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	<title>Comments on: असीमित संभावना, असीमित उपेक्षा!!</title>
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	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: Sanjay</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1347/comment-page-1#comment-3611</link>
		<dc:creator>Sanjay</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 Aug 2008 10:44:33 +0000</pubDate>
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		<description>भारत में न तो प्रतिभा की कमी है न उसे दिखाने का माद्दा रखने वालों की. खिलाडि़यों के साथ जो होता है वह सब जानते हैं. अभिनव के पिता सक्षम थे तो उन्‍होंने करोड़ों रुपए खर्च कर उसे घर पर अभ्‍यास की सुविधा उपलब्‍ध कराई. सैकड़ो अन्‍य खिलाड़ी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में गुमनाम ही रह जाते हैं. एक स्‍वर्ण पदक जीता तो उसे सम्‍मानित करने वालों का तांता लग गया लेकिन पहले जब वह अकेला संघर्ष कर रहा था तब कोई उसकी सुध लेने नहीं आया. हमारी सबसे बड़ी समस्‍या यही अवसरवादी प्रवृत्ति है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भारत में न तो प्रतिभा की कमी है न उसे दिखाने का माद्दा रखने वालों की. खिलाडि़यों के साथ जो होता है वह सब जानते हैं. अभिनव के पिता सक्षम थे तो उन्‍होंने करोड़ों रुपए खर्च कर उसे घर पर अभ्‍यास की सुविधा उपलब्‍ध कराई. सैकड़ो अन्‍य खिलाड़ी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में गुमनाम ही रह जाते हैं. एक स्‍वर्ण पदक जीता तो उसे सम्‍मानित करने वालों का तांता लग गया लेकिन पहले जब वह अकेला संघर्ष कर रहा था तब कोई उसकी सुध लेने नहीं आया. हमारी सबसे बड़ी समस्‍या यही अवसरवादी प्रवृत्ति है.</p>
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		<title>By: दिनेशराय द्विवेदी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1347/comment-page-1#comment-3596</link>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 Aug 2008 17:23:25 +0000</pubDate>
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		<description>आजाद हुए हैं हम, 
लेकिन अनुशासित नहीं। 
अर बात में अराजकता 
स्वेच्छाचारिता हमारी आकांक्षा हो गई 
सोच सामाजिक नहीं रह गई 
वैयक्तिक हो गई 
परिणाम हम रोज देख रहे हैं</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आजाद हुए हैं हम,<br />
लेकिन अनुशासित नहीं।<br />
अर बात में अराजकता<br />
स्वेच्छाचारिता हमारी आकांक्षा हो गई<br />
सोच सामाजिक नहीं रह गई<br />
वैयक्तिक हो गई<br />
परिणाम हम रोज देख रहे हैं</p>
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		<title>By: Kaiserdev</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1347/comment-page-1#comment-3594</link>
		<dc:creator>Kaiserdev</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 Aug 2008 11:07:23 +0000</pubDate>
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		<description>&quot; उपेक्षा ही उपेक्षा मिलती है , किसी नए क्षेत्र में कदम रखनवालों को. &quot; ग़लत बात है यह उपेक्षा तो फ़िर भी अच्छी चीज़ है, अगर पुराने क्षेत्र की बात ( क्रिकेट ) की बात करें तो क्या वहाँ मारा-मारी नहीं है !!
क्यों सौरव वन-डे टीम में नहीं है !!

यदि सचिन और सौरव उपेक्षित नहीं होते तो वापसी नहीं कर पाते. 

इस उपेक्षा ने ही नए नाम भारत को दिए हैं, जैसे - कर्नाम्माल्लेश्वरी, राज्य वर्धन, और अब अभिनव बिंद्रा. इसी उपेक्षा ने बहन सायना नेहवाल को यह अवसर उपलब्ध कराया है कि वह आज अपना और देश का नाम रौशन कर पाये, क्योंकि अब तक कोई दूसरा बैडमिन्टन के क्षेत्र में नाम ही नहीं है. 
उपेक्षा कमजोरों को मार हटाती है और पुरुषार्थियों को दूना जोश देती है. धन्य है यह उपेक्षित-प्रसूता  धरती. जो अब न जाने कितने पुरुषार्थियों को जन्म देने जा रही है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>&#8221; उपेक्षा ही उपेक्षा मिलती है , किसी नए क्षेत्र में कदम रखनवालों को. &#8221; ग़लत बात है यह उपेक्षा तो फ़िर भी अच्छी चीज़ है, अगर पुराने क्षेत्र की बात ( क्रिकेट ) की बात करें तो क्या वहाँ मारा-मारी नहीं है !!<br />
क्यों सौरव वन-डे टीम में नहीं है !!</p>
<p>यदि सचिन और सौरव उपेक्षित नहीं होते तो वापसी नहीं कर पाते. </p>
<p>इस उपेक्षा ने ही नए नाम भारत को दिए हैं, जैसे &#8211; कर्नाम्माल्लेश्वरी, राज्य वर्धन, और अब अभिनव बिंद्रा. इसी उपेक्षा ने बहन सायना नेहवाल को यह अवसर उपलब्ध कराया है कि वह आज अपना और देश का नाम रौशन कर पाये, क्योंकि अब तक कोई दूसरा बैडमिन्टन के क्षेत्र में नाम ही नहीं है.<br />
उपेक्षा कमजोरों को मार हटाती है और पुरुषार्थियों को दूना जोश देती है. धन्य है यह उपेक्षित-प्रसूता  धरती. जो अब न जाने कितने पुरुषार्थियों को जन्म देने जा रही है.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: महामंत्री-तस्लीम</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1347/comment-page-1#comment-3593</link>
		<dc:creator>महामंत्री-तस्लीम</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 Aug 2008 09:26:22 +0000</pubDate>
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		<description>चलिए शुरूआत तो हुई। इससे प्रेरणा लेकर जरूर कुछ न कुछ आगे और आएंगे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>चलिए शुरूआत तो हुई। इससे प्रेरणा लेकर जरूर कुछ न कुछ आगे और आएंगे।</p>
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		<title>By: sangita puri</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1347/comment-page-1#comment-3592</link>
		<dc:creator>sangita puri</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 Aug 2008 08:48:13 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1347#comment-3592</guid>
		<description>आज जिसे भी किसी तरह की सफलता मिल रही है , उसके अपने प्रयास की बदौलत। सरकार या समाज से प्रोत्साहन की आप उम्मीद भी नहीं रख सकते हो। सही कहा , उपेक्षा ही उपेक्षा मिलती है , किसी नए क्षेत्र में कदम रखनवालों को।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आज जिसे भी किसी तरह की सफलता मिल रही है , उसके अपने प्रयास की बदौलत। सरकार या समाज से प्रोत्साहन की आप उम्मीद भी नहीं रख सकते हो। सही कहा , उपेक्षा ही उपेक्षा मिलती है , किसी नए क्षेत्र में कदम रखनवालों को।</p>
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