीकी यौन शिक्षा से भाग… (‎62)
# यौन शिक्षा — पाश्चात्य राज्यो… (‎53)
# प्रकृति (‎53)
# यौनजीवन: भारतीय अवधारणा (‎52)

लगभग 450 पुरालेखों में से दो हफ्तों में सबसे अधिक पढे गये 9 लेखों में से 5 यौनजीवन से आधारित है. "केवल वयस्कों के लिये" जब से लिखा गया है तब से नंबर एक पर रहा है एवं दूसरे लेख से सात से दस गुना आगे रहता है. भारतीय जनमानस कितना यौनलोलुप हो गया है उसका एक अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है.

ऊपर दिखाये गये आंकडे पिछले 6 महीने से मैं देखता आया हूँ एवं उनका अनुपात यही है, जिसका मतलब है कि मैं किसी क्षणिक आंकडे के आधार पर नहीं बोल रहा हूँ. किसी भी दो हफ्ते का आंकडा ले लें तो अनुपात यही रहेगा.

जब तक हम पश्चिमी यौनिक सोच को नहीं छोडेंगे तब तक यही होगा — संभोग से समाधि की ओर अग्रसर होने के बदले जनमानस (कम से कम मानसिक तौर पर) संभोग से संभोग की ओर दौडता रहेगा. इसका सामाजिक असर आप सोच सकते हैं. अति सर्वत्र वर्जयेत. अति हमेशा समाज को विनाश की ओर अग्रसर करता है.

Share:

Author: Super_Admin

4 thoughts on “वासनालोलुप हमारा मन

  1. इन विषयों पर खोज का एक कारण यह भी है कि हमारे यहाँ परम्परा से यौन शिक्षा का अभाव है। हम उसे छिपाते अधिक हैं। यदि वास्तविक यौन शिक्षा मिलने लगे और इसे गुप्त और असामान्य विषय की हैसियत से च्युत कर दिया जाए। यौन शिक्षा को सहज कर दिया जाए तो बहुत समस्या हल होगी। वह नहीं किया तो मुश्किलें बढ़ेंगी क्यों कि यौन उद्दीपन जिस अराजक तरीके से परोसा जा रहा है उसे तो नहीं ही रोका जा सकता है। उस का जवाब और हल इस के सिवा और नहीं कि हम इस विषय को सामान्य और सार्वजनिक करें।
    हम अपने बच्चों को यह सब बातें बताने से झिझकते, सकुचाते हैं। जब समस्य़ा विकराल हो जाती है तो मजबूर हो जाते हैं।

  2. नयी पीढ़ी
    किस आयु सीमा को हम नयी पीढ़ी कहेगे ।
    क्या ४० -५० साल तक की आयु सीमा नयी पीढ़ी मे आती हैं ।
    क्या ३० -४० साल तक की आयु सीमा नयी पीढ़ी मे आती हैं ।
    या २० -३० साल तक की आयु सीमा नयी पीढ़ी मे आती हैं ?
    या १० -२० साल की आयु सीमा नयी पीढ़ी मे आती हैं ?

    अगर पहला वर्ग और दूसरा वर्ग इसमे आता हैं तो आज की हर सामाजिक बुराई की जिम्मेदारी उसकी है । क्योकि इस पीढ़ी को
    यौन शिक्षा नहीं मिली , क्योकि इस पीढ़ी को हमेशा “सेक्स” शब्द को “पर्दे मे रखना ” सिखाया गया सो इस पीढ़ी ने हर गलत काम को किया और आज भी कर रही हैं । इस पीढ़ी मे किसी भी नयी बात को सुनने की क्षमता नहीं हैं । क्योकि उसको सिखाया ही नहीं गया हैं की “ओपेनेस” जरुरी हैं । “ओपेनेस” को वह सीधा नगनता से जोड़ते हैं । अगर इस पीढ़ी {४० -५० साल तक की आयु सीमा ।} को यौन शिक्षा मिली होती तो शायद वो इतनी कुंठित ना होती । हमेशा ग़लती ना तलाशती दूसरो मे । और वोही गलती ना करती जो उसके साथ हुई । समाज मे नगनता इस लिये बढ़ रही हैं क्योकि हम अपनी गलतियों पर परदा डाल कर जीने के आदी हैं ।
    इंटरनेट , मीडिया आजाने से सब कुछ हमारे पहुच मे हैं और हम जिज्ञासु हो कर सब कुछ खंगाल कर अपने अज्ञान को दूर कर रहे है क्योकि हमारे समय मे हमे अंधरे मे रखा गया । अपने बच्चो को यौन शिक्षा जरुर दे हम सब ताकि सेक्स से हिंसा को अलग किया जा सके ।
    टीवी पर जो आज कल दिखाया जाता हैं वह सब इस लिये क्योकि लोग वह सब जानना चाहते हैं जो दबा हुआ सबके मन मे । नगनता ना आए इसके लिये यौन शिखा जरुरी हैं ।

Leave a Reply

Your email address will not be published.