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वह तारा क्या था ?
December 26, 2007 |
ईसा मसीह की जीवनी में एक तारे का वर्णन आया है जो उनके जन्म के समय पूर्वी देशों के विद्वानों को आकाश में दिखा था. इस तारे को देख कर उन विद्वानों ने एकदम बूझ लिया था कि यहूदियों के बीच कोई राजपदधारी शिशु पैदा हुआ है. कल डॉ अरविंद मिश्रा ने सारथी पर टिप्पया कि इस तारे पर कुछ “प्रकाश” डाला जाय.
यह 2000 साल पहले की घटना है. एवं उस समय के खगोल विज्ञान संबंधी जानकारी के बहुत कम पुरावस्तु लेखन मिल पाये है. लेकिन जो कुछ मिला है उसके आधार पर वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ईसा के जन्म के समय एक बहुत ही चमकीली वस्तु आसमान में प्रगट हुई थी. ईसा के जन्म के समय जो तारा दिखा था उसे युनानी भाषा में “प्रकाश पुंज” कहा गया है. स्पष्टतया, वह सामान्य से अधिक चमकीला एक आसमानी प्रकाश था. उस समय के चीनी एवं कोरियन खगोलविदों के लेखन के आधार पर कई शोधार्थीयों इस अनुमान पर पहुंचे हैं.0 इन शोधों से एक और दिलचस्प बात पता चली है कि ईसा के जन्म के आसपास का समय कई सारे असामान्य खगोलीय घटनायें हुई थी. इनमें से एक या अधिक के आधार पर उन विद्वानों ने यह जाना होगा कि यहूदी कौम में एक विशेष व्यक्ति का अवतार हुआ है.
यहां मैं एक बात खास याद दिलाना चाहता हूं. बाईबिल के अनुसार ये विद्वान “पूर्व” से गये थे. अनुमान है कि पचास से सत्तर विद्वानों का एक दल ऊटों के काफिले पर ईसा के दर्शन के लिये गया था. ईसा के दर्शन के बाद यह काफिला उस समय के क्रूर शासक की नजर से बच कर वापस भी चला गया एवं उसके जासूस इन को ढूढ नहीं पाये.
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Comments
8 Comments so far








धन्यवाद शास्त्री जी , आपने तो और जिज्ञासा जगा दी है मैं उन्मुक्त जी से भी सादर आग्रह करूंगा की वे इस अद्भुत घटना पर कुछ और प्रकाश डालें ,यहाँ[यदि आप अन्यथा न लें और इसकी अनुमति दें तो !] अथवा अपने चिट्ठास्थल पर .
इस विषय पर आगे खोज की आवश्यकता है, और अधिक प्रामाणिक जानकारियां प्राप्त हो सकती हैं।
बहुत सम्भव है कि महान विभूति का आगमन खौगोलिक संयोग से जुड़ा होता हो। यह कथा हमें चमत्कृत तो करती ही है।
ज्ञान जी से सहमत हूँ मैं भी
क्षमा करें किसी के विश्वास पर आधात करना नहीं चाहता मगर वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए. वह कोई बड़ी उल्का हो सकती है, जो वायूमण्डल में प्रवेश कर गई थी.
सही है की सभी धर्मो में आस्था चमत्कारों पर टिकी हुई है.
यीशू ने भारत में आकर आध्यात्मिक शिक्षा ली थी, इस पर आप ही रोशनी डाल सकते है. कहा यह भी जाता है की उनकी समाधी कश्मीर में आज भी सुरक्षित है.
इन बातो को दूर्भावनावश की गई न माने. यिशू के प्रति मुझे भी उतना ही आदर है जितना आपको.
कृष्ण, क्राइस्ट, बुद्ध, महावीर आदि पथप्रदर्शकों के जन्म से विशेष घटनाएँ जुड़ी हैं। इन्हें संयोग भी कहा जा सकता है या चमत्कार भी कहा जा सकता है। इतने बरसों पहले हुई घटनाएँ आज शायद समझ के परे हो सकतीं हैं।
अच्छी जानकारी मिली।सभी का धन्यवाद।
आपने जो ब्यौरा दिया है, उसे खगोलीय दृष्टि से समझा जा सकता है। मगर खगोलीय घटनाएं दैव या दैविक संदेशों से बाहर नहीं।