मेरी पसंद के चिट्ठे 005

आज मैं अपनी पसंद के एक चिट्ठे की बात करना चाहता हूँ जिसे पढते बहुत लोग हैं, लेकिन यह बात किसी को बताना नहीं पसंद करते. इस कारण इस चिट्ठे को पाठकों के अनुपात में टिप्पणियां कभी नहीं मिलती. टिप्पणी की जरूरत भी नहीं है, लेकिन इसे पढें जरूर.

SexKya

सेक्स क्या: सवाल है कि इस चिट्ठे में ऐसी क्या बात है कि मैं खुले आम इसके बारे में लिख रहा हूँ. उत्तर हाजिर है:

  1. यह एक विषयाधारित चिट्ठा है.
  2. चिट्ठाकार के अनुसार, सेक्स को लेकर तमाम भ्रांतियां हैं. जिसे लेकर सेक्स शब्द सामने आते ही जेहन में एक गलत छवि उभरती है. इस गलत को दूर करने का एक प्रयास है सेक्स क्या …
  3. मैं ने इसके सारे लेख पढे हैं एवं मेरे मूल्यांकन के अनुसार ये लेख 95% तक वैजानिक तथ्यों पर आधारित हैं, एवं वयस्कों के लिये हिन्दी में आधुनिक यौन शिक्षा का एक अच्छा रास्ता है.
  4. कुछ लोगों को इस चिट्ठे के चित्रों पर आपत्ति होगी. लेकिन लगभग 70% चित्र वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बनाये गये हैं. बाकी 30% चित्रों के बिना काम चल सकता है (मेरा इशारा उन चित्रों की ओर है जिन के बिना भी लेख समझा जा सकता है).

कुल मिला कर यह चिट्ठा यौनजीवन के बारें में वैज्ञानिक तथ्यों के प्रचारप्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. यौनजीवन के बारे में तथ्यपरक लेखों को छापने वाले इस चिट्ठे का मैं सार्वजनिक रूप से अनुमोदन करता हूँ.

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10 Responses to “मेरी पसंद के चिट्ठे 005”

  1. Gyan Dutt Pandey Says:

    इस ब्लॉग को यदा कदा खोला है – पर वहां जाते झेंप सी होती है।

  2. अविनाश वाचस्पति Says:

    मैं तो कभी गया ही नहीं, पर अगर ऐसी बात है तो अवश्य जाऊंगा.

  3. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    मैं ने इसे पढ़ा है। वाकई महत्वपूर्ण चिट्ठा है। लेकिन इसे यदाकदा ही देख पाता हूँ। न जाने क्यों सेक्स के प्रति हमारा समाज सारी बातें परदे के पीछे ही करना चाहता है। जिस से भ्रांतियां बढ़ती हैं। आप इस पर अच्छा प्रकाश ड़ाल सकते हैं।

  4. प्रशान्त प्रियदर्शी Says:

    सच्ची बात कहूं तो मैं इस चिट्ठे पर बहुत पहले एक बार गया था और दोबारा जाने के लिये इसके लिंक को भी ढूंढा था पर मिला नहीं था..

    खैर देखिये इस चिट्ठे की ही तरह आपके इस पोस्ट को भी बहुत कम कमेंट मिले हैं..

    मैं आजकल आपके चिट्ठे पर बहुत कम कमेंट लिख रहा हूं.. दरअसल मेरे पास आजकल समय का बहुत ही ज्यादा अभाव चल रहा है.. पर मैं आपका चिट्ठा रोजाना पढता हूं और आपका चिट्ठा कुछ दिनों से बंद होने से कुछ निराशा भी हुई थी..

  5. arvind mishra Says:

    मैं इसे देखता रहा हूँ …यह उन लोगों को लिए ठीक है जिन्हें सेक्स को लेकर कुछ भ्रम बना रहता है .खासकर किशोरों और युवाओं को …अब हम और ज्ञान जी सरीखे लोग क्यों जाएं वहाँ ?

  6. संजय बेंगाणी Says:

    जब इस चिट्ठे का जन्म हुआ था, तब से इसका समर्थक रहा हूँ.

  7. Sanjeet Tripathi Says:

    कई बार पहुंचा हूं इस ब्लॉग पर!! इसे वाकई एक महत्वपूर्ण चिट्ठा कहा जाना चाहिए

  8. अतुल शर्मा Says:

    इसमें स्तरीय सामग्री दी गई है। बहुत पहले इसके लेख देखे थे। मैं चिट्ठे देखने के लिए नारद का उपयोग करता हूँ और यह वहाँ पर नहीं आता है इसलिए इसे भूल ही गया था।

  9. mamta Says:

    निस्संदेह ये चिटठा बहुत अच्छा है। और लोगों को जागरूक करने मे सहायक भी है।

  10. anitakumar Says:

    इस चिठठे के बारे में कोई जानकारी नहीं थी अब देखुंगी॥बताने के लिए धन्यवाद

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