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	<title>Comments on: भारतीय उच्च शिक्षा</title>
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	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2009 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: नोबेल प्राईज !! &#124; सारथी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2525/comment-page-1#comment-7876</link>
		<dc:creator>नोबेल प्राईज !! &#124; सारथी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Oct 2009 13:07:30 +0000</pubDate>
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		<description>[...] भारतीय उच्च शिक्षा  [...]</description>
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		<title>By: जब तबलची भौतिकी पढाये!! &#124; सारथी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2525/comment-page-1#comment-7853</link>
		<dc:creator>जब तबलची भौतिकी पढाये!! &#124; सारथी</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 11 Oct 2009 08:07:05 +0000</pubDate>
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		<description>[...] भारतीय उच्च शिक्षा  [...]</description>
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		<title>By: विद्यालय दिमांग को कुंद कर रहे हैं!! &#124; सारथी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2525/comment-page-1#comment-7842</link>
		<dc:creator>विद्यालय दिमांग को कुंद कर रहे हैं!! &#124; सारथी</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2009 23:33:43 +0000</pubDate>
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		<description>[...] भारतीय उच्च शिक्षा  [...]</description>
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		<title>By: बवाल</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2525/comment-page-1#comment-7841</link>
		<dc:creator>बवाल</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2009 18:04:51 +0000</pubDate>
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		<description>आप भारतीय शिक्षा प्रणाली की बात करते हैं सर हम तो पूरे भारत के बदलाव के फ़ेर में हैं। काश ये सम्भव होता। आपने वाजिब कहा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आप भारतीय शिक्षा प्रणाली की बात करते हैं सर हम तो पूरे भारत के बदलाव के फ़ेर में हैं। काश ये सम्भव होता। आपने वाजिब कहा।</p>
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		<title>By: dr parveen chopra</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2525/comment-page-1#comment-7840</link>
		<dc:creator>dr parveen chopra</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2009 16:05:15 +0000</pubDate>
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		<description>सही कहा आपने कि शिक्षा में मूलभूत परिवर्तन लाने की बहुत ही ज़्यादा ज़रूरत है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सही कहा आपने कि शिक्षा में मूलभूत परिवर्तन लाने की बहुत ही ज़्यादा ज़रूरत है।</p>
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		<title>By: ज्ञान दत्त</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2525/comment-page-1#comment-7839</link>
		<dc:creator>ज्ञान दत्त</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2009 14:42:40 +0000</pubDate>
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		<description>बढ़िया! शिक्षा व्यवस्था पर लिखा जाना चाहिये। वैसे मुझे लगता है कि जनता शिक्षा की बजाय येन-केन-प्रकरेण डिग्री चाहती है!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बढ़िया! शिक्षा व्यवस्था पर लिखा जाना चाहिये। वैसे मुझे लगता है कि जनता शिक्षा की बजाय येन-केन-प्रकरेण डिग्री चाहती है!</p>
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		<title>By: ab inconvinienti</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2525/comment-page-1#comment-7838</link>
		<dc:creator>ab inconvinienti</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2009 14:18:01 +0000</pubDate>
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		<description>आपका कहना बिलकुल सही है, भारतीय मूल के वैज्ञानिकों पर भारत को गर्व करने का कोई हक नहीं है. ये वैज्ञानिक भारत का नाम तक लेना पसंद नहीं करते यहाँ न इनकी प्रतिभा का कोई कद्रदान था न मौके थे. उन्होंने यह सब उपलब्धियां विदेशी शिक्षा, विदेशी नौकरी, विदेशी फंड्स, विदेशी लैबोरेट्रीज, विदेशी सहयोगियों की मदद से प्राप्त की हैं. और आज तक भारत को उनकी कोई सुध नहीं थी, आज नोबेल मिल गया तो एकदम से अपना हो गया!

पढाई के नाम पर हम केवल आईआईटी आईआईएम् गाते फिरते हैं, जिनका दुनिया के चोटी के सौ इंस्टीट्यूट्स में भी नाम नहीं आ पाता. इनका प्रबंधन और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शायद कोई मौलिक योगदान नहीं है. हम दुनिया को रिसर्चर नहीं देते बल्कि कुशल कर्मचारी देते हैं. 

ये वैज्ञानिक अन्दर तक भरे हुए हैं, आप किसी नासा या बेल लैब्स के बड़े भारतीय वैज्ञानिक से पूछ कर देख लीजिये की वे आज भारत में होते तो क्या अच्छा नहीं होता? यकीन मानिये वह सिहर उठेगा इस कल्पना से. 

भारतीयों को तभी गर्व होना चाहिए जब भारत में जन्मा, भारत में पढ़ा वैज्ञानिक भारत में ही शोध करते हुए ऐसी उपलब्धियां पाए.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपका कहना बिलकुल सही है, भारतीय मूल के वैज्ञानिकों पर भारत को गर्व करने का कोई हक नहीं है. ये वैज्ञानिक भारत का नाम तक लेना पसंद नहीं करते यहाँ न इनकी प्रतिभा का कोई कद्रदान था न मौके थे. उन्होंने यह सब उपलब्धियां विदेशी शिक्षा, विदेशी नौकरी, विदेशी फंड्स, विदेशी लैबोरेट्रीज, विदेशी सहयोगियों की मदद से प्राप्त की हैं. और आज तक भारत को उनकी कोई सुध नहीं थी, आज नोबेल मिल गया तो एकदम से अपना हो गया!</p>
<p>पढाई के नाम पर हम केवल आईआईटी आईआईएम् गाते फिरते हैं, जिनका दुनिया के चोटी के सौ इंस्टीट्यूट्स में भी नाम नहीं आ पाता. इनका प्रबंधन और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शायद कोई मौलिक योगदान नहीं है. हम दुनिया को रिसर्चर नहीं देते बल्कि कुशल कर्मचारी देते हैं. </p>
<p>ये वैज्ञानिक अन्दर तक भरे हुए हैं, आप किसी नासा या बेल लैब्स के बड़े भारतीय वैज्ञानिक से पूछ कर देख लीजिये की वे आज भारत में होते तो क्या अच्छा नहीं होता? यकीन मानिये वह सिहर उठेगा इस कल्पना से. </p>
<p>भारतीयों को तभी गर्व होना चाहिए जब भारत में जन्मा, भारत में पढ़ा वैज्ञानिक भारत में ही शोध करते हुए ऐसी उपलब्धियां पाए.</p>
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		<title>By: PN Subramanian</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2525/comment-page-1#comment-7837</link>
		<dc:creator>PN Subramanian</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2009 14:02:12 +0000</pubDate>
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		<description>ताऊ लोग आजकल बहुत उधम मचा रहे हैं.आपका सोचना यथार्थ से साक्षात्कार है. आपकी यह तस्वीर पहले भी कहीं देखी है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ताऊ लोग आजकल बहुत उधम मचा रहे हैं.आपका सोचना यथार्थ से साक्षात्कार है. आपकी यह तस्वीर पहले भी कहीं देखी है.</p>
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		<title>By: राज भाटिया</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2525/comment-page-1#comment-7836</link>
		<dc:creator>राज भाटिया</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2009 13:44:30 +0000</pubDate>
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		<description>सब से पहले तो अनुनाद जी की बात से सहमत हुं, कारण मेरे लडके ने दो साल के बाद विश्वविद्यालय जाना है, ओर उस की कोशिश है कि किसी बहुत बडे विश्वविद्यालय मै जाये ओर स्कालर सिप ले कर, (मेने अपने बच्चो को कभी भी जोर नही दिया पढाई के लिये)इस बार मेने बच्चो को कहा कि तुम भारत जा कर क्यो नही पढते ? तो मेरे लडके ने सारे विश्वविद्यालयओ की लिस्ट निकाल कर मुझे दे दी.....दुसरा कारण यहा भारत की डिगरी नही चलती, कारण भी साफ़ है पहले भारत की पढाई की बहुत इज्जत होती थी, लेकिन आज आप ने भारत डिगरी लेनी है तो पेसा खरच करो ओर लेलो.... हालात बहुत खराब है, विद्वान  एक तरफ़ खडे है... ओर चोर उचाके डिगरी ले कर मजे कर रहे है...लेकिन यह अभी १० एक सालो से ही हुया है. गुंडा गरदी नहि तो फ़िर यह क्या है
आप की बातो से ओर अन्य टिपण्णीयो से सहमत हुं</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सब से पहले तो अनुनाद जी की बात से सहमत हुं, कारण मेरे लडके ने दो साल के बाद विश्वविद्यालय जाना है, ओर उस की कोशिश है कि किसी बहुत बडे विश्वविद्यालय मै जाये ओर स्कालर सिप ले कर, (मेने अपने बच्चो को कभी भी जोर नही दिया पढाई के लिये)इस बार मेने बच्चो को कहा कि तुम भारत जा कर क्यो नही पढते ? तो मेरे लडके ने सारे विश्वविद्यालयओ की लिस्ट निकाल कर मुझे दे दी&#8230;..दुसरा कारण यहा भारत की डिगरी नही चलती, कारण भी साफ़ है पहले भारत की पढाई की बहुत इज्जत होती थी, लेकिन आज आप ने भारत डिगरी लेनी है तो पेसा खरच करो ओर लेलो&#8230;. हालात बहुत खराब है, विद्वान  एक तरफ़ खडे है&#8230; ओर चोर उचाके डिगरी ले कर मजे कर रहे है&#8230;लेकिन यह अभी १० एक सालो से ही हुया है. गुंडा गरदी नहि तो फ़िर यह क्या है<br />
आप की बातो से ओर अन्य टिपण्णीयो से सहमत हुं</p>
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		<title>By: सुरेश चिपलूनकर</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2525/comment-page-1#comment-7835</link>
		<dc:creator>सुरेश चिपलूनकर</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2009 12:09:18 +0000</pubDate>
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		<description>आपके अनुभवों को पढ़ने के लिये बेताब हैं…। भारत की शिक्षा व्यवस्था आज भी चौराहे पर पड़ी कुतिया के समान ही है, जिसे हर आने-जाने वाला एक लात जमा देता है…</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपके अनुभवों को पढ़ने के लिये बेताब हैं…। भारत की शिक्षा व्यवस्था आज भी चौराहे पर पड़ी कुतिया के समान ही है, जिसे हर आने-जाने वाला एक लात जमा देता है…</p>
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		<title>By: संगीता पुरी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2525/comment-page-1#comment-7834</link>
		<dc:creator>संगीता पुरी</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2009 11:53:38 +0000</pubDate>
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		<description>प्राचीन काल में शिक्षा के केन्‍द्र रहे भारत का एक भी विश्‍वविद्यालय आज दुनियां के 100 सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में नहीं आ रहा है .. जानकर बहुत तकलीफ हुई .. &#039;नही सोच, नही प्रणाली&#039; की जगह शायद &#039;नई सोंच नई प्रणाली&#039; होनी चाहिए .. कृपया सुधार कर लें .. वैसे बहुत सही लिखा है आपने !!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्राचीन काल में शिक्षा के केन्‍द्र रहे भारत का एक भी विश्‍वविद्यालय आज दुनियां के 100 सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में नहीं आ रहा है .. जानकर बहुत तकलीफ हुई .. &#8216;नही सोच, नही प्रणाली&#8217; की जगह शायद &#8216;नई सोंच नई प्रणाली&#8217; होनी चाहिए .. कृपया सुधार कर लें .. वैसे बहुत सही लिखा है आपने !!</p>
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		<title>By: दिनेशराय द्विवेदी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2525/comment-page-1#comment-7833</link>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2009 11:49:27 +0000</pubDate>
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		<description>आप से सहमत हूँ। भारतीय शिक्षा प्रणाली को आमूल परिवर्तन की आवश्यकता है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आप से सहमत हूँ। भारतीय शिक्षा प्रणाली को आमूल परिवर्तन की आवश्यकता है.</p>
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