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	<title>Comments on: हर देशभक्त को दुखी होना चाहिये!!</title>
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	<link>http://sarathi.info/archives/1960</link>
	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: पुनीत ओमर</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5809</link>
		<dc:creator>पुनीत ओमर</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Feb 2009 12:31:55 +0000</pubDate>
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		<description>फिल्म विरासत का वह दृश्य अनायास ही याद हो आया जिसमे एक वकील गाँव वालों को अंग्रेजी में कानून बघार कर अपनी हद में रहने का हुक्म देता है पर तभी गाँव वालों की तरफ से अनिल कपूर अभिनीत पात्र उसे अंग्रेजी में ही जवाब दे कर चुप कर देता है.

कला और ज्ञान सिर्फ कला और ज्ञान हैं. वो किसी भाषा विशेष पर आश्रित न कभी हुए थे और न कभी होंगे. सिर्फ भाषा को आधार बना कर कला और उसको जीने वाले कलाकारों का विरोध करने के प्रयासों के प्रति मैं अपना विरोध दर्ज करता हूँ.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>फिल्म विरासत का वह दृश्य अनायास ही याद हो आया जिसमे एक वकील गाँव वालों को अंग्रेजी में कानून बघार कर अपनी हद में रहने का हुक्म देता है पर तभी गाँव वालों की तरफ से अनिल कपूर अभिनीत पात्र उसे अंग्रेजी में ही जवाब दे कर चुप कर देता है.</p>
<p>कला और ज्ञान सिर्फ कला और ज्ञान हैं. वो किसी भाषा विशेष पर आश्रित न कभी हुए थे और न कभी होंगे. सिर्फ भाषा को आधार बना कर कला और उसको जीने वाले कलाकारों का विरोध करने के प्रयासों के प्रति मैं अपना विरोध दर्ज करता हूँ.</p>
]]></content:encoded>
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	<item>
		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5805</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Feb 2009 09:40:17 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1960#comment-5805</guid>
		<description>@hindi blogge

प्रिय दोस्त,

आपकी टिप्पणी के लिये आभार !! आप की निर्भीक टिप्पणी से यह बात स्पष्ट हो गई है कि आप उस &quot;काकस&quot; में नहीं है जो जबर्दस्ती सारथी पर टिप्पणियां कर रहे हैं. उत्तर के लिये आभार !!

हां मेरे चिट्ठे पर आपका हमेशा स्वागत रहेगा. इतना ही नहीं आप मेरी बातों का खंडन करेंगे तो उसका भी स्वागत रहेगा -- क्योंकि जब आप जैसा  व्यक्ति स्वतंत्र चिंतन के साथ खंडन करेंगा तो मुझे सोचने एवं अपनी बात कुछ और स्पष्ट तरीके से रखने का मौका मिलेगा. गलती हो तो सुधार के लिये भी प्रेरणा मिलेगी.

उत्तर के लिए आभार

सस्नेह -- शास्त्री</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@hindi blogge</p>
<p>प्रिय दोस्त,</p>
<p>आपकी टिप्पणी के लिये आभार !! आप की निर्भीक टिप्पणी से यह बात स्पष्ट हो गई है कि आप उस &#8220;काकस&#8221; में नहीं है जो जबर्दस्ती सारथी पर टिप्पणियां कर रहे हैं. उत्तर के लिये आभार !!</p>
<p>हां मेरे चिट्ठे पर आपका हमेशा स्वागत रहेगा. इतना ही नहीं आप मेरी बातों का खंडन करेंगे तो उसका भी स्वागत रहेगा &#8212; क्योंकि जब आप जैसा  व्यक्ति स्वतंत्र चिंतन के साथ खंडन करेंगा तो मुझे सोचने एवं अपनी बात कुछ और स्पष्ट तरीके से रखने का मौका मिलेगा. गलती हो तो सुधार के लिये भी प्रेरणा मिलेगी.</p>
<p>उत्तर के लिए आभार</p>
<p>सस्नेह &#8212; शास्त्री</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: hindi blogge</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5804</link>
		<dc:creator>hindi blogge</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Feb 2009 08:17:09 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1960#comment-5804</guid>
		<description>नमस्कार शास्त्री जी ....
मुझे पता है आप बहुत ज्ञानी है और आईपी एड्रेस पर ध्यान रखते है और ये बात तो आप ने बडे बडे शब्दों में अपने ब्लॉग पर लिखी हुई है सो मैंने भी कभी पढ़ ली. उस के बाद अपनी पेच्चान छुपाने की जरुरत समजू , इतनी समझदारी  नहीं मुझ में ... शयद यही मेरी पहचान है ... 
हाँ आप को ब्लॉग से हट केर बात करनी हो तो आप बताये उसका भी प्रभंध  है ...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>नमस्कार शास्त्री जी &#8230;.<br />
मुझे पता है आप बहुत ज्ञानी है और आईपी एड्रेस पर ध्यान रखते है और ये बात तो आप ने बडे बडे शब्दों में अपने ब्लॉग पर लिखी हुई है सो मैंने भी कभी पढ़ ली. उस के बाद अपनी पेच्चान छुपाने की जरुरत समजू , इतनी समझदारी  नहीं मुझ में &#8230; शयद यही मेरी पहचान है &#8230;<br />
हाँ आप को ब्लॉग से हट केर बात करनी हो तो आप बताये उसका भी प्रभंध  है &#8230;</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: हमे कुत्ता तक कहा! &#124; सारथी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5788</link>
		<dc:creator>हमे कुत्ता तक कहा! &#124; सारथी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Feb 2009 00:31:11 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1960#comment-5788</guid>
		<description>[...] हर देशभक्त को दुखी होना चाहिये!!  [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] हर देशभक्त को दुखी होना चाहिये!!  [...]</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5786</link>
		<dc:creator>सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2009 18:06:58 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1960#comment-5786</guid>
		<description>बिल्कुल सच बात है जी! 

वैसे किसी के नाम पर कुत्ते का नाम रख लेने पर अपमान किसका होता है... यह भी गहराई से सोचना चाहिए। क्या इस आख्यान से टीपू की वीरता और प्रतिष्ठा हमारे मन में कम हो गयी? वस्तुतः यह तो अंग्रेजों की ओछी मानसिकता का परिचायक ही बना न। 

किसी को गाली देकर हम यह भ्रम पाल लेते हैं कि हमने उसे नीचा दिखा दिया। लेकिन यह भूल जाते हैं कि इस काम में हम खुद नीचे चले जाते हैं। जरा सोचिए! उल्टे यदि अगले ने उस गाली-दान को ग्रहण नहीं किया और ससम्मान वापस कर दिया तो...?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बिल्कुल सच बात है जी! </p>
<p>वैसे किसी के नाम पर कुत्ते का नाम रख लेने पर अपमान किसका होता है&#8230; यह भी गहराई से सोचना चाहिए। क्या इस आख्यान से टीपू की वीरता और प्रतिष्ठा हमारे मन में कम हो गयी? वस्तुतः यह तो अंग्रेजों की ओछी मानसिकता का परिचायक ही बना न। </p>
<p>किसी को गाली देकर हम यह भ्रम पाल लेते हैं कि हमने उसे नीचा दिखा दिया। लेकिन यह भूल जाते हैं कि इस काम में हम खुद नीचे चले जाते हैं। जरा सोचिए! उल्टे यदि अगले ने उस गाली-दान को ग्रहण नहीं किया और ससम्मान वापस कर दिया तो&#8230;?</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: लावण्या</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5785</link>
		<dc:creator>लावण्या</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2009 17:38:14 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1960#comment-5785</guid>
		<description>भारतीय गरिमा को भारतीय मूल का हरेक व्यक्ति उन्नत करेगा तभी विश्व भी 
भारतीयता का सत्कार करेगा ...बुरी नज़रवालोँ का मुँह काला :)
स स्नेह,

- लावण्या</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भारतीय गरिमा को भारतीय मूल का हरेक व्यक्ति उन्नत करेगा तभी विश्व भी<br />
भारतीयता का सत्कार करेगा &#8230;बुरी नज़रवालोँ का मुँह काला <img src='http://sarathi.info/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /><br />
स स्नेह,</p>
<p>- लावण्या</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: विष्‍णु बैरागी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5784</link>
		<dc:creator>विष्‍णु बैरागी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2009 17:18:59 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1960#comment-5784</guid>
		<description>शास्‍त्रीजी! अशिष्‍टता के लिए क्षमा कीजिएगा।
आपकी भावनाओं से असहमत होने की तो कल्‍पना भी आत्‍मघाती है। आपकी बातें भी सही किन्‍तु दिशा में तनिक नकारात्‍मकता अनुभव हो रही है।
क्‍या यह उचित नहीं होगा कि &#039;उनकी&#039; आलोचना करने के बजाय हम अपनी कृतियों की चर्चा करें? इसमें एक कठिनाई आएगी। हमें (याने हम सबको) अपनी कृतियों के बारे में बहुत ही कम जानकारी है। उनके बारे में अखबारों में और विभिन्‍न चैनलों पर गलती से ही कुछ दिखाई देता है।
इसलिए, हमें शुरु से ही शुरु करना होगा। &#039;कभी नहीं से देर भली।&#039; अब तक नहीं कर पाए तो कोई बात नहीं। अब ही शुरु हो जाएं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्‍त्रीजी! अशिष्‍टता के लिए क्षमा कीजिएगा।<br />
आपकी भावनाओं से असहमत होने की तो कल्‍पना भी आत्‍मघाती है। आपकी बातें भी सही किन्‍तु दिशा में तनिक नकारात्‍मकता अनुभव हो रही है।<br />
क्‍या यह उचित नहीं होगा कि &#8216;उनकी&#8217; आलोचना करने के बजाय हम अपनी कृतियों की चर्चा करें? इसमें एक कठिनाई आएगी। हमें (याने हम सबको) अपनी कृतियों के बारे में बहुत ही कम जानकारी है। उनके बारे में अखबारों में और विभिन्‍न चैनलों पर गलती से ही कुछ दिखाई देता है।<br />
इसलिए, हमें शुरु से ही शुरु करना होगा। &#8216;कभी नहीं से देर भली।&#8217; अब तक नहीं कर पाए तो कोई बात नहीं। अब ही शुरु हो जाएं।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: HEY PRABHU YEH TERA PATH</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5782</link>
		<dc:creator>HEY PRABHU YEH TERA PATH</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2009 15:40:26 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1960#comment-5782</guid>
		<description>आइये, भारत कि गरीबी का जश्न मानाये। 
क्यो कि हमने ऑस्कर को जीता है। 
क्यो जीता ? 
किस बात पर जीता ?
स्वाभिमान को ताक मे रखकर ?
यह समझने कि फुर्सत कहा है हमे ?
यह कैसा जशन ?
यह कैसी खुशी ? 

[हे प्रभु यह तेरापन्थ, के समर्थक बनिये और टिपणी देकर हिन्दि ब्लोग जगत मे योगदान दे]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आइये, भारत कि गरीबी का जश्न मानाये।<br />
क्यो कि हमने ऑस्कर को जीता है।<br />
क्यो जीता ?<br />
किस बात पर जीता ?<br />
स्वाभिमान को ताक मे रखकर ?<br />
यह समझने कि फुर्सत कहा है हमे ?<br />
यह कैसा जशन ?<br />
यह कैसी खुशी ? </p>
<p>[हे प्रभु यह तेरापन्थ, के समर्थक बनिये और टिपणी देकर हिन्दि ब्लोग जगत मे योगदान दे]</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: HEY PRABHU YEH TERA PATH</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5781</link>
		<dc:creator>HEY PRABHU YEH TERA PATH</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2009 15:33:06 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1960#comment-5781</guid>
		<description>दादा! देखो कुछ दिन पहले अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लोग पर यही बात कही थी &quot;
यह हरकत तो दशको से विदेशियो द्वारा हो रही है
१९५६ मे  सत्यजित राय कि पहली फिल्म &quot;पथेर पान्चाली&quot; नेहरुजी के हस्तक्षेप से कान फिल्मोत्सव पहुची। फ्रान्सुआ त्रुफो सरीखे महसुर फिल्मकार  पथेर पान्चाली की स्क्रीनिग के बीच से  यह कहकर उठ्करचलते बने  कि भारतियो को हाथ से खाना खाते हुये नही देख सकते बेचारे गरीब! लेकिन &quot;पथेर पान्चाली&quot; 
गरीबी के बारे मे नही थी वह मानवता और मनुष्यता के बारे मे थी। कान मे उसे पुरस्कार ही नही मिले, बल्कि  आज भी गोरे लोग इस फिलम को फिल्म एप्रीशिएसन कोर्स मे इसे कालजयी फिल्म के रुप मे देखते है। 
नरगिस ने १९८० मे सत्यजित राय  कि फिल्मो मे गरीबो के चित्रण मे टीपणी की थी-&quot;मै जब बाहर जाती हु ,तो विदेशी शर्मसार करने वाले सवाल पुछते है कि आपके यहॉ स्कुल है ? क्या आपके वहॉ कारे है?  मुझे तब शर्म और हैरत होती है जब वो पुछते है आप कैसे घरो मे रहते हो ?मुझे लगता है कि मुझे जवाब देना चाहिये कि हम तो पेडो पर रहते है।  &quot;पथेर पान्चाली&quot;  जैसी फिल्मे विदेशो मे इसलिये प्रसिद्ध हुई क्यो कि यह भारत कि अच्छी तस्वीर पेश नही करती है।&quot;

पश्चिम आधुनिक अमीर देशो के आम नागरिक को यह बात समझ नही आती कि भारतीय स्लम मे जानवरो कि जिन्दगी जिनेवाले  लोग आखिर इतने खुश कैसे दिखाई देते है?  

[हे प्रभु यह तेरापन्थ,  के समर्थक बनिये और टिपणी देकर हिन्दि ब्लोग जगत मे  योगदान दे]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>दादा! देखो कुछ दिन पहले अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लोग पर यही बात कही थी &#8221;<br />
यह हरकत तो दशको से विदेशियो द्वारा हो रही है<br />
१९५६ मे  सत्यजित राय कि पहली फिल्म &#8220;पथेर पान्चाली&#8221; नेहरुजी के हस्तक्षेप से कान फिल्मोत्सव पहुची। फ्रान्सुआ त्रुफो सरीखे महसुर फिल्मकार  पथेर पान्चाली की स्क्रीनिग के बीच से  यह कहकर उठ्करचलते बने  कि भारतियो को हाथ से खाना खाते हुये नही देख सकते बेचारे गरीब! लेकिन &#8220;पथेर पान्चाली&#8221;<br />
गरीबी के बारे मे नही थी वह मानवता और मनुष्यता के बारे मे थी। कान मे उसे पुरस्कार ही नही मिले, बल्कि  आज भी गोरे लोग इस फिलम को फिल्म एप्रीशिएसन कोर्स मे इसे कालजयी फिल्म के रुप मे देखते है।<br />
नरगिस ने १९८० मे सत्यजित राय  कि फिल्मो मे गरीबो के चित्रण मे टीपणी की थी-&#8221;मै जब बाहर जाती हु ,तो विदेशी शर्मसार करने वाले सवाल पुछते है कि आपके यहॉ स्कुल है ? क्या आपके वहॉ कारे है?  मुझे तब शर्म और हैरत होती है जब वो पुछते है आप कैसे घरो मे रहते हो ?मुझे लगता है कि मुझे जवाब देना चाहिये कि हम तो पेडो पर रहते है।  &#8220;पथेर पान्चाली&#8221;  जैसी फिल्मे विदेशो मे इसलिये प्रसिद्ध हुई क्यो कि यह भारत कि अच्छी तस्वीर पेश नही करती है।&#8221;</p>
<p>पश्चिम आधुनिक अमीर देशो के आम नागरिक को यह बात समझ नही आती कि भारतीय स्लम मे जानवरो कि जिन्दगी जिनेवाले  लोग आखिर इतने खुश कैसे दिखाई देते है?  </p>
<p>[हे प्रभु यह तेरापन्थ,  के समर्थक बनिये और टिपणी देकर हिन्दि ब्लोग जगत मे  योगदान दे]</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5779</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2009 14:33:40 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1960#comment-5779</guid>
		<description>@common man

आभार कॉमन मेन!!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@common man</p>
<p>आभार कॉमन मेन!!</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: common man</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5778</link>
		<dc:creator>common man</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2009 14:29:31 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1960#comment-5778</guid>
		<description>आपकी लेखनी से निकले हर शब्द से सहमत.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपकी लेखनी से निकले हर शब्द से सहमत.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5777</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2009 12:39:44 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1960#comment-5777</guid>
		<description>@hindi blogge

टिप्पणी के लिये आभार!

यहां बात विदेश जाने, वहां नौकरी करने, आदि कि नहीं हो रही है बल्कि अपना स्वाभिमान विदेशियों को बेचने की बात हो रही है.

आपकी टिप्प्णी के लिये आभार! मैं कुछ दिन से नजर रखें हूँ कि किन आईपी संख्याओं से इस तरह की टिप्पणियां सारथी पर पोस्ट की जा रही हैं. इन आंकडों द्वारा एक निश्चित &quot;पेटर्न&quot; व्यक्त हो गया है. 

अगली एकाध पोस्ट उन लोगों को समर्पित करेंगे जिन को हर बात में आपत्ति होती है लेकिन जो गलत आईडेंटिटी देकर टिप्पणी करते हैं. वे भूल जाते हैं कि आईपी संख्या को छुपाया नहीं जा सकता है जिसके द्वारा मुझे अनुमान हो जाता है कि संभवतया कौन लोग टिप्पणी कर रहे हैं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@hindi blogge</p>
<p>टिप्पणी के लिये आभार!</p>
<p>यहां बात विदेश जाने, वहां नौकरी करने, आदि कि नहीं हो रही है बल्कि अपना स्वाभिमान विदेशियों को बेचने की बात हो रही है.</p>
<p>आपकी टिप्प्णी के लिये आभार! मैं कुछ दिन से नजर रखें हूँ कि किन आईपी संख्याओं से इस तरह की टिप्पणियां सारथी पर पोस्ट की जा रही हैं. इन आंकडों द्वारा एक निश्चित &#8220;पेटर्न&#8221; व्यक्त हो गया है. </p>
<p>अगली एकाध पोस्ट उन लोगों को समर्पित करेंगे जिन को हर बात में आपत्ति होती है लेकिन जो गलत आईडेंटिटी देकर टिप्पणी करते हैं. वे भूल जाते हैं कि आईपी संख्या को छुपाया नहीं जा सकता है जिसके द्वारा मुझे अनुमान हो जाता है कि संभवतया कौन लोग टिप्पणी कर रहे हैं.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: RAJIV MAHESHWARI</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5775</link>
		<dc:creator>RAJIV MAHESHWARI</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2009 10:24:17 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1960#comment-5775</guid>
		<description>&quot;जय हो&quot;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>&#8220;जय हो&#8221;</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Zakir Ali 'Rajneesh'</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5774</link>
		<dc:creator>Zakir Ali 'Rajneesh'</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2009 10:11:58 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1960#comment-5774</guid>
		<description>मैंने तो टीपू नाम के किसी कुत्ते के दर्शन नहीं किए, किन्तु इसी बहाने एक रोचक बात पता चली।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने तो टीपू नाम के किसी कुत्ते के दर्शन नहीं किए, किन्तु इसी बहाने एक रोचक बात पता चली।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: hindi blogge</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1960/comment-page-1#comment-5773</link>
		<dc:creator>hindi blogge</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2009 09:51:14 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/1960#comment-5773</guid>
		<description>एपी तो खुद विदेश मे पढ़ कर आये हैं तब आप का स्वाभिमान कहां था और अगर आप के हिसाब से चले तो समीर , राकेश जीतू , पंकज नरूला सब को विदेशी पैसा छोड़ कर वापस आ जाना चाहिये क्युकी नहीं तो वो देश भक्त नहीं हैं</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>एपी तो खुद विदेश मे पढ़ कर आये हैं तब आप का स्वाभिमान कहां था और अगर आप के हिसाब से चले तो समीर , राकेश जीतू , पंकज नरूला सब को विदेशी पैसा छोड़ कर वापस आ जाना चाहिये क्युकी नहीं तो वो देश भक्त नहीं हैं</p>
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