ऐ मां तेरी सूरत से अलग …

Deivis बचपन की याद अभी भी है जब “ऐ मां तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी” हर किसी के जुबां पर थी. मुझे लगता है कि इन पंक्तियों को हम ने बहुत जल्दी भूला दिया.

माँ चिट्ठा मानवजीवन में मां के महत्व एवं योगदान को याद करने के लिये चालू किया गया है. इसमें मातृत्व के हर पहलू को शब्दों, चित्रों, एवं हर तरह के माध्यम की सहायता से उजागर किया जायगा.

कृ्पया दो क्षण आज मां चिट्ठे पर बिताने का कष्ट करें!!

(शीर्षक पर क्लिक करने पर टिप्पणी-पट आपके समक्ष आ जायगा)

Picture: Deivis  ArticlePedia | Indian Coins | Sarathi

11 Responses to “ऐ मां तेरी सूरत से अलग …”

  1. sangita puri Says:

    मां पर पढ़ना अच्छा लग रहा है। मुझे मेरे ईमेल में इस साइट पर कुछ लिखने के लिए आमंत्रण मिला है। शीघ्र ही कुछ लिखने की कोशिश करती हूं।

  2. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    सारथी का नया लुक अच्छा लगा।

  3. G Vishwanath Says:

    मेरी माँ दो साल पहले चल बसी थी।
    उनकी याद में कुछ महीने पहले अनिता कुमार के ब्लॉग पर एक पोस्ट लिखा था।
    अंग्रेज़ी में लिखा था।
    anitakumar-chirpings.blogspot.com पर पढ़ा जा सकता है।

  4. rachna Says:

    if its possible then please try to make a post on virgin mother Rev Mother Mary .

  5. mamta Says:

    बहुत ही अच्छी शुरुआत।

    आपका ब्लॉग भी कुछ नया-नया सा लग रहा है।

  6. अजित वडनेरकर Says:

    शुक्रिया शास्त्रीजी, वहां अकसर फेरा लग रहा है। अच्छी बातें पढ़ने को मिल रही हैं।
    आपके ब्लाग की सज्जा और नया रंग रूप लुभावना है।
    बहुत दिनों से इच्छा थी कि कहूं , सारथी रंगरूप बदलिये, सो बिनकहे ही मुराद पूरी हो गई।

  7. ज्ञानदत्त पाण्डेय Says:

    ओह, कोई पिताओं का ब्लॉग भी बनाये!

  8. सतीश सक्सेना Says:

    बहुत खूबसूरत, सारथी का नया रूप सुखकर है !

  9. समीर लाल 'उड़न तश्तरी वाले' Says:

    आभार लिंक के लिए.

  10. नीरज सिंह Says:

    आपका आभारी हूँ की आपने मेरे ब्लॉग पे आके मेरा उत्साह वर्धन किया. मैं अभी पहली बार आपका ब्लॉग पढ़ रहा हूँ, क्योंकि मैं नया हूँ. मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है कि जिस तरह से आपने इतने बेहतरीन संग्रह को अछे तरीके से संवारा hai.

  11. priti Says:

    meri maa per kabhi maine dhyan hi nahi dia. per jab mera beta padne mujhse duur bahar gaya hai, meri to rulai he band nahi ho rahi. kuch bhi bhawukta bhare lamhei meri antaria jala detai hai . aab samjhi hu maa ka pyar

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