कल मैं ने हमारे इलाके की अशिक्षा का एक असर अपने लेख स्त्रियों को अपढ रखें, और देखें परिणाम!! में बताया था. इसी से संबंधित एक घटना कर्नाटका के एक गांव में हुई.

परिवार नियोजन का प्रचार अपने चर्मोत्कर्ष पर था. सारे स्वास्थ्य केंद्रों को असंभव लक्ष्य दिये गये थे. खास बात, परिवार नियोजन के उपकरण मुफ्त बांटे जा रहे थे. कुछ कार्यों के लिये तो पैसा भी दिया जा रहा था.

कर्नाटक के एक गांव की स्त्रियों को बुलाकर स्वास्थ्य कर्मचारियों ने मुफ्त कंडोम बांटे. उनको बताया गया कि इसके कारण बच्चों की संख्या कम हो जायगी तो परिवार को आराम ही आराम होगा. अंत में एक स्वास्थ्य कर्मचारी ने एक कंडोम को एक बांस के सिरे पर चढा कर उसके सही उपयोग की विधि भी दिखा दी. स्त्रियां अपने पैकेट को लेके खुशी खुशी वापस लौटीं. स्वास्थ्य कर्मचारी भी बेहद खुश थे कि अभियान सफल रहा.

चार महीनों के बाद उस गांव में गर्भ का एकदम बाढ आ गया. लोगों को समझ में नहीं आया कि यह कैसे हुआ. हर गर्भवती स्त्री कसम खा कर कह रही थी कि उसने वही किया जो उस को बताया गया था. अंत में स्वास्थ्य कर्मचारियों ने उस गांव का दौरा करने का निर्णय लिया.

वहां पहुंचे तो देखा कि हर घर के समक्ष एक बांस गडा हुआ है एवं हरेक के सिरे पर एक कंडोम उपस्थित था!

हजारों सालों से हम परिवार की नायिका — स्त्री — को शिक्षा देने से कतराते रहे है. हम ने जो बोया है उसे हम आज काट रहे हैं. शहर की कुछ स्त्रियां पढलिख गईं तो क्या हुआ, आज भारत का 80% तो गावों में वास करता है.

पिछला लेख: स्त्रियों को अपढ रखें, और देखें परिणाम!!



Comments

8 Comments so far

  1. दिनेशराय द्विवेदी on March 8, 2008 7:04 am

    इस पोस्ट में स्त्रियों की अशिक्षा का तो उल्लेख है किन्तु उन लोगों की अशिक्षा का नहीं जिन्हों ने उन अपढ़ों को सिखाने में सही तरीकों का उपयोग नहीं किया।

  2. उन्मुक्त on March 8, 2008 10:13 am

    मेरे विचार से आपकी पिछली चिट्ठ और यह चिट्ठी का उचित शीर्षक है - ‘अनपढ़ (अविवेकशील) पुरुष’। जो उनके लिये है वे नहीं जानते है और महिलाओं को उसकी शिक्षा के लिये भेजते हैं। इसके लिये महिलाओं को अनपढ़ कहना कितना उचित है :-)

  3. anonymous on March 8, 2008 11:49 am

    Both Mr. Dineshrai and Mr. Unmukt have commented appropriately.

  4. ajaykumarjha on March 8, 2008 12:12 pm

    shashtri jee,
    ghatnaa kaa jikra achha kiyaa aapne aur is ne is baat ko bhee pramaanit kiya ki hamaare yojnaayein kitnee gambheertaa poorvak chalayee jaa rahee hain

  5. rachna on March 8, 2008 1:09 pm

    i fully agree with unmukt and every time you write about woman as uneducated its unfair because you want to highlight a issue about sex education and instead of assigning equal responsibilty on man and woman you always assign total responsibilty on woman . why should man not be called uneducated and backward for not taking suitable precautions and if they do not have enough information on any problem why dont you educate them . i think this article on womans day is in bad taste .its hightime sir you assigned some responsiblity of the society on man as well . the issue of sex education is important but in last 2 blog post you have made it more humrous then educative and its really in bad taste because its not comic to blame woman for ignorance of man

  6. anonymous on March 8, 2008 2:51 pm

    agree with rachna too.

  7. Shastri JC Philip on March 8, 2008 3:55 pm

    सभी टिप्पणीकारों को आभार. रचना सिंह सहित अन्य लोगों ने मेरे निम्न वाक्य के मतलब पर ध्यान नहीं दिया:

    “हजारों सालों से हम परिवार की नायिका — स्त्री — को शिक्षा देने से कतराते रहे है. हम ने जो बोया है उसे हम आज काट रहे हैं.”

    यदि ध्यान दिया होता तो वे समझ जाते कि मैं क्या कहना चाहता हूँ. रचना ने भी निम्न बात न जोडी होती “blame woman for ignorance of man”

    यह लेखन परंपरा वास्तव में पुरुषों के विरुद्ध है, लेकिन जल्द्बाजी में आप इस मर्म को न पहचान न पाये.

  8. Brijmohanshrivastava on April 13, 2008 2:53 pm

    एक चुटकुले को व्यंग्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है इसमें न तो किसी महिला को अशिक्षित दर्शाया है न ही उसका अपमान किया गया है यह एक व्यंग्य है प्रशासनिक मशीनरी पर ग्रामीण अंचलों में पदस्थ कर्मचारियों पर -समाज पर -अशिक्षा पर रुदिवादिता पर काश ऐसे व्यंग कर्मचारी और उच्च पदस्थ शासकीय अमला समझ पाता

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