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	<title>Comments on: अर्धसत्य की दुखद असलियत !</title>
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	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: प्रवीण त्रिवेदी-प्राइमरी का मास्टर</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1581/comment-page-1#comment-4381</link>
		<dc:creator>प्रवीण त्रिवेदी-प्राइमरी का मास्टर</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Nov 2008 15:50:30 +0000</pubDate>
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		<description>शुक्रिया !

मैं भी इस ब्लॉग को लिंकित कर रहा हूँ/
समाज में और अधिक जागरूकता की आवश्यकता है /

इस तरह के लोगों का पुनर्वास की जरूरत है /</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शुक्रिया !</p>
<p>मैं भी इस ब्लॉग को लिंकित कर रहा हूँ/<br />
समाज में और अधिक जागरूकता की आवश्यकता है /</p>
<p>इस तरह के लोगों का पुनर्वास की जरूरत है /</p>
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		<title>By: भूमिका</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1581/comment-page-1#comment-4373</link>
		<dc:creator>भूमिका</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Nov 2008 17:04:19 +0000</pubDate>
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		<description>बड़ा आश्चर्य हुआ ये पढ़ कर कि ब्लागिंग के धुरंधर यहां कह रहे हैं कि अर्धसत्य में डॉ.रूपेश श्रीवास्तव को पढ़ा है पर क्यों किसी ने एक प्रोत्साहित करने वाली टिप्पणी तक नहीं करी या ये भी कोई नीति है? यदि शंकाओं को लेकर मर्द और औरत आपस में ही खुसुर-फुसुर करेंगे तो भला क्या जान पाएंगे हमारे बारे में इस लिये साहस जुटा कर &quot;अर्धसत्य&quot; पर आयें तो उत्तर भी दूंगी भले एनानिमस कमेंट करें।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बड़ा आश्चर्य हुआ ये पढ़ कर कि ब्लागिंग के धुरंधर यहां कह रहे हैं कि अर्धसत्य में डॉ.रूपेश श्रीवास्तव को पढ़ा है पर क्यों किसी ने एक प्रोत्साहित करने वाली टिप्पणी तक नहीं करी या ये भी कोई नीति है? यदि शंकाओं को लेकर मर्द और औरत आपस में ही खुसुर-फुसुर करेंगे तो भला क्या जान पाएंगे हमारे बारे में इस लिये साहस जुटा कर &#8220;अर्धसत्य&#8221; पर आयें तो उत्तर भी दूंगी भले एनानिमस कमेंट करें।</p>
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		<title>By: G Vishwanath</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1581/comment-page-1#comment-4372</link>
		<dc:creator>G Vishwanath</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Nov 2008 16:51:36 +0000</pubDate>
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		<description>हम तो समझते थे कि कोई नैसर्गिक लैंगिक विकलांग होता ही नही। सोचा था ये सब नर हैं जिनके गुप्तांगों जबरन निकाले गये हैं। इनको मैं मर्द ही समझता आया हूँ।

इन लोगों की हरकतों से मैं हैरान होता हूँ। ये लोग इतना अभद्र व्य़वहार क्यों करते हैं?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हम तो समझते थे कि कोई नैसर्गिक लैंगिक विकलांग होता ही नही। सोचा था ये सब नर हैं जिनके गुप्तांगों जबरन निकाले गये हैं। इनको मैं मर्द ही समझता आया हूँ।</p>
<p>इन लोगों की हरकतों से मैं हैरान होता हूँ। ये लोग इतना अभद्र व्य़वहार क्यों करते हैं?</p>
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		<title>By: समीर लाल</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1581/comment-page-1#comment-4371</link>
		<dc:creator>समीर लाल</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Nov 2008 00:42:27 +0000</pubDate>
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		<description>रुपेश जी को पढ़ता रहता हूँ अर्धसत्य पर. आपका आलेख बहुत सार्थक है. आभार.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>रुपेश जी को पढ़ता रहता हूँ अर्धसत्य पर. आपका आलेख बहुत सार्थक है. आभार.</p>
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		<title>By: sameer yadav</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1581/comment-page-1#comment-4370</link>
		<dc:creator>sameer yadav</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Nov 2008 20:05:32 +0000</pubDate>
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		<description>पुनःश्चा....
और जब दुनिया में कितने जानवरों के बेहतर जीवन के लिए प्रयासरत हैं, फ़िर ये तो हम मानवों की ही संतान हैं</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पुनःश्चा&#8230;.<br />
और जब दुनिया में कितने जानवरों के बेहतर जीवन के लिए प्रयासरत हैं, फ़िर ये तो हम मानवों की ही संतान हैं</p>
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		<title>By: sameer yadav</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1581/comment-page-1#comment-4369</link>
		<dc:creator>sameer yadav</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Nov 2008 20:02:18 +0000</pubDate>
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		<description>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव जी के विचारों से पूर्णतः सहमत. इनकी सहायता किये जाने हेतु जागरूकता के साथ यह पहला कदम होना चाहिए...क्योंकि उनकी दुनिया का अँधेरा भी अलग तरह का है. उन्हें पारंपरिक रूप से मिलने वाले न्यौछावर के लिए इस मायावी दुनिया के साबूत आदमियों के द्वारा अपने क्या-क्या नहीं &quot;न्यौछावर&quot; कर दिए जाते हैं...!!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव जी के विचारों से पूर्णतः सहमत. इनकी सहायता किये जाने हेतु जागरूकता के साथ यह पहला कदम होना चाहिए&#8230;क्योंकि उनकी दुनिया का अँधेरा भी अलग तरह का है. उन्हें पारंपरिक रूप से मिलने वाले न्यौछावर के लिए इस मायावी दुनिया के साबूत आदमियों के द्वारा अपने क्या-क्या नहीं &#8220;न्यौछावर&#8221; कर दिए जाते हैं&#8230;!!</p>
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		<title>By: डॉ.रूपेश श्रीवास्तव</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1581/comment-page-1#comment-4368</link>
		<dc:creator>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Nov 2008 15:33:51 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1581#comment-4368</guid>
		<description>आदरणीय गुरूवर्यसम शास्त्री जी, इस विषय पर तात्कालिक प्रभाव में आकर मेरे बड़े भाईसाहब श्री अनिल रघुराज जी ने भी &quot;अगले जनम मोहे हिजड़ा न कीजौ&quot; नाम से पोस्ट लिखी थी। श्रेया नाम की मेरी ऐसी ही एक बच्ची ने कहा कि मैं चाहती हूं कि हमें सरकार से जीवन-यापन के लिये न्यूनतम गुजारा भत्ता,नौकरियों में O.B.C./S.C./S.T. से अधिक वरीयता दी जाए। साथ ही सरकार की ओर से मुफ़्त लिंग निर्धारण परीक्षण का अधिकार दिया जाए जो कि मेडिकल बेस्ड हो जिसमें एनाटामी से लेकर हारमोन्स तक का परीक्षण कराया जाए ताकि ये जाना जा सके कि कौन नैसर्गिक लैंगिक विकलांग है और कौन बना हुआ है ताकि हम बदनसीबों पर लगने वाले आपराधिक आरोपों से हमें मुक्ति मिले।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आदरणीय गुरूवर्यसम शास्त्री जी, इस विषय पर तात्कालिक प्रभाव में आकर मेरे बड़े भाईसाहब श्री अनिल रघुराज जी ने भी &#8220;अगले जनम मोहे हिजड़ा न कीजौ&#8221; नाम से पोस्ट लिखी थी। श्रेया नाम की मेरी ऐसी ही एक बच्ची ने कहा कि मैं चाहती हूं कि हमें सरकार से जीवन-यापन के लिये न्यूनतम गुजारा भत्ता,नौकरियों में O.B.C./S.C./S.T. से अधिक वरीयता दी जाए। साथ ही सरकार की ओर से मुफ़्त लिंग निर्धारण परीक्षण का अधिकार दिया जाए जो कि मेडिकल बेस्ड हो जिसमें एनाटामी से लेकर हारमोन्स तक का परीक्षण कराया जाए ताकि ये जाना जा सके कि कौन नैसर्गिक लैंगिक विकलांग है और कौन बना हुआ है ताकि हम बदनसीबों पर लगने वाले आपराधिक आरोपों से हमें मुक्ति मिले।</p>
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		<title>By: महामंत्री-तस्लीम</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1581/comment-page-1#comment-4367</link>
		<dc:creator>महामंत्री-तस्लीम</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Nov 2008 11:17:53 +0000</pubDate>
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		<description>सही कहा आपने। अर्धसत्य नहीं, वह जीवन का एक ऐसा सत्य है, जो बडे से बडे पूर्णसत्य पर भी भारी है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सही कहा आपने। अर्धसत्य नहीं, वह जीवन का एक ऐसा सत्य है, जो बडे से बडे पूर्णसत्य पर भी भारी है।</p>
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		<title>By: kamlesh madaan</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1581/comment-page-1#comment-4366</link>
		<dc:creator>kamlesh madaan</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Nov 2008 06:19:41 +0000</pubDate>
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		<description>शास्त्री जी क्या आप मेरे इस लेख पर ध्यान देंगें, ये मेरा पहला लेख था और काफ़ी चर्चित भी हुआ था क्योंकि मैने शुरूआत ही हिजड़ों यानी मंगलामुखी के ऊपर लिखा था. विषय था &quot;शबनम मौसी&quot;.

लेख का लिंक ये है http://sunobhai.blogspot.com/2007/05/blog-post.html</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्री जी क्या आप मेरे इस लेख पर ध्यान देंगें, ये मेरा पहला लेख था और काफ़ी चर्चित भी हुआ था क्योंकि मैने शुरूआत ही हिजड़ों यानी मंगलामुखी के ऊपर लिखा था. विषय था &#8220;शबनम मौसी&#8221;.</p>
<p>लेख का लिंक ये है <a href="http://sunobhai.blogspot.com/2007/05/blog-post.html" rel="nofollow">http://sunobhai.blogspot.com/2007/05/blog-post.html</a></p>
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		<title>By: P.N. Subramanian</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1581/comment-page-1#comment-4365</link>
		<dc:creator>P.N. Subramanian</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Nov 2008 03:37:29 +0000</pubDate>
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		<description>एक गंभीर सामाजिक समस्या पर लेख केंद्रित कर विचार मंथन के द्वार खोल दिए हैं. इसके पहले कि हम बातचीत शुरू करें, ज़रूरी होगा कि &quot;अर्धसत्य&quot; के सभी लेखों का अध्ययन किया जावे.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>एक गंभीर सामाजिक समस्या पर लेख केंद्रित कर विचार मंथन के द्वार खोल दिए हैं. इसके पहले कि हम बातचीत शुरू करें, ज़रूरी होगा कि &#8220;अर्धसत्य&#8221; के सभी लेखों का अध्ययन किया जावे.</p>
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		<title>By: दिनेशराय द्विवेदी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1581/comment-page-1#comment-4364</link>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Nov 2008 02:49:24 +0000</pubDate>
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		<description>वे मनुष्य हैं, जब तक हम लिंगाधारित भेद करते रहेंगे तब तक वृहन्नलाओं और स्त्रियों के प्रति न्याय संभव नहीं है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वे मनुष्य हैं, जब तक हम लिंगाधारित भेद करते रहेंगे तब तक वृहन्नलाओं और स्त्रियों के प्रति न्याय संभव नहीं है।</p>
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	<item>
		<title>By: Dr.Arvind Mishra</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1581/comment-page-1#comment-4363</link>
		<dc:creator>Dr.Arvind Mishra</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Nov 2008 00:42:37 +0000</pubDate>
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		<description>आपका यह कहना बिल्कुल सही है कि हिजडों पर वैज्ञानिक अनुसंधान काफी कम हुए हैं -जबकि सामाजिक अनुसंधान तो हुए हैं .कई लेखकों ने इन्हे अपने प्रनुख पात्र बनाए हैं -खुशवंत सिंह की मेरी दिल्ली में ये मौजूद हैं -हिजडों को लेकर एक बात यह भी कही जाती है कि उनकी जमात में शामिल सभी हिजडे नही होते बल्कि एक व्यावसायिक कुचक्र के शिकार हो उस जमात में मजबूरी से आ /लाये जाते हैं -जब एक छोटे से अनुष्ठान से लोगों का धर्म निश्चित किया जा सकता है तो किसी को भी हिजडा कौन बहुत मुश्किल है -आपने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपका यह कहना बिल्कुल सही है कि हिजडों पर वैज्ञानिक अनुसंधान काफी कम हुए हैं -जबकि सामाजिक अनुसंधान तो हुए हैं .कई लेखकों ने इन्हे अपने प्रनुख पात्र बनाए हैं -खुशवंत सिंह की मेरी दिल्ली में ये मौजूद हैं -हिजडों को लेकर एक बात यह भी कही जाती है कि उनकी जमात में शामिल सभी हिजडे नही होते बल्कि एक व्यावसायिक कुचक्र के शिकार हो उस जमात में मजबूरी से आ /लाये जाते हैं -जब एक छोटे से अनुष्ठान से लोगों का धर्म निश्चित किया जा सकता है तो किसी को भी हिजडा कौन बहुत मुश्किल है -आपने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है !</p>
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