(बेंडविड्थ को अब समझिये चित्रों की सहायता से). चिट्ठाकारी एक आसान काम है, लेकिन उसके उन्नत शिखरों को छूने के लिये कुछ तकनीकी ज्ञान जरूरी है. यह ज्ञान कठिन नहीं है, लेकिन जब पहली बार यह जानकारी मिलती है तो कई बातें स्पष्ट नहीं हो पाती. बेंडविड्थ एक ऐसा ही विषय है, अत: मैं विषय को स्पष्ट करने के लिये कुछ और जानकारी यहां पर प्रदान कर रहा हूं. (इसके पहले के लेखों को जरूर पढें क्योंकि कोई भी लेख अपने आप में विषय के हर पहलू को नहीं छूता है).

बेंडविड्थ (पहला अर्थ)

बेडंविड्थ शब्द दो तरह से उपयोग में लाया जाता है. पहला है किसी जाल-कनेक्शन की सामर्थ को बताने के लिये. यह बताने के लिये कि वह एक समय अधिकतम कितनी जानकारी (डाटा) प्रेषित कर सकता है. पुराने जमाने के टेलिफोन कनेक्शन सिर्फ 24 kbps (किलोबाईट्स पर सेकेंड) या कम जानकारी प्रेषित कर सकते थे. नये फाईबरग्लास के टेलिफोन लाईन 56 kbps तक प्रेषित कर सकते हैं. ब्राडबेंड कनेक्शन 212 kbps डाटा प्रेषित कर सकता है. आजकल एशियानेट एवं टाटा (वी एस एन एल) केबल की सहायता से 524 kbps तक तीव्रता वाले कनेक्शन कुछ शहरों में प्रदान करते है.

 

50 पुराने जमाने का 24 kbps कनेक्शन, 1/2 इंच के नल एवं बहुत कम पानी के प्रवाह के समान हुआ करता था. एक बाल्टी पानी भरने में बहुत समय लगता था, एक जालस्थल लोड होने में भी बहुत समय लगता था. (बहुत कम बेंडविड्थ)
100 फाईबरग्लास का टेलिफोन कनेक्शन, 56 kbps , दो इंच के नल के समान सामान्य तृप्तिजनक पानी के प्रवाह के समान होता है. बाल्टी आसानी से भर जाती है, जालस्थल आसानी से लोड हो जाते हैं. (सामान्य बेंडविड्थ)
200 केबल या DSL द्वारा जाल-संपर्क. 212 kbps से लेकर 524 kbps तक तेजी से डाटा प्रेषित करता है. इसे कहते हैं ब्राडबेंड क्योंकि 24 या 56 kbps की तुलना में यह कई गुना अधिक जानकारी (डाटा) एक समय प्रेषित करता है. यह सडक के नीचे सरकार द्वारा बिछाये गये पानी के विशालकाय पाईप के सदृश्य है. बाल्टी क्षण भर में भर जाती है. जालस्थल बिजली की तेजी से लोड हो जाता है.

इसका मतलब यह हुआ कि आपके जाल कनेक्शन का बेंडविड्थ जितना अधिक होगा, आपका जाल उतने ही तेजी से कार्य करेगा. जालस्थल एकदम लोड हो जायेंगे. काफी सारे चित्र हों तो भी दिखने में अधिक समय नहीं लगेगा. लेकिन "बेंडविड्थ" एक और अर्थ में भी प्रयुक्त होता है.

बेंडविड्थ (दूसरा अर्थ)

पिछले कुछ दिनों से कई बार "बेंडविड्थ चोरी" की चर्चा हुई है. यहां "बेंडविड्थ" एक भिन्न अर्थ में प्रयुक्त होता है. इसे स्पष्टतया समझ लें.

मान कर चलिये कि किसी जालस्थल या चिट्ठे पर 10 लेख हैं जिनमें से हरेक लेख 10 किलोबाईट का है. यह भी मान लीजिये कि इन लेखों के साथ 10 चित्र हैं जिन में से हरेक 25 किलोबाईट का है. यदि एक पाठक इन में से हरेक लेख को अपने संगणक पर देखता है तो कुल मिला कर लेखों के (10×10) किलोबाईट डाटा एवं चित्रों के (25×10) किलोबाइट डाटा उसके संगणक पर आते हैं. कुल 100+250 = 350 किलोबाईट डाटा. यह डाटा भेजता है वह सर्वर जिसपर मूल चिट्ठा या जालस्थल स्थित है. इस तरह से डाटा आपके संगणक पर भेजने के लिये उसे कार्य करना पडता है एवं ऊर्जा खर्च होती है. सामान्यतया एक सर्वर पर सैकडों से लेकर 10,000 तक जाल स्थल या चिट्ठे स्थित रहते है. यदि एक दिन एक चिट्ठे या जालस्थल से 350 किलोबाईट डाटा भेजना पडता है तो 10,000 चिट्ठों के लिये करोडों किलोबाईट डाटा भेजना पडेगा. यदि इन जालस्थलों पर चित्र या ऑडियो/वीडियो भी हों तो यह संख्या और भी अधिक हो जाती है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

किसी सर्वर द्वारा भेजे गये डाटा की मात्रा को तकनीकी भाषा में बेंडविड्थ कहा जाता है. यह इस शब्द का दूसरा उपयोग है. मेरे सारे लेखों में बेंडविड्थ इस अर्थ में प्रयुक्त हुआ है. यहां बेंडविड्थ का मतलब है किसी सर्वर द्वारा भेजे गये कुल डाटा की मात्रा. संगणक की सामर्थ, उसके द्वारा प्रति सेकेंड भेजे जा सकने वाले डेटा की मात्रा, सर्वर को चलाने के लिये उपलब्ध ऊर्जा, हर चीज की एक सीमा होती है. इस सीमा के आधार पर हर सर्वर यह तय कर देता है कि एक जालस्थल एक महीने में कितना आंकडा (डाटा) भेज सकता है. उदाहरण के लिये एक स्वतंत्र डोमेन पर स्थित औसत जालस्थल एक महीने में अधिकतम 5 मेगाबाईट डाटा भेज सकता है. इसे कई बार कहा जाता है कि जालस्थल या चिट्ठे का बेंडविड्थ 5 मेगाबाईट प्रति माह है. सारथी एक महीने मे 10 जिगाबाईट (10 गुना 1000 मेगाबाईट) तक डाटा भेज सकता है अत: हमारा बेंडविड्थ 10 जिगाबाईट या 10,000 मेगाबाईट प्रति महीना है. इसमे से लगभग आधा (5000 मेगाबाईट) लगभग हर महीने खर्च हो जाता है. यदि कोई जालस्थल/चिट्ठा किसी महीने के अंत के पहले इस सीमा को छू जाता है तो उस सर्वर अपने आप उस महीने के अंत तक उस जालस्थ/चिट्ठे को बंद कर देता है एवं वह किसी को नहीं दिखता. यदि उस जालस्थल का मालिक पैसे देकर कुछ और बेंडविड्थ खरीद ले तो ही महीने के अंत से पहले वह दूसरों को दिखेगा. मतलब यह कि निश्चित बेंडविड्थ समय से पहले खतम हो गया तो अगले महीने तक उस जालस्थल पर "ताला पड जायगा" एवं वह किसी को नहीं दिखेगा. सारथी के साथ यह तीन बार हो चुका है एवं हम ने अपने बेंडविड्थ को 5 मेगाबाईट से 100, 1000 एवं फिर 10,000 मेगाबाईट प्रति महीना करवाया. हर बार काफी पैसा खर्च करना पडा.

सारांश:कोईजालस्थल (वेबसाईट) या चिट्ठा प्रति माह जो अधिकतम डाटा भेज सकता है उसे उसका बेंडविड्थ कहा जाता है. इसकी एक सीमा होती है. आप किसी अन्य के चिट्ठे पर स्थित चित्र को अपने जालस्थल या चिट्ठे पर लाये बिना जब कडी द्वारा उस चित्र को अपने चिट्ठे पर दिखाते हैं तो उस चित्र को पाठक के संगणक तक भेजने के लिये बेंडविड्थ खर्च होता है उस सर्वर का जिस पर वह चित्र स्थित है. इस तरह आप अपने काम के लिये किसी और के सीमित बेंडविड्थ की उठाइगिरी कर रहे है.

यदि आप जाल पर स्थित किसी चित्र का उपयोग करना चाहते हैं तो अनुमति लेकर उसे अपने चिट्ठे पर लाईयें एवं उसका उपयोग कीजिये. चोरी से बचें क्योंकि पहली बात यह गलत काम है, दूसरी बात यह आपको कानूनी परेशानी में फंसा सकता है.


Comments

5 Comments so far

  1. Gyan Dutt Pandey on December 15, 2007 6:23 am

    वाह! मुझे नहीं अन्दाज था कि कुछ पाठक ऐसे हैं जिन्हें baindwidth समझाना पड़े। आपकी नजर और पाठक की आवश्यकताओं की समझ निश्चय ही बेहतर है।

  2. Sanjay Gulati Musafir on December 15, 2007 10:16 am

    अच्छी जानकारी, विशेषकर उनके लिए तो इससे अनजान थे।

  3. sanjay tiwari on December 15, 2007 11:38 am

    बैंण्डविथ का खेल बहुत व्यापक है. होस्टिंग कंपनियां इसमें अच्छा-खासा खेल करती हैं. लेकिन आपने जिस तरह से नल की टोटी के माध्यम से इस विषय को समझाया है वह काबिले तारीफ है.

  4. balkishan on December 15, 2007 1:41 pm

    बहोत ही उपयोगी जानकारी. सच कहूँ तो मुझे तो ये सब चीजें पता ही नही थी.

  5. kunnu singh on December 28, 2007 4:28 am

    maine ye sawal kaiyoun se poocha par santust karne wala jawab koi bhi neahi mila. maine bhi blog banaya hai aur wallpaper bhi dallen hai aur jish bhi site se wallpaper liya ushka naam ush me se hata ke apne blog ka address dall diya hai kya ishke leeye copyright ka koi kanun lagta hai kripya batayen jarur batane ke baad inform kar dain agar aapki iccha ho tab.

Name (required)

Email (required)

Website

हिन्दी में टंकण के लिये पहले http://quillpad.in/hindi/ पर चले जाईये. टंकण के बाद उसे यहां नकलचिपका लीजिये

Close
E-mail It