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	<title>Comments on: लुप्त होती सिक्का-संपदा !</title>
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	<link>http://sarathi.info/archives/1555</link>
	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: पाठकों से एक विशेष अनुरोध ! &#124; सारथी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1555/comment-page-1#comment-4354</link>
		<dc:creator>पाठकों से एक विशेष अनुरोध ! &#124; सारथी</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Nov 2008 05:23:35 +0000</pubDate>
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		<description>[...] लुप्त होती सिक्का-संपदा !  [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] लुप्त होती सिक्का-संपदा !  [...]</p>
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		<title>By: पुनीत ओमर</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1555/comment-page-1#comment-4341</link>
		<dc:creator>पुनीत ओमर</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Oct 2008 12:36:31 +0000</pubDate>
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		<description>वैसे मैं सिक्कों के बारे में कोई विशेष तकनीकी जानकारी नहीं रखता लेकिन पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक में अशोक से लेकर विक्रमादित्य और बाबर से लेकर कंपनी शासन तक के सिक्के कौडियों के भावः बिकते हुए देखे हैं वो भी सड़क किनारे जमीन पर. तकनीकी के जानकारों से पूछना चाहूँगा की इनकी विश्वसनीयता जांचने का सबसे आसान तरीका क्या है क्योंकि कार्बन डेटिंग आदि कोई सड़क पर खड़ा होकर तो कर नही सकता.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वैसे मैं सिक्कों के बारे में कोई विशेष तकनीकी जानकारी नहीं रखता लेकिन पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक में अशोक से लेकर विक्रमादित्य और बाबर से लेकर कंपनी शासन तक के सिक्के कौडियों के भावः बिकते हुए देखे हैं वो भी सड़क किनारे जमीन पर. तकनीकी के जानकारों से पूछना चाहूँगा की इनकी विश्वसनीयता जांचने का सबसे आसान तरीका क्या है क्योंकि कार्बन डेटिंग आदि कोई सड़क पर खड़ा होकर तो कर नही सकता.</p>
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		<title>By: Zakir Ali 'Rajneesh'</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1555/comment-page-1#comment-4313</link>
		<dc:creator>Zakir Ali 'Rajneesh'</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Oct 2008 07:32:55 +0000</pubDate>
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		<description>वाकई सिक्कों के प्रति लोगों की दीवानगी अब समाप्त हो रही है।
दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वाकई सिक्कों के प्रति लोगों की दीवानगी अब समाप्त हो रही है।<br />
दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।</p>
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		<title>By: Brijmohanshrivastava</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1555/comment-page-1#comment-4299</link>
		<dc:creator>Brijmohanshrivastava</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Oct 2008 07:14:11 +0000</pubDate>
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		<description>जोर्ज पंचम धुल कर जोर्ज सिक्स्थ नहीं बना है और न कोई बना सकता है /जोर्ज आख़िर जोर्ज होते  थे-उन पर धुलाई का असर बेमानी था /खैर / आप बहुत महनत करते हैं और नई नई जानकारियां देते हैं / सिक्के देख कर कुछ पुरानी यादें आई /जोर्ज सिक्स्थ सबसे आख़िरी सिक्का था और इसमें चांदी भी कम थी /इसके पूर्ब के सब सिक्के जोर्ज पंचम ,विक्टोरिया ,मुंडा सबमें  पूरी एक तोला चांदी होती थी  /अठन्नी चवन्नी भी थी और एक पैसा ताम्बे का जिसके बीच में छेड़ होता था .इकन्नी ,दुअन्नी / हाँ मैंने मोहरें और अशरफिया जरूर नहीं देखी है /नीचे जो सिक्के दिए है उनमें एक का तो बताया की अहिल्या बाई द्वारा चलाया वाकी में उर्दू अथवा अरबी अथवा फारसी में लिखा है न जाने कब के होंगे किसी जानकार से पढ़वायें की लिखा क्या है /आप देश की प्राचीन धरोहर सहेज रहे है और जानकारी भी दे रहे है आप बहुत बधाई के पात्र हैं</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जोर्ज पंचम धुल कर जोर्ज सिक्स्थ नहीं बना है और न कोई बना सकता है /जोर्ज आख़िर जोर्ज होते  थे-उन पर धुलाई का असर बेमानी था /खैर / आप बहुत महनत करते हैं और नई नई जानकारियां देते हैं / सिक्के देख कर कुछ पुरानी यादें आई /जोर्ज सिक्स्थ सबसे आख़िरी सिक्का था और इसमें चांदी भी कम थी /इसके पूर्ब के सब सिक्के जोर्ज पंचम ,विक्टोरिया ,मुंडा सबमें  पूरी एक तोला चांदी होती थी  /अठन्नी चवन्नी भी थी और एक पैसा ताम्बे का जिसके बीच में छेड़ होता था .इकन्नी ,दुअन्नी / हाँ मैंने मोहरें और अशरफिया जरूर नहीं देखी है /नीचे जो सिक्के दिए है उनमें एक का तो बताया की अहिल्या बाई द्वारा चलाया वाकी में उर्दू अथवा अरबी अथवा फारसी में लिखा है न जाने कब के होंगे किसी जानकार से पढ़वायें की लिखा क्या है /आप देश की प्राचीन धरोहर सहेज रहे है और जानकारी भी दे रहे है आप बहुत बधाई के पात्र हैं</p>
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	<item>
		<title>By: G Vishwanath</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1555/comment-page-1#comment-4298</link>
		<dc:creator>G Vishwanath</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Oct 2008 05:14:35 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1555#comment-4298</guid>
		<description>पा.ना. सुब्रमणियनजी की टिप्प्णी पढ़ने के बाद, मैंने भी चित्र को ध्यान से देखा।
सिक्के अव्श्य अलग हैं। न केवल George V George VI बन गये हैं पर चेहरा भी अलग है। अक्षरों का size भिन्न है।
सुब्रमणियनजी की अवलोकन शक्ति की दाद देता हूँ!
शास्त्रीजी, आपकी मज़बूरी समझ सकता हूँ।
चमकाने से पहले और चमकाने के बाद वही सिक्के को कैसे बगल में रेखेंगे?
ज़ाहिर है दो अलग चित्र होनी चाहिए।
चित्र ने अवश्य यह बता दिया के पुराने सिक्कों को किस खूबी से चमकाया जा सकत है पर यदि एक ही सिक्के का चमकाने से पहले का चित्र और फ़िर चमकाने के बाद का चित्र पेश किया होता तो और अच्छा होता।
कृपया इसे nit picking न समझें।
मेरे पास भी कुछ पुराने सिक्के थे जो मुझे विरासत में मिली थी। किसी अलमारी में किसी डिब्बे के अन्दर सालों से बन्द पडे हैं। इनके बारे में मैं कुछ जानता नहीं हूँ। समय आने पर अपने बेटे/बेटी को सौंपने का इरादा है। आशा करता हूँ की अगली पीढी भी इसे संभाल कर रेखेगी। 
इस रोचक लेख के लिए धन्यवाद और दिवाली के अवसर पर आपको और आपके सभी पाठकों को मेरी शुभकामनाएं</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पा.ना. सुब्रमणियनजी की टिप्प्णी पढ़ने के बाद, मैंने भी चित्र को ध्यान से देखा।<br />
सिक्के अव्श्य अलग हैं। न केवल George V George VI बन गये हैं पर चेहरा भी अलग है। अक्षरों का size भिन्न है।<br />
सुब्रमणियनजी की अवलोकन शक्ति की दाद देता हूँ!<br />
शास्त्रीजी, आपकी मज़बूरी समझ सकता हूँ।<br />
चमकाने से पहले और चमकाने के बाद वही सिक्के को कैसे बगल में रेखेंगे?<br />
ज़ाहिर है दो अलग चित्र होनी चाहिए।<br />
चित्र ने अवश्य यह बता दिया के पुराने सिक्कों को किस खूबी से चमकाया जा सकत है पर यदि एक ही सिक्के का चमकाने से पहले का चित्र और फ़िर चमकाने के बाद का चित्र पेश किया होता तो और अच्छा होता।<br />
कृपया इसे nit picking न समझें।<br />
मेरे पास भी कुछ पुराने सिक्के थे जो मुझे विरासत में मिली थी। किसी अलमारी में किसी डिब्बे के अन्दर सालों से बन्द पडे हैं। इनके बारे में मैं कुछ जानता नहीं हूँ। समय आने पर अपने बेटे/बेटी को सौंपने का इरादा है। आशा करता हूँ की अगली पीढी भी इसे संभाल कर रेखेगी।<br />
इस रोचक लेख के लिए धन्यवाद और दिवाली के अवसर पर आपको और आपके सभी पाठकों को मेरी शुभकामनाएं</p>
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	<item>
		<title>By: सिद्धार्थ शंकरत्रिपाठी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1555/comment-page-1#comment-4297</link>
		<dc:creator>सिद्धार्थ शंकरत्रिपाठी</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Oct 2008 01:11:14 +0000</pubDate>
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		<description>~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
&lt;a&gt;दीपावली की मंगल शुभकामनाएं।&lt;/a&gt;
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~<br />
<a>दीपावली की मंगल शुभकामनाएं।</a><br />
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: दिनेशराय द्विवेदी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1555/comment-page-1#comment-4296</link>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Oct 2008 16:42:36 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1555#comment-4296</guid>
		<description>सिक्कों का संग्रह इतिहास बताएगा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सिक्कों का संग्रह इतिहास बताएगा।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: सिद्धार्थ शंकरत्रिपाठी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1555/comment-page-1#comment-4295</link>
		<dc:creator>सिद्धार्थ शंकरत्रिपाठी</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Oct 2008 15:02:24 +0000</pubDate>
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		<description>आँखें खोलने वाला आलेख :(</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आँखें खोलने वाला आलेख <img src='http://sarathi.info/wp-includes/images/smilies/icon_sad.gif' alt=':(' class='wp-smiley' /> </p>
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		<title>By: डॉ.रूपेश श्रीवास्तव</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1555/comment-page-1#comment-4294</link>
		<dc:creator>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Oct 2008 14:41:30 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1555#comment-4294</guid>
		<description>आदरणीय शास्त्री जी,आज पहली बार सौभाग्य से आप तक आ पाया ,सच में आज किस्मत अच्छी है जान पड़ता है। लेख बहुत सुन्दर जानकारी देने वाला है। व्यक्तिगत आभार....। आपकी पुस्तक संग्रहणीय होगी मेरे निजी पुस्तकालय के लिये। साधुवाद स्वीकारें।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आदरणीय शास्त्री जी,आज पहली बार सौभाग्य से आप तक आ पाया ,सच में आज किस्मत अच्छी है जान पड़ता है। लेख बहुत सुन्दर जानकारी देने वाला है। व्यक्तिगत आभार&#8230;.। आपकी पुस्तक संग्रहणीय होगी मेरे निजी पुस्तकालय के लिये। साधुवाद स्वीकारें।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: समीर लाल</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1555/comment-page-1#comment-4293</link>
		<dc:creator>समीर लाल</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Oct 2008 14:24:15 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1555#comment-4293</guid>
		<description>रोचक आलेख एवं जानकारी.

आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.


समीर लाल</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>रोचक आलेख एवं जानकारी.</p>
<p>आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.</p>
<p>समीर लाल</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Ranjan</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1555/comment-page-1#comment-4292</link>
		<dc:creator>Ranjan</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Oct 2008 14:18:46 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1555#comment-4292</guid>
		<description>मै भी सिक्कों में ्रुची रखता हूँ.. देश विदेश के सिक्के इक्कठे करता हूँ... करीब २-३ साल पहने पुराने सिक्के भी इक्कठा करना आरंभ किया.. अभी कुल २००० सिक्के तो होगें..

हाँ पुराने सिक्कों में नकली बहुत होते है.. और कई विशेषग्य सिक्कों की सफाई करना भी सही नहीं मानते...

आपकी पुस्तक का इन्तजार रहेगा..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मै भी सिक्कों में ्रुची रखता हूँ.. देश विदेश के सिक्के इक्कठे करता हूँ&#8230; करीब २-३ साल पहने पुराने सिक्के भी इक्कठा करना आरंभ किया.. अभी कुल २००० सिक्के तो होगें..</p>
<p>हाँ पुराने सिक्कों में नकली बहुत होते है.. और कई विशेषग्य सिक्कों की सफाई करना भी सही नहीं मानते&#8230;</p>
<p>आपकी पुस्तक का इन्तजार रहेगा..</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: पा.ना. सुब्रमणियन</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1555/comment-page-1#comment-4291</link>
		<dc:creator>पा.ना. सुब्रमणियन</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Oct 2008 13:18:13 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1555#comment-4291</guid>
		<description>आज दिनभर से बिजली गोल रही इस लिए थोड़ी नोक झोंक ही सही.
आपके वैज्ञानिक सफाई की दाद देनी पड़ेगी. जॉर्ज ५ धुल कर जॉर्ज ६ बन गया.
अब मैं गंभीर हो चला हूँ. एकदम सही बात लिखी. सिक्के प्राचीन इतिहास के स्त्रोत हैं इनमे
हमारे पुरा वैभव से संबंधित कई अनछुए पहलुओं को उजागर करने की क्षमता निहित है.
आपकी पहल प्रशंसनीय है. आभार.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आज दिनभर से बिजली गोल रही इस लिए थोड़ी नोक झोंक ही सही.<br />
आपके वैज्ञानिक सफाई की दाद देनी पड़ेगी. जॉर्ज ५ धुल कर जॉर्ज ६ बन गया.<br />
अब मैं गंभीर हो चला हूँ. एकदम सही बात लिखी. सिक्के प्राचीन इतिहास के स्त्रोत हैं इनमे<br />
हमारे पुरा वैभव से संबंधित कई अनछुए पहलुओं को उजागर करने की क्षमता निहित है.<br />
आपकी पहल प्रशंसनीय है. आभार.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Ratan singh</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1555/comment-page-1#comment-4289</link>
		<dc:creator>Ratan singh</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Oct 2008 09:20:27 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1555#comment-4289</guid>
		<description>रोचक जानकारी</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>रोचक जानकारी</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Ashish Khandelwal</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1555/comment-page-1#comment-4288</link>
		<dc:creator>Ashish Khandelwal</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Oct 2008 07:49:20 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1555#comment-4288</guid>
		<description>रोचक आलेख.. आपकी पुस्तक का इंतजार है...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>रोचक आलेख.. आपकी पुस्तक का इंतजार है&#8230;</p>
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