मेरे चिट्ठे गुरुकुल (iicet.com) पर लेखन, ऑडियो, एवं वीडियो की मदद से मैं गैर हिन्दीभाषी लोगों को हिन्दी सिखाने की कोशिश कर रहा हूं. यह कार्य अभी प्रारंभिक दशा में है, एवं इसका प्रचार मैं ने शुरू नहीं किया है, लेकिन कम से कम बीस विदेशी लोग अपने आप इसके सदस्य बन चुके हैं जिससे कि हर नये वीडियो की सूचना अपने आप उन को मिल सके.
आज इन विदेशियों में से एक का पत्र मिला कि वही हिन्दी सीखने की काफी कोशिश करने के बाद बहुत निराश हो गया है. इस पर मैं ने उस व्यक्ति को बहुत प्रोत्साहित करके लिखा. उसा अंग्रेज ने बहुत आभार प्रगट किया एवं मुझे जवाब भेजा. प्रस्तुत है पत्र के कुछ अंश:
I have been trying to learn Hindi for the last year. It is proving to be harder than I thought. To be honest I am near giving up. I feel defeated.
Hindi is the 4th most spoken language in the world. I cant find a teacher. And all my Indian friends tell me learning Hindi is a waste of time. I have only been able to use the Teach Yourself text books and rent films to learn. There is surprising few resources on the NET. So I am very grateful that you uploaded these videos.
निम्न बातों पर ध्यान दे: 1. यह अंग्रेज कई सालो से हिन्दी सीखने की कोशिश कर रहा है. 2. UK मे इनके इलाके में बहुत से हिन्दुस्तानी हैं, लेकिन उनसे अनुरोध करने के बावजूद इस व्यक्ति को मदद नहीं मिली. 3. उल्टे हिन्दुस्तानी बन्दे इस सज्जन से कहते रहते हैं कि हिन्दी सीखना समय की बर्बादी है. 4. इस तरह हतोत्साहित करने के बावजूद यह बन्दा Teach Yourself किस्म की सहायता से हिन्दी सीखने की कोशिश करता रहा है. 5. यह बन्दा हिन्दी पिक्चर किराये पर लेकर देखता है जिससे कि उसे हिन्दी सीखने का मौका मिले. यह हमारे लिये शरम की बात है कि एक विदेशी तन मन धन समय खर्च करके हिन्दी सीखना चाहता है, लेकिन हिनुस्तानी लोग उसे हतोत्साहित कर रहे हैं. यह बन्दा जाल पर हिन्दी अध्ययन की सुविधा खोज खोज कर परेशान है, लेकिन हिन्दीभाषियों की संख्या की तुलना में ऐसे जालस्थल न के बराबर है. मुझे उम्मीद है कि यह लेख कम से कम 10 हिन्दी चिट्ठाकरों को “हिन्दी सीखिये” किस्म की सुविधा जाल पर स्थापित करने के लिये प्रेरित करेगा – शास्त्री जे सी फिलिप पुनश्च: इस लेख को पोस्ट करने के पहले उन सज्जन का जवाब आ गया जिसे आप नीचे पढ सकते हैं Abhi mai Hindi Vidyarthi hoon. Lekin teacher pas nahin hai. Mai Bollywood film bohut pasand hai. Mera mand pasand actor Raj Kapoor. Ap ko film Shree 420 jante hai?
Thank you for your kind words. I wont give up, but it can be very hard to keep motivated. It is very nice to see someone (like you) talking very clear Hindi in a clam and relaxed way. I hope to see and hear more from you. When my Hindi improves I intend to do a blog on you tube. Hopefully encourage more people to learn Hindi a second language. उन को मैं ने निम्न जवाब दिया: I am doing the recording using a web-cam, and needed some more materials to make the pictures clearer. Got most of them today. Hopefully I will be able to do some recording today.
Since you said that listening to me speaking in calm and composed Hindi is enjoyable, I will try to narrate a lot of topical material and stories also in Hindi, in addition to Hindi lessons.
Shastri JC Philiु
चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: हिन्दी, हिन्दी-जगत, राजभाषा, विश्लेषण, सारथी, शास्त्री-फिलिप, hindi, hindi-world, Hindi-language,
इस विभाग के पिछले 10 पोस्ट




August 6th, 2007 at 10:59 pm
सराहनीय प्रयास !
August 6th, 2007 at 11:15 pm
शास्त्री जी हम लोग मानसिक गुलाम हैं।
अगर हम चीन से 1 % भी कुछ सीख सकें तो बहुत है।
मुझे दुख होता है जब कोई कहता है, नेट पर हिन्दी तभी चलेगी जब उस को अंग्रेज़ी घड़े चलाएँ।
शायद हम करना नहीं चाहते, हम चाहते हैं, दूसरे कर दें। और दूसरो ने किया भी हम से जादा है।
August 6th, 2007 at 11:17 pm
घड़े
corrected
घोड़े
August 7th, 2007 at 12:11 am
बेहतरीन प्रयास के लिये साधुवाद शास्त्री जी।
August 7th, 2007 at 12:19 am
वाकई यह शर्म की बात है कि हिन्दुस्तानी हिन्दी के लिए ही ऐसा कह रहा है!
उस अंग्रेज बंधु हिन्दी प्रेम अच्छा लगा व शास्त्री जी को साधुवाद!!
August 7th, 2007 at 1:23 am
आपका कार्य सराहनीय है। ऐसे हिन्दुस्तानी जो कहते है कि हिंदी सीखना समय की बर्बादी है उन्हें तो डूब मरना चाहिए ।
August 7th, 2007 at 1:58 am
शास्त्रीजी हमने हजार साल गुलामी भोगी है, अब गुलामी हमारे डी.एन.ए. में प्रवेश कर गयी है. जाते जाते जाएगी.
August 7th, 2007 at 1:59 am
सुधार करें, “कई वर्षों से” नही वरन् “पिछले एक वर्ष से”।
ऐसे लोग बहुत मिल जाएँगे, विदेश क्यों जाते हैं, यही अपने भारत में थोक के भाव मिल जाएँगे ऐसे लोग। संबन्धित विषय पर मैंने एक पोस्ट लिखी थी कुछ समय पहले। यदि कोई उत्तर-भारतीय मूल का न हो तो समझ भी आता है कि उसको अपनी मातृभाषा से अधिक लगाव होगा हिन्दी की जगह, लेकिन यदि कोई उत्तर-भारतीय जब ऐसी बात करता है तो वाकई ऐसे लोगों पर स्वयं अपने को शर्म आती है कि ये भी हिन्दुस्तानी हैं।
August 7th, 2007 at 4:23 am
आप का प्रयास ,और उसकी गम्भीरता दोनो प्रसंशनीय हैं.
मैसूर स्थित भाषा संस्थान में हिन्दी के वीदियो पाठ उपलब्ध होने चाहिये.
अर्सा पहले मैने तमिल भाषा पत्राचार के माध्यम से इसी संस्थान से सीखी थी,उन्होने सारा का सारा reading material भिजवाया था.
August 7th, 2007 at 5:08 am
आपका विचार शी आप उसे ज़रूर हिंदी के बारे जानकारी दे
http://www.kaalchakraa.blogspot.com
August 7th, 2007 at 6:37 am
sir with due respect i would like to tell you that in prevaling circumstances for indian settled abroad its very difficult to teach a foriegner hindi . no one wants to be “labeled” there . the word asian and indian are being targetted . if you remember 2 months back i had also asked for some links to post to my foriegn friends.
its we who are sitting in india can help
if any help i can give then you can give my hotmail id to any one who wants to learn
August 7th, 2007 at 6:53 am
शास्त्रीजी!
सबसे पहले तो इस अच्छे प्रयास केलिए आपको बधाई. जो हिंदुस्तानी किसी को हिंदी सीखने से मना करे उसे गुलाम मानसिकता का शिकार होने के अलावा क्या कहना चाहिए वह तो आप जानते ही हैं. मुझे चिट्ठे पर विडियो स्थापित करना तो नहीं आता पर अगर आपको समय प्रबंधन में कहीँ दिक्कत आए तोआप ऐसे विदेशी सज्जनों को मेरी ओर फोरवर्ड कर सकते हैं जिन्हे अन्ग्रेज़ी अच्छी आती हो. वे यदा-कदा मेरी मदद ले सकते हैं.
August 7th, 2007 at 12:54 pm
आप बह्त सराहनीय़ कार्य कर रहे हैं ।बधाई।
August 7th, 2007 at 3:33 pm
आपका प्रयास सराहनीय है. मैं साधुवाद देता हूँ. हिन्दी सीखने को समय की बर्बादी कहने वाले आत्म कुंठा ग्रसित जीव हैं और इस तरह की बातें करके जीवन में अपनी हार को ढकने का प्रयास करते हर जगह पाये जाते हैं. जीवन में अहासिल ऊँचाईयों का दोष वो हिन्दी के मत्थे मढ़ कर चैन से सो जाते हैं, बस यही उनका कार्य है. आप अपना कार्य करें, उनकी बातों में अपना बहुमूल्य लेखन समय न बर्बाद करें. शुभकामनायें.
August 8th, 2007 at 12:40 am
शास्त्री जी,
आप विदेश की बात कर रहे है, हमारे हिन्दुस्तान मे ही ले लीजिये, जो समाज के टेकेदार बने फिरते है वो कोई मौक नही छोड्ते इसे नीचा दिखाने मे. और एक विशेश बात जो सभी हिन्दी भासियो को बुरी लग सकती है कि हमारी राजधानी दिल्ली मे उच्चवर्ग मे और वो तपका जिसपर थोडा पाश्चात रन्ग चड गया है I DONT KNOW HINDI कहना फक्र की बात मानी जाती है, अल्बत्त्ता उसे हिन्दी आती भी है