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	<title>Comments on: सब ओर उत्तरभारतीय हैं!!</title>
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	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: पुनीत ओमर</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2107/comment-page-1#comment-6498</link>
		<dc:creator>पुनीत ओमर</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Apr 2009 08:41:17 +0000</pubDate>
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		<description>ईष्ट देव की बात से पूर्ताया सहमत.. क्यों की मैं स्वयं इस सब को बहुत करीब से देख चूका हूँ.
मेरा कभी जाना तो नहीं हो सका पर अच्छा लगा केरल के बारे में जानकार.. और उससे भी ज्यादा अच्छा लगा ये जानकार की उत्तर भारतीय लोगों ने दिहाडी मजदूरी,  साफ़ सफाई के काम, चाट ठेले और रेहडी के व्यापार में पूरे देश में डंका बजा रखा है..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ईष्ट देव की बात से पूर्ताया सहमत.. क्यों की मैं स्वयं इस सब को बहुत करीब से देख चूका हूँ.<br />
मेरा कभी जाना तो नहीं हो सका पर अच्छा लगा केरल के बारे में जानकार.. और उससे भी ज्यादा अच्छा लगा ये जानकार की उत्तर भारतीय लोगों ने दिहाडी मजदूरी,  साफ़ सफाई के काम, चाट ठेले और रेहडी के व्यापार में पूरे देश में डंका बजा रखा है..</p>
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		<title>By: Isht Deo Sankrityaayan</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2107/comment-page-1#comment-6493</link>
		<dc:creator>Isht Deo Sankrityaayan</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2009 14:08:27 +0000</pubDate>
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		<description>जब पूरा भारत एक है तो इसमें फिर उत्तर-दक्षिण और पूरब-पश्चिम की रट लगाने का क्या मतलब है? सच तो यह है कि आम आदमी ऐसा सोचता भी नहीं है. मुम्बई का कोई आम आदमी उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ चली मुहिम में न तो शामिल हुआ है और न ऐसी किसी मुहिम से उसे कोई सहानुभूति है. यही दूसरी जगहों का भी सच है. राजनेता अपने फ़ायदे के लिए पहले भी देश को बांटने की साजिश करते रहे हैं और आज भी कर रहे हैं. इस मामले में हिंसा भी उनके गुर्गों का काम होता है. इसके ख़िलाफ अब सबको मन बनाकर खड़े होना होगा.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जब पूरा भारत एक है तो इसमें फिर उत्तर-दक्षिण और पूरब-पश्चिम की रट लगाने का क्या मतलब है? सच तो यह है कि आम आदमी ऐसा सोचता भी नहीं है. मुम्बई का कोई आम आदमी उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ चली मुहिम में न तो शामिल हुआ है और न ऐसी किसी मुहिम से उसे कोई सहानुभूति है. यही दूसरी जगहों का भी सच है. राजनेता अपने फ़ायदे के लिए पहले भी देश को बांटने की साजिश करते रहे हैं और आज भी कर रहे हैं. इस मामले में हिंसा भी उनके गुर्गों का काम होता है. इसके ख़िलाफ अब सबको मन बनाकर खड़े होना होगा.</p>
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		<title>By: HEY PRABHU YEH TERA PATH</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2107/comment-page-1#comment-6492</link>
		<dc:creator>HEY PRABHU YEH TERA PATH</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2009 12:59:29 +0000</pubDate>
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		<description>पर इसमे एक सोचने वाली बात यह भी है कि गॉव खाली हो रहे है शहरो मे भिड बढने से व्यवस्थाऐ चरमरा जाती है</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पर इसमे एक सोचने वाली बात यह भी है कि गॉव खाली हो रहे है शहरो मे भिड बढने से व्यवस्थाऐ चरमरा जाती है</p>
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		<title>By: HEY PRABHU YEH TERA PATH</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2107/comment-page-1#comment-6491</link>
		<dc:creator>HEY PRABHU YEH TERA PATH</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2009 12:55:44 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2107#comment-6491</guid>
		<description>सही कहॉ जी पुरा देश अपना, लोग अपने, आप अपने तो फिर क्या टेशन।  आप  और ज्ञानदत्त जी आऐ दिन अपने अपने शहरो मे आम लोगो के दैनिक जीवनचर्या पर कुछ ना कुछ लिखते रहतो हो, जानकारीयो के लिऐ यह आप लोगो का यह क्रम अच्छा लगा। आभार 
हे प्रभु यह तेरापन्थ
मुम्बई टाईगर</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सही कहॉ जी पुरा देश अपना, लोग अपने, आप अपने तो फिर क्या टेशन।  आप  और ज्ञानदत्त जी आऐ दिन अपने अपने शहरो मे आम लोगो के दैनिक जीवनचर्या पर कुछ ना कुछ लिखते रहतो हो, जानकारीयो के लिऐ यह आप लोगो का यह क्रम अच्छा लगा। आभार<br />
हे प्रभु यह तेरापन्थ<br />
मुम्बई टाईगर</p>
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		<title>By: ज्ञानदत्त पाण्डेय</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2107/comment-page-1#comment-6490</link>
		<dc:creator>ज्ञानदत्त पाण्डेय</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2009 09:02:16 +0000</pubDate>
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		<description>यह पढ़ कर लगता है कि भारत सही मायने में राष्ट्र बन रहा है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>यह पढ़ कर लगता है कि भारत सही मायने में राष्ट्र बन रहा है।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: ताऊ रामपुरिया</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2107/comment-page-1#comment-6489</link>
		<dc:creator>ताऊ रामपुरिया</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2009 06:41:21 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2107#comment-6489</guid>
		<description>मेरे हिसाब से तो अब सारे भारत मे सब प्रांतों के लोग न्युनाधिक बस गये हैं. हमारे यहां इतने लोग केरल से हैं कि केरल की आई हुई सभी सब्जियां मिल जाती हैं. वैसे आप सही कह रहे हैं कि मा्रव्व्डी, सिन्धी, गुजराती,यूपी और बिहार वाले ज्यादा मेहनत कश लोग हैं जो सब जगह हैं और अपनी मेहनत के बल पर आगे आये हैं.

रामराम.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे हिसाब से तो अब सारे भारत मे सब प्रांतों के लोग न्युनाधिक बस गये हैं. हमारे यहां इतने लोग केरल से हैं कि केरल की आई हुई सभी सब्जियां मिल जाती हैं. वैसे आप सही कह रहे हैं कि मा्रव्व्डी, सिन्धी, गुजराती,यूपी और बिहार वाले ज्यादा मेहनत कश लोग हैं जो सब जगह हैं और अपनी मेहनत के बल पर आगे आये हैं.</p>
<p>रामराम.</p>
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		<title>By: दिनेशराय द्विवेदी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2107/comment-page-1#comment-6488</link>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2009 06:33:14 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2107#comment-6488</guid>
		<description>ऐसा नहीं कि सब जगह उत्तर भारतीय हैं। आप चूंकि उत्तर भारतीय हैं इस कारण से वे नजर आते हैं। यहाँ कोटा में मैं दक्षिण भारतियों को देखता हूँ। अनेक तो ऐसे रच पच गए हैं कि अब वे दक्षिण भारतीय लगते ही नहीं हैं। किसी अस्पताल में चले जाएँ केरल के लोग मिलेंगे। निर्माम कार्यों में, तकनीकी कार्यों में केरल के लोग मिलेंगे। तमिल और तेलगू भी मिलेंगे। देश में अब एक दूसरे प्रदेशों में काम करने जाने की झिझक कम हो चली है। एक नए भारत का निर्माण हो रहा है। आप किसी देश में चले जाइए वहाँ भारतीय मिलेंगे। इस तरह एक नई दुनिया का निर्माण हो रहा है। नयी तकनीक दुनिया को मथ रही है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ऐसा नहीं कि सब जगह उत्तर भारतीय हैं। आप चूंकि उत्तर भारतीय हैं इस कारण से वे नजर आते हैं। यहाँ कोटा में मैं दक्षिण भारतियों को देखता हूँ। अनेक तो ऐसे रच पच गए हैं कि अब वे दक्षिण भारतीय लगते ही नहीं हैं। किसी अस्पताल में चले जाएँ केरल के लोग मिलेंगे। निर्माम कार्यों में, तकनीकी कार्यों में केरल के लोग मिलेंगे। तमिल और तेलगू भी मिलेंगे। देश में अब एक दूसरे प्रदेशों में काम करने जाने की झिझक कम हो चली है। एक नए भारत का निर्माण हो रहा है। आप किसी देश में चले जाइए वहाँ भारतीय मिलेंगे। इस तरह एक नई दुनिया का निर्माण हो रहा है। नयी तकनीक दुनिया को मथ रही है।</p>
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		<title>By: PN Subramanian</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2107/comment-page-1#comment-6487</link>
		<dc:creator>PN Subramanian</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2009 05:08:51 +0000</pubDate>
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		<description>पढ़ कर बड़ा अच्छा लगा. यह बहुत ही अच्छा संकेत है. इसका एक बड़ा कारण यह भी है की आजकल केरलवाले संपन्न होते जा रहे हैं. मेहनत का काम करना नहीं चाहते इसलिए श्रम साध्य उपक्रमों में बाहर से लोग आते हैं तो किसी को परेशानी भी नहीं है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पढ़ कर बड़ा अच्छा लगा. यह बहुत ही अच्छा संकेत है. इसका एक बड़ा कारण यह भी है की आजकल केरलवाले संपन्न होते जा रहे हैं. मेहनत का काम करना नहीं चाहते इसलिए श्रम साध्य उपक्रमों में बाहर से लोग आते हैं तो किसी को परेशानी भी नहीं है.</p>
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		<title>By: अनिल कुमार</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2107/comment-page-1#comment-6486</link>
		<dc:creator>अनिल कुमार</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2009 04:42:05 +0000</pubDate>
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		<description>लोगों के आपस में घुलने-मिलने से ही भारत वाकई में &quot;एक&quot; देश बनेगा। सकारात्मक आलेख! धन्यवाद!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>लोगों के आपस में घुलने-मिलने से ही भारत वाकई में &#8220;एक&#8221; देश बनेगा। सकारात्मक आलेख! धन्यवाद!</p>
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