[Bad Service By Centurion Bank of Panjab] कुछ महीने पहले सेंचुरियन बेंक से दो जवान लोग मेरे घर बिन बुलाये पधारे. काफी मिन्नतें की कि एक क्रेडिट कार्ड ले लूँ. आखिर सेंचुरियन बैंक का एक मिरेकिल कार्ड ले लिया. थोडाबहुत पैसा खर्च किया. जब पैसे की सूचना आई तो मैं घर पर नहीं था, एवं तारीख निकल गई. कंपनी ने पुन: सूचना भेजी. समय आने पर मैं ने किसी तरह की शिकायत किये बिना पैसा एवं विलंब शुल्क भेज दिया. लेकिन बैंक ने लगभग 2 महीने या अधिक के बाद उस चेक को बेंक भेजा. इस तरह विलम्ब पर विलम्ब होता गया. अंत में मजे की बात यह है कि पैसा मेरे खाते से निकलने के लगभग 10 दिन बाद मुझे नोटिस मिला कि पैसे का भुगतान नहीं किया गया है अत: लगभग 500 रुपये से अधिक जुर्माना भरूं एवं मूल पैसा भी भेजूं. दोचार फोन करने के बाद उन्होंने मान लिया कि गलती उनकी है, पैसा मिल चुका है, लेकिन सजा मुझे भुगतनी पडेगी. सजा के रूप में उन्होंने मेरा कार्ड रद्ध कर दिया एवं कहा कि अब चाहिये तो लिखित में आवेदन करो. मै ने कह दिया, "जी धन्यवाद. जो बैंक चेक मिलने के ढाई महीने बाद मेरे खाते से पैसा निकालता है, एवं बाद में लेटलतीफी की सजा मुझे देता है, एवं जब उनसे प्रश्न पूछा जाता है तो फोन कनेक्शन काट दिया जाता है, उनका कार्ड नहीं चाहिये". दूसरी ओर मेरे पास सिटिबेंक का कार्ड है. यदि उनको आप चेक भेज दें तो जिस दिन उनके हाथ लगता है उसी दिन उसे पावती के रूप में नोट कर लिया जाता है. अब पैसा 2 दिन में उनको मिले या दो महीने में, वे कभी इसका दोष ग्राहक को नहीं देते. इतना ही नहीं, यदि ग्राहक को पैसा देने में देरी होती है तो वे बहुत ही शालीनता से पूछते हैं कि क्या चेक प्राप्त करने के लिये ग्राहक के घर पर किसी को भिजवा दिया जाये. यदि हां करें तो आदमी आता है, न कहें तो नहीं आता है. इतना ही नहीं यदि बैंक की गलती से ग्राहक द्वारा दिये गये चेक के भुनाने में कोई देरी हो जाती है तो बैंक कभी भी अपनी गलती को ग्राहक पर नहीं थोपता. मैं अनुभव के आधार पर सिटिबेंक के क्रेडिट कार्ड का अनुमोदन करता हूँ एवं सबसे निवेदन करता हूँ कि जब तक सेंचुरियन बैंक अपना रवैया न बदले तब तक उसके चक्कर में न पडें. Bad Service and Lack of " Customer-care" by Centurion Bank of Panjab Credit Card known as Miracle Card
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August 20th, 2008 at 9:10 pm
जब मैं भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलौर में था तो सिटीबैंक वालों ने स्टूडेंट्स को क्रेडिट कार्ड दिये थे । हमारे जैसे गरीब स्टूडेंट्स पर ५० हजार रूपये का भरोसा किया था । साथ ही कालेज में एक बक्सा लगा दिया था जिसमें अपने भुगतान का चेक डाल दो ।
जब मैं अमेरिका के विद्यालयों में पी.एच.डी. के लिये आवेदन कर रहा था तो बडी सुविधा हुयी थी । भारत में अभी अमेरिकन एक्सप्रेस भी आ गया है उनकी सेवा भी बहुत अच्छी है ।
August 20th, 2008 at 9:53 pm
सर अगर मेरी सलाह माने तो सीधे नेट बैंकिंग से अपने क्रेडिट कार्ड में पैसे डालें.. इससे आप पर कभी कोई इलजाम नहीं लगा सकता है की आपने फलाने तारीख के बाद पैसा दिया है या पहले क्यों नहीं दिया.. आपके पास नेट बैंकिंग का सबूत होता है उस दिन के ट्रांजेक्सन का..
कम से कम मेरा अनुभव तो यही कहता है.. और मुझे अभी तक कभी धोखा नहीं हुआ है क्रेडिट कार्ड में.. मेरे घर का ज्यादातर सामान जिस हद तक संभव होता है उस हद तक क्रेडिट कार्ड से ही लेता हूं..
August 20th, 2008 at 9:55 pm
शास्त्री जी, सही बात है कि आज तो ग्राहक किंग है……उसे जहां से भी अच्छी सर्विस मिलेगी, वह उधर का ही रुख करेगा। वरना आज कल हर आदमी के पास इतने पचड़े हैं कि और पचड़ों में फंसने की कोई गुंजाईश ही किस के पास है !!
आप ने अपने अनुभव इस पोस्ट के रूप में जग-जाहिर कर के बहुत भलाई का काम किया है।
बहुत बहुत धन्यवाद।
August 20th, 2008 at 9:56 pm
देखिए जहॉं तक साख का प्रश्न है, रिजर्व बैंक के साख उत्पादों की बराबरी नहीं की जा सकती- इन्हें करेंसी नोट के रूप में जाना जाता है तथा आमतौर पर इनके भुगतान में कोई कभी कोई दिक्कत नहीं होती
)
अपन अभी पिछड़े हुए हैं इसलिए अपना मन तो राष्ट्रीकृत बैंको पर ही आता है। बहुत देर बाद पहला क्रेडिट कार्ड SBI से लिया अब तक तो ठीक ही काम कर रहा है। कोई फाइन नहीं चेपा।
August 20th, 2008 at 9:58 pm
धन्यवाद जानकारी के लिए. इस तरह खराब सेवाओं को एक्सपोज किया जाता रहेगा तभी ये सुधरेंगे. आईसीआईसीआई बैंक वालों ने यहाँ रतलाम में हाउसिंग लोन का ब्याज दर बढ़ने पर बढ़ी दर की किश्त वसूली वालों को बिना किसी पूर्व सूचना के भेज दिया था. नतीजतन मेरे मित्र ने दूसरे दिन ही अपना ऋण खाता एसबीआई में टेकओवर करवा लिया था.
August 20th, 2008 at 10:07 pm
इस क्षेत्र में किसी का अनुमोदन न करें-जो जब जिसके चुंगल मेँ आ जाये, बस्स!! वो ही समझ पाता है दर्द.
August 20th, 2008 at 10:31 pm
@प्रशांत
आपने कहा “सर अगर मेरी सलाह माने तो सीधे नेट बैंकिंग से अपने क्रेडिट कार्ड में पैसे डालें.. इससे आप पर कभी कोई इलजाम नहीं लगा सकता है की आपने फलाने तारीख के बाद पैसा दिया है या पहले क्यों नहीं दिया.. आपके पास नेट बैंकिंग का सबूत होता है उस दिन के ट्रांजेक्सन का..”
मैं ने जो भुगतान किया है उसका नेट बेंकिग का सबूत है. कंपनी ने भी माना है कि चेक उनको समय पर मिल गया था. लेकिन इसके बावजूद उनकी जिद है कि सजा मुझे भुगतनी होगी.
August 20th, 2008 at 11:07 pm
“मैं ने जो भुगतान किया है उसका नेट बेंकिग का सबूत है. कंपनी ने भी माना है कि चेक उनको समय पर मिल गया था. लेकिन इसके बावजूद उनकी जिद है कि सजा मुझे भुगतनी होगी.”
tab to kaha ja sakta hai ki yah sarasar manmani hai.
August 20th, 2008 at 11:12 pm
जितनी सुविधाएं बढ़ेंगी उतनी ही पेचींदगियाँ भी बढेंगी। अनुभव इनसे पार पाना सिखा ही देता है। अच्छा विषय…।
August 20th, 2008 at 11:12 pm
देश में सरकार ने उपभोक्ता अदालतें खोली हैं। जरा एक बार आजमा कर तो देखें। कैसे ये सेंचुरियन बैंक वाले आप के चक्कर लगाते हैं?
August 21st, 2008 at 12:32 am
फिर तो यह सीमा की पराकाष्ठा को भी पार कर गया है.. मैं तो कहता हूं की अगर आप कंज्यूमर कोर्ट में जा सकते हैं तो चले जाईये.. आपके पास सबूत भी है..
मेरे एक मित्र ने एच.एस.बी.सी. बैंक से कुछ पंगा होने पर बस कोर्ट की धमकी ही दी थी कि सभी कुछ ठीक हो चला था..
August 21st, 2008 at 8:18 pm
सारथी जी,
सिटी बैंक का कार्ड मैने इस्तेमाल किया था.. ३ वर्ष पहले.. अनुभव बहुत खराब रहा… लगातार ११ महीनों तक सिटी बैंक मे मेरा चैक due date के बाद लगाया और हर महीने late फ़ीस चार्ज की और हर बार उसे रिवर्स भी किया.. आखिर में तंग आकर मैने उसे bye-bye कर दिया….
बचने के तरीकों में online transfer best है, इसके अलावा due date के काफी पहने payment का चेक दे और due date तक देख ले कि आपके खाते से पैसा निकल चुका है..
August 31st, 2008 at 4:12 am
क्रेडिट कार्ड से जुड़ा बुरा अनुभव तो कोई नहीं है क्योंकि कार्ड ही नहीं है पर बैंक से जुड़े कई बुरे अनुभव हैं… आइसीआइसीआइ बैंक से हाल ही में एक डयरेक्ट भुगतान कराने के लिए गया था. मैने रकम राउंड फिगर में दी और भुगतान आदेश पर वह रकम लिखी जो भेजी जानी थी… काउंटर पर बैठी बालिका जो उस वक्त कंधे पर मोबाइल दबाकर बैठी थी, उसने बात करते वक्त पूरा ध्यान नहीं रखा और पूरी रकम ट्रांसफर कर दी. जब मैने बचे पैसे वापस मांगे तो वह बिफर गई. बैंक के अन्य कर्मचारी भी मुझसे हुज्जत करने लगे. मुझे पैसे वापस नहीं दिए गए. अगले दिन मैं अपने एक मित्र पत्रकार को लेकर साथ गया, वो एक टीवी चैनल का रिपोर्टर है. कैमरा स्टार्ट कर मैनेजर से पिछले दिन के वाक्ये की कैफियत तलब की तो फौरन हाथ जोड़कर माफी मांगने लगा… अपनी जेब से पैसे निकाल कर देने की पेशकश की और मामले को रफा दफा करने की प्रार्थना करने लगा. …
बहरहाल इतना ही कहूंगा कि कम कोई भी नहीं है… अंत में मार तो उपभोक्ता पर ही पड़ती है. दिनेश जी का सुझाव सही है. मैने बैंक के उच्च प्रबंधन से शिकायत की थी… जांच हो रही है. देखता हूं क्या परिणाम आएगा.
September 21st, 2008 at 9:12 pm
इसे भी पडे
http://someachar.yatishjain.com/?cat=3
May 11th, 2009 at 3:38 pm
thank u sir
May 11th, 2009 at 3:39 pm
badhiya knowledge