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	<title>Comments on: सारथी नाम बदल लें !!</title>
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	<link>http://sarathi.info/archives/2624</link>
	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: कुछ तो है..जो कि, &#187; मैं चर्चा का पुरज़ोर विरोध करता हूँ&#8230;</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8796</link>
		<dc:creator>कुछ तो है..जो कि, &#187; मैं चर्चा का पुरज़ोर विरोध करता हूँ&#8230;</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Mar 2011 19:05:22 +0000</pubDate>
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		<description>[...] के अवसर से वँचित कर रहे हैं । 3. जब कि हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में ..., सभी सँदर्भित ब्लॉग विदेशी भाषा के ही [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] के अवसर से वँचित कर रहे हैं । 3. जब कि हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में &#8230;, सभी सँदर्भित ब्लॉग विदेशी भाषा के ही [...]</p>
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		<title>By: Prashant(PD)</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8308</link>
		<dc:creator>Prashant(PD)</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Mar 2010 04:43:16 +0000</pubDate>
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		<description>तो नया नाम क्या सोचे हैं?? :D</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>तो नया नाम क्या सोचे हैं?? <img src='http://sarathi.info/wp-includes/images/smilies/icon_biggrin.gif' alt=':D' class='wp-smiley' /> </p>
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	<item>
		<title>By: satish saxena</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8306</link>
		<dc:creator>satish saxena</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Mar 2010 03:11:00 +0000</pubDate>
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		<description>आचार्यवर !
बहुत दिनों बाद मूड में आये और खरा खरा लिखा है ! ब्लाग जगत में अजीब से हालात चल रहे हैं , और आज की स्थिति यह है कि हर कोई सही बात खुल कर कहने से डरता है, और दर है कुछ स्वयंभू ब्लाग माफियों से अपने आपको सबसे बढ़िया लेखक और सर्वप्रिय मान रहे हैं ! बेहद खटिया लेखन के ये महाधनी ये धुरंधर जब चाहें किसी को उठा दें अथवा नीचे गिराने में समर्थ हैं ! इस भय से इक्का दुक्का लोग ही इनका नापसंद लेख लिखने की हिम्मत करते हैं ! मिथिलेश ने अज्ञान वश, दूसरों के पेटेंट विषय पर लिखने की हिमाकत कर डाली नतीजा ....
डॉ अरविन्द मिश्र ही मिथिलेश के साथ खड़े मिसाइल झेल रहे हैं ...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आचार्यवर !<br />
बहुत दिनों बाद मूड में आये और खरा खरा लिखा है ! ब्लाग जगत में अजीब से हालात चल रहे हैं , और आज की स्थिति यह है कि हर कोई सही बात खुल कर कहने से डरता है, और दर है कुछ स्वयंभू ब्लाग माफियों से अपने आपको सबसे बढ़िया लेखक और सर्वप्रिय मान रहे हैं ! बेहद खटिया लेखन के ये महाधनी ये धुरंधर जब चाहें किसी को उठा दें अथवा नीचे गिराने में समर्थ हैं ! इस भय से इक्का दुक्का लोग ही इनका नापसंद लेख लिखने की हिम्मत करते हैं ! मिथिलेश ने अज्ञान वश, दूसरों के पेटेंट विषय पर लिखने की हिमाकत कर डाली नतीजा &#8230;.<br />
डॉ अरविन्द मिश्र ही मिथिलेश के साथ खड़े मिसाइल झेल रहे हैं &#8230;</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: पंकज</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8301</link>
		<dc:creator>पंकज</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Mar 2010 10:23:43 +0000</pubDate>
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		<description>सार्थक चर्चा. आशा है, नियमित रूप से विचार मिलते रहेगे.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सार्थक चर्चा. आशा है, नियमित रूप से विचार मिलते रहेगे.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: मैं चर्चा का पुरज़ोर विरोध करता हूँ&#8230; &#171; बस यूँ ही निट्ठल्ला</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8300</link>
		<dc:creator>मैं चर्चा का पुरज़ोर विरोध करता हूँ&#8230; &#171; बस यूँ ही निट्ठल्ला</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Mar 2010 07:47:59 +0000</pubDate>
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		<description>[...] के अवसर से वँचित कर रहे हैं । 3. जब कि हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में ..., सभी सँदर्भित ब्लॉग विदेशी भाषा के ही [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] के अवसर से वँचित कर रहे हैं । 3. जब कि हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में &#8230;, सभी सँदर्भित ब्लॉग विदेशी भाषा के ही [...]</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: prabhat gopal</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8299</link>
		<dc:creator>prabhat gopal</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Mar 2010 06:34:51 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2624#comment-8299</guid>
		<description>मैं मिथिलेश की बात का समर्थन करता हूं। कम से कम चिट्ठा चर्चा को भड़ास निकालने का माध्यम नहीं बनाना चाहिए, बाकी सब ठीक है। आपका अपना ब्लाग है, व्यक्तिगत स्तर पर जो चाहें लिखें...

फिलिप सर, आपको पढ़कर लगता है.. जैसे एक मार्गदर्शक लौटकर आ गया।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मैं मिथिलेश की बात का समर्थन करता हूं। कम से कम चिट्ठा चर्चा को भड़ास निकालने का माध्यम नहीं बनाना चाहिए, बाकी सब ठीक है। आपका अपना ब्लाग है, व्यक्तिगत स्तर पर जो चाहें लिखें&#8230;</p>
<p>फिलिप सर, आपको पढ़कर लगता है.. जैसे एक मार्गदर्शक लौटकर आ गया।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8298</link>
		<dc:creator>सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Mar 2010 03:42:08 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2624#comment-8298</guid>
		<description>इस प्रकरण की एक सुखद परिणति आपकी वापसी के रूप में देख रहा हूँ। बाकी यह दुनिया जस की तस है। कुछ भी बदला नहीं है और न ही बदलने को तैयार दिखायी देता है। आपका पुनः स्वागत है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इस प्रकरण की एक सुखद परिणति आपकी वापसी के रूप में देख रहा हूँ। बाकी यह दुनिया जस की तस है। कुछ भी बदला नहीं है और न ही बदलने को तैयार दिखायी देता है। आपका पुनः स्वागत है।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8296</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Mar 2010 15:07:15 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2624#comment-8296</guid>
		<description>प्रिय पैदल,

अमर-हिन्दी के लिये हम सब मिल कर बहुत कुछ करेंगे!!

जरूरत घोडों की नहीं सारथियों की हैं, और मैं ने आप को उस समूह में जोड दिया है!

इस हफ्ते से आप की जरूरत होगी -- वाकई में -- हिन्दी-सेवा के लिये. 

सस्नेह  -- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
http://www.IndianCoins.Org</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्रिय पैदल,</p>
<p>अमर-हिन्दी के लिये हम सब मिल कर बहुत कुछ करेंगे!!</p>
<p>जरूरत घोडों की नहीं सारथियों की हैं, और मैं ने आप को उस समूह में जोड दिया है!</p>
<p>इस हफ्ते से आप की जरूरत होगी &#8212; वाकई में &#8212; हिन्दी-सेवा के लिये. </p>
<p>सस्नेह  &#8212; शास्त्री</p>
<p>हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है<br />
<a href="http://www.IndianCoins.Org" rel="nofollow">http://www.IndianCoins.Org</a></p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: " पैदल "</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8295</link>
		<dc:creator>" पैदल "</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Mar 2010 14:52:53 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2624#comment-8295</guid>
		<description>&lt;i&gt;
परम आदरणीय एवँ ब्लॉगर-स्मरणीय शास्त्री जी,
यह स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं कि मुझे आपके विरुद्ध टिप्पणी करने भेजा गया है, पर मैं आपकी पोस्ट पढ़ने का दुःस्साहस कर बैठा । इस पवित्र टिप्पणी बक्से की शपथ कि मुझे अपने ऊपर अत्यन्त खेद हुआ ।
इस पोस्ट की मौलिकता,विचारों की स्पष्टता और सबसे बढ़ कर यह कि इसकी निरपेक्षता से मैं पानी पानी हुआ जाता हूँ । मेरा हृदय-परिवर्तन हो गया है, ऎसी स्वच्छता और कहाँ ?
उधर मैं नाहक ही पानी भरता रहा, अब और पैदल रहा नहीं जाता..
हे फ़ादर, आप मुझे अपने घोड़ों में शामिल कर लें ।
मैं आजीवन आपके रथ में जुता हुआ, हिन्दी माँ की सेवा में लिप्त रहने का वचन देता हूँ । 
हे बिछी हुई बिसातों, मुझे इस आत्मस्वीकृति के लिये क्षमा करना ।
आपका अनुज - &quot; पैदल &quot;
&lt;/i&gt;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><i><br />
परम आदरणीय एवँ ब्लॉगर-स्मरणीय शास्त्री जी,<br />
यह स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं कि मुझे आपके विरुद्ध टिप्पणी करने भेजा गया है, पर मैं आपकी पोस्ट पढ़ने का दुःस्साहस कर बैठा । इस पवित्र टिप्पणी बक्से की शपथ कि मुझे अपने ऊपर अत्यन्त खेद हुआ ।<br />
इस पोस्ट की मौलिकता,विचारों की स्पष्टता और सबसे बढ़ कर यह कि इसकी निरपेक्षता से मैं पानी पानी हुआ जाता हूँ । मेरा हृदय-परिवर्तन हो गया है, ऎसी स्वच्छता और कहाँ ?<br />
उधर मैं नाहक ही पानी भरता रहा, अब और पैदल रहा नहीं जाता..<br />
हे फ़ादर, आप मुझे अपने घोड़ों में शामिल कर लें ।<br />
मैं आजीवन आपके रथ में जुता हुआ, हिन्दी माँ की सेवा में लिप्त रहने का वचन देता हूँ ।<br />
हे बिछी हुई बिसातों, मुझे इस आत्मस्वीकृति के लिये क्षमा करना ।<br />
आपका अनुज &#8211; &#8221; पैदल &#8221;<br />
</i></p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: ताऊ रामपुरिया</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8294</link>
		<dc:creator>ताऊ रामपुरिया</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Mar 2010 12:28:55 +0000</pubDate>
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		<description>आपको पुन: अपने बीच पाकर अदभुत प्रसन्नता का एहसास हो रहा है.

रामराम.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपको पुन: अपने बीच पाकर अदभुत प्रसन्नता का एहसास हो रहा है.</p>
<p>रामराम.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: दिनेशराय द्विवेदी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8293</link>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Mar 2010 11:55:26 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2624#comment-8293</guid>
		<description>वापसी मुबारक हो। चिट्ठा चर्चा का भी इतना चर्चा न होता यदि मिथिलेश ने पोस्ट लिख कर तगड़ी आपत्ति न की होती। वैसे मिथिलेश की पोस्ट में कोई नई बात नहीं थी। वही बात थी जो हजारों लाखों बार कही जा चुकी है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वापसी मुबारक हो। चिट्ठा चर्चा का भी इतना चर्चा न होता यदि मिथिलेश ने पोस्ट लिख कर तगड़ी आपत्ति न की होती। वैसे मिथिलेश की पोस्ट में कोई नई बात नहीं थी। वही बात थी जो हजारों लाखों बार कही जा चुकी है।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8292</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Mar 2010 10:26:19 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2624#comment-8292</guid>
		<description>प्रिय मिथिलेश, चिट्ठाचर्चा या कोई भी चिट्ठा किसी भी अन्य चिट्ठे की चर्चा कर सकता है। यह उनका मौलिक अधिकार है। अत: उस मामले को जाने दो। 

गलत यह हुआ है कि -- जैसे डा अरविंद ने कहा -- &quot;पहले तो चिट्ठाचर्चा ने इनकी किसी पोस्ट का जिक्र नहीं किया — अब क्या केवल चिट्ठाचर्चा मात्र एकल पोस्टों की चर्चा का भंडास निकालने का मंच बन रहा है? जिसे जो भी खुन्नस हो और जिससे भी हो चिट्ठाचर्चा खुला मंच बनता जा रहा है उनके लिए -पहुँचो और भोंपू बजा दो !बढ़िया हैं -लगता है जल्दी ही यहाँ नारियों और नारीवादियों का ही वर्चस्व होगा — मिथिलेश आदि हवा हवाई हो रहेगें!&quot;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्रिय मिथिलेश, चिट्ठाचर्चा या कोई भी चिट्ठा किसी भी अन्य चिट्ठे की चर्चा कर सकता है। यह उनका मौलिक अधिकार है। अत: उस मामले को जाने दो। </p>
<p>गलत यह हुआ है कि &#8212; जैसे डा अरविंद ने कहा &#8212; &#8220;पहले तो चिट्ठाचर्चा ने इनकी किसी पोस्ट का जिक्र नहीं किया — अब क्या केवल चिट्ठाचर्चा मात्र एकल पोस्टों की चर्चा का भंडास निकालने का मंच बन रहा है? जिसे जो भी खुन्नस हो और जिससे भी हो चिट्ठाचर्चा खुला मंच बनता जा रहा है उनके लिए -पहुँचो और भोंपू बजा दो !बढ़िया हैं -लगता है जल्दी ही यहाँ नारियों और नारीवादियों का ही वर्चस्व होगा — मिथिलेश आदि हवा हवाई हो रहेगें!&#8221;</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: indian citizen</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8291</link>
		<dc:creator>indian citizen</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Mar 2010 10:22:32 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2624#comment-8291</guid>
		<description>आपने बिल्कुल ठीक लिखा है. बिना पढ़े और देखे ही कमेंट कर देना हमारे सूडो बुद्धिजीवियों की आदत बन चुकी है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपने बिल्कुल ठीक लिखा है. बिना पढ़े और देखे ही कमेंट कर देना हमारे सूडो बुद्धिजीवियों की आदत बन चुकी है.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: विवेक रस्तोगी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8290</link>
		<dc:creator>विवेक रस्तोगी</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Mar 2010 10:16:05 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2624#comment-8290</guid>
		<description>इस तरह से ही एक बार हमारे साथ भी हो चुका है परंतु हम मुँह न लगे, क्योंकि हमें अपनी ऊर्जा इसमें लगाना व्यर्थ लगा, पर हाँ गलत तो गलत ही है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इस तरह से ही एक बार हमारे साथ भी हो चुका है परंतु हम मुँह न लगे, क्योंकि हमें अपनी ऊर्जा इसमें लगाना व्यर्थ लगा, पर हाँ गलत तो गलत ही है।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Sulabh Jaiswal</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2624/comment-page-1#comment-8289</link>
		<dc:creator>Sulabh Jaiswal</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Mar 2010 09:46:14 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/2624#comment-8289</guid>
		<description>आपका उदाहरण और वस्तु विश्लेषण जरुरी लगा.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपका उदाहरण और वस्तु विश्लेषण जरुरी लगा.</p>
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