प्रश्न: शास्त्री जी, कुछ दिन पहले आप ने हम सब से गूगल के नॉल पर हिन्दी में लिखने को कहा. आज आप ने आह्वान किया कि विकिपीडिया पर हिन्दी में आलेख लिखें. सवाल है कि इन में से कौन सा बेहतर है. मुझे तो सब गडबड मालूम पडता है. बाल नोचने की इच्छा होती है.
मेरे आलेख यह विकिपीडिया क्या बला है?? के छपने के बाद किसी अनाम सज्जन ने सुझाव-बॉक्स की सहायता से यह प्रश्न भेजा है. उनका इशारा विकिपीडिया के लेख के साथ नॉल: आईये हिन्दी के लिये कुछ करें — 01 और नॉल: आईये हिन्दी के लिये कुछ करें — 02 की ओर है.
उत्तर: प्रिय दोस्त कई बार गडबड या असंतुलन किसी वस्तु में नहीं, बल्कि देखने वाले की नजर में होता है. एक से अधिक चुनाव की उपलब्धि को आप गडबड के रूप में देखते हैं. लेकिन विषय के दूसरे पहलू को जरा देखने की कोशिश करें जो इस प्रकार है:
कल अनुनाद जी ने अपने पत्र में लिखा था “हिन्दी विकिपिडिया का समुचित विकास होने पर हिन्दी में ज्ञान की कमी का रोना सदा के लिये बन्द किया जा सकता है।”
हम सब जानते हैं कि अंग्रेजी की तुलना में हिन्दी में पर्याप्त आलेख किसी भी विषय पर नहीं मिल पाते है. लोग इसका बडा रोना रोते हैं. लेकिन विकिपीडिया के आने से इस रोने का इलाज करने के लिये एक कारगर दवा मिल गई है. नॉल के आने से दो दवायें हो गई हैं, न कि सब गडबड हो गया है.
आज जालजगत में अंग्रेजी के कई विश्व/ज्ञानकोश उपलब्ध हैं. हरेक की अपनी खासियत है, अपनी उपयोगिता है. किसी को एक पसंद है, किसी को दूसरा पसंद है. कई सब का सहारा लेते हैं. महज इसलिये कोई बाल नहीं नोचता कि एक से अधिक चुनाव लभ्य है. बल्कि जब ज्ञान के लिये एक से अधिक मुफ्त स्रोत उपलब्ध हो जाता है तो हरेक को फायदा होता है.
यह हमारा भाग्य है कि अब हिन्दी में दो ज्ञान/विश्वकोश की नीव पड गई है. हम में से हरेक व्यक्ति के पास ऐसी जानकारियां हैं जिन से दूसरों को फायदा हो सकता है. आप के शहर के एक अज्ञात, लेकिन महत्वपूर्ण, एतिहासिक स्थल से लेकर आपके शहर की लुप्त होती कलाओं के बारे में आप से बेहतर कोई नहीं लिख सकता!!
बाल नोचना छोडिये. लिखना शुरू कर दीजिये. हिन्दी में ज्ञान की कमी का रोना रोने के बदले आईये हिन्दी के लिये कुछ करने के लिये कमर कस ले!!
Article Bank | Net Income | Indian Coins | Physics Made Simple | India
Photograph: Pulling My Hair Out! by Katalyst (is still a…












March 12th, 2009 at 5:52 am
सही कहा आपने कि विकल्प असंतुलन नहीम पैदा करता बलिक दृष्टि को और भी अधिक पैनी और योग्य बनाते हैं । धन्यवाद ।
March 12th, 2009 at 7:50 am
आपका कल का लेख पढने के बाद विकिपीडिया पर तीन लेख लिखे है अभी विकिपीडिया को थोडा समझ रहा हूँ ,विकिपीडिया के लेख में फोटो लगाना अभी समझ नहीं आया हो सके तो बताने का कष्ट करे |
March 12th, 2009 at 8:47 am
विकल्पों का रहना कितनी अच्छी बात है.
March 12th, 2009 at 9:21 am
sir apka abhiyan kafi sarahniya hai
March 12th, 2009 at 9:34 am
सही कहा.. अब दो दवा हो गई है… क्या एक पर लिखा आलेख दुसरे पर कोपी कर सकते हैं?
March 12th, 2009 at 10:55 am
Hi Sirji…nice to go through your blog…and it is well equipped… which typing tool are you using for typing in Hindi…? recently i was searching for the same and found…”quillpad”…do you use the same…?
learnt that it has an option of Rich Text too..? which Google is not providing. and also it provides 9 Indian Languages and Google is providing only 5…!
will you tell me your opinion on the same…?
http://www.quillpad.in
keep writing..
jai Ho…
March 12th, 2009 at 12:08 pm
हिंदी भाषा के किसी भी रूप में प्रसार के लिए आप सभी को मेरी शुभकामनाये.
परन्तु गूगल नौल और विकीपीडिया को हिंदी से लीप देने के पहले हम क्या इस बारे में भी सोच हैं की ये लोग होते कौन हैं विशुद्ध भारतीय भाषा में लिखे गए भारतीय ज्ञान को सरे विश्व में वितरित करने का हक़ रखने वाले? मैं ऑनलाइन सामग्री पर लागू होने वाले सभी तरह के लाइसेंस के बारे में जानता हूँ परन्तु फिर भी सहमत नहीं हूँ की भारतीय अपनी अकूत ज्ञान सम्पदा को अपनी ही आंचलिक भाषा में किसी विदेशी के हाथों सौंप दे. अगर हर साल १० लाख से अधिक कंप्यूटर अभियंता या जानकार बनाने वाली भारत की युनीवर्सिटीज के होनहार छात्र अगर एक स्वदेशी ज्ञान स्थल नहीं बना सके तो कोई बात नहीं, परन्तु इंटरनेट पर चाँद निशुल्क सुविधाओं और औजारों के लालच में आकर अपना सर्वस्व विशुद्ध व्यापारिक मानसिकता वाले विदेशियों के चरणों में न्योछावर करने का मैं विरोध करता हूँ.
शास्त्री जी आप इतिहास के बेहतर जानकार हैं. आपको अवश्य पता होगा की कब कब और कैसे विश्व के तमाम भागों में तमाम आचार संहिताओं और वाणिज्य नियमों को ताक पर रख कर सूचनाओं का दुरूपयोग किया गया है. विशेष कर अमेरिका द्वारा.. इसलिए अधिक लिखने की आवश्यकता नहीं.
March 12th, 2009 at 12:53 pm
हिन्दी लेखन के प्रेरणा जगाने वाला आलेख, आभार।
होली की हार्दिक शुभकामनाऍं।
March 12th, 2009 at 2:11 pm
गलती से एक बार में भी देख चुका हूँ ।
March 12th, 2009 at 10:34 pm
शास्त्री जी मै तेयार हुं, शायद ओर लोगो को भी ढुढ लू, आप भी देखे,पुनीत ओमर जी की बात भी हमारे से मिलती है, ओर हो सकता है मै अकेला ही यह कर्त्यब्य निभा लू, लेकिन इस समय मेरी नोकरी को थोडा खतरा है, ओर अगर नोकरी जाती है, तो मुझे कोई अपना ही धंधा खोलना पडेगा,उस मे मेरे पास समय बिलकुल नही रहेगी इस ब्लांगिग के लिये, लेकिन अगर धंधा चल गया तो यह सारा खर्च मै ऊठाने को तेयार हू, लेकिन सब से पहले तो उमीद है हमारी कंपनी चलती रहे, ओर नोकरी बनी रहे, पिछले तीन साल से यह कंपनी लडखडा रही है, गलत फ़ेसलो के कारण, वेसे मंदी का असर इस कंपनी को नही, नया मालिक हद से ज्यादा…., बहुत से गलत फ़ेसले करने से हम सब इस समय इस मुसिबत मै है, अगर इस साल मालिक को अकल आ गई तो ठीक….. वरना १५० लोग घर मै बेठ जायेगे.
इस लिये अभी मै इस बारे थोडा समय चाहुगां
आज का लेख ओर टिपण्णियां सब अच्छी लगी, पुनित जी की बात मन को भा गई.
धन्यवाद
March 12th, 2009 at 11:50 pm
ज्ञान बांटने से बढता है, संकुचित नहीं होता।
March 14th, 2009 at 9:26 am
[...] नॉल, विकीपीडिया — सब गडबड है!! [...]