ब्रह्मचर्य से केंसर होता है??

Virginity साठ और सत्तर के दशक भारतीय समाज में परिवर्तन के दशक थे. पश्चिम के प्रभाव में आज भारत में जो सामाजिक परिवर्तन दिखते हैं (पब संस्कृति, वेलेन्टाईन दिवस, डेटिंग, अधनंगे वस्त्र, अंग्रेजी की आराधना, अंग्रेजी नव वर्ष की शराब-पार्टी) इनकी जडें सन 1970 के आसपास घटी घट्नाओं का परिणाम है. इन में से एक था हिप्पी आंदोलन.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमरीका में जो आर्थिक क्रांति आई उसके कारण वहां हर भौतिक चीज की सुलभता हो गई थी. यहां तक कि 1970 में एक शर्ट एक डालर का और एक पैंट ढेड डालर का बिकता था.

इस भौतिक सुलभता का फल 1960 के आसपास यह हुआ कि वहां  बिना अधिक मेहनत किये, बिन अधिक पढाई किये, हरेक को नौकरी, मकान, भोजन मिलने लगा. यहां तक कि अपना काम करने के लिये वे विदेशों से लोग बुलाने लगे. अमरीका में सस्ता काम करने वाले विदेशियों का प्रवाह लगभग इस समय शुरू हुआ था.

लेकिन भौतिक सुविधा के साथ जो अध्यात्मिक खालीपन आया, उसने 1960 के अंत तक ऐसी एक अमरीकी युवा पीढी तय्यार कर दी थी जिसका कहना था कि यदि हाथ में पर्याप्त पैसे हैं तो क्यों न मनमाना जियें. ऐसे जन्म हुआ हिप्पी आंदोलन का. इसकी पहली पीढी के लोग पढे लिखे, धनी युवा और युवती थे जिन्होंने समाज के सारे आदर्शों को ताक पर रख दिया था. नशा करना, व्यभिचार करना, हर सामाजिक बंधन को तोडना इनका काम था.

हिप्पी लोग चूंकि चरस और गांजे की तलाश में लाखों की संख्या में हिन्दुस्तान आये, उस कारण उन्होंने उस समय के भारत की शहरी युवा पीढी को बहुत अधिक प्रभावित किया. उनके प्रभाव में कमीज पर लगाने के हजारों प्रकार के बिल्लों का आगमन हुआ जिनको शर्ट पर टांकना महाविद्यालयीन विद्याथियों के बीच बहुत जनप्रिय था. इन बिल्लों पर अकसर समाज-विरोधी एवं नैतिकता विरोधी संदेश लिखे रहते थे.

मैं उस समय बीएस सी में था एवं इस तरह की नैतिकता विरोधी बातों का काफी विरोध करता था. लेकिन एक दिन एक विद्यार्थी एक बिल्ला लगा कर आया (ब्रह्मचर्य से केंसर होता है) जिसे देख कर एकदम समझ में नहीं आया कि एक या दो वाक्यों में  प्रभावी तरीके से किस तरह ऐसे अनैतिक बात का खंडन किया जाये. मैं ने यह बात अपने एक साथी को बताई तो वह बोला कि उस के पास सही हल है और समय आने पर वह उसे पेल देगा.

पहले पीरियड के बाद अध्यापक चले गये तो सब उस बिल्ले की चर्चा में पिल गये. जो लडका उसे लगा कर आया था वह बहुत इतरा रहा था कि किसी के पास भी इसकी काट नहीं है. अचानक मेरा साथी खडा हुआ और बोला, भईया विनोद का बिल्ला तो बहुत गजब का है.  लेकिन एक प्रश्न है — विनोद की बहनों को और माताजी को कभी कैंसर हुआ है क्या?

आगे की बात आप खुद सोच लीजिये!

हां, एक बात जरूर! समाजविरोधी तत्वों को हर तरह से अनावृत किया जाना जरूरी है! इस के लिये कलम के धनी लोग अपने चिट्ठों के द्वारा बहुत कुछ कर सकते हैं!!

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Author: Super_Admin

13 thoughts on “ब्रह्मचर्य से केंसर होता है??

  1. अरे रामराम..रामराम..कैसा हैडिंग दिया?

    पर पोस्ट पढी तब ज्ञान हुआ कि मामला अलग ही है. असल मे मुझे तो ऐसा लगता है कि समय के साथ सब कुछ चलायमान है. बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

  2. आपकी बातों से पूर्णत: सहमत हूँ, इसे रोकने के लिए समाज के प्रबुद्ध जनों को पूरी दृढ़ता के साथ आगे आना होगा !

  3. किसी व्यक्ति विशेष को या उसके आवरण को पेल देने से वह बात ख़त्म नहीं की जा सकती जिसे इस लेख में “समस्या” कह कर इंगित किया जा रहा है. हमारी और आपकी तरह ही “ये” लोग भी किसी भी विकासशील समाज का हिस्सा हैं और हमेशा रहेंगे. पेज ३ फिल्म में भी इससे जुड़ा हुआ एक कथन था कि “ये …. का गटर है. जब तब ढका रहे, सिस्टम साफ़ रहेगा.”

    ये समाज के दो पक्षों या कह लें कि दो विचारधाराओं के बीच कि लड़ाई है ना कि सत्य-असत्य या देव-दानव के बीच की लड़ाई जिसमे कि क्लाइमेक्स अवश्यम्भावी हो-ऐसा मेरा मानना है.

  4. सच में इस तरह के कथनों को उसी तरह के दूसरे कथनों से काटा जा सकता है ।
    मेरे ब्लॉग पर आकर टिप्पणी करने का धन्यवाद । इससे उत्साह में वृध्दी हुई है ।

  5. हिप्पी आन्दोलन के बारे में थोड़ा और विस्तार की आकांक्षा कर रहा हूं । जरा विस्तार दें ।

  6. हम आपसे पूर्णतः सहमत हैं. एक बात सूझ रही है. कुछ प्रेरणादायी सद्विचारों वाले बिल्ले बनाये जाएँ और हम लोग लगाया करें तो कैसा रहेगा. आर्ची या हालमार्क से संपर्क कर प्रायोजित करने भी कह सकते हैं.

  7. शास्त्री जी आप ने बिलकुल सही कहा, ओर इन्ही हिप्पी बिमारी ने ही भारत मै हरे रामा, ओर हरे कृष्य्णा नाम की बिमारी भी फ़ेलाई अब जहा भी देखो इस्कांन नाम से यह मंदिर हमारे राम ओर कृष्ण को हाय रामा ओर हाय कृषणा कहते फ़िरते है, ओर हमारे नोजावान इन इस्कांन मै जाना अपनी शान समझते है, फ़िर आए भगवान रजनीश जिस ने रही सही कसर भी पुरी कर दी… अब किस किस को रोये, यह सब अपने साथ साथ हमारे इस पबित्र समाज को भी केंसर दे रहे है, आप के सहपाथी विनोद की तरह से.
    बहुत ही सुंदर लेख लिखा आप ने.
    धन्यवाद

  8. पर अब तो अमेरिका सहीत दुनिया भर मे भी भयकर मन्दी का दोर है ऐसे मे आर्थिक तन्गी ने फिर से हिप्पी सस्कृति को वास्तविक अध्यात्म कि और मोड दिया है।

    भारत के कई मठ खाली पडे है, बहुत से बाबाओ के विदेसी भक्त जो यहॉ अध्यात्म के बहाने चरच-गान्जा, शराब, सेक्स करने आते थे जिहे आप हिप्पी कहते है वे नरनारद है। वाराणासी हरिद्वारा, प्रयागराज, नासिक, एवम गुजरात,के बडे बडे धर्मगुरुओ के अखाडे सुन सान पडे है, यह कैसी अध्यात्मिकता होती है इन्ह टीवी बाबाओ के यहॉ। लाखो करोडो रुपयो कि आवक यह बाबा विदेशो से किस तर्क से हासिल कर पाते है जॉस का विषय है। सम्भोग से समाधि का नारा देने वाले रजनीश ने भारत कि धार्मिक व अधात्मिक क्षैत्र मे हिप्पी सस्कृति के दरवाजे खोल दिऐ, और आज कल सभी मठो मे विदेशीओ का जमावडा रहता है। क्यो? इसलिऐ

    इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमरीका में जो आर्थिक क्रांति आई उसके कारण वहां हर भौतिक चीज की सुलभता हो गई थी. से जोडना तो ठिक है। पर भारत मे लाने का कार्य अध्यात्मिक क्षेत्र के माध्यम से ही हुआ है।

    भारत के धनी युवाओ युवतियो का गान्जा अफिम, के प्रति लगाव व हिप्पी सस्कृति का ओढना भगवान रजनीश के उस(XXXXX) नारे के बाद ज्यादा प्रचलित हुआ।

  9. भईया विनोद का बिल्ला तो बहुत गजब का है. लेकिन एक प्रश्न है — विनोद की बहनों को और माताजी को कभी कैंसर हुआ है क्या?
    बस यही इसका सही जवाब है.

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