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	<title>Comments on: इलाज जो मर्ज से खतरनाक निकला!!</title>
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	<link>http://sarathi.info/archives/2354</link>
	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: Mahesh Sinha</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7409</link>
		<dc:creator>Mahesh Sinha</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jul 2009 07:41:57 +0000</pubDate>
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		<description>जिन सज्जन के मार्गनिर्देशन में यह काम सम्पन्न हुआ कमसे कम उनका नाम बताकर तो उनका सम्मान किया जा सकता है</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जिन सज्जन के मार्गनिर्देशन में यह काम सम्पन्न हुआ कमसे कम उनका नाम बताकर तो उनका सम्मान किया जा सकता है</p>
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		<title>By: अनुराग शर्मा - Smart Indian</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7384</link>
		<dc:creator>अनुराग शर्मा - Smart Indian</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Jul 2009 02:12:14 +0000</pubDate>
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		<description>जब अक्षम लोग राज करते हैं तो व्यक्तिगत, सामाजिक, या संस्थागत तरीके से विरोध करना जरूरी होता है. करें तो फल जरूर होगा. कम से कम एकाध बार मैदान में कूद कर देखें!!
बिलकुल सही कहा है आपने.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जब अक्षम लोग राज करते हैं तो व्यक्तिगत, सामाजिक, या संस्थागत तरीके से विरोध करना जरूरी होता है. करें तो फल जरूर होगा. कम से कम एकाध बार मैदान में कूद कर देखें!!<br />
बिलकुल सही कहा है आपने.</p>
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		<title>By: पुनीत ओमर</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7368</link>
		<dc:creator>पुनीत ओमर</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Jul 2009 13:03:25 +0000</pubDate>
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		<description>प्रेरणादायी व्यवहारिक आलेख.
लेकिन मेरा सुझाव है की इस लेख की मूळ भावना को समझना चाहिए न की इसे सरकारी तंत्र से बेवजह गुत्थम गुत्था करने के लिए प्रेरित करने वाला आलेख.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्रेरणादायी व्यवहारिक आलेख.<br />
लेकिन मेरा सुझाव है की इस लेख की मूळ भावना को समझना चाहिए न की इसे सरकारी तंत्र से बेवजह गुत्थम गुत्था करने के लिए प्रेरित करने वाला आलेख.</p>
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	<item>
		<title>By: Tasliim</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7358</link>
		<dc:creator>Tasliim</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jul 2009 12:27:22 +0000</pubDate>
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		<description>ठस लोगों की कमी नहीं, एक खोजो हजार मिलते हैं।
&lt;a href=&quot;http://alizakir.blogspot.com/&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;-Zakir Ali ‘Rajnish’&lt;/a&gt; 
&lt;a href=&quot;http://tasliim.blogspot.com/&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;{ Secretary-TSALIIM &lt;/a&gt;&lt;a href=&quot;http://sciblogindia.blogspot.com/&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;&amp; SBAI }&lt;/a&gt;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ठस लोगों की कमी नहीं, एक खोजो हजार मिलते हैं।<br />
<a href="http://alizakir.blogspot.com/" rel="nofollow">-Zakir Ali ‘Rajnish’</a><br />
<a href="http://tasliim.blogspot.com/" rel="nofollow">{ Secretary-TSALIIM </a><a href="http://sciblogindia.blogspot.com/" rel="nofollow">&amp; SBAI }</a></p>
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		<title>By: रजत</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7357</link>
		<dc:creator>रजत</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jul 2009 11:28:08 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2354#comment-7357</guid>
		<description>सही बात है... निशांत जी की बात भी 100 टका सही है... पर उन अधिकारी महोदय  का लम्बी छुट्टी से आने के बाद क्या हुआ??? कोई बता सकता है... आने पर उन्हे किसी दूसरे विभाग का उध्दार करने का जिम्मा दे दिया गया होगा. कितना अच्छा नियम है ना कोई गलती करने पर समान वेतन,भत्ते, सुविधाओं का उपयोग करते हुये अगली और बड़ी गलती के लिये और अधिक ऊर्जावान होकर वापस आओ. 
इसी तरह के नियमों ने ऊंचे पदों पर आसीन व्यक्तियॉं को किसी भी प्रकार के दण्ड विधान के विरुध्द् इतना अभेद्य बना दिया है कि इन नियमों के प्रति अविश्वास और घृणा दोनो के भाव एकसाथ आ जाते है... अखिल भारतीय सेवाओं के किसी भी अधिकारी को सेवा से पृथक करना बेहद जटिल और बोझिल कार्य है, जबकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशो को उनके पद से हटाना लगभग असम्भव है. लगभग... जबकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया बेहद् गोपनीय और इतनी ही सन्देहास्पद है. कोई नही जानता कि उच्च न्यायालय में सीधे नियुक्त होने वाले किसी वकील की योग्यता को आकने का मापदण्ड क्या हैं??? किन किन मानदण्डों पर खरा उतरने के बाद किसी व्यक्ति का नाम ऐसे महत्वपूर्ण पदो के लिये प्रस्तावित किया जाता हैं... वैसे अन्य महत्वपूर्ण जगहो  जैसे लोकायुक्त,सूचना आयोग, प्रशासनिक अभिकरण आदि के पदो नियुक्तियां भी मुख्य मंत्री और राज्यपाल आदि अपने &#039;स्वविवेक&#039; के आधार पर करते रहते है... पर यह बात समझ से परे है कि   इन मुख्यमंत्रियों और राज्यपालो के &#039;स्वविवेक&#039; को  पूर्व अधिकारीगण ही क्यों सर्वथा 
योग्य  व्यक्ति प्रतीत होते है ???</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सही बात है&#8230; निशांत जी की बात भी 100 टका सही है&#8230; पर उन अधिकारी महोदय  का लम्बी छुट्टी से आने के बाद क्या हुआ??? कोई बता सकता है&#8230; आने पर उन्हे किसी दूसरे विभाग का उध्दार करने का जिम्मा दे दिया गया होगा. कितना अच्छा नियम है ना कोई गलती करने पर समान वेतन,भत्ते, सुविधाओं का उपयोग करते हुये अगली और बड़ी गलती के लिये और अधिक ऊर्जावान होकर वापस आओ.<br />
इसी तरह के नियमों ने ऊंचे पदों पर आसीन व्यक्तियॉं को किसी भी प्रकार के दण्ड विधान के विरुध्द् इतना अभेद्य बना दिया है कि इन नियमों के प्रति अविश्वास और घृणा दोनो के भाव एकसाथ आ जाते है&#8230; अखिल भारतीय सेवाओं के किसी भी अधिकारी को सेवा से पृथक करना बेहद जटिल और बोझिल कार्य है, जबकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशो को उनके पद से हटाना लगभग असम्भव है. लगभग&#8230; जबकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया बेहद् गोपनीय और इतनी ही सन्देहास्पद है. कोई नही जानता कि उच्च न्यायालय में सीधे नियुक्त होने वाले किसी वकील की योग्यता को आकने का मापदण्ड क्या हैं??? किन किन मानदण्डों पर खरा उतरने के बाद किसी व्यक्ति का नाम ऐसे महत्वपूर्ण पदो के लिये प्रस्तावित किया जाता हैं&#8230; वैसे अन्य महत्वपूर्ण जगहो  जैसे लोकायुक्त,सूचना आयोग, प्रशासनिक अभिकरण आदि के पदो नियुक्तियां भी मुख्य मंत्री और राज्यपाल आदि अपने &#8216;स्वविवेक&#8217; के आधार पर करते रहते है&#8230; पर यह बात समझ से परे है कि   इन मुख्यमंत्रियों और राज्यपालो के &#8216;स्वविवेक&#8217; को  पूर्व अधिकारीगण ही क्यों सर्वथा<br />
योग्य  व्यक्ति प्रतीत होते है ???</p>
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	<item>
		<title>By: राज भाटिया</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7355</link>
		<dc:creator>राज भाटिया</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jul 2009 08:42:28 +0000</pubDate>
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		<description>शास्त्री जी आप ने सही कहा, आज कल बेवकुफ़ ओर कम पढे लिखे लोग उस स्थान पर बेठे है, जो स्थान उन के काबिल नही या कहे वो लोग उस स्थान के कबिल नही, पिछले दिनो भारत आना हुआ तो मै हेरान था ऎसे कई लोगो को देख कर जिन्हे आंगुठा लगाना भी नही आता लेकिन कई महत्व पुर्ण स्थानो पर विराजमान थे, पता करने पर पता चला कि इन की रिश्ते दारी है नेताओ से??
अब उस देश मै जहां पढेलिखे लोग नोकरी को तरसे ओर अनपढ ओर बेवकुफ़ ऎसी जगह पर विराजमान हो उस देश का भविष्या कया होगा....?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्री जी आप ने सही कहा, आज कल बेवकुफ़ ओर कम पढे लिखे लोग उस स्थान पर बेठे है, जो स्थान उन के काबिल नही या कहे वो लोग उस स्थान के कबिल नही, पिछले दिनो भारत आना हुआ तो मै हेरान था ऎसे कई लोगो को देख कर जिन्हे आंगुठा लगाना भी नही आता लेकिन कई महत्व पुर्ण स्थानो पर विराजमान थे, पता करने पर पता चला कि इन की रिश्ते दारी है नेताओ से??<br />
अब उस देश मै जहां पढेलिखे लोग नोकरी को तरसे ओर अनपढ ओर बेवकुफ़ ऎसी जगह पर विराजमान हो उस देश का भविष्या कया होगा&#8230;.?</p>
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	<item>
		<title>By: Nishant</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7354</link>
		<dc:creator>Nishant</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jul 2009 07:27:10 +0000</pubDate>
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		<description>एक बात और, सिर्फ अपनी सीनियोरिटी के दम पर पावरफुल पद प्राप्त कर लेने वाले मूढ़मगज अपने को सबसे काबिल अफसर मामने का मुगालता पाल बैठते हैं. केवल गलतियाँ निकालने के लिए वे मातहत के बनाये ड्राफ्ट की नुक्ताचीनी करते हैं जबकि खुद ढंग से चार लाइनें लिखने की काबिलियत नहीं रखते. 
लेकिन एक बात माननी होगी, इनमें गजब का lobbying टैक्ट होता है. और अपने से ऊपरवाले को खुश रखने की कला इन्हें बखूबी आती है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>एक बात और, सिर्फ अपनी सीनियोरिटी के दम पर पावरफुल पद प्राप्त कर लेने वाले मूढ़मगज अपने को सबसे काबिल अफसर मामने का मुगालता पाल बैठते हैं. केवल गलतियाँ निकालने के लिए वे मातहत के बनाये ड्राफ्ट की नुक्ताचीनी करते हैं जबकि खुद ढंग से चार लाइनें लिखने की काबिलियत नहीं रखते.<br />
लेकिन एक बात माननी होगी, इनमें गजब का lobbying टैक्ट होता है. और अपने से ऊपरवाले को खुश रखने की कला इन्हें बखूबी आती है.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Nishant</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7353</link>
		<dc:creator>Nishant</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jul 2009 07:21:27 +0000</pubDate>
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		<description>जब नौकरियां तमाम तरह के आरक्षणों और केवल हजारों फैक्ट याद रखने की काबलियत पर दी जाएँगीं तो यही होगा. किसे इस बात से मतलब है की गुप्त काल का फलां सिक्का कितने ग्राम का होता था! जो इसे याद रख पता है वह तो IAS बन जाता है, जो केवल काम की बातें और काम करने की कला जानता है वह उसका LDC बन जाता है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जब नौकरियां तमाम तरह के आरक्षणों और केवल हजारों फैक्ट याद रखने की काबलियत पर दी जाएँगीं तो यही होगा. किसे इस बात से मतलब है की गुप्त काल का फलां सिक्का कितने ग्राम का होता था! जो इसे याद रख पता है वह तो IAS बन जाता है, जो केवल काम की बातें और काम करने की कला जानता है वह उसका LDC बन जाता है.</p>
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	<item>
		<title>By: ताऊ रामपुरिया</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7351</link>
		<dc:creator>ताऊ रामपुरिया</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jul 2009 05:48:35 +0000</pubDate>
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		<description>इस प्रेरक आलेख के लिये धन्यवाद.

रामराम</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इस प्रेरक आलेख के लिये धन्यवाद.</p>
<p>रामराम</p>
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	<item>
		<title>By: PN Subramanian</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7350</link>
		<dc:creator>PN Subramanian</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jul 2009 05:30:30 +0000</pubDate>
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		<description>प्रेरक आलेख. आभार</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्रेरक आलेख. आभार</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: indian citizen</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7349</link>
		<dc:creator>indian citizen</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jul 2009 05:26:21 +0000</pubDate>
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		<description>ऐसा ही होता है हर जगह गधे और घोड़े पाये जाते हैं यह अलग बात है कि सरकारी नौकरियों में गधों को भी वही स्थान हासिल होता है जो घोड़ों को.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ऐसा ही होता है हर जगह गधे और घोड़े पाये जाते हैं यह अलग बात है कि सरकारी नौकरियों में गधों को भी वही स्थान हासिल होता है जो घोड़ों को.</p>
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	<item>
		<title>By: हिमांशु</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7348</link>
		<dc:creator>हिमांशु</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jul 2009 05:16:31 +0000</pubDate>
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		<description>एकदम सही कहा आपने - &quot;जब अक्षम लोग राज करते हैं तो व्यक्तिगत, सामाजिक, या संस्थागत तरीके से विरोध करना जरूरी होता है&quot; बस आवश्यकता होती है आन्तरिक प्रेरणा और संबल की । 
आलेख के लिये धन्यवाद ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>एकदम सही कहा आपने &#8211; &#8220;जब अक्षम लोग राज करते हैं तो व्यक्तिगत, सामाजिक, या संस्थागत तरीके से विरोध करना जरूरी होता है&#8221; बस आवश्यकता होती है आन्तरिक प्रेरणा और संबल की ।<br />
आलेख के लिये धन्यवाद ।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: अविनाश वाचस्‍पति</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7347</link>
		<dc:creator>अविनाश वाचस्‍पति</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jul 2009 03:58:49 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2354#comment-7347</guid>
		<description>मूर्खता का न सिर होता है 
न सर पर पैर
फिर भी अपना पीटती है
जोरों से ढोल।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मूर्खता का न सिर होता है<br />
न सर पर पैर<br />
फिर भी अपना पीटती है<br />
जोरों से ढोल।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: राजीव तनेजा</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7346</link>
		<dc:creator>राजीव तनेजा</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jul 2009 03:34:54 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2354#comment-7346</guid>
		<description>सिर्फ ऊँचे पद पर होने से ही कोई जीनियस नहीं हो जाता...


बढिया लेख</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सिर्फ ऊँचे पद पर होने से ही कोई जीनियस नहीं हो जाता&#8230;</p>
<p>बढिया लेख</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: दिनेशराय द्विवेदी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2354/comment-page-1#comment-7345</link>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jul 2009 02:49:23 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2354#comment-7345</guid>
		<description>जब ऊंची-नीची नौकरियाँ योग्यता के स्थान पर व्यक्तिगत निष्ठाओं पर मिला करें तो मूर्खों का ही बोलबाला होता है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जब ऊंची-नीची नौकरियाँ योग्यता के स्थान पर व्यक्तिगत निष्ठाओं पर मिला करें तो मूर्खों का ही बोलबाला होता है।</p>
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