मेरा बेटा लडकियों से चिढता है!

प्रश्न: मेरा बेटा 10 साल का है एवं पिछले छ: महीने से लडकियों से बहुत चिढता है. वह हमेशा उनसे दूर बैठने की कोशिश करता है एवं उसका हमउमर कोई लडका किसी लडकी के पास बैठ जाये या किसी लडकी से छू जाये तो वह उनको बहुत चिढाता है. मुझे क्या करना चाहिये.

सबसे पहली बात, आप उसे इस आदत के लिये किसी तरह की टोकाटाकी न करें, बल्कि जरूरी हुआ तो उसकी जानकारी में लाये बिना इस आदत को दूर करने की कोशिश करें.

लेकिन इसके पहले आप को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिये कि आपका बच्चा किसी भी तरीके से असामान्य नहीं है. दर असल दस साल के आसपास अधिकतर बच्चे समलिंगी बच्चों में अधिक रुचि लेने लगते हैं, और दोचार साल में यह आदत अपने आप खतम हो जाती है. लेकिन कुछ बच्चों में यह रुचि विपरीतलिगियों के प्रति चिढ के रूप में में प्रगट होती है. यह भी दोचार साल में अपने आप खतम हो जाती है. मानव विकास विविधता से भरी एक प्रक्रिया है, एवं इस वैविध्य के बारें में हमें फिकर करने की जरूरत नहीं है. यदि इस तरह का वैविध्य नहीं होता तो हम आप एक दूसरे के इतने अधिक समान होते कि हम सब खिलौने की  दुकान में बिकने वाले एक ही सांचे से निकले  गुड्डेगुडियों के समान यांत्रिक तरीके से एकसमान हो जाते.

इस उत्तर के आरंभ में मैं ने कहा था कि जरूरी हुआ तो उसकी जानकारी में लाये बिना इस आदत को दूर करने की कोशिश करें. मेरा मतलब यह है कि किसी बालमनोविज्ञान के ज्ञाता एवं परिचित परामर्शदाता को यदि यह लगे कि आपके बेटे की आदत एकदम असामान्य है तो ही इस मामले में बच्चे को बदलने की कोशिश करनी चाहिये. वह कैसे करना है वह परामर्शदाता अपके बच्चे के निरीक्षणपरीक्षण के बाद अपने आप आपको बता देगा.

Share:

Author: Super_Admin

6 thoughts on “मेरा बेटा लडकियों से चिढता है!

  1. बच्चा पूरी तरह से बेहतर है क्योंकि वह लड़कियों की सच्चाई से वाकिफ हो चुका है. 🙂 :०
    आप क्या चाहते हैं कि बच्चा ‘वैलेंटाइन डे’ मनाये.

  2. अरे , कोई मेरे पीछे बेलन लेकर मत आओ मैं तो मजाक कर रहा था. मेरा मतलब है कि उस बात पर ध्यान दे कि उसे यह पता न चले कि उसकी आदत से माता-पिता दुखी हैं. उसे धीरे-धीरे अन्य बच्चियों से घुलने मिलने दें.

    आप देखियेगा कि वह अपनी चीजें उनके साथ बाँटने लगेगा.

    मुझे पार्ले-जी का एक विज्ञापन याद आ रहा है जिसमें स्कूल से लौटता हुआ लड़का, एक लड़की को पहले एक बिस्किट देना चाहता है और फ़िर अंततः पूरा पैकेट दे देता है.
    ऐसा ही यह बच्चा भी करे, ईश्वर से यही दुआ है.

  3. वैसे इस उम्र में यह दोष स्वाभाविक रूप से उत्पन्न हो जाता है। मुझे लगता है कि बालक की यौन शिक्षा प्रारंभ करने का समय है। हो सकता है इस विषय में कुछ गलत तथ्य उस की जानकारी में आए हों जिन्हें वह सच समझ रहा हो।

  4. कोई परेशानी की बात नही है जब हम १० साल के थे तो मुहल्ले के लड़को को इकट्ठा कर के लड़कियों के ख़िलाफ़ भाषण देते थे और कभी कभी तो अच्छे खास भाई बहन में लडाई करा देते थे जिसका परिणाम ये हुआ की लड़कियों ने अपना गुट बना लिया और भीषण दंगे हुए फ़िर २ साल में सब कुछ नोर्मल हो गया हा हा हा क्या दिन थे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *