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	<title>Comments on: लव जिहाद: क्या बला है यह?</title>
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	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2009 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: Dr.Rupesh Shrivastava</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8030</link>
		<dc:creator>Dr.Rupesh Shrivastava</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Nov 2009 08:43:37 +0000</pubDate>
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		<description>आदरणीय,ये मुद्दा प्रकाश में तो अब आ रहा है किन्तु ये शुरुआत सिमी के सहयोगी संगठन &quot;तन्ज़ीम-ए-अल्लाहोअक़बर&quot; की तरफ़ से लगभग पंद्रह सालों से मुंबई में करी जा चुकी थी। जब किसी भी कार्य को एक ’मिशनरी’ जैसे समर्पण के साथ करा जाए तो सफलता मिलती ही है चाहे वह धर्म प्रचार करना हो अथवा कुछ अन्य कार्य। जिन्हें इस कार्य के दूरगामी परिणामों से लाभ है वे धन,राजनैतिक पहुंच आदि प्रयोग करने से पीछे नहीं हटते। यदि जो चाहते हैं कि लड़कियों को अन्य धर्म में जाने से रोका जा सके तो उन्हें खुद ही बेहतर समझ देनी होगी कि किसी एक के अन्य धर्म में चले जाने से किन समीकरणों में बदलाव होता है किसे लाभ होता है क्यों होता है कैसे होता है; कदाचित जब लाभ का स्वार्थ स्पष्ट होगा तो बच्चियां समझ सकेंगी। इन मिशनरी लड़कों को शरीर सौष्ठव और सौन्दर्य प्रसाधनों के प्रयोग के साथ ही स्त्री व्यवहार को भी बखूबी समझाया जाता है। ये सब मैं निजी तौर पर जानता हूं,मेहरबानी करके इस वाक्य को अन्यथा न लें।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आदरणीय,ये मुद्दा प्रकाश में तो अब आ रहा है किन्तु ये शुरुआत सिमी के सहयोगी संगठन &#8220;तन्ज़ीम-ए-अल्लाहोअक़बर&#8221; की तरफ़ से लगभग पंद्रह सालों से मुंबई में करी जा चुकी थी। जब किसी भी कार्य को एक ’मिशनरी’ जैसे समर्पण के साथ करा जाए तो सफलता मिलती ही है चाहे वह धर्म प्रचार करना हो अथवा कुछ अन्य कार्य। जिन्हें इस कार्य के दूरगामी परिणामों से लाभ है वे धन,राजनैतिक पहुंच आदि प्रयोग करने से पीछे नहीं हटते। यदि जो चाहते हैं कि लड़कियों को अन्य धर्म में जाने से रोका जा सके तो उन्हें खुद ही बेहतर समझ देनी होगी कि किसी एक के अन्य धर्म में चले जाने से किन समीकरणों में बदलाव होता है किसे लाभ होता है क्यों होता है कैसे होता है; कदाचित जब लाभ का स्वार्थ स्पष्ट होगा तो बच्चियां समझ सकेंगी। इन मिशनरी लड़कों को शरीर सौष्ठव और सौन्दर्य प्रसाधनों के प्रयोग के साथ ही स्त्री व्यवहार को भी बखूबी समझाया जाता है। ये सब मैं निजी तौर पर जानता हूं,मेहरबानी करके इस वाक्य को अन्यथा न लें।</p>
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	<item>
		<title>By: Raj</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8029</link>
		<dc:creator>Raj</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Nov 2009 06:38:20 +0000</pubDate>
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		<description>Dear Shastri Ji,

            You are right my comment is in general context of such happenings in whole nation.Please don&#039;t take it for a specific region.

     As I think in all parts of country it is not possible to create an awareness among girls without proper media coverage that&#039;s why I tried to focus on that Because Muslim fundamentalist can do it anywhere in India.

   I would appreciate if some scholars come for a debate on News channels against these issues.That will help a lot in educating people.

This can happen with all innocent girls of any religion because parents are not aware or intrested in feeding these type of issues in their childrens.

@Nisachar: Your observation is perfect.

@Anunad Singh:  Nice quote.
&quot; जिसका जो ‘स्वभाव’ है उसको बदलना दुष्कर काम है। श्वान (कुत्ते) को यदि राजा बना दिया जाय तो क्या वह ‘जूता चबाना’ छोड़ देगा?&quot;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Dear Shastri Ji,</p>
<p>            You are right my comment is in general context of such happenings in whole nation.Please don&#8217;t take it for a specific region.</p>
<p>     As I think in all parts of country it is not possible to create an awareness among girls without proper media coverage that&#8217;s why I tried to focus on that Because Muslim fundamentalist can do it anywhere in India.</p>
<p>   I would appreciate if some scholars come for a debate on News channels against these issues.That will help a lot in educating people.</p>
<p>This can happen with all innocent girls of any religion because parents are not aware or intrested in feeding these type of issues in their childrens.</p>
<p>@Nisachar: Your observation is perfect.</p>
<p>@Anunad Singh:  Nice quote.<br />
&#8221; जिसका जो ‘स्वभाव’ है उसको बदलना दुष्कर काम है। श्वान (कुत्ते) को यदि राजा बना दिया जाय तो क्या वह ‘जूता चबाना’ छोड़ देगा?&#8221;</p>
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		<title>By: nishachar</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8028</link>
		<dc:creator>nishachar</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Nov 2009 14:49:03 +0000</pubDate>
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		<description>@संजय बेगाणी
संजय जी मैं आपकी बातों से कुछ हद तक सहमत हूँ परन्तु कुछ विचारभिन्नता भी है.

विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण की बात से मैं सहमत हूँ. आपने जिन गुणों को आकर्षण का कारण बताया उनसे भी सहमत हूँ परन्तु यह गुण प्रत्येक धर्म के युवक में हो सकते हैं. असल बात है कि यह एक मकसद के साथ सुनियोजित ढंग से किया जा रहा है और इसके लिए बाकायदा संसाधन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं- मसलन युवकों को महँगी गाडियां, मोबाइल, जेब खर्च के लिए धन उपलब्ध करवाया जा रहा है.कालेज में प्रवेश दिलाने के साथ ही संभावित शिकार (लड़कियों) की सूची भी उपलब्ध कराई जाती है. मतलब प्रोफेशनल तरीके से यह काम करवाया जा रहा है. अगर आपको भी इस तरह के संसाधन उपलब्ध करवाए जाये तो आप भी यह काम कर सकते हैं. इसके लिए बलिष्ठ शरीर या हीरो जैसा चेहरा जरूरी नहीं है (इस उम्र में गधी भी परी नजर आती है) . आप कुरूप नहीं है, वाक्पटु हैं और स्त्री मनोविज्ञान को थोडा बहुत समझते हैं तो आपको इस काम में कोई मुश्किल नहीं आएगी. अब बात आती है धर्म और समुदाय की- हिन्दू और इसाई समुदाय उदार हैं और लड़किया न तो परदे में रहती हैं और न ही उन पर इतनी ज्यादा पाबंदियां लगाई जाती हैं जितना कि मुस्लिम समाज में, इसी सब का फायदा इन युवकों को मिलता है.

अब सवाल उठता है कि &quot;लव जेहाद&quot; के अलावा भी लड़कियां मुस्लिम युवकों के बहकावे में क्यों आ जाती हैं. अगर उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए इस बात पर गौर करें कि ये मुस्लिम युवक इस काम के लिए हमेशा फारिग रहते हैं, जैसे कि यह सिर्फ इसी काम के लिए पैदा हुए हैं और रोजी-रोटी कमाने या पढाई -लिखाई के लिए इन पर कोई दबाव नहीं है. (मुस्लिम मोहल्लों के आस -पास पड़ने वाले लड़कियों के स्कूल- कालेजों के बाहर या फिर बाजारों -नुक्कडों पर खड़े होकर छेड़खानी करने वाले मुस्लिम युवक इसका सबूत हैं). मैं यह नहीं कहता कि हिन्दू या अन्य समुदायों के लड़के छेड़खानी नहीं करते लेकिन मुस्लिम लड़के जिस बेफिक्री और गुंडागर्दी के साथ बिना किसी लोक-लाज के  ऐसा करते हैं वह यही आभास देता है कि शायद उनके परिवार वाले भी इसे बुरा नहीं समझते होंगे.  इसी बात का विरोध करते हुए कुछ वर्षों पहले मेरठ में बजरंग दल ने इसी तरह हिन्दू  लड़कियों के साथ &quot;दोस्ती&quot; करने या करने का प्रयास करने वाले मुस्लिम युवको को पीटा था तो सामाजिक संगठन छाती पीटने लगे थे.

एक और बात, चाहे लड़का गैर मुस्लिम हो या लड़की ऐसे विवाहों में धर्म परिवर्तन गैर मुस्लिम को ही करना पड़ता है (जहाँ ऐसा नहीं होता वहां उसका हश्र जम्मू के रजनीश जैसा होता है). दूसरे हिन्दू परिवारों में मुस्लिम लड़की को आसानी से स्वीकार्यता नहीं मिलती इसलिए भी हिन्दू लड़के मुस्लिम युवतियों से सम्बन्ध बनाने में हिचकते हैं.

तो, कुल मिलाकर लब्बो लुबाव यह है कि माँ- बाप को बड़े होते बच्चों का मित्र बनकर उनका मार्गदर्शन करना होगा और विशेषकर लड़कियों को इस तरह के खतरों से आगाह करना होगा तभी इस षडयंत्र का मुकाबला किया जा सकता है. इसके साथ ही आधुनिकता के चक्कर में वास्तविकता से मुंह चुराने की आदत भी छोड़नी होगी.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@संजय बेगाणी<br />
संजय जी मैं आपकी बातों से कुछ हद तक सहमत हूँ परन्तु कुछ विचारभिन्नता भी है.</p>
<p>विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण की बात से मैं सहमत हूँ. आपने जिन गुणों को आकर्षण का कारण बताया उनसे भी सहमत हूँ परन्तु यह गुण प्रत्येक धर्म के युवक में हो सकते हैं. असल बात है कि यह एक मकसद के साथ सुनियोजित ढंग से किया जा रहा है और इसके लिए बाकायदा संसाधन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं- मसलन युवकों को महँगी गाडियां, मोबाइल, जेब खर्च के लिए धन उपलब्ध करवाया जा रहा है.कालेज में प्रवेश दिलाने के साथ ही संभावित शिकार (लड़कियों) की सूची भी उपलब्ध कराई जाती है. मतलब प्रोफेशनल तरीके से यह काम करवाया जा रहा है. अगर आपको भी इस तरह के संसाधन उपलब्ध करवाए जाये तो आप भी यह काम कर सकते हैं. इसके लिए बलिष्ठ शरीर या हीरो जैसा चेहरा जरूरी नहीं है (इस उम्र में गधी भी परी नजर आती है) . आप कुरूप नहीं है, वाक्पटु हैं और स्त्री मनोविज्ञान को थोडा बहुत समझते हैं तो आपको इस काम में कोई मुश्किल नहीं आएगी. अब बात आती है धर्म और समुदाय की- हिन्दू और इसाई समुदाय उदार हैं और लड़किया न तो परदे में रहती हैं और न ही उन पर इतनी ज्यादा पाबंदियां लगाई जाती हैं जितना कि मुस्लिम समाज में, इसी सब का फायदा इन युवकों को मिलता है.</p>
<p>अब सवाल उठता है कि &#8220;लव जेहाद&#8221; के अलावा भी लड़कियां मुस्लिम युवकों के बहकावे में क्यों आ जाती हैं. अगर उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए इस बात पर गौर करें कि ये मुस्लिम युवक इस काम के लिए हमेशा फारिग रहते हैं, जैसे कि यह सिर्फ इसी काम के लिए पैदा हुए हैं और रोजी-रोटी कमाने या पढाई -लिखाई के लिए इन पर कोई दबाव नहीं है. (मुस्लिम मोहल्लों के आस -पास पड़ने वाले लड़कियों के स्कूल- कालेजों के बाहर या फिर बाजारों -नुक्कडों पर खड़े होकर छेड़खानी करने वाले मुस्लिम युवक इसका सबूत हैं). मैं यह नहीं कहता कि हिन्दू या अन्य समुदायों के लड़के छेड़खानी नहीं करते लेकिन मुस्लिम लड़के जिस बेफिक्री और गुंडागर्दी के साथ बिना किसी लोक-लाज के  ऐसा करते हैं वह यही आभास देता है कि शायद उनके परिवार वाले भी इसे बुरा नहीं समझते होंगे.  इसी बात का विरोध करते हुए कुछ वर्षों पहले मेरठ में बजरंग दल ने इसी तरह हिन्दू  लड़कियों के साथ &#8220;दोस्ती&#8221; करने या करने का प्रयास करने वाले मुस्लिम युवको को पीटा था तो सामाजिक संगठन छाती पीटने लगे थे.</p>
<p>एक और बात, चाहे लड़का गैर मुस्लिम हो या लड़की ऐसे विवाहों में धर्म परिवर्तन गैर मुस्लिम को ही करना पड़ता है (जहाँ ऐसा नहीं होता वहां उसका हश्र जम्मू के रजनीश जैसा होता है). दूसरे हिन्दू परिवारों में मुस्लिम लड़की को आसानी से स्वीकार्यता नहीं मिलती इसलिए भी हिन्दू लड़के मुस्लिम युवतियों से सम्बन्ध बनाने में हिचकते हैं.</p>
<p>तो, कुल मिलाकर लब्बो लुबाव यह है कि माँ- बाप को बड़े होते बच्चों का मित्र बनकर उनका मार्गदर्शन करना होगा और विशेषकर लड़कियों को इस तरह के खतरों से आगाह करना होगा तभी इस षडयंत्र का मुकाबला किया जा सकता है. इसके साथ ही आधुनिकता के चक्कर में वास्तविकता से मुंह चुराने की आदत भी छोड़नी होगी.</p>
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	<item>
		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8027</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Nov 2009 13:07:52 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2576#comment-8027</guid>
		<description>@Raj

Dear Raj ji,

since you have not seen the happenings in Kerala, it is easy to condemn this approach.

Were you in the field here, you would have endorsed it.

You probably wanted to say that other methods are needed outside Kerala. Yes, I accept that.

Shastri</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@Raj</p>
<p>Dear Raj ji,</p>
<p>since you have not seen the happenings in Kerala, it is easy to condemn this approach.</p>
<p>Were you in the field here, you would have endorsed it.</p>
<p>You probably wanted to say that other methods are needed outside Kerala. Yes, I accept that.</p>
<p>Shastri</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Raj</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8026</link>
		<dc:creator>Raj</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Nov 2009 12:41:17 +0000</pubDate>
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		<description>This is a  Nice post But approach to tackle this issue is not good.

 Without creating a strong movement against  Muslim boys among teenage girls you can&#039;t do anything by these discussions.

 A very strong Girls movement is required with high media coverage.To protect them with these brainwashed muslim fundamentalists.

So please contact some girls who want to rejoin their original faith and also create awareness among girls.

In whole country Many Hindu girls are in affair with muslim boys (with fake Hindu names also) having very less education than them. :(

We cant do anything in this case b&#039;coz our media will say that we are against love.So teenage girls should be prepared against these type of cheap mentality muslim boys with the help of parent and teachers associations.

We can start this awareness by discussing it with Inter college&#039;s  principals and teachers.

Only they can save our Young generations.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>This is a  Nice post But approach to tackle this issue is not good.</p>
<p> Without creating a strong movement against  Muslim boys among teenage girls you can&#8217;t do anything by these discussions.</p>
<p> A very strong Girls movement is required with high media coverage.To protect them with these brainwashed muslim fundamentalists.</p>
<p>So please contact some girls who want to rejoin their original faith and also create awareness among girls.</p>
<p>In whole country Many Hindu girls are in affair with muslim boys (with fake Hindu names also) having very less education than them. <img src='http://sarathi.info/wp-includes/images/smilies/icon_sad.gif' alt=':(' class='wp-smiley' /> </p>
<p>We cant do anything in this case b&#8217;coz our media will say that we are against love.So teenage girls should be prepared against these type of cheap mentality muslim boys with the help of parent and teachers associations.</p>
<p>We can start this awareness by discussing it with Inter college&#8217;s  principals and teachers.</p>
<p>Only they can save our Young generations.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: अनुनाद सिंह</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8025</link>
		<dc:creator>अनुनाद सिंह</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Nov 2009 07:48:05 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2576#comment-8025</guid>
		<description>&quot;लव जिहाद&quot; नामक इस  असभ्य हरकत पर सार्थक लिखने के लिये साधुवाद।  देश को इस नीचता से उबारने का सम्यक हल निकालना पड़ेगा।

मुझे पंचतंत्र के कुछ सूत्र याद आ रहे हैं -
१) अज्ञातकुलशीलस्य वासो देयो न कस्यचिद् । (जिसका कुल और शील ज्ञात न हो उसे अपने घर में नहीं ठहराना चाहिये)

२) जिसका जो &#039;स्वभाव&#039; है उसको बदलना दुष्कर काम है।  श्वान (कुत्ते) को यदि राजा बना दिया जाय तो क्या वह &#039;जूता चबाना&#039; छोड़ देगा?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>&#8220;लव जिहाद&#8221; नामक इस  असभ्य हरकत पर सार्थक लिखने के लिये साधुवाद।  देश को इस नीचता से उबारने का सम्यक हल निकालना पड़ेगा।</p>
<p>मुझे पंचतंत्र के कुछ सूत्र याद आ रहे हैं -<br />
१) अज्ञातकुलशीलस्य वासो देयो न कस्यचिद् । (जिसका कुल और शील ज्ञात न हो उसे अपने घर में नहीं ठहराना चाहिये)</p>
<p>२) जिसका जो &#8216;स्वभाव&#8217; है उसको बदलना दुष्कर काम है।  श्वान (कुत्ते) को यदि राजा बना दिया जाय तो क्या वह &#8216;जूता चबाना&#8217; छोड़ देगा?</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8024</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Nov 2009 05:39:02 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2576#comment-8024</guid>
		<description>उन्मुक्तजी से सहमत. 

आपने लव जैहाद की बात को माना, साधूवाद. वरना यह हिन्दुओं का फितुर ही माना जाता. 

दुसरी बात लड़कियाँ मुस्लिम युवकों को क्यों पसन्द करती है? इसका कारण मनो वैज्ञानिक है. मानव विकास के समय जो मानसिक विकास हुआ उसमें निहित है. 

समझाने के लिए भारी नितम्ब (इसे सुडोल भी समझ सकते है) व वक्ष पुरूष को आकर्षित करते है क्योंकि कहीं इसका इशारा महिला की प्रजनन क्षमता की ओर होता है. भले ही हम इस ओर न सोच रहे हों, मगर विकास काल में यही सही रहा होगा और अनजाने में आकर्षित होते है. वैसे ही महिलाएं कुछ खास प्रकार के पुरूषों से आकर्षित होती है. अनजाने में. इस पुरूषों का बखान करना बखेड़ा खड़ा कर सकता है, अतः केवल समझ लें.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>उन्मुक्तजी से सहमत. </p>
<p>आपने लव जैहाद की बात को माना, साधूवाद. वरना यह हिन्दुओं का फितुर ही माना जाता. </p>
<p>दुसरी बात लड़कियाँ मुस्लिम युवकों को क्यों पसन्द करती है? इसका कारण मनो वैज्ञानिक है. मानव विकास के समय जो मानसिक विकास हुआ उसमें निहित है. </p>
<p>समझाने के लिए भारी नितम्ब (इसे सुडोल भी समझ सकते है) व वक्ष पुरूष को आकर्षित करते है क्योंकि कहीं इसका इशारा महिला की प्रजनन क्षमता की ओर होता है. भले ही हम इस ओर न सोच रहे हों, मगर विकास काल में यही सही रहा होगा और अनजाने में आकर्षित होते है. वैसे ही महिलाएं कुछ खास प्रकार के पुरूषों से आकर्षित होती है. अनजाने में. इस पुरूषों का बखान करना बखेड़ा खड़ा कर सकता है, अतः केवल समझ लें.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8023</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Nov 2009 03:45:58 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2576#comment-8023</guid>
		<description>प्रिय उन्मुक्त जी, मैं यौनशिक्षा का पक्षधर हूँ, लेकिन उसकी जिम्मेदारी मांबाप की मानता हूँ, न कि विद्यालय की.

इस आलेख का मुख्य विषय बेमेल विवाह नहीं बल्कि सामाजिक आजादी का दुरुपयोग कैसे हो रहा है यह है.

सस्नेह  -- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
http://www.Sarathi.info</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्रिय उन्मुक्त जी, मैं यौनशिक्षा का पक्षधर हूँ, लेकिन उसकी जिम्मेदारी मांबाप की मानता हूँ, न कि विद्यालय की.</p>
<p>इस आलेख का मुख्य विषय बेमेल विवाह नहीं बल्कि सामाजिक आजादी का दुरुपयोग कैसे हो रहा है यह है.</p>
<p>सस्नेह  &#8212; शास्त्री</p>
<p>हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है<br />
<a href="http://www.Sarathi.info" rel="nofollow">http://www.Sarathi.info</a></p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: उन्मुक्त</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8022</link>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Nov 2009 03:20:48 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2576#comment-8022</guid>
		<description>मैं इस समस्या को religion (अंग्रेजी में इसलिये लिखा क्योंकि इसके लिये धर्म के शब्द का प्रयोग ठीक नहीं) से नहीं जोड़ना चाहता। religion अक्सर लोगों के विचारों को पूर्वग्रहित, अंधा कर देती है। जो कि विकृति का जन्म देते हैं। 

समाज में एक ही  religion एक ही जाति के लोगों के बीच अरिपक्व या बेमेल विवाह, अलग अलग religion के लोगों बीच इस तरह के विवाह से कहीं अधिक होते हैं। इसे धर्मांतर से जोड़ना ठीक नहीं है। इसका कारण कहीं और है।

मेरे विचार से इसका मुख्य कारण मां, पिता, परिवार के सदस्यों का बच्चों के साथ समय न गुजारना होता है। उन्हें ठीक दिशा न देना होता है। बच्चे अपना समय रचनात्मक कार्य, खेल कूद में न लगा कर टीवी के बेकार के प्रोग्राम, अन्तरजाल की बेकारी में लगा रहे हैं। 

मैं जानता हूं कि आप (शास्त्री जी) यौन शिक्षा के पक्षधर नहीं हैं पर यह प्रश्न इससे भी जुड़ा हुआ है। बच्चे समझ नहीं पाते की यह जन्म जन्मांतर का प्रेम नहीं है पर जीवन के परिवर्तन का उफान है। इसे ठीक दिशा में ले जाने की जिम्मेवारी परिवार की है जिसमें परिवार खरा नही उतरता है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मैं इस समस्या को religion (अंग्रेजी में इसलिये लिखा क्योंकि इसके लिये धर्म के शब्द का प्रयोग ठीक नहीं) से नहीं जोड़ना चाहता। religion अक्सर लोगों के विचारों को पूर्वग्रहित, अंधा कर देती है। जो कि विकृति का जन्म देते हैं। </p>
<p>समाज में एक ही  religion एक ही जाति के लोगों के बीच अरिपक्व या बेमेल विवाह, अलग अलग religion के लोगों बीच इस तरह के विवाह से कहीं अधिक होते हैं। इसे धर्मांतर से जोड़ना ठीक नहीं है। इसका कारण कहीं और है।</p>
<p>मेरे विचार से इसका मुख्य कारण मां, पिता, परिवार के सदस्यों का बच्चों के साथ समय न गुजारना होता है। उन्हें ठीक दिशा न देना होता है। बच्चे अपना समय रचनात्मक कार्य, खेल कूद में न लगा कर टीवी के बेकार के प्रोग्राम, अन्तरजाल की बेकारी में लगा रहे हैं। </p>
<p>मैं जानता हूं कि आप (शास्त्री जी) यौन शिक्षा के पक्षधर नहीं हैं पर यह प्रश्न इससे भी जुड़ा हुआ है। बच्चे समझ नहीं पाते की यह जन्म जन्मांतर का प्रेम नहीं है पर जीवन के परिवर्तन का उफान है। इसे ठीक दिशा में ले जाने की जिम्मेवारी परिवार की है जिसमें परिवार खरा नही उतरता है।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: राज भाटिया</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8021</link>
		<dc:creator>राज भाटिया</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Nov 2009 19:22:18 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2576#comment-8021</guid>
		<description>शास्त्री जी युरोप मे खास कर जर्मनी मै विदेशी लोग जब यहां आते है तो, यहा रहने के लिये ओर यहां की नागरिका हांसिल करने के लिये उलटे  सीधे तरीके आजमाते है, उन मे से एक तारीका है यहां शादी करना, विदेशी आदमी या  ओरत यहा के नागरिक से शादी कर के जब उन्हे पास्पोर्ट मिल जाता है तो उन्हे छोड  देते है, पहले  तो यहा के लोगो को यह खेल समझ मै नही आया   अब समझ मै आया तो यह जाग्रुक हो गये है,  ओर ्बच्चो को  समझाया जाता है, लेकिन जब कोई बच्चा या बच्ची जिद करता है कि मुझे तो बहुत प्यार है तो उस विदेश के कागज पत्रो मै जान के देरी की जाती है, कभी कोई कमी तो कभी कमी, जिस को ठीक करवाने मै कई साल लग जाते है, ओर प्यार का भूत भी उतर जाता है.... तो हम क्यो ना अपनी बच्चियो को किसी ऎसे ही उपाय से इन जेहादियो से बचाये</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्री जी युरोप मे खास कर जर्मनी मै विदेशी लोग जब यहां आते है तो, यहा रहने के लिये ओर यहां की नागरिका हांसिल करने के लिये उलटे  सीधे तरीके आजमाते है, उन मे से एक तारीका है यहां शादी करना, विदेशी आदमी या  ओरत यहा के नागरिक से शादी कर के जब उन्हे पास्पोर्ट मिल जाता है तो उन्हे छोड  देते है, पहले  तो यहा के लोगो को यह खेल समझ मै नही आया   अब समझ मै आया तो यह जाग्रुक हो गये है,  ओर ्बच्चो को  समझाया जाता है, लेकिन जब कोई बच्चा या बच्ची जिद करता है कि मुझे तो बहुत प्यार है तो उस विदेश के कागज पत्रो मै जान के देरी की जाती है, कभी कोई कमी तो कभी कमी, जिस को ठीक करवाने मै कई साल लग जाते है, ओर प्यार का भूत भी उतर जाता है&#8230;. तो हम क्यो ना अपनी बच्चियो को किसी ऎसे ही उपाय से इन जेहादियो से बचाये</p>
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	<item>
		<title>By: mithilesh dubey</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8020</link>
		<dc:creator>mithilesh dubey</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Nov 2009 17:16:25 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2576#comment-8020</guid>
		<description>मुद्दा आपने बहुत ही गंभीर रखा है। अगर देखा जाये तो ये एक प्रकार का हथकंडा भी है, जिसे हिन्दुओं के खिलाफ हथियार के रुप मे प्रयोग किया जा रहा है। हाँ यहाँ आपने ये बात सही कहा कि हमें अपने बच्चो को परिचित करवाना चाहिए इस तरह के जिहाद से। और मुझे लगता है कि यही उपाय सबसे सही होगा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मुद्दा आपने बहुत ही गंभीर रखा है। अगर देखा जाये तो ये एक प्रकार का हथकंडा भी है, जिसे हिन्दुओं के खिलाफ हथियार के रुप मे प्रयोग किया जा रहा है। हाँ यहाँ आपने ये बात सही कहा कि हमें अपने बच्चो को परिचित करवाना चाहिए इस तरह के जिहाद से। और मुझे लगता है कि यही उपाय सबसे सही होगा।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Ratan Singh</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8019</link>
		<dc:creator>Ratan Singh</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Nov 2009 17:12:02 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत चिंताजनक है ये ! ये जिहादी पता नहीं देश को कहाँ ले जायेंगे !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत चिंताजनक है ये ! ये जिहादी पता नहीं देश को कहाँ ले जायेंगे !</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8018</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Nov 2009 16:47:39 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2576#comment-8018</guid>
		<description>@प्रेम विधर्मी से किया जा सकता है किन्तु यदि उद्देश्य ही धर्म परिवर्तन हो तो गलत है।

सहमत!!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@प्रेम विधर्मी से किया जा सकता है किन्तु यदि उद्देश्य ही धर्म परिवर्तन हो तो गलत है।</p>
<p>सहमत!!</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: ghughutibasuti</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8017</link>
		<dc:creator>ghughutibasuti</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Nov 2009 16:03:53 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2576#comment-8017</guid>
		<description>बच्चों को समझाना बहुत कठिन काम है। कुँए में कूदते किसी किशोर को रोकना बहुत ही कठिन है। इस उम्र में जिस बात से रोकेंगे उतना ही अधिक वे उसे करेंगे।
मुझे लगता है कि जब किसी का पुत्र या पुत्री किसी ऐसे से प्रेम करें जिसकी मंशा पर या जिसके साथ रहने पर आपको संदेह हो कि वह खुश नहीं रहेगा/ रहेगी तो आप उन्हें यही कहें कि कुछ समय और एक दूसरे को समझो, पढ़ाई खत्म कर लो आदि और स्पैशियल मैरिज एक्ट या अदालती विवाह करने का ही सुझाव दें।  यदि मंशा सही नहीं होगी तो धर्म परिवर्तन ना करने की स्थिति पर वह स्वयं ही आपके बच्चे में रुचि कम कर देगा। यदि आप विरोध नहीं करेंगे तो बहुत संभव है कि उन्हें विवाह की हड़बड़ी नहीं होगी और आपकी संतान अपने आप ही सच देख लेगी।
किशोर किशोरियों के बीच ही यह चर्चा छेड़ी जाए। या फिर उन्हें ही इस विषय पर चर्चा करने को उकसाया जाए।
प्रेम विधर्मी से किया जा सकता है किन्तु यदि उद्देश्य ही धर्म परिवर्तन हो तो गलत है।
घुघूती बासूती</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बच्चों को समझाना बहुत कठिन काम है। कुँए में कूदते किसी किशोर को रोकना बहुत ही कठिन है। इस उम्र में जिस बात से रोकेंगे उतना ही अधिक वे उसे करेंगे।<br />
मुझे लगता है कि जब किसी का पुत्र या पुत्री किसी ऐसे से प्रेम करें जिसकी मंशा पर या जिसके साथ रहने पर आपको संदेह हो कि वह खुश नहीं रहेगा/ रहेगी तो आप उन्हें यही कहें कि कुछ समय और एक दूसरे को समझो, पढ़ाई खत्म कर लो आदि और स्पैशियल मैरिज एक्ट या अदालती विवाह करने का ही सुझाव दें।  यदि मंशा सही नहीं होगी तो धर्म परिवर्तन ना करने की स्थिति पर वह स्वयं ही आपके बच्चे में रुचि कम कर देगा। यदि आप विरोध नहीं करेंगे तो बहुत संभव है कि उन्हें विवाह की हड़बड़ी नहीं होगी और आपकी संतान अपने आप ही सच देख लेगी।<br />
किशोर किशोरियों के बीच ही यह चर्चा छेड़ी जाए। या फिर उन्हें ही इस विषय पर चर्चा करने को उकसाया जाए।<br />
प्रेम विधर्मी से किया जा सकता है किन्तु यदि उद्देश्य ही धर्म परिवर्तन हो तो गलत है।<br />
घुघूती बासूती</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: दिनेशराय द्विवेदी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2576/comment-page-1#comment-8016</link>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Nov 2009 15:58:56 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2576#comment-8016</guid>
		<description>अपने बच्चों के प्रति लापरवाही भरा व्यवहार ही इस तरह के परिणाम लाता है। मैं आप से सहमत हूँ कि &#039;जिस तरह अपने बच्चों को सुरक्षित तरीके से सडक पर चलना सिखाते हैं उसी तरह हम अपने बच्चों को लव-जिहाद के  यथार्थ से परिचित करवायें।&#039;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अपने बच्चों के प्रति लापरवाही भरा व्यवहार ही इस तरह के परिणाम लाता है। मैं आप से सहमत हूँ कि &#8216;जिस तरह अपने बच्चों को सुरक्षित तरीके से सडक पर चलना सिखाते हैं उसी तरह हम अपने बच्चों को लव-जिहाद के  यथार्थ से परिचित करवायें।&#8217;</p>
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