मेरी रुचि विषयाधारित चिट्ठों के प्रति काफी अधिक है. मेरे पाठक जानते हैं कि इस विषय में मैं ने एक अभियान ही चला रखा है कि अधिक से अधिक चिट्ठे विषयाधारित हों या विषयकेंद्रित हों. हिन्दी का सौभाग्य है कि विषयाधारित चिट्ठे बढ रहे हैं. उनके पाठक भी बढ रहे हैं. जितने भी विषयाधारित चिट्ठे हैं उनको अन्य चिट्ठों की तुलना में स्थाई पाठक भी अधिक मिल रहे हैं.
इस समय लगभग 40 विषयाधारित चिट्ठे बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं. इन में से आर्थिक, फिल्म, शेयर एवं मार्केट से संबंधित चिट्ठों को मैं नहीं पढता क्योंकि इन विषयों में मेरी रुचि कम है. अत: इन अच्छे एवं उपयोगी चिट्ठों के बारें में मैं इस लेखन परंपरा में नहीं लिखूंगा.
मेरी पसंद के लगभग 25 विषयाधारित चिट्ठों में से तीन के बारे में आज कुछ कहना चाहता हूँ. लेखों में ये जिस क्रम से दिये जा रहे हैं वे पूरी तरह से Random हैं एवं इस क्रम में किसी भी तरह की वरीयता का प्रदर्शन नहीं है.
किसानो के लिए. पंकज अवधिया से मेरी पहली “मुलाकात” एक गूगलखोज के द्वारा हुई थी. उसके बाद मैं हमेशा उनके लेख पढता आया हूँ. भारत की लुप्त होती वैज्ञानिक जानकारी के एक महत्वपूर्ण पहलू को दस्तावेजीकरण द्वारा सुरक्षित रखने के लिये कृषिवैज्ञानिक पंकज का योगदान असाधारण है.
शब्दों का सफर अजित वडनेरकर शब्दव्युत्पत्ति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान कर रहे है. अंग्रेजी में शब्दव्युत्पत्ति पर अनुसंधान एक अति विकसित क्षेत्र है, लेकिन भारतीय भाषाओं में मौलिक कार्य कम ही हुआ है. अजित जिस समर्पण के साथ शब्दों की साधना कर रहे हैं वह कल की पीढी के लिये एक महत्वपूर्ण योगदान होगा.
साईब्लॉग हिन्दी चिट्ठाकारों के बीच वैज्ञानिक चिट्ठों का नितांत अभाव है. मुझ जैसे भौतिकविद को यह बात हमेशा खलती रहती है. लेकिन विज्ञान के क्षेत्र में अब तीनचार चिट्ठे आ गये हैं, जिन में डॉ अरविन्द मिश्रा का साईब्लॉग बहुत महत्वपूर्ण है. वे पंकज या अजित के समान नियमित नहीं लिख पा रहे हैं, लेकिन उम्मीद है कि यदि पाठको की ओर से कुछ दबाव/टिप्पणी आदि बढ जाये तो वे और अधिक नियमित हो जायेंगे. यदि वे 3 दिन में एक बार 100 शब्दों का एक वैज्ञानिक खबर ही छाप दें तो उनका चिट्ठा दौडने लगेगा.
मेरी पसंद के विषयाधारित चिट्ठे अगले लेखों में !!




February 20th, 2008 at 6:44 am
सही लिखा और सही आकलन किया। ये तीनो चिठ्ठे बड़ी मेहनत से लिखे जाते हैं। और अपने क्षेत्र-सोच के प्रति समर्पित हैं।
February 20th, 2008 at 7:01 am
अच्छा आकलन है बधाई,
आगे भी इंतजार रहेगा
February 20th, 2008 at 7:30 am
आप की पसंद के और चिट्ठों की प्रतीक्षा है। लगता है ये चिट्ठे अधिकांश की दैनिक पाठ सूची में स्थान पा चुके हैं।
February 20th, 2008 at 8:44 am
वाकई, तीनों ही ब्लॉग जबरदस्त और जरूरी काम कर रहे हैं।
February 20th, 2008 at 10:38 am
सही चुनाव
February 20th, 2008 at 11:33 am
बढ़िया।
February 20th, 2008 at 12:36 pm
आपके प्रोत्साहन के लिये आभार। मै और अजित जी रात को काम करते है। अक्सर हमारी पोस्ट रात तीन से चार के बीच एक के पीछे एक दिखती है। अजीत जी का काम मुझे ज्यादा मेहनत वाला लगता है। मै अभी अपनी क्षमता का केवल कुछ प्रतिशत ब्लाग दुनिया को दे पा रहा हूँ। भविष्य मे अपना क्लोन बनवाया तो एक हिन्दी ब्लाग जगत के लिये भी रहेगा।
February 20th, 2008 at 2:12 pm
शब्दों के सफर पर आपकी ‘नज़र’ बनी रहे। आपकी प्रेरणा लगातार इस मंच पर और निजी पत्रों के जरिये मिलती रही है जो मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अवधिया जी और मिश्र जी के ब्लाग नियमित पढ़ता हूं। अभी शायद ब्लागरोल में नहीं हैं। अगली कड़ियों की प्रतीक्षा है।
February 20th, 2008 at 2:51 pm
सही!!!
February 20th, 2008 at 3:09 pm
बढ़िया और सही चुनाव,अगली कड़ियों की प्रतीक्षा है।
February 20th, 2008 at 4:43 pm
दर्द हिन्दुस्तानी ( पंकज अवधिया) जी न केवल गहराई में जाकर ज्ञान की बात करते हैं बल्कि इनकी निरंतरता इनके ब्लोग को अनदेखा नहीं होने देती.
अजित जी का कोई सानी इस क्षेत्र में है ही नहीं.
‘साईब्लोग” पहले कभी नहीं पढा, अब आपने चर्चा की है तो अवश्य देखूंगा. धन्यवाद.
February 21st, 2008 at 8:55 am
सभी को आभार ,मेरा यह चिट्ठा ज्यादा नियमित है- http://indiascifiarvind.blogspot.com/ सभी को विनम्र आमंत्रण …..
ंकज जी को भलीभांति नही पढ़ पाया हूँ मगर शब्दों का सफर का तो मुरीद हूँ .. मेरी सदस्यता है –इन दोनों चिट्ठाकारों को उनके अतुलनीय अवदान के लिए कोटिशः बधाई !
February 21st, 2008 at 4:48 pm
सफर के सभी सहयात्रियों का आभारी हूं। मकसद चाहे साफ हो, मंजिल चाहे दृष्टिगत हो मगर सहयात्री न हों तो
एकला चलो …वाली उक्ति भी बहुत हौसला नहीं बंधाती है। बना रहे साथ , चलता रहेगा सफर…
February 26th, 2008 at 8:27 pm
सर एक बार फ़िर हम आप के आंकलन से सहमत हैं , और एक बार फ़िर हम इसमें से पहले दो ब्लोग के नियमित पाठक हैं पर तीसरे को खोजेगें