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	<title>Comments on: पाठकों से एक विशेष अनुरोध !</title>
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	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: अजित वडनेरकर</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1577/comment-page-1#comment-4361</link>
		<dc:creator>अजित वडनेरकर</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Nov 2008 07:57:23 +0000</pubDate>
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		<description>शास्त्रीजी की पहल प्रशंसनीय है। अनुनाद जी के सुझाव पर सबको अमल करना चाहिए...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्रीजी की पहल प्रशंसनीय है। अनुनाद जी के सुझाव पर सबको अमल करना चाहिए&#8230;</p>
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		<title>By: Dr.Arvind Mishra</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1577/comment-page-1#comment-4360</link>
		<dc:creator>Dr.Arvind Mishra</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Nov 2008 04:39:11 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे की और आपने ध्यान दिलाया है -लोगों के अपने सांस्कृतिक धरोहरों के इस आयाम की और भी अंजर रखनी चाहिए .</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे की और आपने ध्यान दिलाया है -लोगों के अपने सांस्कृतिक धरोहरों के इस आयाम की और भी अंजर रखनी चाहिए .</p>
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		<title>By: प्रवीण त्रिवेदी-प्राइमरी का मास्टर</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1577/comment-page-1#comment-4358</link>
		<dc:creator>प्रवीण त्रिवेदी-प्राइमरी का मास्टर</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 02 Nov 2008 11:03:04 +0000</pubDate>
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		<description>सार्थक व गंभीर पहल !

पूरा समर्थन .</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सार्थक व गंभीर पहल !</p>
<p>पूरा समर्थन .</p>
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	<item>
		<title>By: P.N. Subramanian</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1577/comment-page-1#comment-4357</link>
		<dc:creator>P.N. Subramanian</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Nov 2008 17:14:19 +0000</pubDate>
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		<description>अनुनाद सिंह जी का  &quot;दस्तावेजीकरण&quot;  वाला सुझाव सराहनीय है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अनुनाद सिंह जी का  &#8220;दस्तावेजीकरण&#8221;  वाला सुझाव सराहनीय है.</p>
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		<title>By: Zakir Ali 'Rajneesh'</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1577/comment-page-1#comment-4356</link>
		<dc:creator>Zakir Ali 'Rajneesh'</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Nov 2008 07:22:41 +0000</pubDate>
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		<description>आपके अनुरोध उपयोगी हैं। काश, यह उन लोगों तक भी पहुंचते हैं, जो इन सब चीजों की कालाबाजारी करते हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपके अनुरोध उपयोगी हैं। काश, यह उन लोगों तक भी पहुंचते हैं, जो इन सब चीजों की कालाबाजारी करते हैं।</p>
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		<title>By: Anunad Singh</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1577/comment-page-1#comment-4353</link>
		<dc:creator>Anunad Singh</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Nov 2008 04:55:46 +0000</pubDate>
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		<description>शास्त्री जी, 

इतने महत्वपूर्ण  विषय को उठाने के लिये धन्यवाद! 

इसी के साथ मैं यह अनुरोध करूंगा कि आपके आस-पास  &#039;कोई&#039;  भी चीज  विलुप्त होने की कगार पर हो तो उसका शीघ्रातिशीघ्र दस्तावेजीकरण (डॉकुमेन्टेशन) कर लेना चाहिये। इससे वह परोक्ष रूप से &#039;अमर&#039; हो जाती है।  उदाहरण के लिये आपके क्षेत्र में पुराने घरों की डिजाइन में क्या-क्या पहलू हुआ करते थे?  आपके गाँव का कोई व्यक्ति विशेष ढंग से चारपाई बुनता था; कोई विशेष ढंग से टोकरी बनाता था;  कोई दाई बच्चा पैदा कराने का विशेष तरीका इस्तेमाल करती थी, आदि।  यह मान लीजिये कि आगे ये सब बहुत उपयोगी होंगे। इन  विधियों को खोजने में लाखों लोगों ने माथा-पच्ची किया होगा; लाखों साल लगे होंगें। हम इन्हें यों  ही विलुप्त कैसे होते देख सकते हैं? वो भी कम्यूटर के इस युग में? जबकि  फोटो लेना और दस्तावेज बनाना बायें हाँथ का खेल हो गया है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्री जी, </p>
<p>इतने महत्वपूर्ण  विषय को उठाने के लिये धन्यवाद! </p>
<p>इसी के साथ मैं यह अनुरोध करूंगा कि आपके आस-पास  &#8216;कोई&#8217;  भी चीज  विलुप्त होने की कगार पर हो तो उसका शीघ्रातिशीघ्र दस्तावेजीकरण (डॉकुमेन्टेशन) कर लेना चाहिये। इससे वह परोक्ष रूप से &#8216;अमर&#8217; हो जाती है।  उदाहरण के लिये आपके क्षेत्र में पुराने घरों की डिजाइन में क्या-क्या पहलू हुआ करते थे?  आपके गाँव का कोई व्यक्ति विशेष ढंग से चारपाई बुनता था; कोई विशेष ढंग से टोकरी बनाता था;  कोई दाई बच्चा पैदा कराने का विशेष तरीका इस्तेमाल करती थी, आदि।  यह मान लीजिये कि आगे ये सब बहुत उपयोगी होंगे। इन  विधियों को खोजने में लाखों लोगों ने माथा-पच्ची किया होगा; लाखों साल लगे होंगें। हम इन्हें यों  ही विलुप्त कैसे होते देख सकते हैं? वो भी कम्यूटर के इस युग में? जबकि  फोटो लेना और दस्तावेज बनाना बायें हाँथ का खेल हो गया है।</p>
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		<title>By: कविता वाचक्नवी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1577/comment-page-1#comment-4352</link>
		<dc:creator>कविता वाचक्नवी</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Oct 2008 22:39:09 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1577#comment-4352</guid>
		<description>खजुराहो के बाजार में अभी अभी देख कर आई हूँ कि दुर्लभ सिक्के व राजकीय मुद्राएँ किस प्रकार बाज़ार में सरेआम बिक रही हैं ढेर की ढेर।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>खजुराहो के बाजार में अभी अभी देख कर आई हूँ कि दुर्लभ सिक्के व राजकीय मुद्राएँ किस प्रकार बाज़ार में सरेआम बिक रही हैं ढेर की ढेर।</p>
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		<title>By: sameer yadav</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1577/comment-page-1#comment-4351</link>
		<dc:creator>sameer yadav</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Oct 2008 20:01:15 +0000</pubDate>
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		<description>शास्त्री जी आपने पहल को अब एक सार्थक एवम पूर्ण अभियान का रूप दे दिया...आभार इसके लिए..!
यह तो जागरूकता के जोर से ही भागने वाला भूत है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्री जी आपने पहल को अब एक सार्थक एवम पूर्ण अभियान का रूप दे दिया&#8230;आभार इसके लिए..!<br />
यह तो जागरूकता के जोर से ही भागने वाला भूत है.</p>
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		<title>By: अन्नपूर्णा</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1577/comment-page-1#comment-4350</link>
		<dc:creator>अन्नपूर्णा</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Oct 2008 05:57:30 +0000</pubDate>
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		<description>मैनें अपने ब्लोग पुरवाई में कला श्रेणी में गुम होती कला से संबंधित चित्र सहित कुछ सामग्री देने की कोशिश की है। कृपया देखें यह कहाँ तक ठीक है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मैनें अपने ब्लोग पुरवाई में कला श्रेणी में गुम होती कला से संबंधित चित्र सहित कुछ सामग्री देने की कोशिश की है। कृपया देखें यह कहाँ तक ठीक है।</p>
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		<title>By: पुनीत ओमर</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1577/comment-page-1#comment-4349</link>
		<dc:creator>पुनीत ओमर</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Oct 2008 05:15:30 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1577#comment-4349</guid>
		<description>आपसे अनुरोध है की प्राचीन धरोहरों से सम्बंधित कानूनी पहलुओं पर भी एक आलेख लिखें. 
अगर कोई व्यक्ति इन वस्तुओं का कानूनी वारिस है और अधिकार पूर्वक इन्हे बेचना चाहता है तो उसे किस प्रकार रोका जा सकता है. या फ़िर सरकार किन कानूनों के आधार पर लोगों की व्यक्तियों की निजी संपत्ति का अधिग्रहण करती है जैसा की जयपुर, जोधपुर के राजाओं, निजामों और लखनऊ के नवाबों की संपत्ति का अधिग्रहण किया गया जिसमे अन्यान्य धरोहरें शामिल थीं. अंग्रेज  किस कानूनी आधार पर कोहिनूर और तीपुसुल्तान की तलवार आदि के मालिक बने.
वैसे जिस प्रक्रिया का जिक्र आपने आज किया है अपनी धरोहरों को बचाने के लिए.. वो व्यवहारिक रूप से उतनी आसान नहीं है.  
अगर यहाँ अगर एक भारतीय ख़ुद कुछ करना चाहे तो उसे शक की नजर से देखा जाता है लेकिन नेशनल जिओग्राफिक और डिस्कवरी के लोग ऐसी जगहों पर जहाँ खुदाई आदि चल रही हो आसानी से प्रवेश पा जाते हैं. दो माह पहले महाभारत काल के जरासंध की अस्थियाँ मिलने के घटनाक्रम को उदाहरण के तौर पर लिया जा सकता है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपसे अनुरोध है की प्राचीन धरोहरों से सम्बंधित कानूनी पहलुओं पर भी एक आलेख लिखें.<br />
अगर कोई व्यक्ति इन वस्तुओं का कानूनी वारिस है और अधिकार पूर्वक इन्हे बेचना चाहता है तो उसे किस प्रकार रोका जा सकता है. या फ़िर सरकार किन कानूनों के आधार पर लोगों की व्यक्तियों की निजी संपत्ति का अधिग्रहण करती है जैसा की जयपुर, जोधपुर के राजाओं, निजामों और लखनऊ के नवाबों की संपत्ति का अधिग्रहण किया गया जिसमे अन्यान्य धरोहरें शामिल थीं. अंग्रेज  किस कानूनी आधार पर कोहिनूर और तीपुसुल्तान की तलवार आदि के मालिक बने.<br />
वैसे जिस प्रक्रिया का जिक्र आपने आज किया है अपनी धरोहरों को बचाने के लिए.. वो व्यवहारिक रूप से उतनी आसान नहीं है.<br />
अगर यहाँ अगर एक भारतीय ख़ुद कुछ करना चाहे तो उसे शक की नजर से देखा जाता है लेकिन नेशनल जिओग्राफिक और डिस्कवरी के लोग ऐसी जगहों पर जहाँ खुदाई आदि चल रही हो आसानी से प्रवेश पा जाते हैं. दो माह पहले महाभारत काल के जरासंध की अस्थियाँ मिलने के घटनाक्रम को उदाहरण के तौर पर लिया जा सकता है.</p>
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		<title>By: Ranjan</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1577/comment-page-1#comment-4348</link>
		<dc:creator>Ranjan</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Oct 2008 03:26:31 +0000</pubDate>
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		<description>विदेशों में भारतीय सिक्कों के कई मुरीद है.. और अपने यहां उन्हे बेचने वाले... हमें ज्यादा सजगता से काम लेना होगा..

शास्त्री जी इस पहल के लिये आभार.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>विदेशों में भारतीय सिक्कों के कई मुरीद है.. और अपने यहां उन्हे बेचने वाले&#8230; हमें ज्यादा सजगता से काम लेना होगा..</p>
<p>शास्त्री जी इस पहल के लिये आभार.</p>
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		<title>By: P.N. Subramanian</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1577/comment-page-1#comment-4347</link>
		<dc:creator>P.N. Subramanian</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Oct 2008 03:18:19 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1577#comment-4347</guid>
		<description>एक मित्र के प्रश्न का उत्तर देने के लिए मै सोच ही रहा था कि एक अलग आलेख की आवश्यकता है. आपने सार्थक बना दिया. आभार.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>एक मित्र के प्रश्न का उत्तर देने के लिए मै सोच ही रहा था कि एक अलग आलेख की आवश्यकता है. आपने सार्थक बना दिया. आभार.</p>
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