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	<title>Comments on: कौन हैं ये तथाकथित मठाधीश?</title>
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	<link>http://sarathi.info/archives/2226</link>
	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: alpana verma</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6907</link>
		<dc:creator>alpana verma</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 20:59:34 +0000</pubDate>
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		<description>bahut sahi likha hai aap ne --
पूंजीनिवेश किये बिना कभी किसी को कुछ नहीं मिलता. आप जितना अधिक फल चाहते हैं, उतनी ही अधिक पेड की सेवा, खादपानी करनी पडेगी. 
-yah to  aajmayee hui bat hai...
-agar blogging mein inactive ho gaye to aksar log bhool bhi jaldi hi jaatey hain.
-Is lekh mein bahut hi achcha vishleshan kiya gaya hai.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>bahut sahi likha hai aap ne &#8211;<br />
पूंजीनिवेश किये बिना कभी किसी को कुछ नहीं मिलता. आप जितना अधिक फल चाहते हैं, उतनी ही अधिक पेड की सेवा, खादपानी करनी पडेगी.<br />
-yah to  aajmayee hui bat hai&#8230;<br />
-agar blogging mein inactive ho gaye to aksar log bhool bhi jaldi hi jaatey hain.<br />
-Is lekh mein bahut hi achcha vishleshan kiya gaya hai.</p>
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	<item>
		<title>By: anil pusadkar</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6906</link>
		<dc:creator>anil pusadkar</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 19:14:58 +0000</pubDate>
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		<description>सहमत हूं आपसे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सहमत हूं आपसे।</p>
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	<item>
		<title>By: venus kesari</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6905</link>
		<dc:creator>venus kesari</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 17:43:26 +0000</pubDate>
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		<description>@ सारथी जी 
सत्य वचन कहा आपने 
@समीर जी 
आपकी कही सभी बाते मानना चाहता हूँ मगर कभी कभी ऐसी पोस्ट भी गलती से पढ़ लेता हूँ जहाँ टिप्पडी न ही करने में समझदारी हो तो खिसक लेता हूँ   

वीनस केसरी</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@ सारथी जी<br />
सत्य वचन कहा आपने<br />
@समीर जी<br />
आपकी कही सभी बाते मानना चाहता हूँ मगर कभी कभी ऐसी पोस्ट भी गलती से पढ़ लेता हूँ जहाँ टिप्पडी न ही करने में समझदारी हो तो खिसक लेता हूँ   </p>
<p>वीनस केसरी</p>
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		<title>By: SHWETA KOHLI</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6904</link>
		<dc:creator>SHWETA KOHLI</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 16:09:40 +0000</pubDate>
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		<description>Respected Shastriji, it is difficult to select the &#039;MATHADISH &#039;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Respected Shastriji, it is difficult to select the &#8216;MATHADISH &#8216;</p>
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		<title>By: Kajal Kumar</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6903</link>
		<dc:creator>Kajal Kumar</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 15:49:24 +0000</pubDate>
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		<description>मुझे तो पता ही नहीं था की यहाँ भी मठाधीशबाज़ी होती है ! :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मुझे तो पता ही नहीं था की यहाँ भी मठाधीशबाज़ी होती है ! <img src='http://sarathi.info/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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	<item>
		<title>By: हमारी कमाई यही है:- ताऊ   हे प्रभु यह तेरा-पथ"</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6902</link>
		<dc:creator>हमारी कमाई यही है:- ताऊ   हे प्रभु यह तेरा-पथ"</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 14:12:38 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2226#comment-6902</guid>
		<description>@ ताऊजी ने कहा- &quot;नियमित लिखे..उतना ही नियमित जितना नियमित आप आफ़िस जाते हैं. इस धंधे मे कमाई नही है…इसमे कमाई यही है जो आज मेरे और समीर जी के नाम का जो हवाला शा्श्त्री जी ने दिया है…वो ही कमाई है..रुपया पैसा सब बेकार है उसके सामने. अब ये आप पर निर्भर करता है कि आपको कैसी कमाई चाहिये?

उपर लिखे शब्दो को ध्यान से पढे&gt;  ताऊजी ने ब्लोगजीवन के लिऐ बडी ही मजबुत टिकाऊ वाली बात कर गऐ है। ताऊजी ने, ब्लोग दुनिया मे हमारी क्या भुमिका होनि चाहिए  का वास्तविक निवारण बताया। यह बात सही है घर एवम समय फुक कर हमे ब्लोग लिखना है जिसमे कमाई कुछ नही है। अगर यहॉ कोई कमाई है तो वह है- प्यार, मोहब्बत, दोस्ती, बन्धन, एवम लोगो का आर्शिवाद। इसलिए  हे प्रभु, श्री समीरलालजी (महाताऊ भारत) एवम पी सी रामपुरीयॉजी
 (ताऊ, भारत} को ससम्मान अच्छी विचार धाराओ सकारात्मक सन्देशो के लिऐ बधाई।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@ ताऊजी ने कहा- &#8220;नियमित लिखे..उतना ही नियमित जितना नियमित आप आफ़िस जाते हैं. इस धंधे मे कमाई नही है…इसमे कमाई यही है जो आज मेरे और समीर जी के नाम का जो हवाला शा्श्त्री जी ने दिया है…वो ही कमाई है..रुपया पैसा सब बेकार है उसके सामने. अब ये आप पर निर्भर करता है कि आपको कैसी कमाई चाहिये?</p>
<p>उपर लिखे शब्दो को ध्यान से पढे&gt;  ताऊजी ने ब्लोगजीवन के लिऐ बडी ही मजबुत टिकाऊ वाली बात कर गऐ है। ताऊजी ने, ब्लोग दुनिया मे हमारी क्या भुमिका होनि चाहिए  का वास्तविक निवारण बताया। यह बात सही है घर एवम समय फुक कर हमे ब्लोग लिखना है जिसमे कमाई कुछ नही है। अगर यहॉ कोई कमाई है तो वह है- प्यार, मोहब्बत, दोस्ती, बन्धन, एवम लोगो का आर्शिवाद। इसलिए  हे प्रभु, श्री समीरलालजी (महाताऊ भारत) एवम पी सी रामपुरीयॉजी<br />
 (ताऊ, भारत} को ससम्मान अच्छी विचार धाराओ सकारात्मक सन्देशो के लिऐ बधाई।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: ताऊ रामपुरिया</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6901</link>
		<dc:creator>ताऊ रामपुरिया</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 13:25:46 +0000</pubDate>
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		<description>भूल सुधार : 

लिगों = लोगों</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भूल सुधार : </p>
<p>लिगों = लोगों</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: ताऊ रामपुरिया</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6900</link>
		<dc:creator>ताऊ रामपुरिया</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 13:21:18 +0000</pubDate>
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		<description>आज शाश्त्री जी ने बहुत ही बढिया प्रसंग ऊठाया और उस पर उतनी ही सुंदर बात कमेंट के रुप मे समीरलाल जी ने कही है. 

अगर कोई माने तो यही बाते समीरलाल्जी ने मुझे शुरुआती दिनों मे कही थी.  इसीलिये मैं अपना चित्ट्ठाकारी का गुरु उनको मानता हूं. और आज वही बाते वो सार्वजनिक रुप से कह रहे हैं. इसका मतलब साफ़ है कि गुरु या कहें कि वरिष्ठ लिगों की नियत मे कोई खोट नही है.

अगर कोई कमी है तो शिष्य मे ही है.  बादल तो पानी बरसा ही रहा है..अब हम अपने घडे का मुंह ही उल्टा करके बैठ जायें तो हमारा घडा तो खाली ही रहने वाला है.

हां यहां कोई जरुरी नही है कि सब आपको हाथों हाथ ही लेंगे. नियमित लिखे..उतना ही नियमित जितना नियमित आप आफ़िस जाते हैं. इस धंधे मे कमाई नही है...इसमे कमाई यही है जो आज मेरे और समीर जी के नाम का जो हवाला शा्श्त्री जी ने दिया है...वो ही कमाई है..रुपया पैसा सब बेकार है उसके सामने. अब ये आप पर निर्भर करता है कि आपको कैसी कमाई चाहिये?

अब ज्यादा क्या कहें?  गुरु समीर जी ने सब कुछ साफ़ साफ़ तो समझा दिया है. 

किसी भी हालत मे कुंठाग्रस्त ना हों...बस अपने लक्ष्य को प्राप्त करने मे आनंद महसूस करें..आप देखेंगे कि आपके आसपास काफ़ी सारे मित्र इकट्ठे हो गये हैं.... यहां सभी बहुत सह्रदय और नेक लोग हैं...

कभी कभी तल्खी की कोई बात हो भी जाये तो उस पर मिट्टी डालिये  आखिर एकाध गंदी मछली तो सब जगह होती ही है.  आप जिसे बडी मछली समझते हैं वो भी हो सकती है. फ़िक्र मत पालिये..आखिर ऐसे व्यवहार करने वाली यही बडी मछली ही बाहर जायेगी इस तालाब से. 

माननिय शाश्त्री जी का आभार यहां इज्जत बख्सने के लिये कि आज हमारे गुरुदेव के साथ बैठाकर प्रसंशा कर डाली. अब क्या पता हम इस लायक हैं भी या नही.

रामराम.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आज शाश्त्री जी ने बहुत ही बढिया प्रसंग ऊठाया और उस पर उतनी ही सुंदर बात कमेंट के रुप मे समीरलाल जी ने कही है. </p>
<p>अगर कोई माने तो यही बाते समीरलाल्जी ने मुझे शुरुआती दिनों मे कही थी.  इसीलिये मैं अपना चित्ट्ठाकारी का गुरु उनको मानता हूं. और आज वही बाते वो सार्वजनिक रुप से कह रहे हैं. इसका मतलब साफ़ है कि गुरु या कहें कि वरिष्ठ लिगों की नियत मे कोई खोट नही है.</p>
<p>अगर कोई कमी है तो शिष्य मे ही है.  बादल तो पानी बरसा ही रहा है..अब हम अपने घडे का मुंह ही उल्टा करके बैठ जायें तो हमारा घडा तो खाली ही रहने वाला है.</p>
<p>हां यहां कोई जरुरी नही है कि सब आपको हाथों हाथ ही लेंगे. नियमित लिखे..उतना ही नियमित जितना नियमित आप आफ़िस जाते हैं. इस धंधे मे कमाई नही है&#8230;इसमे कमाई यही है जो आज मेरे और समीर जी के नाम का जो हवाला शा्श्त्री जी ने दिया है&#8230;वो ही कमाई है..रुपया पैसा सब बेकार है उसके सामने. अब ये आप पर निर्भर करता है कि आपको कैसी कमाई चाहिये?</p>
<p>अब ज्यादा क्या कहें?  गुरु समीर जी ने सब कुछ साफ़ साफ़ तो समझा दिया है. </p>
<p>किसी भी हालत मे कुंठाग्रस्त ना हों&#8230;बस अपने लक्ष्य को प्राप्त करने मे आनंद महसूस करें..आप देखेंगे कि आपके आसपास काफ़ी सारे मित्र इकट्ठे हो गये हैं&#8230;. यहां सभी बहुत सह्रदय और नेक लोग हैं&#8230;</p>
<p>कभी कभी तल्खी की कोई बात हो भी जाये तो उस पर मिट्टी डालिये  आखिर एकाध गंदी मछली तो सब जगह होती ही है.  आप जिसे बडी मछली समझते हैं वो भी हो सकती है. फ़िक्र मत पालिये..आखिर ऐसे व्यवहार करने वाली यही बडी मछली ही बाहर जायेगी इस तालाब से. </p>
<p>माननिय शाश्त्री जी का आभार यहां इज्जत बख्सने के लिये कि आज हमारे गुरुदेव के साथ बैठाकर प्रसंशा कर डाली. अब क्या पता हम इस लायक हैं भी या नही.</p>
<p>रामराम.</p>
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		<title>By: रंजन</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6898</link>
		<dc:creator>रंजन</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 09:58:08 +0000</pubDate>
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		<description>जैसा व्यवहार औरो से चाहते है वै्सा खुद भी करो...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जैसा व्यवहार औरो से चाहते है वै्सा खुद भी करो&#8230;</p>
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	<item>
		<title>By: Dr.Arvind Mishra</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6897</link>
		<dc:creator>Dr.Arvind Mishra</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 09:23:30 +0000</pubDate>
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		<description>सही कहा आपने ! लेखन sahaj और सर्वजन हिताय हो -प्रायोजित न हो !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सही कहा आपने ! लेखन sahaj और सर्वजन हिताय हो -प्रायोजित न हो !</p>
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	<item>
		<title>By: बालसुब्रमण्यम</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6896</link>
		<dc:creator>बालसुब्रमण्यम</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 07:29:34 +0000</pubDate>
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		<description>अच्छा विश्लेषण। आप आभार के पात्र इसलिए भी हैं कि इस पोस्ट को पढ़कर समीर जी को अपनी ज्ञान की गठरी थोड़ी खोलनी पड़ी है। उसमें सौ रत्न वे छिपाए हुए हैं, केवल 7 बांटकर बच निकलना चाह रहे हैं। ऐसी कृपणता उन्हें बिलकुल शोभा नहीं देती। इसलिए वे बाकी रत्नों को भी तुरंत ही ब्लोग-राज्य की प्रजा में बांट दें। हम उनकी हजार कंठ से जय-जयकार कर उठेंगे!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अच्छा विश्लेषण। आप आभार के पात्र इसलिए भी हैं कि इस पोस्ट को पढ़कर समीर जी को अपनी ज्ञान की गठरी थोड़ी खोलनी पड़ी है। उसमें सौ रत्न वे छिपाए हुए हैं, केवल 7 बांटकर बच निकलना चाह रहे हैं। ऐसी कृपणता उन्हें बिलकुल शोभा नहीं देती। इसलिए वे बाकी रत्नों को भी तुरंत ही ब्लोग-राज्य की प्रजा में बांट दें। हम उनकी हजार कंठ से जय-जयकार कर उठेंगे!</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: हे प्रभु यह तेरा-पथ"</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6895</link>
		<dc:creator>हे प्रभु यह तेरा-पथ"</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 05:46:46 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2226#comment-6895</guid>
		<description>फिलाल ताऊ बिजी है रिजल्ट बनाने मे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>फिलाल ताऊ बिजी है रिजल्ट बनाने मे।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: हे प्रभु यह तेरा-पथ"</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6894</link>
		<dc:creator>हे प्रभु यह तेरा-पथ"</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 05:44:57 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2226#comment-6894</guid>
		<description>अभी तो ताऊजी कि बारी है देखे वो क्या बॉटते है। ताऊके ज्ञान सन्देश प्रसारण के बाद, ही  हे प्रभु! तुरन्त सारथी पर अपना मत रखेगे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अभी तो ताऊजी कि बारी है देखे वो क्या बॉटते है। ताऊके ज्ञान सन्देश प्रसारण के बाद, ही  हे प्रभु! तुरन्त सारथी पर अपना मत रखेगे।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: हे प्रभु यह तेरा-पथ"</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6893</link>
		<dc:creator>हे प्रभु यह तेरा-पथ"</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 05:40:09 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2226#comment-6893</guid>
		<description>ये समिरलालाजी क्या बॉट रहे है ? देखो तो गुरुदेव !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ये समिरलालाजी क्या बॉट रहे है ? देखो तो गुरुदेव !</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: शास्त्रीजी ने मारा यू टर्न - हे प्रभु यह तेरा-पथ"</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2226/comment-page-1#comment-6892</link>
		<dc:creator>शास्त्रीजी ने मारा यू टर्न - हे प्रभु यह तेरा-पथ"</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2009 05:37:46 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2226#comment-6892</guid>
		<description>सर यह क्या आपने तो यू टर्न ही मार लिया ? क्या किसी मठाधिश का खतवा आया है ?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सर यह क्या आपने तो यू टर्न ही मार लिया ? क्या किसी मठाधिश का खतवा आया है ?</p>
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