समलैंगिक आंदोलन के घोषित लक्ष्य!!

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चित्र: अमरीकी समलैंगिकों के 2007 के परेड का एक चित्र. यदि संतुलित कानून न बनाये गये तो कल को भारत में भी यह जुगुप्साजनक प्रदर्शन  दिख सकता है!

जैसा मैं ने पिछले आलेखों में बताया था, समलैंगिकता के लिये कोई निर्विवाद आनुवंशिक कारण नहीं है. अधिकांश समलैंगिकों  के लिये यह एक सीखी हुई या मनोवैज्ञानिक आदत है एवं इसके लिये उनको अपराधी न मान कर उनके रोग के लिये चिकित्सा उपलब्ध करवाई जानी चाहिये. शायद हजार में एक समलैंगिक गर्भ में विकास के दौरान विकृति के कारण पुरुष शरीर में स्त्री या स्त्री शरीर में पुरुष के रुप में एक यौनिक विकलांग के रूप में जन्म लेता है. ऐसे लोगों को दक्ष चिकित्सकों की देखरेख में चिकित्सा उपलब्ध करवाई जानी चाहिये क्योंकि ऐसे लोगों की समस्या का लगभग शत प्रतिशत हल अब संभव हो गया है.

लेकिन इसके साथ साथ हर प्रबुद्ध भारतीय को यह समझ लेना चाहिये कि आज पश्चिमी लमलैंगिक आंदोलन जिस दिशा में जा रहा है वह क्या है. कारण यह है कि सारी दुनियां के कई समलिंगी इन से प्रेरणा और कई बार आर्थिक सहयोग प्राप्त कर इनके रास्ते चलने की कोशिश कर रहे हैं.

पाश्चात्य समलैंगिकों का घोषित एजेंडा निम्न है

  1. परिवार एवं यौनसंबंधी सारी धार्मिक, सामाजिक एवं नैतिक अवधारणाओं  में आमूल परिवर्तन.
  2. “परिवार” की परिभाषा का आमूल परिवर्तन जिससे कि परस्पर विवाहित पुरुष-समलैंगिकों  और परस्पर विवाहित लेस्बियन-स्त्रियों को भी एक “परिवार” माना जाये और परिवारों को मिलने वाली हर सरकारी सहूलियतें मिलें.
  3. समलैंगिक दंपत्तियों को बच्चे “गोद” लेने का अधिकार दिया जाये.
  4. इन समलैंगिक-परिवारों द्वारा गोद लिये गये बच्चों को, या शुक्राणु खरीद कर लेस्बियन दंपत्तियों द्वारा पैदा किये गये बच्चों को कानूनी तौर पर अपने माँ-बाप की संताना माना जाये.
  5. जनसामान्य की तुलना में समलैंगिकों को अधिक कानूनी सुरक्षा, अधिक कानूनी अधिकार, एवं सरकारी आर्थिक सहायता दी जाये.
  6. लमलैंगिकता का विरोध करने वाले जनसामान्य को कडी से कडी सजा (मुचलका, कैद) दी जाये. लेकिन यदि समलैंगिक लोग जनसामान्य और उनके यौनजीवन के विरुद्ध कुछ बोलें तो कानून इसे अभिव्यक्ति की आजादी करार दें.
  7. धर्म या नैतिकता के आधार पर समलैंगिकता के विरोध करने वालों को ऐसा विरोध उनको  सजा (मुचलका, कैद) देने के लिये पर्याप्त माना जाये.
  8. विद्यालयों में समलैगिकता की शिक्षा देना, समलैंगिक पिक्चरें दिखाना, समलैंगिक साहित्य पढना जरूरी किया जाये.
  9. समलैंगिकों द्वारा नशीली दवाओं के प्रयोग को कानूनी वैधता प्रदान की जाये.
  10. जेलबंद समलैंगिक कैदियों को अपने समलैंगिक “जीवनसाथी” से मिलने की कानूनी छूट दी जाये.

इनके अलावा और भी कई मांगें हैं, लेकिन किसी भी चिंतक की जानकारी के लिये इतना पर्याप्त है. भारतीय समलैंगिकों में से कुछ लोग इन में से कुछ मांग मूँह जबानी रख चुके हैं, और इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वे आगे क्या क्या मांगें रखेंगे.

इन सब के आधार पर हिन्दुस्तान की बहुतसंख्यक जनता को सावधानी से सोचना होगा कि रस्सी को कितनी ढील दी जाये कि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन न हो, लेकिन समाज में अराजकत्व भी न आये.

अभी तक के सारे लेखों के सारांश के रूप में मैं कल के आलेख में कुछ प्रस्ताव रखूँगा. मेरे कल के आलेख को पढने के पहले समलैंगिकों के निम्न चित्र जरूर देख लें जिनको सारथी इस तरह के अनुसंधान-आधारित लेख के साथ छापना मुश्किल है. ये सारे के सारे चित्र समलैंगिकों के पब्लिक प्रदर्शन से लिये गये है, न कि घर के अंदर लिये गये चित्र.

चित्र 1चित्र 2, चित्र 3, चित्र 4, चित्र 5, चित्र 5

Indian Coins | Guide For Income | Physics For You | Article Bank  | India Tourism | All About India | Sarathi | Sarathi English |Sarathi Coins  Picture: by Kevin Coles

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Author: Super_Admin

5 thoughts on “समलैंगिक आंदोलन के घोषित लक्ष्य!!

  1. एक बात रह ही गई, इस चर्चा में।

    यदि समलैंगिकता अर्जित आदत है, तो उसे छुड़ाने के लिए किस तरह के चिकित्सकीय उपाय उपलब्ध हैं? क्या कोई होर्मोन आधारित दवाएं कारगर हैं, या मनोचिकित्सा अपेक्षित है? क्या दुनिया में कहीं भी समलैंगिकता को छुड़ाने के लिए एल्कहोल एनोनिमस जैसी कोई संस्था काम कर रही है? भारत में किन अस्पतालों में इसका इलाज होता है? क्या पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में, जैसे आयुर्वेद में, इसका कोई इलाज है?

    संक्षेप में कहें तो, इस मर्ज का इलाज क्या है, कैसे होता है, और कहां होता है?

    और, परिवार और समाज के स्तर पर क्या ऐहतियाती कदम उठाए जा सकते हैं, और उठाए जाने चाहिए, ताकि भावी पीढ़ियों को समलैंगिकता से मुक्त रखा जा सके?

  2. @बालसुब्रमण्यम

    जल्दी ही इस विषय पर लिखूँगा बालसुब्रमण्यम जी !!

    सस्नेह — शास्त्री

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
    http://www.Sarathi.info

  3. इस श्रृंखला से बहुत कुछ जानने को मिला। इसे बीमारी और विकृति मान कर समाज को इस से संघर्ष तो करना ही पड़ेगा। पर सहानुभूति के साथ न कि इसे अपराध मान कर।

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