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	<title>Comments on: नंगे होने पर ही ये लिख पाते हैं!!</title>
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	<link>http://sarathi.info/archives/2343</link>
	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: sciblog</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7305</link>
		<dc:creator>sciblog</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Jun 2009 12:08:10 +0000</pubDate>
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		<description>जिसे देखो वही नंगा होने अथवा करने पर तुला हुआ है।
&lt;a href=&quot;http://alizakir.blogspot.com/&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;-Zakir Ali ‘Rajnish’&lt;/a&gt; 
&lt;a href=&quot;http://tasliim.blogspot.com/&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;{ Secretary-TSALIIM &lt;/a&gt;&lt;a href=&quot;http://sciblogindia.blogspot.com/&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;&amp; SBAI }&lt;/a&gt;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जिसे देखो वही नंगा होने अथवा करने पर तुला हुआ है।<br />
<a href="http://alizakir.blogspot.com/" rel="nofollow">-Zakir Ali ‘Rajnish’</a><br />
<a href="http://tasliim.blogspot.com/" rel="nofollow">{ Secretary-TSALIIM </a><a href="http://sciblogindia.blogspot.com/" rel="nofollow">&amp; SBAI }</a></p>
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	<item>
		<title>By: सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7304</link>
		<dc:creator>सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2009 04:16:41 +0000</pubDate>
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		<description>मुझे लगता है कि बेनामी टिप्पणियों को एक एकेडेमिक इंटरेस्ट से पढ़ना चाहिए। बल्कि उनका अध्ययन करना चाहिए। बेनामी टिप्पणी का एक निष्कर्ष तो यही है कि स्वयं लिखने वाला भी उसे दिन के उजाले में सबके सामने लिखी जाने वाली बात नहीं मानता। यानि वह स्वयं उसके विरुद्ध खड़ा है।

यह मनोवैज्ञानिक शोध का विषय होना चाहिए कि यदि व्यक्ति को पहचाने जाने का डर न हो तो वह क्या-क्या कर सकता है। सामाजिक प्रास्थिति हमारे ऊपर कौन से जरूरी बन्धन लगाती है यह भी इन बेनामी कुंठासुरों से जाना जा सकता है। नितान्त निजी तौर पर एक व्यक्ति जो सोचता है वह एक सामाजिक प्राणी की सोच से कितनी भिन्न है, यदि यह सब जानना है तो इस बेनामी नामक प्राणी को खूब फलने-फूलने दीजिए। बस, इसकी कही बातों को दिल से न लगाइए।:)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मुझे लगता है कि बेनामी टिप्पणियों को एक एकेडेमिक इंटरेस्ट से पढ़ना चाहिए। बल्कि उनका अध्ययन करना चाहिए। बेनामी टिप्पणी का एक निष्कर्ष तो यही है कि स्वयं लिखने वाला भी उसे दिन के उजाले में सबके सामने लिखी जाने वाली बात नहीं मानता। यानि वह स्वयं उसके विरुद्ध खड़ा है।</p>
<p>यह मनोवैज्ञानिक शोध का विषय होना चाहिए कि यदि व्यक्ति को पहचाने जाने का डर न हो तो वह क्या-क्या कर सकता है। सामाजिक प्रास्थिति हमारे ऊपर कौन से जरूरी बन्धन लगाती है यह भी इन बेनामी कुंठासुरों से जाना जा सकता है। नितान्त निजी तौर पर एक व्यक्ति जो सोचता है वह एक सामाजिक प्राणी की सोच से कितनी भिन्न है, यदि यह सब जानना है तो इस बेनामी नामक प्राणी को खूब फलने-फूलने दीजिए। बस, इसकी कही बातों को दिल से न लगाइए।:)</p>
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	<item>
		<title>By: राज भाटिया</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7303</link>
		<dc:creator>राज भाटिया</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 12:58:57 +0000</pubDate>
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		<description>शास्त्री जी, इन अनाम/अनामिका को हम सब ने पहचान तो लिया ही है, लेकिन पक्का सबूत ना होने से अभी उसे नंगा नही कर सके,(वेसे तो इज्जत से वो नंगा ही है)मुझे जब भी कोई टिपण्णी आती है बेनाम से तो मे उसे मिटाता नही, बल्कि उस का एक एक शव्द ध्यान से पढता हुं, फ़िर उस टिपण्णी का लहजा (आंदाजा ) क्योकि हम सब एक ही ढंग से नही लिखते, अब का तरीका अलग अलग अंदाज है, ओर बहुत से लोगो के लेख नाम के बिना भी हम पहचाने है कि इस आंदाज से तो फ़ंला फ़लां ही लिखते है, फ़िर शव्दो की गल्तिया, बस ऎसी छोटी छोटी बातो पर गोर करे तो... चोर तो पकडा गया, लेकिन इन सब के लिये बहुत समय चाहिये,</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्री जी, इन अनाम/अनामिका को हम सब ने पहचान तो लिया ही है, लेकिन पक्का सबूत ना होने से अभी उसे नंगा नही कर सके,(वेसे तो इज्जत से वो नंगा ही है)मुझे जब भी कोई टिपण्णी आती है बेनाम से तो मे उसे मिटाता नही, बल्कि उस का एक एक शव्द ध्यान से पढता हुं, फ़िर उस टिपण्णी का लहजा (आंदाजा ) क्योकि हम सब एक ही ढंग से नही लिखते, अब का तरीका अलग अलग अंदाज है, ओर बहुत से लोगो के लेख नाम के बिना भी हम पहचाने है कि इस आंदाज से तो फ़ंला फ़लां ही लिखते है, फ़िर शव्दो की गल्तिया, बस ऎसी छोटी छोटी बातो पर गोर करे तो&#8230; चोर तो पकडा गया, लेकिन इन सब के लिये बहुत समय चाहिये,</p>
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	<item>
		<title>By: बी एस पाबला</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7298</link>
		<dc:creator>बी एस पाबला</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 09:14:29 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2343#comment-7298</guid>
		<description>StatCounter जैसी मुफ्त में मिल रही सेवा की अपनी सीमायें हैं। इससे कुछ हद तक आइडिया तो लग सकता है, किन्तु सटीक निशाना नहीं लगाया जा सकता। भारी भुगतान लेकर अत्याधुनिक तकनीकी सेवायें देने वाले तो आपकी इच्छा को पूरा करते हुये बाकायदा उस व्यक्ति की, उसके कम्प्यूटर सहित बखिया उधेड़ कर हाथ में रख देते हैं और देते हैं ऐसे वैज्ञानिक सबूत जिन्हें दुनिया की कोई अदालत झुठला नहीं सकती।

शास्त्री जी से एक निवेदन भी: &#039;तकनीकविशारद&#039; शब्द हटा दें, असहजता महसूस हो रही या फिर &#039;तकनीकनौसिखिया&#039; से बदल दें।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>StatCounter जैसी मुफ्त में मिल रही सेवा की अपनी सीमायें हैं। इससे कुछ हद तक आइडिया तो लग सकता है, किन्तु सटीक निशाना नहीं लगाया जा सकता। भारी भुगतान लेकर अत्याधुनिक तकनीकी सेवायें देने वाले तो आपकी इच्छा को पूरा करते हुये बाकायदा उस व्यक्ति की, उसके कम्प्यूटर सहित बखिया उधेड़ कर हाथ में रख देते हैं और देते हैं ऐसे वैज्ञानिक सबूत जिन्हें दुनिया की कोई अदालत झुठला नहीं सकती।</p>
<p>शास्त्री जी से एक निवेदन भी: &#8216;तकनीकविशारद&#8217; शब्द हटा दें, असहजता महसूस हो रही या फिर &#8216;तकनीकनौसिखिया&#8217; से बदल दें।</p>
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	<item>
		<title>By: अजय कुमार झा</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7297</link>
		<dc:creator>अजय कुमार झा</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 07:51:54 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2343#comment-7297</guid>
		<description>शास्त्री जी, मुझे खुद बहुत दुःख हुआ था...वो तिप्प्न्नियाँ पढ़ कर भी और ब्लॉग जगत में जो भी जिस तरह का चल रहा है वो देख कर भी...अफ़सोस की लोग...जो कम से कम इतना मष्तिष्क तो रखते हैं की कुछ रच्नात्क्मक लिख रहे हैं...इस तरह के कृत्या भी करते हैं...मुझे संतोष है की ...समय पर मैंने वो व्यवस्ता लागू कर दी..रही बात स्टेट काउंटर की..कल से कई बार कोशिश कर चुका हूँ मगर हो नहीं पा रहा है..पाबला जी की मदद से कर लूँगा...मगर यहाँ कुछ न कुछ तो गलत पनप ही रहा है....मैं खुद अनुभव कर रहा हूँ...अफ़सोस की अग्ग्रेगेतोर्स इन मामले में कुछ भी नहीं कर रहे हैं ..या शायद कर पा रहे हैं...मुझे विश्वास है की मेरा चरित्र..(जो मेरी लेखनी और टिप्पणी से अंदाजा लगाया जा सकता है ) को देखते हुए आपका स्नेह और विश्वास मुझ पर बना रहेगा...मगर मन क्षुब्ध और व्यथित तो जरूर है.....</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्री जी, मुझे खुद बहुत दुःख हुआ था&#8230;वो तिप्प्न्नियाँ पढ़ कर भी और ब्लॉग जगत में जो भी जिस तरह का चल रहा है वो देख कर भी&#8230;अफ़सोस की लोग&#8230;जो कम से कम इतना मष्तिष्क तो रखते हैं की कुछ रच्नात्क्मक लिख रहे हैं&#8230;इस तरह के कृत्या भी करते हैं&#8230;मुझे संतोष है की &#8230;समय पर मैंने वो व्यवस्ता लागू कर दी..रही बात स्टेट काउंटर की..कल से कई बार कोशिश कर चुका हूँ मगर हो नहीं पा रहा है..पाबला जी की मदद से कर लूँगा&#8230;मगर यहाँ कुछ न कुछ तो गलत पनप ही रहा है&#8230;.मैं खुद अनुभव कर रहा हूँ&#8230;अफ़सोस की अग्ग्रेगेतोर्स इन मामले में कुछ भी नहीं कर रहे हैं ..या शायद कर पा रहे हैं&#8230;मुझे विश्वास है की मेरा चरित्र..(जो मेरी लेखनी और टिप्पणी से अंदाजा लगाया जा सकता है ) को देखते हुए आपका स्नेह और विश्वास मुझ पर बना रहेगा&#8230;मगर मन क्षुब्ध और व्यथित तो जरूर है&#8230;..</p>
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	<item>
		<title>By: Arkjesh</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7296</link>
		<dc:creator>Arkjesh</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 07:38:09 +0000</pubDate>
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		<description>अपनी तरफ़ से सावधानी बरतना ही एकमात्र उपाय है । अनाम टिप्पणियां स्वीकार ही नहीं की जानी चाहिये &#124; अन्ततः Comment moderator तो है ही</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अपनी तरफ़ से सावधानी बरतना ही एकमात्र उपाय है । अनाम टिप्पणियां स्वीकार ही नहीं की जानी चाहिये | अन्ततः Comment moderator तो है ही</p>
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	<item>
		<title>By: anil pusadkar</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7295</link>
		<dc:creator>anil pusadkar</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 04:59:52 +0000</pubDate>
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		<description>नंगों को और क्या नंगा करेंगे शास्त्री जी।मेरे हिसाब से तो उन्हे उन्के हाल पर छोड़ देना चाहिये।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>नंगों को और क्या नंगा करेंगे शास्त्री जी।मेरे हिसाब से तो उन्हे उन्के हाल पर छोड़ देना चाहिये।</p>
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		<title>By: रंजन</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7294</link>
		<dc:creator>रंजन</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 04:07:40 +0000</pubDate>
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		<description>हर चहरे में  छिपे होते है कई चहरे

जिसको भी देखिये कई बार देखिये..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हर चहरे में  छिपे होते है कई चहरे</p>
<p>जिसको भी देखिये कई बार देखिये..</p>
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	<item>
		<title>By: ताऊ रामपुरिया</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7293</link>
		<dc:creator>ताऊ रामपुरिया</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 03:55:49 +0000</pubDate>
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		<description>सबसे पहले तो ईश्वर से इन राहुकेतु/राहुकेतुआणियों उर्फ़ बेनामी/बेनामिनों की आत्मा की शांति के लिये प्रार्थना करता हूं. ईश्वर उन्हे उनकी करणी अनुसार जन्नत /दोजख बख्से. और ब्लागरों को उनकी काली नजरों से बचायें.

आपके सुझाव माने जाने चाहिये. राहुकेतुओं की टिपणीयों का प्रकाशन ना किया जाये तो उनको खुराक मिलना बंद हो जायेगी तो खुश होकर रसीली (माकटेल) का आनंद नही ऊठा पायेंगे. और गर्मी मे झुलसते रहेंगे तो उनकी आत्मा को अति प्रशन्नता होगी.

रामराम.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सबसे पहले तो ईश्वर से इन राहुकेतु/राहुकेतुआणियों उर्फ़ बेनामी/बेनामिनों की आत्मा की शांति के लिये प्रार्थना करता हूं. ईश्वर उन्हे उनकी करणी अनुसार जन्नत /दोजख बख्से. और ब्लागरों को उनकी काली नजरों से बचायें.</p>
<p>आपके सुझाव माने जाने चाहिये. राहुकेतुओं की टिपणीयों का प्रकाशन ना किया जाये तो उनको खुराक मिलना बंद हो जायेगी तो खुश होकर रसीली (माकटेल) का आनंद नही ऊठा पायेंगे. और गर्मी मे झुलसते रहेंगे तो उनकी आत्मा को अति प्रशन्नता होगी.</p>
<p>रामराम.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: दिनेशराय द्विवेदी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7292</link>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 03:21:29 +0000</pubDate>
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		<description>सब कुछ इस आलेख में कहा जा चुका है। वैसे तो बेनामी टिप्पणी के टिप्पणीकारों को भी खोजा जा चुका है और खोजा जा सकता है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सब कुछ इस आलेख में कहा जा चुका है। वैसे तो बेनामी टिप्पणी के टिप्पणीकारों को भी खोजा जा चुका है और खोजा जा सकता है।</p>
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		<title>By: बालसुब्रमण्यम</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7291</link>
		<dc:creator>बालसुब्रमण्यम</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 02:00:48 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2343#comment-7291</guid>
		<description>चिट्ठा जगत के इन कायर लिक्खड़ों को नजरंदाज कर देने और उनकी टिप्पणियों को तुरंत हटा देने की नीति भी कारगर साबित हो सकती है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>चिट्ठा जगत के इन कायर लिक्खड़ों को नजरंदाज कर देने और उनकी टिप्पणियों को तुरंत हटा देने की नीति भी कारगर साबित हो सकती है।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: समीर लाल</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7290</link>
		<dc:creator>समीर लाल</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 02:00:31 +0000</pubDate>
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		<description>सुन बस रहे हैं..और कुछ नहीं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सुन बस रहे हैं..और कुछ नहीं.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: विवेक रस्तोगी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7289</link>
		<dc:creator>विवेक रस्तोगी</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 01:44:52 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2343#comment-7289</guid>
		<description>नंगे का इलाज यही है क्योंकि हमारे यहां एक कहावत है &quot;नांगड़े के नौ घर बलवान&quot; ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>नंगे का इलाज यही है क्योंकि हमारे यहां एक कहावत है &#8220;नांगड़े के नौ घर बलवान&#8221; ।</p>
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	<item>
		<title>By: Dr.Arvind Mishra</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7288</link>
		<dc:creator>Dr.Arvind Mishra</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 01:37:22 +0000</pubDate>
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		<description>सुब कुछ तो आप ने कह ही दिया है ,सुना दिया है ! ऐसी कलुषित आत्माओं के विरूद्ध निरंतर अभियान चलाये रखना अब जरूरी हो गया है !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सुब कुछ तो आप ने कह ही दिया है ,सुना दिया है ! ऐसी कलुषित आत्माओं के विरूद्ध निरंतर अभियान चलाये रखना अब जरूरी हो गया है !</p>
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	<item>
		<title>By: अविनाश वाचस्‍पति</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2343/comment-page-1#comment-7287</link>
		<dc:creator>अविनाश वाचस्‍पति</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Jun 2009 23:56:51 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2343#comment-7287</guid>
		<description>सार यही है कि हल तो हर चीज का है। बस हम किसे जोतना चाहते हैं और किसे नहीं। वैसे भी सबै भूमि गोपाल की। निष्‍कर्षत: ब्‍लॉग पर बेनामी टिप्‍पणियों की सुविधा नहीं दी जानी चाहिए। उससे यह गंदगी काफी हद तक रूकती है तो यही किया जाना चाहिए और जैसा कि शास्‍त्रीजी ने सुझाव दिया है कि &#039;&#039;चिट्ठाकारों से मेरा अनुरोध है कि ऐसे काम दोचार तकनीकविदों पर डाल कर वे अपना समय सक्रिय रूप से चिट्ठाकारी में लगा दें.&#039;&#039; पर अमल करते हुए &#039;&#039; नंगा तो नंगा ही रहेगा. उस के चक्कर में पड कर अपनी चिट्ठाकारी जाया करने के बदले उसे उसके कुतंत्रों पर छोड दें. यदि बहुत अधिक उछलकूद करने लगेगा/लगेगी तो उसका आईपी एड्रेस, कालोनी का पता आदि छाप दिया जायगा &#039;&#039; इस कार्यवाही को सरअजाम दिया करें। तो इस तरह हो गया समझ लीजिए 100 प्रतिशत समाधान।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सार यही है कि हल तो हर चीज का है। बस हम किसे जोतना चाहते हैं और किसे नहीं। वैसे भी सबै भूमि गोपाल की। निष्‍कर्षत: ब्‍लॉग पर बेनामी टिप्‍पणियों की सुविधा नहीं दी जानी चाहिए। उससे यह गंदगी काफी हद तक रूकती है तो यही किया जाना चाहिए और जैसा कि शास्‍त्रीजी ने सुझाव दिया है कि &#8221;चिट्ठाकारों से मेरा अनुरोध है कि ऐसे काम दोचार तकनीकविदों पर डाल कर वे अपना समय सक्रिय रूप से चिट्ठाकारी में लगा दें.&#8221; पर अमल करते हुए &#8221; नंगा तो नंगा ही रहेगा. उस के चक्कर में पड कर अपनी चिट्ठाकारी जाया करने के बदले उसे उसके कुतंत्रों पर छोड दें. यदि बहुत अधिक उछलकूद करने लगेगा/लगेगी तो उसका आईपी एड्रेस, कालोनी का पता आदि छाप दिया जायगा &#8221; इस कार्यवाही को सरअजाम दिया करें। तो इस तरह हो गया समझ लीजिए 100 प्रतिशत समाधान।</p>
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