सुरेश चिपलूनकर के चिट्ठे को हर कोई जानता है. इनके हिन्दूवादी विचारों से कई चिट्ठाकार इनका विरोध करते हैं, लेकिन मैं इस चिट्ठे के स्नेहियों में से एक हूँ क्योंकि मैं भी सुरेश के समान ही राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिये समर्पित हूँ. पिछले दिनों उन्होंने घोषणा की कि उनके सारे लेख क्रियेटिव कामन्स में दिये जा रहे हैं.
क्रियेटिव कामन्स का मतलब है कि बिना किसी अतिरिक्त अनुमति के उनके लेखों को कोई भी चिट्ठाकार अपने चिट्ठे पर छाप सकता है. सिर्फ उनके चिट्ठे पर दी शर्तों का पालन करना पर्याप्त होगा. मैं उनके इस कदम का अनुमोदन एवं हार्दिक स्वागत करता हूँ. उम्मीद है कि कई चिट्ठाकार इसी तरह अपने चिट्ठे की सामग्री उदारता से उपलब्ध करवायेंगे.
इस मामले में मैं उन्मुक्त जी का नाम हरेक को याद दिलाना चाहता हूँ. उनके चिट्ठे की हर सामग्री किसी के द्वारा भी पुन: छापी जा सकती है और उनकी शर्तें एकदम उदार हैं. उनका तर्क यह है कि अपनी रचना को इस तरह से खुले में छोड देने से “विचार आगे बढते हैं”. मैं उनकी इस सोच का कायल हूँ, एवं हिन्दी चिट्ठाकारों के समक्ष इस तरह का एक नमूना और आदर्श रखने के लिये उनका भी अनुमोदन करता हूँ. उनसे एवं मेरे बेटे से प्रेरणा लेकर “सारथी” के मेरे सारे आलेख क्रियेटिव कामन्स में रखे गये हैं. रवि रतलामी भी प्रशंसा के पात्र हैं जिनका चिट्ठा इसी तरह क्रियेटिव कामन्स में है.
इस बीच सुरेश के निम्न आलेख भारत में ईसाई-मुस्लिम संघर्ष की शुरुआत केरल से होगी… Christian Muslim Ratio and Dominance in Kerala को देखा तो लगा कि यह आलेख एवं इसमें दिये गये निष्कर्ष गलत आंकडों पर आधारित है. उन से मैं ने वादा किया है कि चित्र का दूसरा पहलू सारथी पर पेश करूंगा. यह आलेख सारथी पर कल आयगा. इस बीच उपर दी गई कडी को चटका कर आप यह आलेख और सुरेश का चिट्ठा दोनों जरा देख लें.
इस विभाग के पिछले 10 पोस्ट
- एक बिजली, लाखों का नुक्सान!
- बनारस का बुद्धिजीवी फरिश्ता!
- जालियांवाला बाग हत्याकांड!!
- केरल में धार्मिक संघर्ष !!
- उन्मुक्त, सुरेश चिपलूनकर: अनुमोदन तथा कुछ और बातें!!
- पुलीस स्टेशन का एक और चक्कर!!
- ईसाईयों का “भाईचारा-संप्रदाय”
- अन्तर सोहिल का प्रश्न!!
- एक व्यक्तिगत बात !!
- मार दिया जाये या छोड दिया जाये!!




October 22nd, 2009 at 10:26 am
मैने सुरेश चिपलूनकर जी के चिट्ठे पर इसे पढा था .. पर क्रियेटिव कामन्स का मतलब समझ में नहीं आया .. हमारे आलेखों को कोई छापे .. इसमें तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए .. पर सबकी अपनी अलग तरह की सोंच होती है .. इसलिए उसका उल्लेख तो होना ही चाहिए .. जैसे कि मैं अपने आलेखों में ज्योतिष के क्षेत्र में अपने पिताजी के विचारधारा की चर्चा करती हूं .. इसे ज्योतिष में और कहीं मिक्स नहीं किया जा सकता है !!
October 22nd, 2009 at 10:35 am
मैंने भी पढा है वह लेख वाकई गलत आंकडों पर आधारित है, साबित आप कर देंगें? ना करेंगे तो भी हम प्रसन्न हैं, उधर यह तो लिखा मिला कि ईसाई किस किस तरह से हिन्दु को ईसाई बनाते हैं पर यह नहीं पता चल रहा मुसलमान कैसे बनाया जा रहा है,
October 22nd, 2009 at 10:49 am
प्रतीक्षा रहेगी।
October 22nd, 2009 at 2:27 pm
पोस्ट की प्रतीक्षा है !
October 22nd, 2009 at 4:27 pm
शास्त्री जी, मेरे बारे में अच्छे विचार रखने और स्नेह देने के लिये शुक्रिया।
मैं नहीं जानता कि वह व्यक्ति कौन है जिसने यह वेबसाइट शुरू की है। लेकिन हो सकता है कि सबको बिना शर्त अपने लेखों का छापने अनुमति देने पर ही शुरू की गयी हो। कम से कम मेरे विचार तो कुछ औरों तक पहुंच रहें हैं।
October 22nd, 2009 at 4:44 pm
शास्त्री जी आपके लेख का इंतज़ार मुझे भी है… तब तक मैं भी इस मुद्दे पर थोड़ा और अध्ययन/खोज कर लूं… पता नहीं आप मुझे कहाँ रगड़ने वाले हैं…
@ संगीता जी… क्रियेटिव कामन्स लाइसेंस और कॉपीराइट इसलिये जरूरी है ताकि आपका लिखा हुआ कोई भी लेख कोई दूसरा व्यक्ति अपने आर्थिक फ़ायदे के लिये न कर ले… अब यदि मेरी मंशा मेरे विचारों को आगे तक पहुँचाने की है लेकिन इन्हीं लेखों को कोई वेबसाइट चुरा ले और उस पर विज्ञापन से कमाई भी कर ले तो यह गलत है ना…। बस इतना सा ही मतलब है कि यदि लेखक को किसी लेख से किसी प्रकार की आर्थिक कमाई नहीं हो रही तो किसी दूसरे को भी यह हक नहीं कि उस सामग्री से वह कुछ लाभ कमाये…।
October 22nd, 2009 at 6:38 pm
आदरणीय शास्त्री जी ,
मुझे माननीय सुरेश जी के ब्लॉग पर बहुत अधिक आपति है , मुझे नहीं लगता उनके विचार किसी भी तरह से रास्त्र निर्माण में काम आ सकते हैं , मुझे ऐसे विचारों से घृणा और इर्ष्या ही झलकती है , मैंने उनके केरल वाले ब्लॉग पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी इस उम्मीद से की शायद उन जैसा विद्वान व्यक्ति मेरे विचारों पर भी ध्यान दे . में आपसे उम्मीद रखता हूँ की आप शायद सही प्रकाश दिखाएं .
धन्यवाद
कभी मेरे ब्लॉग पर भी पधारें , आप जैसे विद्वानों की प्रतिक्रिया का बहुत शुक्रगुजार हूँगा .http://mutinity.blogspot.com/
October 22nd, 2009 at 8:18 pm
सुरेश चिपलूनकर के चिट्ठे को हर कोई जानता है. इनके हिन्दूवादी विचारों से कई चिट्ठाकार इनका विरोध करते हैं, लेकिन मैं इस चिट्ठे के स्नेहियों में से एक हूँ क्योंकि मैं भी सुरेश के समान ही राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिये समर्पित हूँ. पिछले दिनों उन्होंने घोषणा की कि उनके सारे लेख क्रियेटिव कामन्स में दिये जा रहे हैं.
sahi kaha aapne !
ab is rahul srivastava secular bhai ko kaun samjhaye ki wo jo sochte hain klewal wahi rashtrbhakti nahin hai .
October 23rd, 2009 at 12:22 am
हम हिन्दू ,मुस्लिम या इसाई नहीं है , ये एक असत्य है , इश्वर ने हमे इंसान बनाकर धरती पर भेजा था , और अगर कोई इस झूठ के साथ रास्त्र निर्माण की बात करता है तो मुझे उस पर हसी आती है , आप लोगों को आपका रास्त्र निर्माण मुबारक .
http://mutinity.blogspot.com/ आपके धर्म और सामाजिक व्यवस्था के बारे में कुछ लिखा है , समय हो तो पढ़ लीजियेगा .
धन्यवाद
December 23rd, 2009 at 7:34 pm
Well Hindi typing karna mujhe nahi aata so haath jod kar aapse maafi chahta hu,
Suresh ji ne bahut hi satik or saaf likha hai or 100% satya likha hai Suresh ji aapka bahut bahut aabhar, KEEP UP THE GOOD WORK SIR, and please let me know if i can help in anyway for the cause of Rashtra Nirman.
Hamare bhai Shri Rahul ji i just wanted to say lets talk about it, i just visited your blog and surely would love to discuss things with you, come on bro we should open our eyes now atleast now, dont only look infront look all around and you will see……….only if you want to see the truth whats happening and the conspiracy behind it then it you will learn what is secularism what is Rashtra Nirman, what is Hinduvadi what is right wing etc. but am afraid it might be too late then.
Vande Matram
November 24th, 2011 at 6:24 pm
mere khayal se suresh ji 101% sahi baatain likhte hai, jo unaki bato ko nahi samajata hai usase sayad koi dusra murkh nahi hai
November 24th, 2011 at 9:39 pm
Bandhuo……
Mai Shree Suresh Ji se sat pratisat sahmat hbu. Unke vicharo aur lekho me na hi kewal deshbhakti hai apitu satyata bhi hai. English mein agar kahu to main unka FAN hu.
Jab maine pehli baar unkla blog padha to mujhe theek nhi laga ,par jab maine unki baato pe vichaar kiya ,vastvik jeevan mein use dekhne ki koshish ki to main bhi unki tarah deshbhakti ka sandesh prasarit karne laga hu……ha par unke tulna mein mai kuchh bhi nhi hu.
@Rahul Bhai……
Kya aap ko sach nhi nazar aata???? Kya sirf hume hi secularism ka jhanda le ke ghumna hai…..kya hum hi bhaichaara failana jante hai….????? In saari baato ka jawab sochiyega……par sighra ati sighra……kahi der na ho jaaye.