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	<title>Comments on: यौन शिक्षा, आलोचनाओं एवं आपत्तियों का उत्तर &#8212; 2</title>
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	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: paramjitbali</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/506/comment-page-1#comment-820</link>
		<dc:creator>paramjitbali</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Aug 2007 05:59:13 +0000</pubDate>
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		<description>शास्त्री जी,आप का लेख और की गई टिप्पणीयों के सवाल-जवाब पढ़ कर यह बात तो साफ हो जाती है कि हमे अमरीकी यौन -शिक्षा की जरूरत नही है ।यदि अमरीका को कोई फायदा उन्हें अपना कर नही हुआ तो यहाँ उस से फायदा नही नुकसान ही ज्यादा होगा ।क्यूँकि हमारी सभ्यता और उन की सभ्यता में जमीन-आसमान का अन्तर है । लेकिन क्या हमारी सरकारें भी इस बात को समझने की कोशिश करेगी ? बहुत मुश्किल लगता है ।
हम भी चाहते हैं कि इस विषय पर खुल कर चर्चा हो ताकी सही निष्कर्ष निकल सके । कही ऐसा ना हो की जोश में इस कार्य को शुरू कर दिया जाए और बाद मे पछताना पड़े ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्री जी,आप का लेख और की गई टिप्पणीयों के सवाल-जवाब पढ़ कर यह बात तो साफ हो जाती है कि हमे अमरीकी यौन -शिक्षा की जरूरत नही है ।यदि अमरीका को कोई फायदा उन्हें अपना कर नही हुआ तो यहाँ उस से फायदा नही नुकसान ही ज्यादा होगा ।क्यूँकि हमारी सभ्यता और उन की सभ्यता में जमीन-आसमान का अन्तर है । लेकिन क्या हमारी सरकारें भी इस बात को समझने की कोशिश करेगी ? बहुत मुश्किल लगता है ।<br />
हम भी चाहते हैं कि इस विषय पर खुल कर चर्चा हो ताकी सही निष्कर्ष निकल सके । कही ऐसा ना हो की जोश में इस कार्य को शुरू कर दिया जाए और बाद मे पछताना पड़े ।</p>
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		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/506/comment-page-1#comment-818</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Aug 2007 04:01:26 +0000</pubDate>
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		<description>प्रिय नीरज, आपकी टिप्पणी पढ कर अच्छा लगा. एकदम सही कह रहे हो कि &quot;एक अच्छी बात ये है कि आप और हम दोनों ही शोध से जुडे हुये हैं, अत: किसी भी Hypothesis की तार्किकता जांचना आप और मेरी दोनो की ही Academic Training में शामिल है । आपकी अगली प्रविष्टियों का इन्तजार रहेगा ।&quot;

&quot;आपका लेख पढकर अच्छा लगा कि आपने हमारे विचारों को एक संवाद की तरह समझा है न कि आपसी लडाई झगडे की तरह ।&quot; नीरज, झगडा तो वे करते हैं जो विचारविनिमय का मतलब नहीं जानते या जिनके लिये हर बात इज्जत का सवाल है. मेरेआपके लिये यह इज्जत का नहीं अनुसंधान का सवाल है.

फिलहाल कल के लेख के साथ इस विषय से कुछ समय के लिये अवकाश लूंगा. एक हफ्ते के अंतराल के बाद फिर लिखूंगा.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्रिय नीरज, आपकी टिप्पणी पढ कर अच्छा लगा. एकदम सही कह रहे हो कि &#8220;एक अच्छी बात ये है कि आप और हम दोनों ही शोध से जुडे हुये हैं, अत: किसी भी Hypothesis की तार्किकता जांचना आप और मेरी दोनो की ही Academic Training में शामिल है । आपकी अगली प्रविष्टियों का इन्तजार रहेगा ।&#8221;</p>
<p>&#8220;आपका लेख पढकर अच्छा लगा कि आपने हमारे विचारों को एक संवाद की तरह समझा है न कि आपसी लडाई झगडे की तरह ।&#8221; नीरज, झगडा तो वे करते हैं जो विचारविनिमय का मतलब नहीं जानते या जिनके लिये हर बात इज्जत का सवाल है. मेरेआपके लिये यह इज्जत का नहीं अनुसंधान का सवाल है.</p>
<p>फिलहाल कल के लेख के साथ इस विषय से कुछ समय के लिये अवकाश लूंगा. एक हफ्ते के अंतराल के बाद फिर लिखूंगा.</p>
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		<title>By: नीरज रोहिल्ला</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/506/comment-page-1#comment-817</link>
		<dc:creator>नीरज रोहिल्ला</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Aug 2007 03:28:54 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/506#comment-817</guid>
		<description>शास्त्रीजी,
आपका लेख पढकर अच्छा लगा कि आपने हमारे विचारों को एक संवाद की तरह समझा है न कि आपसी लडाई झगडे की तरह । 

आप इस विषय पर दो लेख और लिखने वाले हैं, मैं इस विषय पर अपने विचार आपके उन दोनों लेखों को पढने के बाद ही रखूँगा जिससे कि संवाद में किसी भी Assumption की आवश्यकता कम से कम पडे ।

मैं अमेरिका में पिछले केवल ३ वर्षों से हूँ परन्तु इतने समय में ही मैने अपने विश्वविद्यालय में और अपने जान पहचान वालों के माध्यम से इस विषय पर काफ़ी चर्चा की हुयी है । एक अच्छी बात ये है कि आप और हम दोनों ही शोध से जुडे हुये हैं, अत: किसी भी Hypothesis की तार्किकता जांचना आप और मेरी दोनो की ही Academic Training में शामिल है । आपकी अगली प्रविष्टियों का इन्तजार रहेगा ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्रीजी,<br />
आपका लेख पढकर अच्छा लगा कि आपने हमारे विचारों को एक संवाद की तरह समझा है न कि आपसी लडाई झगडे की तरह । </p>
<p>आप इस विषय पर दो लेख और लिखने वाले हैं, मैं इस विषय पर अपने विचार आपके उन दोनों लेखों को पढने के बाद ही रखूँगा जिससे कि संवाद में किसी भी Assumption की आवश्यकता कम से कम पडे ।</p>
<p>मैं अमेरिका में पिछले केवल ३ वर्षों से हूँ परन्तु इतने समय में ही मैने अपने विश्वविद्यालय में और अपने जान पहचान वालों के माध्यम से इस विषय पर काफ़ी चर्चा की हुयी है । एक अच्छी बात ये है कि आप और हम दोनों ही शोध से जुडे हुये हैं, अत: किसी भी Hypothesis की तार्किकता जांचना आप और मेरी दोनो की ही Academic Training में शामिल है । आपकी अगली प्रविष्टियों का इन्तजार रहेगा ।</p>
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