जाल से आय: आपके प्रश्न!

चिट्ठाकार मित्रों ने टिप्पणियों एवं ईपत्रों द्वारा मेरे लेख जाल से आय: 25,000 रुपया प्रति माह ??? एवं क्या जाल से आय संभव है? में प्रतिपादित विषयों के बारे में कई प्रश्न पूछे हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों का जवाब इस लेख में शामिल कर रहा हूँ:

(G Vishwanath): कई बार सुना था कि कुछ लोग ब्लॉग के माध्यम से पैसा कमा रहे हैं।बहुत दिनों से उत्सुक था यह जानने के लिए कि आखिर कितना पैसा कमा लेते हैं। सुना था कि दुनिया में कुछ सफ़ल चिट्ठाकार (विशेषकर अमित अग्रवाल -of Digital Inspirations fame) तो अपनी अच्छी खासी नौकरियाँ छोडकर Full Time blogger बनकर लाखों रुपये कमाने लगे हैं। आज पहली बार आपके इस लेख से आम ब्लॉग्गरों के कुछ आँकडे मिले। अगर आम ब्लॉग लिखने वालों की यह हालत है तो हम जैसे टिप्पणीकारों की क्या हैसियत? चवन्नी भी हमारे नसीब में नहीं लिखी है।

न बाबा न। हम ब्लॉग को अपना शौक ही मानते थे और भविष्य में भी यही मानेंगे। मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है इस जरिए पैसे कमाने का। सफ़ल और नामी ब्लॉग्गरों को यह आमदनी मुबारक हो। ईश्वर की कृपा से आज हमारे पास एक मध्यवर्गीय स्तर के जीवन जीने के लिए पर्याप्त आमदनी है। यदि कभी अधिक कमाने की इच्छा हुई तो और भी रास्ते हैं जो हम आजमाएंगे। सोचता हूँ इडली/वडा/दोसा बेचने में कम दिमाग और जयादा आमदनी की संभावना है। ब्लोग पढ़ने वाले कम होते हैं । इडली/वडा/दोसा के शौकीन की कोई कमी नहीं। घी और सांभार की महक सूंघते ही अपने आप दौड़ते चले आएंगे।

उत्तर: मेहनत बिन पैसा नहीं बन पता है, विश्वनाथ जी, एवं हर पेशे का यही हाल है. फरक यह है कि किसी को एक प्रकार की मेहनत आसान लगती है, दूसरे को दूसरे प्रकार की मेहनत. मुझ जैसे व्यक्ति के लिये एक ईडली बनाना आजीवन कैद के समान है जबकि जालपर 12 से 14 घंटे ऐसे लगते हैं जैसे समय फुर्र से उड गया. अत: न तो ईडली बनाना सबके वश की बात है, न मरीज देखना, न व्यापारिक चिट्ठाकारी करना. हर पेशा कुछ लोगों के लिये आसान है, बाकी के लिये कठिन है.

(अजित वडनेरकर): आप हमेशा कमाई की बात करते हैं । मगर इसी बीच हमने मसीजीवी की एक पोस्ट पढ़ी जिसमें उन्होने गूगल एडसेंस द्वारा हिन्दी ब्लाग्स को विज्ञापन देना बंद करने की सूचना दी थी…. फिर आय का क्या होगा ?

उत्तर: गूगल एक व्यापारिक संस्थान है अत: वह जरूर यह सुविधा जल्दी ही चालू कर देगा. हिन्दी चिट्ठों पर  विज्ञापन बंद करने का कारण नाईजीरियाई अपराध, हिन्दी चिट्ठे!! में देख लीजिये.

(Sanjay): इस शृंखला को आगे तो बढ़ाएं, यह तो कई बार चर्चा का विषय रह चुका है… असल बात तो वे तरीके हैं जिनसे आय शुरू होगी. दूसरी बात यह कि सिर्फ गूगल के एडसेंस से कमाई होना संभव नहीं है… इंग्लिश ब्‍लॉगर बहुत से दूसरे विज्ञापन भी अपने चिट्ठों पर लगाते हैं, जो भारत में हिंदी ब्‍लॉगर्स को नहीं मिलते.

उत्तर: मैं ने बात कई बार आगे बढाई है, लेकिन मित्र लोग उसे इसलिये समझ नहीं पा रहे क्योंकि अधिकतर लोग “हर्र एवं फिटकरी” के बिना आय चाहते हैं. इस लेखन परंपरा में मैं ने पुन: याद दिलाया है कि अपने चिट्ठे पर अधिकतम पाठक लाने की कोशिश करें एवं गूगल विज्ञापन द्वारा आय का रास्ता खोजें.

आपकी यह सोच गलत है कि सिर्फ गूगल एडसेंस से कमाई होना संभव नहीं है. मैं ने अपने चार चिट्ठों का हवाला दिया था जहां आराम से 25,000 प्रति माह कमाई होती है. लेकिन इन चार चिट्ठों पर लगभग 6 अन्य प्रसिद्ध कंपनियों के विज्ञापन लगा कर देखें. इन में से 4 पर कोई कमाई नहीं होती अत: उनको हटा दिया. गूगल एडसेंस के अलावा सिर्फ बिडवरटाईजर नामक कंपनी के विज्ञापनों से कमाई होती है. लेकिन कितना, जरा यह भी जान लें. गूगल से जब 25 हजार का चेक आता है तो उन्हीं चार चिट्ठों से बिडवरटाईजर का 500 रुपये का चेक आता है. असली आय फिलहाल गूगल एडसेंस में ही है प्रिय संजय एवं अन्य मित्रों.

(दिनेशराय द्विवेदी): आप ने अपने चिट्ठे पर लिखा है..“हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!!” पर आप का यह और इस से पिछला आलेख क्या हिन्दी चिट्ठाकारों को जबरन हिन्दी से अंग्रेजी की और नहीं ढकेल रहा है?

उत्तर: दिनेश जी, इस लेखन परंपरा का उद्धेश्य मित्रों के अनुरोध पर  “चिट्ठाकारी से आय” पर एक विहंगम दृष्टि डालना था, ना कि चिट्ठाकारी के बारे में लिखना. अत: जहां जहां आय होगी है उसकी जानकारी दे दी है, एवं साथ में यह भी कह दिया है कि अंग्रेजी से आय लेकर उसे हिन्दी के पोषण के लिये लगायें – जैसा मैं सारथी पर कर रहा हूँ.

(Suresh Chiplunkar):  आपकी लिस्ट के मुताबिक कुछ शब्द… बलात्कारी, यौनाकर्षण, यौनजीवन, वासनालोलुप, प्यार की प्यास, समलैंगिक, मनोहर कहानियाँ, गंदी आदत… आदि हैं, क्या चिठ्ठा हिट करवाने के लिये टाइटल भड़काऊ और ललचाऊ होने चाहिये, या फ़िर चिठ्ठे का मटेरियल अच्छा होना चाहिये, इस प्रकार के टाइटलों पर तो अधिक हिट्स आना स्वाभाविक ही है…

उत्तर: प्रिय सुरेश, भडकाऊ शीर्षक द्वारा थोडे समय के लिये एग्रीगेटरों से पाठक प्राप्त किये जा सकते हैं, लेकिन सारथी  को मुश्किल से 20 पाठक एक दिन एग्रीगेटरों से मिलते हैं अत: शीर्षक से सारथी को पाठक मिलने में कोई फायदा नहीं होता है. भडकाऊ शीर्षक  सारथी के समान स्थाई तौर पर पाठक आकर्षित नहीं कर सकते क्योंकि  गूगल जैसे खोज यंत्र शीर्षक को नहीं विषयवस्तु को महत्व देते हैं. सारथी के सारे लेखों के शीर्षक देखें तो यह स्पष्ट हो जायगा.

(Prashant): सर, आपका यह लेख अच्छा लगा.. मगर मैं सुरेश जी कि बातों से सोच में जरूर पर गया.. मैंने अपने ब्लौग पर अपनी भाभी के ऊपर एक पोस्ट और एक पोस्ट ब्लू फिल्म के ऊपर लिखी थी.. आज मुझे बस यही दो पोस्ट लगभग 200-450 हिट्स प्रतिदिन दे रहा है.. अब ये बात और है कि लिखने की वजह उस समय कुछ और ही थी..

उत्तर: इसका कारण आपका लेख नहीं है. कारण यह है कि इन विषयों पर एकाध ही लेख हिन्दी में छपे हैं. अत: कोई भी व्यक्ति इन विषयों पर खोज करता है तो खोज यंत्र उसे आपके चिट्ठे पर भेज देते हैं. लेकिन कल को दस और चिट्ठों पर इन विषयों पर लेख आ जायेंगे तो आपको पाठक मिलना कम हो जायेंगे क्योंकि खोज यंत्र इन दसों चिट्ठों पर लोगों को भेजेंगे.

(चलते चलते एक प्रश्न और, अज्ञात टिप्पणीकार की ओर से): इन्टनेट से कमाई का मतलब होता हैं नेट को इस्तमाल कर के कमाना और जो ब्लोगिंग से नहीं होगा ये ज्यादा आउटसोर्सिंग से होता हैं.

सारथी पर हम अज्ञात टिप्पणियों को स्वीकार नहीं करते अत: आपकी टिप्पणी नहीं दिख रही है, पर हम आपको जानते हैं क्योंकि काफी समय से हम आपके आईपी नंबर को साफ्टवेयर की मदद से निरीक्षण/ट्रेस करते आये हैं. संभवतया आपके संगणक का  एबसोल्यूट आईपी नंबर भी हमारे पास दर्ज  है.  

पलट कर आपसे एक प्रश्न जरूर पूछना है – यदि ब्लागिंग से कमाई नहीं होती तो हम गूगल का जो चेक हर महीने बैंक में जमा करते हैं एवं जिस पर बाकायदा टेक्स देते हैं वह क्या महज हमारा भ्रम है????????

यदि आपको टिप्पणी पट न दिखे तो आलेख के शीर्षक पर क्लिक करें, टिप्पणी-पट लेख के नीचे दिख जायगा!!

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Author: Super_Admin

7 thoughts on “जाल से आय: आपके प्रश्न!

  1. Dear Sir
    Nice to read your articles. It gives a lot of useful information.
    I have a blog http://www.girdher.com and that is in English . Kindly review it from adsense point of view. What should i do to improve it. Starting from 13th August 2008, i have earned 19 $ till date.
    Pls suggest some good measures to improve my earning
    i have read your english blog but u r saying that u r having 4 blogs in englisg. Where r they?
    pls reply these.

  2. शास्त्रीजी,

    इड्ली/वडा की बात तो मैंने मजाक में कहा था!
    कहीं आप इसे गंभीर व्याख्यान समझकर बुरा तो नहीं मान गए?
    ब्लॉग से आपकी आय २५०००/- है यह जानकर प्रसन्नता हुई।
    आशा करता हूँ कि आपको भविष्य में और भी कमाई हो।
    कम से कम एक लाख रुपया प्रति महिना आपका लक्ष्य होना चाहिए।
    आपको इस रकम पर और इससे भी अधिक रकम पर अधिकार है।
    आपसे कम सामर्थ्य और ज्ञान रखने वाले इससे ज्यादा कमा रहे हैं ।

    पसन्द अपनी अपनी।
    दिन में १२ से १४ घंटे ईंटरनेट से जुडे रहना, और ब्लॉग्गिंग करते रहना हमारे बस की बात नहीं। हम दिन में ज्यादा से ज्यादा, कुल मिलाकर एक या दो घंटे इस के लिए निकाल सकेंगे और वह भी छोटे छोटे Free Time Slices को जोड़कर। छुट्टियों के दिन ही इससे ज्यादा समय निकाल सकूँगा।
    इन हालातों में मेरे लिए इसे केवल शौक समझना चाहिए और पैसे के बारे में सोचना भी उचित नहीं।

    हमने लिखा था कि पच्चीस हज़ार कमाने के लिए और भी साधन हैं जिसे हम जरूरत पढ़ने पर आजमाएंगे। लेकिन आपको आश्वासन देता हूँ कि हम भी इड़ली/वडा धंधे के बारे में नहीं सोचेंगे। हम इडली और वडा खाना ज्यादा और बनाना कम पसन्द करेंगे।

    हाँ, यह अवश्य कहूँगा कि केटरिन्ग व्यवसाय में जो परिश्रम, लगन, और पूँजी की आवश्यकता है उसके लिए यदि कोई तैयार है तो महीने में २५००० से कई ज्यादा आमदनी हो सकती है। यहाँ, पास में ही कुछ साल पहले एक पढ़ी लिखी महिलाने अपने घर बैठे ही यह व्यवसाय आरंभ किया था छोटे पैमाने पर और आज उस महिला का लाखों का कारोबार चल रहा है, कई कर्मचारी हैं (बावर्ची, सफ़ाई कर्मचारी, delivery boys, Van drivers वगैरह) और बेंगळूरु में कई Multinational कंपनियों के कार्यालयों में नाश्ता/भोजन सप्प्लाई कर रही है। उनके यहाँ एक कंप्यूटर भी देखा था। On line orders लेती हैं!

    आपका ब्लॉग पढ़कर यह सांत्वना हुई के हम ने अब तक ब्लॉग के माद्यम से कुछ न कमाके कुछ ज्यादा नहीं खोया। आखिर एक या दो घंटे में क्या आमदनी हो सकती थी?
    लिखते रहिए और मज़ाक को क्षमा कर दीजिए।
    शुभकामनाएं
    विश्वनाथ

  3. @G Vishwanath

    प्रिय विश्वनाथ जी, मैं ने आपकी टिप्पणी से बहुत प्रेरणा ली एवं हर पहलू को सोचने का अवसर मिला — न कि बुरा माना.

    आप ने समय का जो कहा है, 1 या 2 घंटे, यह आय के लिये पर्याप्त नहीं है. शुरू के 2 सालों में 4 से 8 घंटे एवं बाद में दिन में दो घंटे पर्याप्त होंगे. मेरे 12 घंटे पुराने ब्लागों पर नहीं नये पर लगाये जा रहे हैं.

  4. शास्त्रीजी,
    पात्र को देने से कुछ नही होता, पात्र मे लेने की पात्रता भी होनी चाहिए. आपके यह लेख उचित पात्रो के लिए बहुत प्रेरणादायी है, मेरी आपसे एक गुजारिश है कि आप एक फॉरम भी शुरू करें.

  5. शास्त्रीजी,
    गूगल के विशेष एड से ज्यादा कमाई होती है इसपर विस्तार से जानना चाहता हूँ

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