पैसा नहीं बल्कि देशप्रेम!

RakeshMishra पिछले कई सालों से मैं भारत के एतिहासिक स्थानों का अध्ययन कर रहा हूँ एवं अगली पीढियों के लिये इन धाराशाई होते एतिहासिक स्थानों के उच्च किस्म के छायाचित्र उतार रहा हूँ. इन यात्राओं के दौरान कई महानुभवों से मुलाकात होती है जिनके आगे मेरा मन नतमस्तक हो जाता है.

इस चित्र में दिख रहे श्री राकेश मिश्रा जी (सब के पंडित जी) ग्वालियर किले पर गाईड हैं. शारीरिक रूप से काफी श्रम का काम है. लगभग डेढ घंटे तक लोगों को घुमाकर स्थानपरिचय करवाने पर सौ रुपया मिल जाता है.

तीन साल पहले मैं कुछ मित्रों को ग्वालियर किला दिखाने ले गया तो इनको गाईड के रूप में उनके साथ भेजा, और यह हमारी पहली मुलाकात थी. उसके बात अगले दो बार मैं किले पर छायाचित्र उतारने गया तो भी इन से मुलाकात हुई. जब इन छायाचित्रों को उतारने का लक्ष्य इनको मालूम हुआ तो इन्होंने न केवल मुझे जबर्दस्ती काफी दुर्गम स्थानों पर घुमाया, चित्र खीचने को कहा, बल्कि एक भी पाई पारिश्रमिक लेने से मना कर दिया. इन्होंने इस तरह अपने परिवार की रोजी रोटी कमाने के बदले देशप्रेम के लिये अपनी कमाई निछावर कर दी. मैं ने जबर्दस्ती इनकी जेब में कुछ रुपये डाले तो वे रुआंसे हो गये. गर्व है मुझे ऐसे देशाभिमानी लोगों पर.

इस बार भी उन्होंने अपनी ओर से मुझे काफी जानकरी दी एवं मुझे अपने अनुसंधानों के परिणाम उनको बताने का अवसर मिला. यदि आप कभी ग्वालियर किले पर जाये तो 0975 435 5976 पर संपर्क करके इनकी सेवा जरूर लें.

6 Responses to “पैसा नहीं बल्कि देशप्रेम!”

  1. भुवनेश Says:

    ग्‍वालियर किले पर गये तो पंडितजी से जरूर मुलाकात होगी.

    ग्‍वालियर के बारे में आपके अनुसंधान को जानने की बहुत उत्‍सुकता है.

    अगली बार आपके ग्‍वालियर प्रवास पर चर्चा होगी.

  2. vishal Says:

    theek hai ..inhi se sampark karenge!

  3. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    पंडित राकेश शर्मा जी का परिचय कराने और संपर्क प्रदान करने के लिए धन्यवाद्, अब तो लगता है ग्वालियर हमारा ही है।

  4. समीर लाल Says:

    हम तो आपके साथ चलेंगे अगली बार.

  5. Gyan Dutt Pandey Says:

    अरे वाह, सवेरे सवेरे आपने एक सच्चरित्र से मिलवा दिया। धन्यवाद।

  6. संजय बेंगाणी Says:

    अगर कभी जा पाये तो ध्यान में रहेगा.

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