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	<title>Comments on: गुलाबी चड्डियां -&#8211; फल क्या होगा?</title>
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	<link>http://sarathi.info/archives/1872</link>
	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: Hindi Blogosphere&#8217;s Reactions to the Pink Chaddi Campaign Show the Divide Between Bharat and India &#124; Gauravonomics Blog</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5796</link>
		<dc:creator>Hindi Blogosphere&#8217;s Reactions to the Pink Chaddi Campaign Show the Divide Between Bharat and India &#124; Gauravonomics Blog</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Feb 2009 04:53:15 +0000</pubDate>
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		<description>[...] उन में से ही किसी की करतूत तो नहीं है? (link) Some people have started a campaign to send pink underwear to the radicals, and that too of the [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] उन में से ही किसी की करतूत तो नहीं है? (link) Some people have started a campaign to send pink underwear to the radicals, and that too of the [...]</p>
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		<title>By: चड्डी-कंडोम कांड &#8212; आखिरी अध्याय!! &#124; सारथी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5661</link>
		<dc:creator>चड्डी-कंडोम कांड &#8212; आखिरी अध्याय!! &#124; सारथी</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Feb 2009 00:31:16 +0000</pubDate>
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		<description>[...] गुलाबी चड्डियां -&#8211; फल क्या होगा?  [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] गुलाबी चड्डियां -&ndash; फल क्या होगा?  [...]</p>
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	<item>
		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5492</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Feb 2009 04:18:22 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1872#comment-5492</guid>
		<description>@नीरज रोहिल्ला

प्रिय नीरज,
 
मेरे आलेखों को अलग से देखा जाये तो तुम ने मेरी जो आलोचना
की है वह एक दम सही है. लेकिन इस लेख की आखिरी कडी
(जो इसके बाद छपी है) उसे देख लोगे तो समझ में आ जायगा 
कि मैं ने जो कुछ कहा है उसके पीछे एक गंभीर कारण है.
 
Consortium of Pub Going, Loose-living Women
 
है इन सब के पीछे, न कि हिन्दुस्तान से स्नेह करने वाली
स्त्रियां. यदि देशप्रेमी लोगों ने देशप्रेम के कारण कुछ किया
होता तो मैं जरूर अनुमोदन करता.
 
अखिरी आलेख जरा देख लेना.
 
आलोचना के लिये आभार. आलोचना हमेशा मुझे चिंतन के
लिये प्रेरित करती है.
 
सस्नेह -- शास्त्री</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@नीरज रोहिल्ला</p>
<p>प्रिय नीरज,</p>
<p>मेरे आलेखों को अलग से देखा जाये तो तुम ने मेरी जो आलोचना<br />
की है वह एक दम सही है. लेकिन इस लेख की आखिरी कडी<br />
(जो इसके बाद छपी है) उसे देख लोगे तो समझ में आ जायगा<br />
कि मैं ने जो कुछ कहा है उसके पीछे एक गंभीर कारण है.</p>
<p>Consortium of Pub Going, Loose-living Women</p>
<p>है इन सब के पीछे, न कि हिन्दुस्तान से स्नेह करने वाली<br />
स्त्रियां. यदि देशप्रेमी लोगों ने देशप्रेम के कारण कुछ किया<br />
होता तो मैं जरूर अनुमोदन करता.</p>
<p>अखिरी आलेख जरा देख लेना.</p>
<p>आलोचना के लिये आभार. आलोचना हमेशा मुझे चिंतन के<br />
लिये प्रेरित करती है.</p>
<p>सस्नेह &#8212; शास्त्री</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: नीरज रोहिल्ला</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5485</link>
		<dc:creator>नीरज रोहिल्ला</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Feb 2009 23:29:50 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1872#comment-5485</guid>
		<description>शास्त्रीजी,
आपकी पुरानी दो प्रविष्टियों का उदाहरण देकर अपनी बात समझाना चाहूँगा।  आपने &quot;सडकछाप कुत्ते की जनानी कौन&quot; और &quot;सुपरमार्केट की मेम&quot; प्रविष्टियों में एक महिला से वार्तालाप में जिन वाक्यांशों का प्रयोग किया वो इस प्रकार थे:

I know who you are. Only a B**** will enter among so many dogs. एवं

सच है देवी, सच है. शायद इसी कारण बहुत सी अंग्रेजीदां कुतियें  खरीददारी के लिये यहां पधारती हैं।

मैने इन दोनों ही प्रविष्टियों पर टिप्पणी नहीं की क्योंकि मेरी समझ में किसी भी स्थिति में ऐसी भाषा का प्रयोग उचित नहीं है।  अगर मूल किस्से से अलग करके आपके वाक्यों को देखें तो ये नितान्त अनुचित हैं लेकिन आपने जिस सन्दर्भ में इनका प्रयोग किया उसके चलते लगभग सभी टिप्पणीकर्ताओं ने इस पर सहमति जतायी न कि आपको कटघरे में खडा किया।

आपने ये इस सन्दर्भ में कहा जब उन दोनों महिलाओं ने आपसे कोई व्यक्तिगत बात नहीं कि और न ही आपको किसी सन्दर्भ में गाली सुनायी।  लेकिन चूँकि इन महिलाओं का व्यवहार अन्य लोगों के प्रति अशोभनीय था, इसके चलते आपने वो शब्द बोले।

अब राम सेना वालों का व्यवहार केवल अशोभनीय ही नहीं, अनैतिक, अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक भी था।  इसके चलते मेरी समझ में लाल चड्ढी भेजना किसी महिला को B**** कहने से बडा अपराध नहीं हो जाता।  

फ़ल की चिन्ता न करें, आपके उन दोनो संवादों से अगर आपको लगता है कि कुछ फ़ल निकलेगा और उस महिला का हृदय परिवर्तन होगा तो आपकी सोच गलत है। परन्तु आपने भी अपने स्तर से विरोध किया।  फ़िर लाल चड्ढी के मामले में Holier than thou का इसरार क्यों?

मैं व्यवहार और चिन्तन में हमेशा Abstract विचार को Fairplay जैसी भावना से अधिक महत्व देता हूँ।  इस मुद्दे लाल चड्ढी के निर्माताओं को होने वाले फ़ायदे का तर्क देना बहस को मूल मुद्दे से भटकाना जैसा है। अगर वो खादी की लाल चड्ढियाँ भेजें तो क्या आप वैचारिक रूप से उनके साथ खडे हो जायेगें? असली मुद्दा सोच का है।

अगर किसी अन्य का ब्लाग होता तो मैं इस टिप्पणी को कभी नहीं लिखता।  लेकिन आप वैचारिक रूप से काफ़ी सजग रहते हैं एवं आपके मेरे प्रति अनुराग के चलते ऐसा लिखने की ढॄष्टता कर रहा हूँ। आशा है आप अन्यथा नहीं लेंगे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्रीजी,<br />
आपकी पुरानी दो प्रविष्टियों का उदाहरण देकर अपनी बात समझाना चाहूँगा।  आपने &#8220;सडकछाप कुत्ते की जनानी कौन&#8221; और &#8220;सुपरमार्केट की मेम&#8221; प्रविष्टियों में एक महिला से वार्तालाप में जिन वाक्यांशों का प्रयोग किया वो इस प्रकार थे:</p>
<p>I know who you are. Only a B**** will enter among so many dogs. एवं</p>
<p>सच है देवी, सच है. शायद इसी कारण बहुत सी अंग्रेजीदां कुतियें  खरीददारी के लिये यहां पधारती हैं।</p>
<p>मैने इन दोनों ही प्रविष्टियों पर टिप्पणी नहीं की क्योंकि मेरी समझ में किसी भी स्थिति में ऐसी भाषा का प्रयोग उचित नहीं है।  अगर मूल किस्से से अलग करके आपके वाक्यों को देखें तो ये नितान्त अनुचित हैं लेकिन आपने जिस सन्दर्भ में इनका प्रयोग किया उसके चलते लगभग सभी टिप्पणीकर्ताओं ने इस पर सहमति जतायी न कि आपको कटघरे में खडा किया।</p>
<p>आपने ये इस सन्दर्भ में कहा जब उन दोनों महिलाओं ने आपसे कोई व्यक्तिगत बात नहीं कि और न ही आपको किसी सन्दर्भ में गाली सुनायी।  लेकिन चूँकि इन महिलाओं का व्यवहार अन्य लोगों के प्रति अशोभनीय था, इसके चलते आपने वो शब्द बोले।</p>
<p>अब राम सेना वालों का व्यवहार केवल अशोभनीय ही नहीं, अनैतिक, अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक भी था।  इसके चलते मेरी समझ में लाल चड्ढी भेजना किसी महिला को B**** कहने से बडा अपराध नहीं हो जाता।  </p>
<p>फ़ल की चिन्ता न करें, आपके उन दोनो संवादों से अगर आपको लगता है कि कुछ फ़ल निकलेगा और उस महिला का हृदय परिवर्तन होगा तो आपकी सोच गलत है। परन्तु आपने भी अपने स्तर से विरोध किया।  फ़िर लाल चड्ढी के मामले में Holier than thou का इसरार क्यों?</p>
<p>मैं व्यवहार और चिन्तन में हमेशा Abstract विचार को Fairplay जैसी भावना से अधिक महत्व देता हूँ।  इस मुद्दे लाल चड्ढी के निर्माताओं को होने वाले फ़ायदे का तर्क देना बहस को मूल मुद्दे से भटकाना जैसा है। अगर वो खादी की लाल चड्ढियाँ भेजें तो क्या आप वैचारिक रूप से उनके साथ खडे हो जायेगें? असली मुद्दा सोच का है।</p>
<p>अगर किसी अन्य का ब्लाग होता तो मैं इस टिप्पणी को कभी नहीं लिखता।  लेकिन आप वैचारिक रूप से काफ़ी सजग रहते हैं एवं आपके मेरे प्रति अनुराग के चलते ऐसा लिखने की ढॄष्टता कर रहा हूँ। आशा है आप अन्यथा नहीं लेंगे।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: विष्‍णु बैरागी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5482</link>
		<dc:creator>विष्‍णु बैरागी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Feb 2009 18:10:06 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1872#comment-5482</guid>
		<description>न्‍यूटन के &#039;गति नियमों&#039; का तीसरा नियम है - &#039;प्रत्‍येक क्रिया की समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।&#039;
एक स्थिति और है - निषेध सदैव आकर्षित करते हैं।
वास्‍तविकता इन दो बातों के बीच ही कहीं न कही है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>न्‍यूटन के &#8216;गति नियमों&#8217; का तीसरा नियम है &#8211; &#8216;प्रत्‍येक क्रिया की समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।&#8217;<br />
एक स्थिति और है &#8211; निषेध सदैव आकर्षित करते हैं।<br />
वास्‍तविकता इन दो बातों के बीच ही कहीं न कही है।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: राज भाटिया</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5481</link>
		<dc:creator>राज भाटिया</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Feb 2009 17:17:52 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1872#comment-5481</guid>
		<description>शास्त्री जी,बहुत अच्छा लेख लिखा, हमे अपने बच्चो मे यह संस्कार डालने चाहिये लेकिन उस से पहले हमे भी अच्छा इन्सांन बनाना हो गया, वरना कल पछताना पडेगा, मेरे बच्चे युरोप मे पेदा हुये है मुझे भी यहा करीब ३० साल हो गये , मै कभी कभी एक आध बीयर ले लेता हू, लेकिन बहुत कम लेकिन आज तक मेरी बीबी ने या बच्चो ने कभी पी नही,
यह तुच्छ लोगो का काम है, दुसरो की नकल करना एक समझ दार आदमी या ओरत कभी भी किसे की नकल नही करेगी, नकल करना आजादी नही, ओर असल आजादी क्या है यह इन मुर्खो को नही पता, पता तब हो जब इन्हे किसी ने बताया हो इन के बताने वाले खुद नही जानते होगे, उन्हे रिशवत ओर घटोलो से ही फ़ुरसत कहा होगी.
धन्यवाद</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्री जी,बहुत अच्छा लेख लिखा, हमे अपने बच्चो मे यह संस्कार डालने चाहिये लेकिन उस से पहले हमे भी अच्छा इन्सांन बनाना हो गया, वरना कल पछताना पडेगा, मेरे बच्चे युरोप मे पेदा हुये है मुझे भी यहा करीब ३० साल हो गये , मै कभी कभी एक आध बीयर ले लेता हू, लेकिन बहुत कम लेकिन आज तक मेरी बीबी ने या बच्चो ने कभी पी नही,<br />
यह तुच्छ लोगो का काम है, दुसरो की नकल करना एक समझ दार आदमी या ओरत कभी भी किसे की नकल नही करेगी, नकल करना आजादी नही, ओर असल आजादी क्या है यह इन मुर्खो को नही पता, पता तब हो जब इन्हे किसी ने बताया हो इन के बताने वाले खुद नही जानते होगे, उन्हे रिशवत ओर घटोलो से ही फ़ुरसत कहा होगी.<br />
धन्यवाद</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5480</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Feb 2009 16:37:48 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1872#comment-5480</guid>
		<description>The correct URL:


http://thepinkcondomcampaign.blogspot.com/</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>The correct URL:</p>
<p><a href="http://thepinkcondomcampaign.blogspot.com/" rel="nofollow">http://thepinkcondomcampaign.blogspot.com/</a></p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5479</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Feb 2009 16:15:30 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1872#comment-5479</guid>
		<description>@Isht Deo Sankrityaayan

दोनों में से किसी भी पक्ष ने सही नहीं किया है !!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@Isht Deo Sankrityaayan</p>
<p>दोनों में से किसी भी पक्ष ने सही नहीं किया है !!</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5478</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Feb 2009 16:06:45 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1872#comment-5478</guid>
		<description>@सुरेश चिपलूनकर

सुरेश, मैं ने वह कंडोम वाला http://www.thepinkcondomcampaign.com/ चिट्ठा देख लिया. वैसा ही हुआ जैसा मैं ने कहा था. अब शायद कंडोम के जवाब में चोलियां भेजी जायेंगी.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@सुरेश चिपलूनकर</p>
<p>सुरेश, मैं ने वह कंडोम वाला <a href="http://www.thepinkcondomcampaign.com/" rel="nofollow">http://www.thepinkcondomcampaign.com/</a> चिट्ठा देख लिया. वैसा ही हुआ जैसा मैं ने कहा था. अब शायद कंडोम के जवाब में चोलियां भेजी जायेंगी.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5477</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Feb 2009 16:03:58 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1872#comment-5477</guid>
		<description>@E-Guru Rajeev

आजकल तुम्हारी लेखनी काफी सशक्त हो रही है. लिखते रहो. हर सामाजिक बुराई का विरोध करना जरूरी है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@E-Guru Rajeev</p>
<p>आजकल तुम्हारी लेखनी काफी सशक्त हो रही है. लिखते रहो. हर सामाजिक बुराई का विरोध करना जरूरी है.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Isht Deo Sankrityaayan</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5476</link>
		<dc:creator>Isht Deo Sankrityaayan</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Feb 2009 15:48:21 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1872#comment-5476</guid>
		<description>आप बिलकुल सही हैं शास्त्री जी, पर आजकल सच कहना गुनाह है. पुनश्च,इन मामलों में अपने ही प्रति जिम्मेदार हो सक्ते हैअ, सबको ऐसा करने के लिए विवश नहीं कर सक्ते. जैसे ही ऐसा कुछ कहेंगे आप भी तालिबानी घोषित कर दिए जाएंगे. और हाँ, राम सेना ने जो किया उसे भी सही नहीं ठहराया जा सकता. आख़िर तालिबान में और उनमें फ़र्क़ क्या रह गया, सिर्फ़ जगह और अस्त्र का ही न! बाक़ी तरीक़ा तो एक ही है, दोनोंका.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आप बिलकुल सही हैं शास्त्री जी, पर आजकल सच कहना गुनाह है. पुनश्च,इन मामलों में अपने ही प्रति जिम्मेदार हो सक्ते हैअ, सबको ऐसा करने के लिए विवश नहीं कर सक्ते. जैसे ही ऐसा कुछ कहेंगे आप भी तालिबानी घोषित कर दिए जाएंगे. और हाँ, राम सेना ने जो किया उसे भी सही नहीं ठहराया जा सकता. आख़िर तालिबान में और उनमें फ़र्क़ क्या रह गया, सिर्फ़ जगह और अस्त्र का ही न! बाक़ी तरीक़ा तो एक ही है, दोनोंका.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: सुरेश चिपलूनकर</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5475</link>
		<dc:creator>सुरेश चिपलूनकर</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Feb 2009 15:33:09 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1872#comment-5475</guid>
		<description>संयोग से आपकी पिछली दोनो पोस्टें मेरे लेख को उद्धृत करके हुई, इसके लिये मैं आपका आभारी हूँ… छिछोरेपन का जो खेल इन अंग्रेजी मैडमों ने शुरु किया है उसके जवाब में जैसी की अपेक्षा थी एक और जवाबी ब्लॉग आया है http://thepinkcondomcampaign.com ये भी उतना ही छिछोरा अभियान है, लेकिन इनका कहना है कि यह सिर्फ़ जवाबी कार्रवाई है, पहल तो उन्होंने ही की थी…</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>संयोग से आपकी पिछली दोनो पोस्टें मेरे लेख को उद्धृत करके हुई, इसके लिये मैं आपका आभारी हूँ… छिछोरेपन का जो खेल इन अंग्रेजी मैडमों ने शुरु किया है उसके जवाब में जैसी की अपेक्षा थी एक और जवाबी ब्लॉग आया है <a href="http://thepinkcondomcampaign.com" rel="nofollow">http://thepinkcondomcampaign.com</a> ये भी उतना ही छिछोरा अभियान है, लेकिन इनका कहना है कि यह सिर्फ़ जवाबी कार्रवाई है, पहल तो उन्होंने ही की थी…</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: E-Guru Rajeev</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5474</link>
		<dc:creator>E-Guru Rajeev</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Feb 2009 15:21:05 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1872#comment-5474</guid>
		<description>शास्त्री जी, एक बात मैंने नोटिस की है कि ये खोखली नारीवादी औरतें बन्दर जाति की भाँती नक़ल करना जानती हैं. अगर कोई पुरूष सड़क किनारे सुसु करे तो ये भी करेंगी.
 ये उस एक आदमी का अनुसरण करेंगी पर लाखों आदमी जो अपने घर में करते हैं उनका क्या !!
उनका अनुसरण नहीं करना चाहेंगी !!
लाखों अच्छे आदमियों का अनुसरण नहीं करना चाहेंगी !! 
घटिया औरतें घटिया पुरुषों का ही तो सहारा लेंगी.
कमाल है मैं अपने बाथरूम में करता हूँ तो मेरी कोई वैल्यू ही नहीं है.
मेरी माँ ने सिखाया है कि हमेशा अच्छी बातों का अनुसरण करना पर लगता है कि ये लोग बिना माँ वालियां हैं जिन्हें किसी ने कोई संस्कार नहीं दिए कि बेटा हमेशा अच्छी बातें सीखते हैं और अच्छी बातों का अनुसरण करते हैं.
इन लोगों को जीने का सलीका तो आता नहीं है हर बात में पुरुषों से बराबरी करेंगी. करो मेरी बराबरी करो मैं तो प्रेशर रोक कर घर आकर करता हूँ.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्री जी, एक बात मैंने नोटिस की है कि ये खोखली नारीवादी औरतें बन्दर जाति की भाँती नक़ल करना जानती हैं. अगर कोई पुरूष सड़क किनारे सुसु करे तो ये भी करेंगी.<br />
 ये उस एक आदमी का अनुसरण करेंगी पर लाखों आदमी जो अपने घर में करते हैं उनका क्या !!<br />
उनका अनुसरण नहीं करना चाहेंगी !!<br />
लाखों अच्छे आदमियों का अनुसरण नहीं करना चाहेंगी !!<br />
घटिया औरतें घटिया पुरुषों का ही तो सहारा लेंगी.<br />
कमाल है मैं अपने बाथरूम में करता हूँ तो मेरी कोई वैल्यू ही नहीं है.<br />
मेरी माँ ने सिखाया है कि हमेशा अच्छी बातों का अनुसरण करना पर लगता है कि ये लोग बिना माँ वालियां हैं जिन्हें किसी ने कोई संस्कार नहीं दिए कि बेटा हमेशा अच्छी बातें सीखते हैं और अच्छी बातों का अनुसरण करते हैं.<br />
इन लोगों को जीने का सलीका तो आता नहीं है हर बात में पुरुषों से बराबरी करेंगी. करो मेरी बराबरी करो मैं तो प्रेशर रोक कर घर आकर करता हूँ.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: E-Guru Rajeev</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5473</link>
		<dc:creator>E-Guru Rajeev</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Feb 2009 15:07:04 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1872#comment-5473</guid>
		<description>कुछ समय बीत जाए फ़िर देखते हैं, इन नारीवादियों ने अपने अधोवस्त्र पुरुषों को देकर क्या पा लिया !! :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>कुछ समय बीत जाए फ़िर देखते हैं, इन नारीवादियों ने अपने अधोवस्त्र पुरुषों को देकर क्या पा लिया !! <img src='http://sarathi.info/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: deepak bhanre</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1872/comment-page-1#comment-5472</link>
		<dc:creator>deepak bhanre</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Feb 2009 08:08:55 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1872#comment-5472</guid>
		<description>सही कहा आपने समस्या की जड़ मैं जाने की बजाय , अपनी बात के समर्थन और दूसरों की बात के विरोध हेतु इस तरह के हाश्यास्पद और बेहूदा कदम लोगों की अतार्किक और अगम्भीरता को प्रर्दशित करती है . क्या यह व्यक्ति जो कर रहा है उसे किसी भी तरह से सही कहना का जूनून है , चाहे वह ग़लत ही क्यों न हो . एक अच्छा आलेख .</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सही कहा आपने समस्या की जड़ मैं जाने की बजाय , अपनी बात के समर्थन और दूसरों की बात के विरोध हेतु इस तरह के हाश्यास्पद और बेहूदा कदम लोगों की अतार्किक और अगम्भीरता को प्रर्दशित करती है . क्या यह व्यक्ति जो कर रहा है उसे किसी भी तरह से सही कहना का जूनून है , चाहे वह ग़लत ही क्यों न हो . एक अच्छा आलेख .</p>
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