आज से हजारों साल पहले चीनी लोगों ने एक बहुत सरल खेल ईजाद की थी जिसे कहते हैं टेनग्राम (Tangram). इसमें लकडी या कागज के सात टुकडे होते हैं जिनके उपयोग से विभिन्न आकृतियां बनाई जा सकती है, जिन में से एक दाई तरफ आप देख रहे हैं. देखने में आसान लगता है, लेकिन मुझे काफी मेहनत लगी.
अनुमान है कि इन सात टुकडों से कम से कम दस हजार आकृतियां बनाई जा सकती हैं. इन में से कुछ आकृतियों को आप दूसरे चित्र में देख सकते हैं.
अब सवाल यह है कि यह मेरे या आपके किस काम का है. उत्तर है कि यह बहुत काम का है, खास कर यदि आप 40 से ऊपर के हैं. यदि आप 50 पार कर चुके हों तो यह और अधिक काम का है.
एक उमर के बाद मानव मस्तिष्क धीमा होने लगता है. तर्कशास्त्र के नियम भेजे से बाहर निकलने लगते है. कल तक जो चीजें आसानी से समझ में आ जाती थीं अब उनके साथ दिमांग खपाना पडता है. बच्चे आपको याद दिलाने लगते हैं कि “पापा यह समझना आपके वश की बात नहीं है”.
आजकल की सर्वसाधारण बिठाऊ जिंदगी भी दिमांग के धीमा एवं कुंद होने मे बहुत सहयोग देती है. अत: हर व्यक्ति को 40 के बाद शतरंज या इस तरह के खेलों का शौक करना चाहिये जो उनके दिमांग को धारदार रखे. मैं इस कार्य के लिए प्रयुक्त करता हूँ टेनग्राम को. इसमे किसी और खिलाडी की जरूरत नहीं है एवं आप आसानी से इसे खेल सकते हैं. आज इसके लिये एक मुफ्त तंत्र से आपका परिचय करवाते हैं.
800किलोबाईट के इस सॉफ्टवेयर की सहायता से आप दस हजारों आकृतियां बना सकते हैं. (आपके संगणक पर फ्लेश प्लेयर होना चाहिये जो कि मुफ्त तंत्र है). मेरे संगणक पर यह हमेशा चालू रहता है एवं मैं विभिन्न अकृतियां बनाता रहता हूँ. अनुमान है कि 500 की संख्या पार हो चुकी है, लेकिन अभी कम से कम 9,500 और बचे हुए हैं. तब तक शायद 10,000 और आकृतियां ईजाद हो जायें.
चाहे आप 40 के ऊपर के हों या नहीं इसे आजमा कर जरूर देखें. आपके बच्चे के मानसिक विकास के लिये तो यह एक बहुत ही अच्छा साधन है.
Tangram
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January 14th, 2008 at 6:53 am
आहा। तो यह है राज आप के दिमाग की खिड़कियां खुली रहने का। आज आपने खोल ही दिया। वैसे चिट्ठों पर टिप्पणियां करना भी अच्छा खेल है।
January 14th, 2008 at 7:12 am
चलिये जी। डाउनलोड कर लिया। अब शार्प होगा हमारा भी दिमाग!
January 14th, 2008 at 7:17 am
शास्त्रीजी,
वैसे रोचक जानकारी दी आपने, इसको डाउनलोड करके जरूर आजमाया जायेगा ।
हमारा तो २५ की बाली उमर में कुंद होता जा रहा है
आज सुबह मैने एक २१ किमी लम्बी दौड दौडी, उसकी रिपोर्ट अवश्य पढें,
http://antardhwani.blogspot.com
January 14th, 2008 at 7:44 am
Very interesting indeed ! Thanks !!
January 14th, 2008 at 1:21 pm
हम भी कोशिश कर के देखते हैं।नयी जानकारी के लिए आभार।
January 14th, 2008 at 5:36 pm
hello!
really interesting thing!
the pdf has so many images, wonder how they are made? they look really interesting!
thank for sharing this!
rgds