युनिकोड की जरूरत समझने के बाद अगला प्रश्न यह है कि चिट्ठा कहां पर स्थापित किया जाये. इसके लिये दो विकल्प हैं: मुफ्त लभ्य वेबसाईटों पर या अपने खुद के वेबसाईट पर. दोनों के अपने फायदे और नुक्सान हैं.
१. मुफ्त वेबसाईट: अकसर काफी बडी कंपनियां लोगों को समान्य वेबसाईट के लिये ब्लाग (चिट्ठा) के लिये जगह मुफ्त में प्रदान करते हैं.इसका फायदा यह है कि आपकी जेब से इस कार्य के लिय फूटी कौडी भी खर्च नहीं होती है. www.Blogger.Com इस का अच्छा उदाहरण है. हिन्दी अपनाने के मामले में भी यहां काफी सहूलियत है. आप प्रोग्रामिंग का क ख ग नहीं जानते तो भी कोई परेशानी न होगी क्योंकि मोटे तौर पर एक नए चिट्ठे की जो जरूरते हैं उन सब का ख्याल पहले से कर लिया गया है और आपको अधिक कुछ नहीं करना पडेगा.
नुक्सान यह है कि इन चिट्ठों पर आपका पूर्ण नियंत्रण नहीं रहता. यदि आप सामान्य से अधिक क्रियाशील व्यक्ति हैं तो कई बार इन सीमाओं के बारे में आप को बहुत कुण्ठा हो सकती है — खासकर यदि आप प्रोग्रमिंग में कुछ दखल रखते हैं तो.
२. अपने खुद की वेबसाईट: यदि आप १००० रुपया प्रति वर्ष खर्च कर सकते हैं तो आप अपने खुद के मालिकाना हक का वेबसाईट या चिट्ठा पंजीकृत कर सकते हैं. इसके कई फायदे हैं. पहला यह है कि आप अपनी पसंद का नाम चुन सकते हैं. दूसरा यह कि इस पर आपका पूर्ण नियंत्रण रहता है. तीसरा यह है कि आप आराम से अपने प्रोग्रामिंग का शौक पूरा कर सकते हैं, ठोकपीट कर सकते हैं.
नुक्सान यह है कि प्रोग्रामिंग और रखरखाव/साजसज्जा पर कुछ अधिक समय देना पडेगा.
– शास्त्री जे सी फिलिप
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May 7th, 2007 at 7:16 pm
शास्त्री जी; आपकी यह सीरीज तो बहुत ही अच्छी बनती जा रही है.
May 7th, 2007 at 9:49 pm
@धुरविरोधी
प्रोत्साहन के लिये आभार !!
May 8th, 2007 at 4:58 am
स्वागत है आपक हिन्दी चिट्ठा जगत में । अच्छा हो अगर आप कुछ साईटस का नाम भी बता देते जो वेब साईट को होस्ट करते हैं ।
May 8th, 2007 at 6:54 am
@meraepanna
मेरे चिट्ठे पर पधारने के लिये धन्यवाद! सुझाव के लिये भी धन्यवाद. लेख के अंत मे इस तरह की तकनीकी जानकारी अलग से देने की सोच रहा हूं.
May 9th, 2007 at 1:27 pm
Very good Very good Very good Very good Very good Very good Very good Very good Very good Very good
May 9th, 2007 at 11:50 pm
@Hindustani Raj
मेरे ठीये पर पधारने के लिये शुक्रिया. इतना सारा प्रोत्साहन! यह तो मेरे लिये साल भर दौडने के लिये पर्याप्त होगा!!!
– शास्त्री जे सी फिलिप