आपका भविष्य आपके हाथ में है?

image क्या आपके विचार आपका भविष्य बदल सकते है? धार्मिक प्रवृत्ति के लोग शायद एकदम से कहेंगे कि मनुष्य के विचार उसके भविष्य को बदल सकते हैं. वैज्ञानिक नजरिये से सोचने वाले लोग शायद एकदम से कहेंगे कि नजरिये से कोई फरक नहीं पडता है. सच क्या है?

सच यह है कि किसी भी विषय पर मनुष्य का नजरिया उसके वर्तमान को दिशा देता है, और यह उसके भविष्य को रूप देता है और इस तरह उसका नजरिया वाकई में उसके अनजाने उसके भविष्य को प्रभावित करता है. तीन विद्यार्थीयों के ले लीजिये जो परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो जाते हैं. एक आत्महत्या कर लेता है, एक मानसिक निराशा में डूब जाता है, जबकि एक उसे अपने जीवन में नई दिशा खोजने का एक दिन बना लेता है. एक ही घटना, लेकिन तीन परिणाम

कितने ही विद्यार्थी हैं जिनके पास जीवन ही हर सुविधा है. उन पर किसी भी तरह का भार या जिम्मेदारी नहीं होती है. लेकिन आलसी बन कर वे अपनी जिंदगी मिटा देते हैं. लेकिन उन्हीं की कक्षा में कई विद्यार्थी ऐसे भी होते हैं जिनके पास पर्याप्त कपडे, पाठ्य पुस्तके, या कापियां नहीं होती. उनको पढाई के साथ साथ घर का काम भी करना पडता है. इतना ही नहीं, कई बार रात के समय छत पर बैठ कर खंबे की ट्यूबलाईट से काम चलाना पडता है. इसके बावजूद परीक्षा में वे दिन प्रति दिन उन्नति करते जाते हैं. फरक नजरिये का है.

दुनियां के सफल वैज्ञानिक, वकील, व्यापारी, डाक्टर, इंजिनियर, संगीतज्ञ, कलाकार आदि के जीवन को ही देख लीजिये. दस में सिर्फ दो मिलेंगे जो हर तरह से सुविधासंपन्न थे. बाकि आठ के समक्ष निराशा ही निराशा थी. अभाव ही अभाव था. लेकिन कुंठित होने, निराश होने, मैदान छोडने के बदले वे सकारात्मक नजरिये से कार्य करते रहे. एक दिन सफलता उनके चरणों में आ गिरी.

आपका भविष्य वाकई में आप के हाथ में है.  आज से जरा हर कार्य को सकारात्मक नजरिये से देखना शुरू कीजिये, और छ: महीने के बाद देखिये कि कितना फरक पड गया है.

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Author: Super_Admin

17 thoughts on “आपका भविष्य आपके हाथ में है?

  1. Yes, I fully agree with you, don’t you think the parents and teachers are responsible to a large extent. Expections by the parents, No guidance by teachers,To complete the Syllabus is only job left with teacher. Who will develope self confidence in a student?? who will encourage them that failure doubles the success rate. We have to make a culture at home and teaching institutions to teach students that devotion, dedication and determination is the key of success., hence a plateform is required , the society has changed.I used to read on LALTAIN OR CHIMNI in my college library when the electricity goes, Anyhow this is past..hence through your blog I want to say yes future of a student is in hands with the remarks that your meritus are being judged by the product you give not by the efforts you put.

  2. धार्मिक या वैज्ञानिक .. सभी सकारात्‍मकता की ही वकालत करते हैं .. सोच और कर्म दोनो में .. मेहनत के अनुरूप सफलता मिलनी ही है सबको .. पर वैज्ञानिक माने या नहीं .. समय का इंतजार तो करना ही पडता है सबों को ।

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  4. हमारे चारों ओर जो मानव सृष्टि है – चाहे वह चांद पर पड़ा मानव कदम हो, या सारी मानव-जाति को सदा के लिए सुला सकनेवाले परमाणु बम हो, ताज महल जैसी महान कलाकृतियां हों – सभी सकारात्मक सोच के ही परिणाम हैं।

    हम जो सोचते हैं, उसे ही करते भी हैं। इसलिए अच्छा सोचेंगे, तो अच्छा करेंगे। नकारात्मक सोचेंगे, तो वैसा ही करेंगे भी।

    नेपोलियन हिल ने एक किताब लिखी है, थिंक एंड गेट रिच, जिसका हिंदी अनुवाद भी उपलब्ध है। उसमें उन्होंने सकारात्मक सोच के अद्भुत कारनामों का वर्णन किया है और यह भी बताया है कि हर आदमी उसे अपने जीवन में कैसे उतार सकता है। सभी के पढ़ने योग्य किताब है यह।

  5. mahoday
    mai apana Bhawishya janana chahta hun
    Kya mera Bhawishya ujjwal hai
    Batayen
    Mai bahut din se naukari ke liye praysfrat hun par kuchh nahi mil pa raha hai.
    yog kab hai.

  6. bhasha ek madhyam hai jo hame ek dusare se jodta hai, ham bhartiya kyon na hindi ko samman dete hue hindi madhyam apnai bhasha ka prayog karen . hame hindustani hone par garva hai/

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