शोकदिवस !!!

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शोकदिवस !!

शोकदिवस !!

शोकदिवस !!

शोकदिवस !!

 

आज राष्ट्रीय स्तर पर शोक मनाने की जरूरत है.

बम्बई में जो कुछ हुआ वह भारतमां के हर बच्चे के लिये व्यथा की बात है!

राष्ट्रद्रोहियों को चुन चुन कर खतम करने का समय आ गया है!!

शायद एक बार और कुछ क्रांतिकारियों को जन्म लेना पडेगा !!!

शोक!शोक!शोक!
किस बात का शोक?
कि हम मजबूत न थे
कि हम सतर्क न थे
कि हम सैंकड़ों वर्ष के
अपने अनुभव के बाद भी
एक दूसरे को नीचा और
खुद को श्रेष्ठ साबित करने के
नशे में चूर थे।
कि शत्रु ने सेंध लगाई और
हमारे घरों में घुस कर उन्हें
तहस नहस कर डाला।

अब भी
हम जागें
हो जाएँ भारतीय
न हिन्दू, न मुसलमां 
न ईसाई
मजबूत बनें
सतर्क रहें
कि कोई
हमारी ओर
आँख न तरेरे।
दिनेशराय द्विवेदी

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Author: Super_Admin

18 thoughts on “शोकदिवस !!!

  1. ” आज शायद सभी भारतीय नागरिक की ऑंखें नम होंगी और इसी असमंजस की स्थति भी, हर कोई आज अपने को लाचार बेबस महसूस कर रहा है और रो रहा है अपनी इस बदहाली पर …”ईश्वर मारे गए लोगों की आत्मा को शान्ति प्रदान करें

  2. यह तो ग्लोबल जेहाद है, कहाँ कहाँ किस किस के हाथ से बन्दूक छिनोगे? स्त्रोत को मिटा नहीं सकते, तो बेहतर है शोक मनाएं. कर भी क्या सकते हैं?

  3. अपनी एक जुटता का परिचय दे रहा हैं हिन्दी ब्लॉग समाज । आप भी इस चित्र को डाले और अपने आक्रोश को व्यक्त करे । ये चित्र हमारे शोक का नहीं हमारे आक्रोश का प्रतीक हैं । आप भी साथ दे । जितने ब्लॉग पर हो सके इस चित्र को लगाए । ये चित्र हमारी कमजोरी का नहीं , हमारे विलाप का नहीं हमारे क्रोध और आक्रोश का प्रतीक हैं । आईये अपने तिरंगे को भी याद करे और याद रखे की देश हमारा हैं ।

  4. “जो हुआ वो गलत हुआ,जो हो रहा है वो गलत हो रहा है, और जो होगा वो ओर भी ज्यादा गलत होगा” ईश्वर मृत आत्माओं को शान्ती दे । भटके हुओं को रास्ता दिखायें ।

  5. शोक!शोक!शोक!
    किस बात का शोक?
    कि हम मजबूत न थे
    कि हम सतर्क न थे
    कि हम सैंकड़ों वर्ष के
    अपने अनुभव के बाद भी
    एक दूसरे को नीचा और
    खुद को श्रेष्ठ साबित करने के
    नशे में चूर थे।
    कि शत्रु ने सेंध लगाई और
    हमारे घरों में घुस कर उन्हें
    तहस नहस कर डाला।

    अब भी
    हम जागें
    हो जाएँ भारतीय
    न हिन्दू, न मुसलमां
    न ईसाई
    मजबूत बनें
    सतर्क रहें
    कि कोई
    हमारी ओर
    आँख न तरेरे।

  6. Quote:
    स्रोत को मटियामेट करना है दोस्त !!
    Unquote:

    कहाँ है स्रोत?
    पाकिस्तान में?
    अफ़गानिस्तान मे?
    साउदी अरब में?
    या कुछ खास पथभृष्ट लोगों के मन में?
    यदि स्रोत कोई स्थान होता तो हम वहाँ बंबारी कर सकते हैं
    जहाँ स्रोत कुछ लोगों का मन है और ऐसे लोग पहचान-पदक पहनकर नहीं घूमेंगे तो कोई क्या करे?

  7. मैं तो हतप्रभ हूँ .मूक, निर्वचन. कोई टिप्पणी कहीं भी छोड़ नहीं पाया. हार कर रोएँ काँप उठे तो यहाँ चला आया. ब्लॉग तो एकजुट है पर क्या देश भी…

  8. आपने कभी सोचा है की अमेरिका पे दुबारा हमला करने की हिम्मत क्यों नही हुई इनकी ?अगर सिर्फ़ वही करे जो कल मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में कहा है तो काफ़ी है…..अगर करे तो….
    फेडरल एजेंसी जिसका काम सिर्फ़ आतंकवादी गतिविधियों को देखना ….टेक्निकली सक्षम लोगो को साथ लाना .रक्षा विशेषग से जुड़े महतवपूर्ण व्यक्तियों को इकठा करना ….ओर उन्हें जिम्मेदारी बांटना ….सिर्फ़ प्रधान मंत्री को रिपोर्ट करना ,उनके काम में कोई अड़चन न डाले कोई नेता ,कोई दल …….
    कानून में बदलाव ओर सख्ती की जरुरत …..
    किसी नेता ,दल या कोई धार्मिक संघठन अगर कही किसी रूप में आतंकवादियों के समर्थन में कोई ब्यान जारीकर्ता है या गतिविधियों में सलंगन पाया जाए उसे फ़ौरन निरस्त करा जाए ,उस राजनैतिक पार्टी को चुनाव लड़ने से रोक दिया जाए .उनके साथ देश के दुश्मनों सा बर्ताव किया जाये …….इस वाट हम देशवासियों को संयम एकजुटता ओर अपने गुस्से को बरक्ररार रखना है .इस घटना को भूलना नही है….ताकि आम जनता एकजुट होकर देश के दुश्मनों को सबक सिखाये ओर शासन में बैठे लोगो को भी जिम्मेदारी याद दिलाये ….उम्मीद करता हूँ की अब सब नपुंसक नेता अपने दडबो से बाहर निकल कर अपनी जबान बंद रखेगे ….इस हमले को याद रखियेगा ……ये हमारे देश पर हमला है !

  9. हाँ, मैं हूँ शोकाकुल क्योंकि मेरे रिश्तेदारों ने कांग्रेस को वोट दिया था. मैंने उनको रोका था पर … मेरा तो एक ही वोट है न !

  10. इस दुःख में हम भी दुखी हैं. सुबह से हर ब्लाग पर यही रोना – पीटना चल रहा हैं. सिर्फ़ २००८ में कई विस्पोट हुए. हमेशा नेताओं ने यही कहा हम सकत कदम उठाएंगे, मगर …….. सब बेकार.
    घर जाओ पिक्चर देखो एंड सोजाओ. यही हिंदुस्तानिओं का आदत हैं.

  11. बहुत दुखद व त्रास्त घटना | अब भी हमारे नेताओं की आँखे न खुले तो देश का दुर्भाग्य ही होगा

  12. ” शोक व्यक्त करने के रस्म अदायगी करने को जी नहीं चाहता. गुस्सा व्यक्त करने का अधिकार खोया सा लगता है जबआप अपने सपोर्ट सिस्टम को अक्षम पाते हैं. शायद इसीलिये घुटन !!!! नामक चीज बनाई गई होगी जिसमें कितनेही बुजुर्ग अपना जीवन सामान्यतः गुजारते हैं……..बच्चों के सपोर्ट सिस्टम को अक्षम पा कर. फिर हम उस दौर सेअब गुजरें तो क्या फरक पड़ता है..शायद भविष्य के लिए रियाज ही कहलायेगा।”

    समीर जी की इस टिपण्णी में मेरा सुर भी शामिल!!!!!!!
    प्राइमरी का मास्टर

  13. यह समय शोक करने का नही, गलतियो को ढूढना आज उचित नही। हम सबको मिल जुलकर आज देश कि एकता, अखण्डता को सुनिश्चत करना होगा। रोष होना ही चाहिऐ, पर हिसा करने वालो के प्रति। आज हमे एक दुसरे का हाथ पकडने का समय है। टॉग खिचने का नही। यह विचार उन्ह लोगो के लिये है जो मुम्बई मे ऑतकवादी हमले मे “राज ठाकरे ?” कहॉ कि बॉत अपने चिठ्ठे मे लिखते है। आज के समय मे सिर्फ और सिर्फ “भारत मॉता कि जय” के सिवाय कुछ भी नही। कोई राजनिति नही होनी चाहिऐ। यह भारत और समस्त भारतीओ कि लडाई है,उन्ह दहशतगर्दियो के खिलाफ जो मुम्बई मे ऑतकी हमला किया। गढे मुर्दे उखाडने का आज समय नही है।

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