सारथी चिट्ठा-अवलोकन: 3

सारथी चिट्ठा अवलोकन” शास्त्री जे सी फिलिप द्वारा चुने चिट्ठों एवं अन्य विषयों की जानकारी नियमित रूप से प्रकाशित करता है — इस उम्मीद के साथ कि यह स्वान्त: सुखाय कार्य जनोपयोगी भी सिद्ध होगा. हिन्दी एवं हिन्दुस्तान की उन्नति के लिये यह जरूरी है कि हम एक दूसरे को प्रोत्साहित करें, एवं एक दूसरे के ज्ञान, गुण, एवं योगदान जन जन की नजर में लायें.

6 जून 2007 को प्रकाशित
इतिहास
“एक हमारा साथी था, जो चला गया” …
श्री अमृतलाल नागर – भाग — १

श्री अमृतलाल नागर -सँस्मरण – भाग — २
श्री अमृतलाल नागर – संस्मरण – भाग — ३
श्री अमृतलाल नागर – संस्मरण – भाग — ४
श्री अमृतलाल नागर – संस्मरण – भाग — ५

काव्य
कन्यादान
जनादेश
तू मानव है, मानव जैसी बात कर
खबर, देशी
नदियों का नया ठेकेदार-कोका-कोला
चिन्तन
भारत के तालिबानी – संस्कृति के स्वयम्भू पहरुए
अपने ही लोग फूट डालने की नीति पर चल रहे हैं

जनोपयोगी
पैसा कमाने के गुर
एड्स का प्रसार
जाल-जगत
एक्रोबेट रीडर से मुक्ति पाईये, फॉक्सइट ट्राई कीजिये
टिप्पणी/परिचय
अनुगूँज 23: ऑस्कर, हिन्दी और बॉलीवुड
भाषा जगत
अच्‍छी हिंदी: एक
अच्‍छी हिंदी: दो
विश्लेषण
मुझे दाल भात खाने दीजिये..
Life in a METRO, दौड़ते-भागते शहर की कहानी
लोगों का पथ और यात्रा अवरुध्द करना क्या उचित है?
वैज्ञानिक
पर्यावरण की नौटंकी
पर्यावरण दिवस…. कुछ विशेष उपाय…
हास्य-व्यंग
वीरेन्द्र जैन की छः व्यंग्य रचनाएं
मुन्ना भाई मीट्स हिंदी ब्लागर्स-1
ब्लॉगिंग में भी आरक्षण हो

6 Responses to “सारथी चिट्ठा-अवलोकन: 3”

  1. ghughutibasuti Says:

    मेरी रचना को चुने हुए चिट्ठों में स्थान देने के लिए धन्यवाद ।
    घुघूती बासूती

  2. Shastri JC Philip Says:

    @घुघूती बासूती
    रचना को हम ने स्थान नहीं दिया बल्कि उसने अपने आप को इस स्थान तक पहुंचाया है.

  3. दीपकबापू कहिन Says:

    शास्त्री जी, आपके प्रयास देखकर प्रसन्नता हो रही है-दीपक भारत दीप

  4. Sanjeet Tripathi Says:

    आभार आपका!!!
    मुन्ना भाई की अगली किश्त भी आ चुकी है, एक नज़र डाल लें।
    धन्यवाद!!

  5. shanoo Says:

    शास्त्री जी बहुत-बहुत शुक्रिया मेरी रचना को आपने एक बार फ़िर अपनी पसंद मै शामिल किया..मै पूरी कोशिश करुंगी कि आगे भी मै आपकी पसंद के अनुकूल बन सकूँ…

    सुनीता(शानू)

  6. lavanya / लावण्या, Says:

    “एक हमारा साथी था, जो चला गया” …( श्री अमृतलाल नागर ) – भाग — १ से — ५ तक का लिन्क “इतिहास” वर्ग मेँ देकर आपने श्री अमृत लाल जी नागर को आज ब्लोग जगत मेँ स्थान देकर जीवित कर दिया है उसके लिये आपकी आभारी हूँ

    स स्नेह,
    लावण्या

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