धर्म का विकृत रूप !!

मेरे पिताजी (उम्र 80 साल) आजकल प्रोस्ट्रेट-ग्लेंड की शल्यक्रिया के लिये अस्पताल में भरती हैं. शुक्रवार को उनकी तबियत अचानक बिगड गई और सारा दिन मैं ने उनके साथ बिताया. बगल में एक मस्जिद में दिन भर भाषणबाजी चलती रही और पिताजी एक क्षण भी आराम नहीं कर सके.

कारण यह था कि मस्जिद के ऊपर भोंपू-लाऊडस्पीकर लगा था, और उसकी दिशा ठीक अस्पताल की ओर थी. जनता बाकी सारी दिशाओं में रहती है, लेकिन भोंपू की दिशा उनकी तरफ नहीं थी. पता नहीं इंटेन्सिव केयर यूनिट के कितने मरीजों की तबियत इस कारण बिगड जाती है कि भोंपू उनको क्षण क्षण में ध्वनि के बमरूपी झटके देता है.

आज से चार साल पहले तक मैं जिस कालेज में पढाता था वहां सामने ही एक केथोलिक चर्च था. सुबह पांच बजे से उनका भोंपू इसी तरह चालू हो जाता था. टेपरिकार्डर से निकले गाने कर्णकटू स्वर में सबकी नीद हराम करते थे, साथ में बीमार लोगों को और बीमार करने के द्वारा  “प्रभु” से जल्दी ही मुलाकात करवा देते थे. धर्म जब समाज के साथ और लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड करने लगता है तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही जरूरी है.

मेरे पाठक जानते हैं कि मैं बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति हूँ. लेकिन जब धर्म लोगों को पालक के बदले मारक का रूप ले लेता है तो उसे नियंत्रण में लाना जरूरी है.

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21 Responses to “धर्म का विकृत रूप !!”

  1. cmpershad Says:

    आजकल अन्य प्रकार के प्रदूषण के साथ ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ रहा है…कभी ईद के नाम, कभी दुर्गा पूजा के नाम तो कभी ईशुमसीह के नाम…. अब किस किस को रोका जाय और रोकने पर कौन रुकने को तैयार है:(

  2. varun jaiswal Says:

    भक्ति का यह रूप सिवाय ढकोसलेबाज़ी के और कुछ भी नहीं है नियंत्रण आवश्यक है लेकिन बिना कठोर कानूनों के बात नहीं बनेगी , एवं इसके लिए जन-जागरूकता चाहिए |

    || ” सत्यमेव जयते ” ||

  3. काजल कुमार Says:

    इन धर्म के अखाड़ों पर लाउडस्पीकर बैन होना चाहिए. आखिर ये यूं हल्ला मचा-मचा कर साबित क्या करना चाहते हैं. हमारे पड़ौस में भी एक बहुत बड़ा पार्क है जिसमें शादी, मेले, कीर्तन, जागरण, सिंगर-नाइट और भी न जाने क्या-क्या हर रोज़ पूरी-पूरी रात चलता रहता था.

    उस पार्क के ठीक सामने रहने वाले एक सज्जन से जब नहीं रहा गया तो अदालत के हस्तक्षेप के चलते इन सब पर पाबंदी लग पाई. अब अमन चैन है वर्ना पार्क की ठेकेदारी एक पंचायत के पास थी जो वाकायदा इन हुड़दंगी हल्लेबाज़ों से कानूनन नोट वसूलती थी. लोकल पुलिस की पौवारा थी अगर किसी ने फ़ोन कर दिया कि 10 बजे के बाद भी हल्ला हो रहा है । 10 बजे के बाद पैसा लिया चलते बनती थी पुलिस.

    अदालत का भला हो जो इलाके का उद्धार हुआ.

  4. समीर लाल Says:

    जब धर्म लोगों को पालक के बदले मारक का रूप ले लेता है तो उसे नियंत्रण में लाना जरूरी है….सही कह रहे हैं आप!!

  5. ताऊजी लठ्ठ वाले Says:

    आजकल कोई भी पीछे नही है. सब एक दूसरे पर अपना शक्ति परीक्षण समझते हैं इसे. अगर कोई इसके खिलाग कुछ कहता है तो वो अधार्मिक करार दे दिया जाता है. आजकल सप्ताह भर से माताजी की पूजन के नाम पर रात भर जो डिस्को डांडिया चल रहे हैं इसने राते खराब कर रखीं हैं और जनता समझती नही है कि ये सब कंपनियों द्वारा प्रायोजित माल बेचने का तरीक है. हम तो कुछ नही बोलेंगे.

    रामराम.

  6. राज भटिया Says:

    यह धर्म का विकृत रूप हम लोगो ने खुद ही किया है, जिन लोगो को रुचि है प्राथना मै,नमाज मै, कीर्तन मै, वो खुद चले जाये गे अपने अपने धर्म स्थान पर फ़िर यह दिखावा किस लिये….यह पाखंड क्यो…. ऎसे ओर भी बहुत् से कारण है जिस के कारण मै इन मंदिरो मै जाने से कतराता हुं, जब कि भगवान को मानता हुं,
    आप ने बहुत ही अच्छी बात लिखी,लेकिन कोन मानेगा इस बात को???

  7. लावण्या Says:

    ये आलेख ,
    समाज का सच ही दीखालाता जान पड़ रहा है

  8. सतीश Says:

    रात्रि जागरण को आप भूल गए , जगत जननी को पूरी रात चिल्ला चिल्ला कर याद करते हैं, क्या माँ यह चाहती है कि बच्चे उसे ऐसे याद करें साथ ही फ़िल्मी गीतों की पैरोडी …..

  9. nishachar Says:

    इस पाखंड से मैं स्वयं भी बहुत परेशान हूँ. मैं काम – काज के कारण रात बारह बजे से पहले कभी सो नहीं पाता और सुबह पांच बजे ही मस्जिद के लाउडस्पीकर से होने वाले शोरगुल से नींद उचट जाती है, फिर मंदिर से लाउडस्पीकर चालू हो जाता है. कभी-कभी “अत्यंत धर्मनिष्ठावान” लोग जागरण के बहाने रात भर सोने नहीं देते. मन आता है इन सभी पाखंडियों को गोली मार दी जाये.

  10. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    धर्म को निजी ही बना रहने दिया जाए तो उत्तम है। उस की सामाजिक भूमिका समाप्त हो चुकी है।

  11. ताऊजी लठ्ठ वाले Says:

    इष्ट मित्रों एवम कुटुंब जनों सहित आपको दशहरे की घणी रामराम.

  12. संजय बेंगाणी Says:

    यह पाखंड और दिखावा मात्र है. किसी धर्म के कथित अनुयायी इससे परे नहीं है. इस बेवकुफी पर पाबन्दी लगनी चाहिए.

  13. DR. MUKESH RAGHAV Says:

    Sir, I feel sorry that father is having Prostatic problem, yes you know aging factor. Dont worry.I Pray almighty for his earlier recovery.Second aspect of Pollution Bhaiya from Kabir Dasji to today , voices have been raised. but all went in vain. System is total a drama thinking mind like you can raise the voice, but raising with the impression that some change will take place. I am sorry sir.
    Regards
    Mukesh

  14. Anonymous Says:

    When you drive by a dead skunk in the road, why does it take about 10 seconds before you smell it? Assume that you did not actually drive over the skunk.

  15. Sanjay kareer Says:

    आशा करता हूं कि आपके पिताजी का स्‍वास्‍थ्‍य अब बेहतर होगा। उनके शीघ्र स्‍वस्‍थ होने की कामना करता हूं।

  16. Dr. Purushottam Meena Says:

    Aapko aise logon ke khilaf kanuni karywahi karni pahiye, kyonki yah sanvidhan ke article 21 ka uyyanghan hai.

  17. Dr. Purushottam Meena Says:

    Aise logon ko court ke samne khada karna chahiye, yah sanvidhan ke article 21 ka khula ullanghghan hai.

  18. vijay Says:

    aap hi nai kabir se le kar aab tak sbhi kaamkazi log is tarah ki puja prathnaon se dhukhi hain ye dharm ka nahi vikrat mansiktaka ek roop hai

  19. ghughutibasuti Says:

    लाउडस्पीकर्स और धर्म अलग ही रहने चाहिए।
    घुघूती बासूती

  20. gopal Says:

    sir
    i do not eho r u can mail me ur profile so that i can help u

  21. gopal Says:

    mahoydya

    aap kripa kare aapna vivran muze mail kare

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