मिस्र या ईजिप्ट दुनियां की सबसे प्राचीन संस्कृतियों में से एक है. मिस्र के 4000 साल पुराने पिरामिड, हजारों ममियां, ठोस सोने के ताबूत, पत्थर पर उकेरी गई लाखों पंक्तियां, एवं पेपिरस पर लिखे गये हजारों ग्रंथ किसी भी अन्वेषक को एक पूरे जीवन भर अध्ययन का अवसर देता है — फिर भी वह इस संस्कृति के सतह भर को छू पाता है.
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अपने शिखर के 2000 सालों इस देश को एक से अधिक जाति एवं कौम के लोगों ने नियंत्रित किया अत: एक ही देवता के बारे में उनका विश्वास शुरू में कुछ था, अंत में और कुछ हो जाता है. ऐसा ही अनूबिस के साथ हुआ.
सीयार के सर वाले मनुष्य या सीयार के रूप में अनूबिस को प्रदर्शित किया जाता था. अनूबिस को शुरू में अधोलोक या मृत्युलोक का देवता माना जाता था. क्रमश: अनूबिस को मृत्यु के पश्चात ममी तय्यार करने की प्रक्रिया से जुडा देवता माना जाने लगा.
ऐसा भी माना जाता था कि अनूबिस मृतक का दिल तौल कर देखता था. दिल जितना वजनी होता था, वह व्यक्ति उतना ही महान माना जाता था. अत: ममी बनाने की प्रक्रिया के समय मृतक के दिल को सावधानी से निकाल कर अनूबिस को पेश करने के लिये एक मर्तबान में रख दिया जाता था.
मिस्र पर युनानियों के नियंत्रण के साथ साथ अनूबिस के बारें में उनकी धारणा में और परिवर्तन आया, एवं क्रमश: इस देवता की आराधना लुप्त हो गई. लेकिन परोक्ष रूप में अनूबिस की आराधना यूरोप में 1700 ईस्वी के आरंभ तक होती रही, एवं उसके बाद अनूबिस की आराधना लगभग पूर्ण रूप से समाप्त हो गई












January 20th, 2008 at 7:21 am
सभी संस्कृतियों में देवताओं का इसी प्रकार से विकास और कालांतर में लोप हुआ है। कृपया भारतीय देवताओं के बारे में लिखने का भी विचार बनाएं।
January 20th, 2008 at 9:19 am
Mythology is replete with such characters all around the world !
Thanks for introducing to this strange legendary wolf-man character of Egypt.There is no dearth of such half man,half animal characters in Indian myths too-Ganesh and Daksh are famous examples in point.
January 20th, 2008 at 9:55 am
नमस्कार, बहुत बढ़िया और ज्ञानवर्धक लेख। इतिहास संबंधी लेख मुझे बहुत ही अच्छे लगते हैं।
January 20th, 2008 at 11:24 am
अच्छी जानकारी.