आपकी समस्यायें 002

कल मैं ने जिस समस्या का उत्तर दिया था उसे एक टिप्पणीकार मित्र ने अपने प्रश्न द्वारा एवं अन्य कई मित्रों ने अपनी विस्तृत  टिप्पणियों द्वारा बहुत अधिक संपुष्ट कर दिया है. उन सब को मेरा आभार.

उस प्रश्न के एक और पहलू पर एक मां से आज मुझे एक पत्र मिला है जो इस प्रकार है:

प्रश्न: कल आपने उस परिवार को परामर्श दिया था  जहा केबल टीवी के कारण उनके बच्चे की पढाई बिगड रही है. लेकिन मेरी समस्या इसके एकदम विपरीत है. हमारा परिवार संयुक्त है एवं काफी सारे लोग एकसाथ रहते हैं. हरेक के अलग शौक हैं, एवं दो दो टीवी एवं एक म्यूजिक सिस्टम है. सब एक साथ चलते हैं, एवं घर में काफी शोर रहता है. लेकिन मेरा बडा बेटा इन बातों में कोई खास रुचि नहीं लेता है.

वह एक डाक्टर बनना चाहता है. वह सबके साथ बैठता है, सबसे हिलमिल कर रहता  है, लेकिन अधिकतर समय पढने के लिये अपने कमरे में बंद हो जाता है. कहीं एक समाजविरोधी प्राणी तो नहीं बन जा रहा?

उत्तर: आप भाग्यवती हैं देवी कि आपका बच्चा एक  लक्ष्य निश्चित कर चुका है एवं वह इतना अनुशासित है कि एक संयुक्त परिवार का शोरशराबे से भरे माहौल में भी वह अपना बिना किसी शिकायत के अपना अनुशासन बनाये हुए है. कितने लोगों को ऐसे बच्चे मिलते हैं.

आपने खुद लिखा है कि वह सबके साथ बैठता है एवं सबसे हिलिमिल कर रहता है. अत: उसमे समाजविरोध का कोई बीज नहीं पनप रहा है बल्कि आधुनिक समाज में व्यक्ति के ध्यान को बंटाने वाली बातों पर उसने काबू कर लिया है. आप किसी तरह की फिकर न करे.

परामर्श के लिये कृपया अपने प्रश्न बिना नाम एवं परिचय के इस चिट्ठे के दाईं ओर दिये गये फार्म द्वारा सारथी को भेजें!!

4 Responses to “आपकी समस्यायें 002”

  1. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    मेरा मानना है कि संयुक्त परिवार में बच्चा अनुशासन शीघ्रता से सीख लेता है। बशर्ते कि उपेक्षा का शिकार न हो।

  2. Ranjan Says:

    सही है.. शास्त्री जी..

  3. Sanjay Says:

    ये बढि़या है शास्‍त्री जी. अच्‍छा लगा.

  4. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी Says:

    होनहार को पढ़ने दीजिए। बड़ा होकर अच्छा बनेगा। शुभकामनाएं।

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