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	<title>Comments on: यौनिक गंदगी: नया क्या है ?</title>
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	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: bhuvnesh</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1360/comment-page-1#comment-3664</link>
		<dc:creator>bhuvnesh</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Aug 2008 14:09:27 +0000</pubDate>
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		<description>अभी हाल ही में रक्षाबंधन मनाया....अक्‍सर मजाक में या एसएमएस पर कुछ लड़कों से सुनने को मिलता है कि रक्षाबंधन के समय लड़कियों से बचकर रहना कहीं भाई ना बना लें.....जबकि सारे के सारे अनगिनत गर्लफ्रेंड रखने में बड़े गर्व का अनुभव करते हैं.

वाकई बहुत कुछ बदल रहा है....अब बात यहां तक आ पहुंची है कि लोग अपनी कजिन तक के बारे में ऐसे विचार रखते हैं....हालांकि मेरा मानना है कि ऐसी विकृतियां पहले से समाज में मौजूद रही होंगी...हालांकि अब वे ज्‍यादा लोगों में फैल रही हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अभी हाल ही में रक्षाबंधन मनाया&#8230;.अक्‍सर मजाक में या एसएमएस पर कुछ लड़कों से सुनने को मिलता है कि रक्षाबंधन के समय लड़कियों से बचकर रहना कहीं भाई ना बना लें&#8230;..जबकि सारे के सारे अनगिनत गर्लफ्रेंड रखने में बड़े गर्व का अनुभव करते हैं.</p>
<p>वाकई बहुत कुछ बदल रहा है&#8230;.अब बात यहां तक आ पहुंची है कि लोग अपनी कजिन तक के बारे में ऐसे विचार रखते हैं&#8230;.हालांकि मेरा मानना है कि ऐसी विकृतियां पहले से समाज में मौजूद रही होंगी&#8230;हालांकि अब वे ज्‍यादा लोगों में फैल रही हैं&#8230;</p>
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		<title>By: रंजन</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1360/comment-page-1#comment-3663</link>
		<dc:creator>रंजन</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Aug 2008 06:24:36 +0000</pubDate>
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		<description>वाकई ये बहुत चिन्ताजनक है, ये साहित्य एक तरीका बताते है.. अगर ये एसे ही चलता रहा तो हो सकता है भविष्य में लोग इसे  ही सत्य मानने लगे..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वाकई ये बहुत चिन्ताजनक है, ये साहित्य एक तरीका बताते है.. अगर ये एसे ही चलता रहा तो हो सकता है भविष्य में लोग इसे  ही सत्य मानने लगे..</p>
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		<title>By: अनिल रघुराज</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1360/comment-page-1#comment-3662</link>
		<dc:creator>अनिल रघुराज</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Aug 2008 05:21:03 +0000</pubDate>
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		<description>सारथी जी, बेहद संवेदनशील और ज़रूरी मसला उठाया है आपने। शुक्रिया। इसी तरह हम जैसे आम लोगों के दिमाग में छाए अंधेरे को दूर करते रहेंगे, यही अपेक्षा है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सारथी जी, बेहद संवेदनशील और ज़रूरी मसला उठाया है आपने। शुक्रिया। इसी तरह हम जैसे आम लोगों के दिमाग में छाए अंधेरे को दूर करते रहेंगे, यही अपेक्षा है।</p>
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		<title>By: SATYAJEETPRAKASH</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1360/comment-page-1#comment-3661</link>
		<dc:creator>SATYAJEETPRAKASH</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Aug 2008 03:00:53 +0000</pubDate>
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		<description>सच शास्त्रीजी,
चिंता की बात है. अभी-अभी बातचीत के दौरान मेरे मुंह से निकाल गया कि समाज का एक बड़ा तबका समाज से बौद्धिकता को खत्म कर देना चाहता है ताकि वह ज्यादा से ज्यादा भाव में बिक सके. बौद्धिकता के रहते उनका बिक पाना कदापि संभव नहीं है, इसलिए वे इसे खत्म कर देना चाहते हैं. सिनेमा, खबरिया चैनलों, मुद्रण माध्यमों, को लीजिए, अपने आपको ज्यादा से ज्यादा भाव में बेचने के लिए ये लोग क्या-क्या नहीं कर रहे हैं, सबका लक्ष्य इंसान के अंदर से उसकी बौद्धिकता को समाप्त करना है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सच शास्त्रीजी,<br />
चिंता की बात है. अभी-अभी बातचीत के दौरान मेरे मुंह से निकाल गया कि समाज का एक बड़ा तबका समाज से बौद्धिकता को खत्म कर देना चाहता है ताकि वह ज्यादा से ज्यादा भाव में बिक सके. बौद्धिकता के रहते उनका बिक पाना कदापि संभव नहीं है, इसलिए वे इसे खत्म कर देना चाहते हैं. सिनेमा, खबरिया चैनलों, मुद्रण माध्यमों, को लीजिए, अपने आपको ज्यादा से ज्यादा भाव में बेचने के लिए ये लोग क्या-क्या नहीं कर रहे हैं, सबका लक्ष्य इंसान के अंदर से उसकी बौद्धिकता को समाप्त करना है.</p>
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