Jan
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यौनाकर्षण, स्त्रियां, बलात्कार !
January 25, 2008 |
आज समाज हर और यौनाकर्षण से भरा हुआ है. आलपिन से लेकर कारों तक हर चीज स्त्री के यौनाकर्षण के आधार पर बेची जाती है. ऐसे स्त्रियों की भी कोई कमी नहीं है जो नाचगाने (केबरे), पिक्चर, विज्ञापन, आदि कि लिये अपने आपको बडे आराम से अनावृत करती हैं एवं मादक मुद्राओं में चित्रित होती हैं. Picture By Jesse Boyd साथ में दिये गये दो चित्रों को देखें. दोनों ही स्त्रियां हैं एवं दोनों ही नृत्य कर रही हैं. लेकिन क्या दर्शक के ऊपर पहले चित्र का वही असर होता है जो दूसरे चित्र का है. याद रखें कि मैं ने एक बहुत ‘सामान्य’ चित्र यहां दिया है. वास्तव में विज्ञापनों, कलेंडरो, टीवी, पिक्चर आदि में जिस तरह के अनावृत स्त्री-चित्र दिखते हैं उनको सारथी पर नहीं दिखाया जा सकता. ऐसे कई केलेंडर भारत में उपलब्ध हैं जिनमें स्त्रियों के शरीर पर थोडे से धागों के अलावा और कुछ नहीं है. इन स्त्रियों को मारपीट कर, या जबर्दस्ती अगवा करके नहीं लाया गया बल्कि वे अपनी इच्छा से इन कलेंडरों के लिये पोज देती हैं. बल्कि आजकल इन लोगों में बडी होड लगी है कि कौन अपने आपको अधिकतम अनावृत कर सकती हैं. यदि आप किसी प्रोफेशनल महाविद्यालय में चले जाये तो भी आपको लडकियां इस तरह की नुमाईश करती नजर आयेंगी कि आपकी आंखें शरम से झुक जायें. मेरे दोनों बच्चों के महाविद्यालयीन कार्यक्रमों में मैं ने यह बात नोट की थी. मैं ने अपनी बेटी से पूछा भी (हमारे घर में एक खुला माहौल है) कि लडकियां क्यों इस तरह अपने आप को अनावृत कर रही हैं तो उसने फट से उत्तर दिया कि डेडी वे लोग साफ कहते हैं कि एक मौका मिला है कि अपने पुरुष साथियों को "लुभाने" का. कैसा लुभाव — साफ है कि यौनाकर्षण द्वारा सिर्फ यौन-लुभाव ही पैदा होगा. Picture by CorinthianGulf अब यदि स्त्रियां यह मांग करे कि उनकी नग्नता से पुरुष यौनाकर्षण जरूर महसूस करें लेकिन वे इसका असर अपने जीवन में न होने दे तो यह कैसे हो सकता है. आप हंडिया आग पर चढायें लेकिन यह मांग करते रहें कि पानी गरम न हो तो यह कैसे हो सकता है. यदि आप बारूद पर आग डालें एवं मांग करें कि विस्फोट न हो तो यह कैसी अनहोनी बात है. आप पूछेंगे कि मैं बलात्कारियों का पक्ष ले रहा हूँ क्या. कदापि नहीं. मैं पहले ही कह चुका हूँ कि बलात्कार के लिये एक ही सजा होनी चाहिये और वह है मृत्युदंड या लिंगछेदन. स्त्री के साथ इतने नीच एवं क्रूर तरीके से पेशा आने वाले व्यकित को किसी भी तरह से बख्शा नहीं जाना चाहिये. वह दया का पत्र नहीं है. लेकिन इस चित्र का एक पहलू और है जो हम सब को समझना चाहिये. वह है स्त्री की जिम्मेदारी का. मजे की बात यह है कि वे स्त्रियां जो अराजकत्व के स्तर तक "नारी-स्वतंत्रता" की वकालात करती है, वे यौनाकर्षण के मामले में स्त्रियों की सामाजिक जिम्मेदारी के बारे में मौन रहती हैं. [शेष अगले लेख में] पृष्टभूमि: यौनाकर्षण: स्त्रियों की जिम्मेदारी/गैरजिम्मेदारी 2
यह न भूलें कि ये लडकियां अपने यौनाकर्षण को समझ कर अपनी इच्छा से अपने आप को अनावृत कर रहीं है. ऐसा करने के लिये किसी पुरुष ने उन पर दबाव नहीं डाला है. वे नर्सरी के बच्चे नहीं है, अत: वे यह भी जानती हैं कि यौनाकर्षण का अंतिंम पडाव क्या होता है.
यौनाकर्षण: स्त्रियों की जिम्मेदारी/गैरजिम्मेदारी 1
Comments
17 Comments so far








स्त्री स्वतंत्रता के मानदंड और सीमाएँ तो मैं नहीं जानता पर मैं मुझे ऐसा लगता है कि उपरोक्त दोनों चित्रों का असर अलग ही होना चाहिए।
सहमत। विचार बैलेंस तो होना चहिये।
सेकेण्ड क्लास के भरे डिब्बे में गहनों से लकदक चढ़ें तो चेन स्नैचिंग की सम्भावना बढ़ ही जायेगी।
“नारी-स्वतंत्रता” की वकालात करती है, वे यौनाकर्षण के मामले में स्त्रियों की सामाजिक जिम्मेदारी के बारे में मौन रहती हैं.
SAHI KHA APENEY NARI KI MONTA PAR….YEH SAB PARIVARIK SANSKARO KE DEN HOTI HAI…YADI GHAR WALEY HE IZAAZAT NA SE SEY TO KYA MAJAAL…LADKIYA ISE BEBAKI SEY APNE JISM KE NUMAISHA KAREY…..
AAJKAL PAISE KE BHOOK SABKUCH DHAANP LETI HAI AUR MONTA BHI SEEKHA DETI HAI…
The figure first i.e. above one is more[sexually] stimulating !while the below one elicits a response of admiration.
mujeh dono chito mae kewal dance kee do mudraayae dikhaayee deekhee . arjun ko apnee aankh sae kewal nishaana dikhtaa tha
डांस की दो मुद्राएँ?
सही है परंतु एक मादक और एक पूजनीय
मैं अर्जुन नहीं पुरुष हूँ और मुझे आँख नहीं पूरी चिड़िया दिखाई दे रही है।
अतुल शर्मा
aap dhynay hae
@rachna
एक अर्धनग्न स्त्री जो “शरीर” का प्रदर्शन कर रही है, एवं एक भारतीय नृत्यांगना जो “नृत्य” का प्रदर्शन कर रही है, एक पुरुषों की वासना भडका रही है दूसरी उनके मन में भक्तिभाव पैदा कर रही है, यदि इन दोनों के बीच आप को रत्ती मात्र का भी अंतर नहीं दिख रहा है तो मानव वासना के असर को समझने लिये आपको अभी काफी अध्ययन करना होगा, काफी दूर चलना होगा — वह भी एक अन्वेषक की सोच के साथ.
लेकिन जब तक स्त्रियां इस अंतर को नहीं समझेंगी तब तक वे अराजकत्व एवं जिम्मेदारी का अंतर भी नहीं समझ में आयगा.
ह्म्म, सहमत!! ईमानदारी से कहूं तो -
मै कोई साधु सन्यासी घोर संयमी आदमी नही हूं अगर पहले चित्र वाली मेरे सामने या आसपास हो तो मेरी आंखे बार बार उसकी ओर जाएंग ही निश्चित ही। फ़िर उसके नज़दीक जाकर उससे बात करने की कोशिश भी हो सकती है । जबकि दूसरे चि्त्र वाली से बात करने से पहले दस बार सोचना होगा।
मानव वासना के असर को समझने लिये आपको अभी काफी अध्ययन करना होगा, काफी दूर चलना होगा — वह भी एक अन्वेषक की सोच के साथ.
मानव वासना kewal purusho ko hee kyon sataatee hae shashtrii jee kabhie aapne kissi stri ko sadak per mutr taagate pursuh ko taaktae dekah hae ??
हे नर , क्यों आज भी इतने कमजोर हो तुम
क्यों आज भी इतने कमजोर हो तुम
कि नारी को हथियार बना कर
अपने आपसी द्वेषो को निपटाते हो
क्यों आज भी इतने निर्बल हो तुम
कि नारी शरीर कि
संरचना को बखाने बिना
साहित्यकार नहीं समझे जाते हो
तुम लिखो तो जागरूक हो तुम
वह लिखे तो बेशर्म औरत कहते हो
तुम सड़को को सार्वजनिक शौचालय
बनाओ तो जरुरत तुम्हारी है
वह फैशन वीक मे काम करे
तो नंगी नाच रही है
तुम्हारी तारीफ हो तो
तुम तारीफ के काबिल हो
उसकी तारीफ हो तो
वह “औरत” की तारीफ है
तुम करो तो बलात्कार भी “काम” है
वह वेश्या बने तो बदनाम है
हे नर
क्यों आज भी इतने कमजोर हो तुम
@rachna
आपने कहा:
“मानव वासना kewal purusho ko hee kyon sataatee hae shashtrii jee”
यही तो मैं बार बार कह रहा हूं कि पुरुष और स्त्री की मानसिक स्थिति एवं यौनाकर्षण एक समान नहीं होता. आप जिस दिन यह समझ जायेंगी उस दिन इसी तरह लिखने लगेंगी जैसे मैं इन दिनों लिख रहा हूँ.
sir
when man know that woman body prokes them then why do they go to woman , all these hight clubs , all these bikni clad photos are because man want to oogle
so for last 60 years in india woman are being told to accept , to tolerate , to remain a recluse , to remain fully clothed , to remain in the houses , to cover themselfs
but even after tolerating the oogling of man for 60 years the condition in india remains the same . i may not be as learned as you are but let me tell you younger generation of man are sitting on valconao because woman is tired of being told what to do .
the starting point of any discussion after 60 years of independenc should be “what man should do so that the society which is sinking every day improves” what is the moral of these 2 photos
ask me i can sum uo
see what you want to see
ignore what you want to ignore
sir
people like you who can influence others by writng should change from writing what woman should do to what man havent done and what they should do to improve th edetoriating society.
if a mere photo of woman is going to ignite the sexual desire of man then why not keep away from such things . a bikni clad model does it to earn money when she is modeling for a calander , a pross does it for money when she sells her body or attracts man , but why does it happen , WHO ARE THE BUYERS OF THESE PRODUCTS , WHAT IS THEIR SOCIAL RESPONSIBILTY , I THINK AFTER 60 YEARS OF FREE INDIA DISCUSSION SHOULD BE ON THEM .
I CAN UNDERSTAND VERY WELL YOUR POINTOF VIEW BUT ITS VERY OLD POINT OF VIEW AND VERY RUSTIC ONE . if man had a bilogical disorder its better they get it corrected rather then tell woman to make them suitable or adjustable to this biological disorder
i am sorry if i have written something that may have hurt your sentiments because you are elder to me by age and qualification but things have to change fast and man have to change themselfs to become more tolerant and maryaadit in their behaviour because woman has tolerated for 60 years and has waited for a change to come
@rachna
“a bikni clad model does it to earn money”
“WHO ARE THE BUYERS OF THESE PRODUCTS”
You said it Rachna ji. If women are going to make their bodies and sexual attraction a “commodity” to be sold to the highest bidder, they will also be treated as commodity.
You cannot take with one had that you give away with the other. If you advocate the right of women to “sell” themselves, then you cannot demand privacy, rights, respect and other things.
I think it is high time for women to advise their own folk that their bodies are God given gifts which are not to be used to seduce the world.
“i am sorry if i have written something that may have hurt your sentiments because you are elder to me by age and qualification ”
This forum is open for discussion of ideas. I have absolutely no problem in such discussion. My age or qualification does not come as a barrier.
In fact even if someone is totally opposed to my views, I do not moderate their comments. Comments are deleted only if a comment talks ill of someone else in the blogworld.a
http://mujehbhikuchkehnahaen.blogspot.com/2008/01/blog-post_25.html
पहले चित्र ओर दुसरे चित्र को हम कहां देख सकते हे ?
पहला चित्र बजारुपन ओर सस्तापन ,ओर घटियापन लिये हुये हे,जिस कि तरफ़ हम तो कया कोई शरीफ़ आदमी भी नही देखना चाहेगा, दुसरा चित्र आप अपने परिवार के साथ,अपनी मां बहिन,ओर बेटी के साथ बेठ कर देख सकते हे.बाकी जो जेसा हे उसे यह चित्र बेसे ही दिखते हे.
राज भाटिया