आज लगभग सारी दुनियां में जो यौनशिक्षा दी जा रही है वह यौनशिक्षा के अमरीकी अवधारणा पर आधारित है. प्रस्तुत है इस अमरीकी अवधारणा पर आधारितयौनशिक्षा के लिये हिन्दुस्तान के कुछ प्रदेशों में प्रयुक्त की जाने वाली पुस्तक से कुछ उद्दरण. (यदि आपको इसे पढने में तकलीफ होती है तो मैं क्षमा प्रार्थी हूं. याद रखें कि समय रहते आप न चेते तो ये बाते आपके बच्चों को पढाई जायेंगी). 1. “The four main kinds of contra-ceptives include: barrier methods (condoms, diaphragm); methods that prevent the ovary from releasing the egg (birth control pills, Depo-Provera); methods that destroy the sperm cell — creams/foam/jellies (which contain spermicidal agents like Nonoxynol 9 etc); and methods that prevent the fertilized egg attaching to the uterus (IUD, Copper-T)” — From the chapter ‘How can I protect myself’ गर्भरोधक मुख्यतया चार प्रकार के होते है: अवरोधी तरीके (कंडोम, डायफ्राम), ओवरी को नियंत्रित करने वाले तरीके (गर्भ निरोधी गोलियां, डेपोप्रोवेरा), शुक्राणुओं के विनाश के तरीके (क्रीम, फोम, जेल्ली आदि), और भ्रूण के गर्भाशयम में स्थापन को रोकने वाली विधियां (IUD, कापर टी इत्यादि). (संदर्भ 1, हिन्दुस्तानी यौनशिक्षा की एक पुस्तक से) 2. “If you are having penetrative sexual (vaginal, oral and anal) intercourse you should be using a condom. You need to use a condom correctly every time you have sexual intercourse. Young people need to either stop having penetrative sexual intercourse (you can continue to have safe sex, like mutual masturbation, touching, rubbing, etc), abstain completely from sex or use a condom.” — (ibid) यदि आप योनि, मुख, या गुदा में भेदन के द्वारा यौनक्रिया करना चाहते हैं तो (लिंग पर) कंडोम जरूर चढा लें. यौनक्रिया करते समय हर बार कंडोम का प्रयोग जरूर करना चाहिये. युवा लोग भेदन द्वारा संभोग के बदले आपस में एक दूसरे को हस्तमैथुन करवा सकते हैं, आपस में स्पर्श कर सकते हैं, या (यौनांगों को) आपस में रगड सकते हैं जो आपसी यौनाचार के लिये अधिक सुरक्षित तरीके है. यदि ये बातें पसंद न हो तो यौनाचार के समय कंडोम जरूर चढा लें (संदर्भ 1, हिन्दुस्तानी यौनशिक्षा की एक पुस्तक से) 3. “During vaginal intercourse a man puts an erect penis into the vagina. Following ejaculation, semen containing millions of sperm enters the uterus through the vagina. If the ovary has released an egg — then the sperm may encounter the egg in the fallopian tube. A woman is fertile for about 24 hours after an egg leaves an ovary and is in the uterine tube…” — From the chapter ‘What is Conception’ योनि द्वारा संभोग करते समय पुरुष अपने उत्त्थान पाये लिंग को योनि में प्रविष्ट करता है. वीर्यस्खलन होने पर करोडों शुक्राणु योनि द्वारा गर्भाशय में प्रवेश कर जाते हैं एवं डिंब की ओर जाते हैं. (संदर्भ 1, हिन्दुस्तानी यौनशिक्षा की एक पुस्तक से) 4. In this lesson the message of safe sex is conveyed by a girl protagonist requesting a boy who asks her to dance to wear a ‘condom cap’ — a crude analogy by any standard (see box p.65). इस पाठ में सुरक्षित यौनाचार (कक्षा में एक नाच द्वारा) सिखाया जाता है. इसके लिये (कक्षा का) एक लडका (अपनी ही कक्षा की किसी) एक लडकी से उसके साथ नाचने को कहता है. जवाब में लडकी कहती है कि वह यदि एक कंडोंम को आवरण/ढक्कन के रूप में चढा लेगा तो ही वह उसके साथ नाचेगी. (संदर्भ 1, हिन्दुस्तानी यौनशिक्षा की एक पुस्तक से) कुछ आंकडे: अमरीका में यौन शिक्षा से कुछ फायदा हुआ क्या: In the United States, in 1960, the birthrate for unmarried women was 21.6 per 1,000; by 1990, the U.S. birthrate for unmarried women had doubled to 43.8 per 1,000 In 1960, syphilis and gonorrhea were the only major sexually transmitted diseases (they were called venereal diseases). By 1990, more than 20 varieties of STDs (some fatal, and many resistant to condoms) menace those who are sexually active outside faithful marriage. In 1960, no Americans had an incurable STD; now, more than 68 million Americans have an incurable STD. In 1960, no one had heard of AIDS or AIDS orphans. Now, experts predict that, worldwide, by 2020 AIDS will have killed between 65 million and 100 million and will leave more than 40 million as AIDS orphans. हिन्दुस्तान को नहीं चाहिये पश्चिमी अवधारणा पर आधारित यौन शिक्षा जो मनुष्य को पाश्विक यौनाचार की ओर ले जाता है! प्रष्टभूमि जानने के लिये देखिये इस विषय मेरे पर अन्य लेख: 1. http://www.educationworldonline.net/eduworld/article.php?choice=prev_art&article_id=883&issueid=54 2. http://www.family.org/socialissues/A000001082.cfm चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: विश्लेषण, आलोचना, सहीगलत, निरीक्षण, परीक्षण, सत्य-असत्य, विमर्श, हिन्दी, हिन्दुस्तान, भारत, शास्त्री, शास्त्री-फिलिप, सारथी, वीडियो, मुफ्त-वीडियो, ऑडियो, मुफ्त-आडियो, हिन्दी-पॉडकास्ट, पाडकास्ट, analysis, critique, assessment, evaluation, morality, right-wrong, ethics, hindi, india, free, hindi-video, hindi-audio, hindi-podcast, podcast, Shastri, Shastri-Philip, JC-Philip,
अमरीका में 1000 अविवाहित लडकियों पर 1960 मे सिर्फ 21.6 अवैध जन्म होते थे, लेकिन 1990 तक आते आते यह बढ कर 43.8 अवैध जन्म हो गया.
1960 में मुख्यतया सिर्फ दो तरह की यौनसंपर्क व्याधियां थीं. 1990 में कुल 20 प्रकार के यौनरोग हो गये जिनमें कई कंडोमों के द्वारा भी नहीं रोके जा सकते.
1960 में अमरीका में इलाज से परे यौन रोग से ग्रस्त एक भी व्यक्ति नहीं था. आज वहां 6.8 करोड लोगों को लाइलाज यौन व्याधियां हैं.
1960 में वहां AIDS का नाम भी नहीं था, लेकिन 2020 तक 6.5 करोड से 10 करोड के बीच लोग AIDS से मारे जायेंगे. 4 करोड से अधिक अनाथ AIDS से मरे मांबाप छोड जायेंगे.
यौन शिक्षा, आलोचनाओं एवं आपत्तियों का उत्तर — 2
यौन शिक्षा, आलोचनाओं एवं आपत्तियों का उत्तर — 1
लाखों अमरीकी यौन शिक्षा से भाग रहे हैं 002
लाखों अमरीकी यौन शिक्षा से भाग रहे हैं 001
यौन शिक्षा — पाश्चात्य राज्यों का अनुभव क्या कहता है ??
हिन्दुस्तानियों को चाहिये क्या पैरों में इलेक्ट्रॉनिक पैरकडी ??
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August 21st, 2007 at 7:42 am
ये आपने अच्छा काम शुरू किया है.
August 21st, 2007 at 8:12 am
आपने यौन शिक्षा पर जो तथ्य दिये निश्चित रूप से उत्तम विचार है
बधाई,
आज बात सही है कि यौन बीमारी की वहज, यौन शिक्षा ही है।
August 21st, 2007 at 8:43 am
अरे वाह शास्त्री जी, वैज्ञानिक का विश्लेषण जारी रहे. कोई माने न माने संदर्भ सामग्री के रूप में इन तथ्यों का बहुत अच्छा उपयोग होगा.
काम की बात हिन्दी में. यह नारा कैसा है?
August 21st, 2007 at 8:52 am
शास्त्रीजी,
आपके इस लेख के कुछ विचारबिन्दुओं पर मेरी टिप्पणी इस प्रकार है ।
“अमरीका में 1000 अविवाहित लडकियों पर 1960 मे सिर्फ 21.6 अवैध जन्म होते थे, लेकिन 1990 तक आते आते यह बढ कर 43.8 अवैध जन्म हो गया” ।
अविवाहित लडकियों की संतानों को अवैध करार देना मानवीय दॄष्टि से बिल्कुल अनुचित है । आपको शब्दों को चुनते समय थोडा सावधान रहना चाहिये । Single Mom का Concept अलग है और अवैध संतान बिल्कुल अलग, बल्कि मानवीय दॄष्टिकोण से किसी भी संतान को अवैध कहना जीवन का घोर अपमान है । आपके इस आँकडे का यौन शिक्षा से कोई भी सीधा सम्बन्ध नहीं है । अमेरिकी समाज में Single Mom होने के कारणों में सबसे प्रमुख सम्बन्ध विच्छेद है, यौन शिक्षा नहीं ।
“1960 में अमरीका में इलाज से परे यौन रोग से ग्रस्त एक भी व्यक्ति नहीं था. आज वहां 6.8 करोड लोगों को लाइलाज यौन व्याधियां हैं” ।
अमेरिका की कुल आबादी लगभग ३० करोड है, उनमें से ६.८ करोड लोगों को लाइलाज यौन रोग होने का मतलब से हर पाँच में से (बच्चे बूढे और जवान सभी मिलाकर) लगभग १ लाइलाज यौन रोग से ग्रस्त होंगे । ये आँकडा मेरे गले नहीं उतरता । आप क्या सोचते हैं ?
एड्स फ़ैलने के अन्य कारण भी हैं । उदाहरण के तौर पर अफ़्रीका के देशों में यौन शिक्षा स्कूलों में नहीं सिखायी जाती है, परन्तु एड्स का संक्रमण वहाँ भी भयानक है । वहाँ पर इसके अन्य कारण है ।
आपकी अगली पोस्ट का इन्तजार रहेगा और उसके बाद मैं एक साथ अपने विचार आपके सामने रखूँगा ।
धन्यवाद ।
August 21st, 2007 at 9:49 am
ऐसे विषयों पर खुल कर बात करने और लिखने की आवशयकता है।
August 21st, 2007 at 10:13 am
इस विषय को आगे बढ़ाये. सही लेखमाला.
भारत में अभी यौन शिक्षा नहीं दी जा रही, मगर एड्स के मामले बढ़ रहे है, बल्कि भयानक होते जा रहे है. ऐसे भी यौन रोगो के फैलाव के लिए सिधे यौन शिक्षा को जिम्मेदार कैसे मान लें. अगर कण्डोम का प्रयोग आता हो तो एड्स से बचा जा सकता है.
यौन शिक्षा का अर्थ व्याभिचार की शिक्षा न हो इस पर सहमत हुआ जा सकता है.
August 21st, 2007 at 10:21 am
हिंदुस्तानी यौन शिक्षा की पुस्तक के बजाए किस सिलेबस से ये उठाया गया है, ये पता चलता तो ज्यादा बेहतर होता। और, ये नाच वाला प्रयोग क्या किसी स्कूल में हुआ है। जानकारी हो तो बताएं
August 21st, 2007 at 1:02 pm
शास्त्री जी,आप का लेख पढ कर तो ऐसा लगा की यह यौन-शिक्षा यौन रोगो से बचाव के लिए ्नही,बल्कि शिक्षा द्वारा जो नही भी जानते उन्हें और अधिक शिक्षित करने का प्रयास है ।
अगली पोस्ट का इन्तजार है।
August 21st, 2007 at 7:37 pm
रुचिकर, ऐसी शिक्षा देकर क्या हासिल करना चाहते हैं यौन शिक्षा के पक्षधर?
August 21st, 2007 at 10:29 pm
बहुत सोचा की न लिखुँ..मगर लिखने को मजबूर हो गई हूँ बुरा मत मानियेगा…
शास्त्री जी ज्ञान कोई भी हो जरूरी है प्राप्त करना मगर ज्यादा खोल कर लिखना मुझे अच्छा नही लगता…हमारे देश की संकृति तो यही कहती है…अब आप ही बताईये मेरा वो ग्यारह साल का बेटा जब नारद पर अपनी पोस्ट देखता है तो क्या आपकी यह पोस्ट नही देखेगा…क्या मै उसे अभी से ज्ञान दूँ या फ़िर हर समय उस पर नजर रखुँ…मालूम नही क्यों मगर आज मै आपके पक्ष में नही हूँ…आप ज्ञान जो देते है बहुत अच्छा लगता है…मगर इस विषय पर इतना काफ़ी है…बाकी आप समझदार है…कुछ गलत लिखा है तो माफ़ी चाहती हूँ…या फ़िर इतना गहरा मत समझाईये..बात एसे तरिके से हो ताकी बच्चे नही सिर्फ़ बड़े ही समझ पायें…
शानू
August 23rd, 2007 at 12:21 pm
शास्त्री जी, आपके उन्मुक्त सत्य प्रकाशित करने के आपके ये प्रयास स्तुत्य है। किन्तु “विनाश काले विपरीत बुद्धिः” ही अमेरिकी तथा शेष संसार को शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक बीमारियों की जकड़ में ला रही है।
लेकिन दूसरी दृष्टि से देखें तो लगता है शायद आप ऐसी भ्रामक, दिग्भ्रान्तक, महाविनाशक शिक्षाओं का अपने ब्लॉग पर परोक्ष प्रचार ही कर रहे हैं। इस लेखन के साथ ही कुछ और सत्य उद्घाटित करना बेहतर होता जिसमें ‘सेक्स’ = ‘काम’ = तीसरा पुरुषार्थ के शुद्ध सात्विक रूप का वर्णन एवं प्रचार हो। सिर्फ मैथुन मात्र ‘काम’ नहीं है। ‘मथना’ = मंथन, चाहे समुद्र मंथन हो या विचार मंथन या …! “मैथुन” मात्र तो ‘काम’ के एक लाखवें हिस्से से भी कम होगा। अच्छा होगा सेक्स के असली स्वरूप, व्यापक स्वरूप, आध्यात्मिक पक्ष का उद्घाटन कर अपने ब्लॉग पर प्रकाशित करें। क्योंकि ‘काम’ भी सृष्टि का एक अनिवार्य अंग है। यदि यह नहीं तो संसार भी नहीं रहेगा।
भ्रान्त (भले ही कटु सत्य हो) ज्ञान यदि दिया है तो साथ साथ इसका सही ज्ञान भी तुलनात्मक रूप में देना आवश्यक है।
और फिर इण्टरनेट नैतिक कानूनों के तहत ‘वयस्क’ सामग्री के पृष्ठ में प्रवेश करने के पूर्व एक चेतावनी यथा 18 वर्ष से अधिक आयु होने की प्रमाणपत्र का पृष्ठ प्रकट होना चाहिए, जहाँ पर क्लिक करने के बाद ही उस पृष्ठ में प्रवेश हो सके।
August 23rd, 2007 at 12:52 pm
@हरिराम जी,
आपने शायद ध्यान नहीं दिया हिन्दुस्तानी यौन अवधारणा पर मेरे लेख आने वाले है. जो कुछ लिखा है वह तो गलत बातों की परीक्षा मात्र है. सही तो अब आयगा, एवं आप उसे जरूर पसंद करेंगे
August 26th, 2007 at 4:23 pm
में भारत में यौनं शिक्षा के पुरे पक्ष में हूँ और उसके २ बड़े कारण है – “Child Abuse” और “ग़लत शिक्षा”, मगर अगर हमारी यौन यह सिखाती है जो शास्त्रीजी ने यहाँ लिखा है तो में इसका विरोध करूंगा.
मेरे हिसाब से जो शिक्षा देनी चाहिए उसके पूर्ण रूप से यौन शिक्षा कहना ग़लत होगा. जैसा की शास्त्रीजी ने अपनी इस विषय पर पहली पोस्ट में बताया है की हमारा सेक्स के प्रति नजरिया पश्चिम से भिन्न से, उसी प्रकार हमारी यौन शिक्षा भी वहाँ से भिन्न होना जरुरी है.
मेरे हिसाब से इस शिक्षा को कई भागो में बाता जाना चाहिए और उम्र के विभिन्न पड़ाव पर इसे सिखाया जाना चाहिए. जैसे की १ आठ साल के बालक को यौन क्रिया, मैथुन आदि से कोई लेना देना नही है इसलिए उसे यह नही बताना ही ठीक है, मगर जब येहि बालक १५ साल का हो तो उसे इन चीजो के बारे में बतलाया जाए लेकिन उसमे भी यह सावधानी रखी जाए की हम उसे सिर्फ़ सेक्स के बारे में नही बल्कि मन, आत्म और शरीर के बारे में बताया जाए.